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देश के नए बनने वाले संसद भवन से जुड़ी ये खास बातें जानते हैं आप?

पीएम मोदी ने संसद की नई इमारत का शिलान्यास किया है

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कुछ ऐसा दिखेगा नया संसद भवन. ये तस्वीर ओम बिड़ला ने ट्विटर पर शेयर की है.
कुछ ऐसा दिखेगा नया संसद भवन और आसपास का इलाका.
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Varun Kumar
9 दिसंबर 2020 (अपडेटेड: 10 दिसंबर 2020, 11:58 AM IST)
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कोरोना वायरस की वैक्सीन और किसानों के आंदोलन के अलावा कुछ और चीजें जो इस वक्त चर्चा में हैं, उन्हीं में से एक है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट. केंद्र सरकार अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित है. पीएम मोदी ने खुद 10 दिसंबर को इसका शिलान्यास किया. इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने एक पेच फंसा दिया है. सरकार से फिलहाल इस प्रोजेक्ट पर काम तब तक रोकने के लिए कहा है, जब तक इससे जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई पूरी नहीं हो जाती. हालांकि कागजी कार्रवाई और शिलान्यास की इजाजत दे दी है. इस खबर में हम आपको इस प्रोजेक्ट से जुड़ी हर खास बात बताने वाले हैं, तो चलिए शुरू करते हैं. नई बिल्डिंग की जरूरत क्या है? सबसे पहला सवाल यही है कि इस नई बिल्डिंग की जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल इसकी कई वजहें हैं. # आजाद भारत में पहली बार संसदीय चुनाव 1951 में हुए थे. उस वक्त लोकसभा की 489 सीटें थीं. आज लोकसभा में 543 सदस्य हैं. 2026 में परिसीमन होना है, उसके बाद सदस्यों की संख्या और बढ़ जाएगी, ऐसा कहा जा रहा है. # नया परिसीमन इसलिए भी जरूरी बताया जा रहा है क्योंकि इस वक्त एक सांसद करीब 25 लाख की आबादी का प्रतिनिधित्व कर रहा है. संविधान के आर्टिकल 81 में कहा गया है कि सदन में 550 से अधिक निर्वाचित सदस्य नहीं होंगे, जिनमें से 530 राज्यों से और 20 केंद्र शासित प्रदेशों से होंगे. # फिलहाल लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 और राज्यसभा सदस्यों की संख्या 245 है. 2021 में प्रस्तावित जनगणना के साथ ये संख्या बदलेगी और बढ़ेगी. 84वें संविधान संशोधन, 2001 में कहा गया है कि 2026 तक यथास्थिति बरकरार रहेगी. # 2026 में परिसीमन के बाद बढ़ने वाले संसद सदस्यों का भार उठाने में वर्तमान संसद भवन की इमारत सक्षम नहीं है. पुरानी बिल्डिंग को बने 100 साल पूरे होने वाले हैं, उसमें इन सबको कैसे फिट किया जाएगा. ये भी बड़ा सवाल है. # इसके अलावा एक पॉइंट ये भी है कि सभी मंत्रालयों के ऑफिस अलग-अलग जगहों पर हैं. इस वजह से कॉओर्डिनेशन में दिक्कतें आती हैं. नए प्रोजेक्ट में सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ऑफिस एक ही जगह पर हों. # संसद की मौजूदा इमारत में कई जगहों पर रिपेयरिंग की जरूरत है. वेंटीलेशन सिस्टम, इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम, ऑडियो-वीडियो सिस्टम जैसी चीजें सुधार मांग रही हैं. इसीलिए सरकार ने नई इमारत बनाने का फैसला किया है. कौन हैं इस नई इमारत के 'विश्वकर्मा'? ये तो बात हुई कि इस नई इमारत की जरूरत क्यों है, अब बताते हैं कि इस इमारत का डिजाइन किसने बनाया है, और इसे बनाने का ठेका किसको मिला है? # गुजरात के आर्किटेक्ट हैं विमल पटेल. इन्होंने ही संसद के नए डिजाइन को तैयार किया है. आर्किटेक्चर के मामले में पटेल बहुत सीनियर हैं. गुजरात हाई कोर्ट, IIM अहमदाबाद, IIT जोधपुर, अहमदाबाद का रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट, RBI अहमदाबाद जैसी इमारतों के डिजाइन विमल पटेल ने ही तैयार किए हैं. उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है. # संसद की नई बिल्डिंग को बनाने का जिम्मा टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को सौंपा गया है. सितंबर 2020 में इसके लिए बोलियां लगाई गई थीं. नई संसद पार्लियामेंट हाउस स्टेट के प्लॉट नंबर 118 पर बनाई जाएगी. सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत संसद की नई इमारत के अलावा इंडिया गेट के आसपास 10 और बिल्डिंग बनाई जाएंगी, जिनमें 51 मंत्रालयों के ऑफिस होंगे. नई इमारत की खास बातें क्या हैं? अब बताते हैं कि नई इमारत में खास क्या है. सबसे खास है सहूलियतें. ये काफी आधुनिक फैसिलिटी वाली बिल्डिंग होगी ताकि कामकाज तेजी से हो और सांसद व अन्य लोग अच्छा महसूस करें. # नई इमारत 2022 तक बनकर तैयार करने का लक्ष्य है. 2022 में संसद का सत्र नई बिल्डिंग में ही चलाया जाएगा, ऐसा कहा जा रहा है. नई इमारत के निर्माण में सीधे तौर पर 2000 लोग और अप्रत्यक्ष रूप से 9000 लोग जुड़ने वाले हैं. # संसद की नई इमारत 64,500 स्क्वायर मीटर में फैली होगी. इसके बनाए जाने पर कुल खर्च 971 करोड़ आएगा. नई बिल्डिंग भूकंपरोधी होगी. # फिलहाल लोकसभा में 590 लोगों के बैठने की जगह है, वहीं नई लोकसभा में 888 सीटें होंगी. विजिटर्स गैलरी में भी 336 लोग बैठ पाएंगे. नई राज्यसभा में 384 सीटें होंगी और विजिटर्स गैलेरी में 336 लोग बैठ सकेंगे. फिलहाल राज्यसभा में 280 लोगों के बैठने की जगह है. # इस नई संसद में कैफे, लाउंज, डाइनिंग एरिया, मीटिंग के लिए कमरे, अफसरों और बाकी कर्मचारियों के लिए हाईटेक ऑफिस बनाए जाएंगे. # बिल्डिंग को ऐसा बनाया जाएगा कि आसानी से मेंटिनेंस हो सके. अपग्रेड की जब भी जरूरत हो तो आसानी से काम किया जा सके. पुरानी संसद का क्या होगा? संसद भवन की नई इमारत के शिलान्यास से पहले लोकसभा सचिवालय की ओर से संसद की पुरानी इमारत से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी दी. https://twitter.com/LokSabhaSectt/status/1336634535132491782?s=19 वर्तमान संसद भवन का शिलान्यास 12 फरवरी 1921 को किया गया था. इसे छह साल में 83 लाख रूपये  की लागत से तैयार किया गया था. उद्घाटन भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन द्वारा 18 जनवरी 1927 को किया गया था. नई इमारत बनने के बाद इसे पुरातत्व धरोहर में बदला जा सकता है. बाकी संसदीय कार्यक्रमों में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा. नई इमारत की डिजाइन के बारे में गुरुग्राम के मशहूर आर्किटेक्ट तुषार गौड़ ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग कह रहे हैं कि नए संसद भवन का डिजाइन अमेरिका के पेंटागन की बिल्डिंग जैसा है. ऐसा है नहीं. ये उससे काफी अलग है. बात होनी चाहिए इमारत की आत्मा को लेकर. सोचिए, पुराना संसद भवन गोल क्यों बनाया गया? ये एक प्रतीक जैसा है जो कहता है कि हर दिशा से लोग आ सकते हैं. हालांकि तुषार का कहना था कि निजी तौर पर नया डिजाइन मुझे खास पसंद नहीं है.

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