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कौन हैं दिनेश खटीक जिनके लिए सीएम योगी ने संगीत सोम को पीछे कर दिया?

अबकी बार मुख्यमंत्री ने खुद ही तालमेल बढ़ाने की कोशिश की. लंबे-चौड़े संगीत सोम के पीछे छूट जाने वाले दिनेश खटीक को खुद की आगे बुला लिया.

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Dinesh Khatik
दिनेश खटीक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (India Today)
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सौरभ
23 जनवरी 2026 (Updated: 23 जनवरी 2026, 12:08 AM IST)
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरठ में एक स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के मॉडल पर नज़रें गड़ाए खड़े थे. अधिकारी उन्हें बिल्डिंग के बारे में समझा रहे थे. बगल में उनके सरधना विधायक संगीत सोम खड़े थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें देखा और पीछे हटने के लिए कहा. वीडियो में नज़र आता है जैसे योगी संगीत सोम को पीछे जाने के लिए और पीछे खड़े एक शख्स को आगे आने के लिए कहते हैं. जिसको योगी आगे आने के लिए कहते हैं उनका नाम है दिनेश खटीक. योगी सरकार में मंत्री हैं. हालांकि, खटीक की पहचान सिर्फ इतनी भर नहीं है.

कौन हैं दिनेश खटीक?

दिनेश खटीक मेरठ जिले की हस्तिनापुर सीट से दूसरी बार के विधायक हैं. दलित समाज से आने वाले दिनेश ने अपना पहला चुनाव 2017 में हस्तिनापुर की विधानसभा सीट से ही लड़ा और जीते भी. दिनेश लंबे समय से संघ से जुड़े हैं. इनके पिता भी संघ में रहे. इनके भाई नितिन खटीक जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं. दिनेश हस्तिनापुर के मवाना के रहने वाले हैं. उनका ईंट के भट्ठे का बिज़नेस है. वो मेरठ के गंगानगर में रहते हैं.

एक महीना पहले की बात है. 25 दिसंबर, 2025 को दिनेश खटीक खबरों में आए. वजह थी उनका एक बयान. सार्वजनिक मंच था. मंच पर पूर्व कांग्रेसी और वर्तमान में बीजेपी हितैशी प्रमोद कृष्णम भी खड़े थे. तभी दिनेश खटिक कहते हैं,

"कुदरती बात है, कि मैं दोबारा विधायक बना, दो बार मिनिस्टर बना. पर पता नहीं अपने आप मेरे मन से ये बात निकलती है, मैंने आजतक मेरठ में नहीं कही है, मीडिया वाले भी खड़े हैं. मैं बार-बार ये कहता हूं कि मैं दो बार विधायक बन गया, मुझे शापित भूमि से अब तीसरी बार विधायक नहीं बनना. "

जाहिर है बीजेपी के लिए यह बयान असहज करने के लिए काफी था. 

बहरहाल, दिनेश खटीक के मन में ये जो बात आई उसकी वजह क्या है, यह तो वही जानते होंगे. पर हम थोड़ा पीछे चलते हैं. लोगों ने राहत सामग्री लेने से इनकार कर दिया और स्थायी समाधान की मांग की. इस दौरान डीएम डॉ. वीके सिंह और एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा भी मौजूद थे.

ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें राशन या अस्थायी मदद नहीं, बल्कि बाढ़ से मुक्ति और सुरक्षित जमीन चाहिए.

पिछले साल उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से बाढ़ की चपेट में आए. इनमें मेरठ का हस्तिनापुर भी शामिल था. 4 सितंबर को दिनेश खटीक अपनी ही विधानसभा में बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में राहत सामाग्री लेकर पहुंचे थे. 6 सिंतबर को ABP न्यूज़ पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक लोगों ने राहत सामग्री लेने से इनकार कर दिया. ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें राशन या अस्थायी मदद नहीं, बल्कि बाढ़ से मुक्ति और सुरक्षित जमीन चाहिए. ग्रामीणों ने कहा कि हर साल बाढ़ उनके घरों और खेतों को नुकसान पहुंचाती है, और अस्थायी राहत उनकी समस्याओं का हल नहीं है.

थोड़ा सा और पीछे चलते हैं. पिछले ही साल नवंबर की बात है. 9 नवंबर को एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी ने FIR दर्ज कराई कि उनकी जमीन पर उनके पड़ोसी ने कब्जा करने की कोशिश की. FIR की मानें, तो राजकुमार के साथ आए लोगों ने दो राउंड गोलियां भी फायर कीं. साथ ही उनकी जमीन पर लगा हुआ लोहे का गेट उखाड़कर फेंक दिया. इस घटना का वीडियो भी सामने आया है. साथ ही मुकदमे में उन्होंने अटेप्ट टू मर्डर का भी केस दर्ज कराया.

यहीं पर एंट्री हुई योगी के मंत्री दिनेश खटीक की. सूत्रों के हवाले से खबर आई कि मंत्री दिनेश खटीक ने बाकायदा अधिकारियों से बात की, ताकि आरोपियों के सिर से हत्या की कोशिश का इल्जाम हट सके. हालांकि, लल्लनटॉप ने इस मामले पर दिनेश खटीक का पक्ष जानना चाहा, लेकिन उनका जवाब नहीं आया.

हालांकि, मामला तो यह भी पहला नहीं था जब दिनेश खटीक का नाम विवाद से जुड़ा हो. आजतक से जुड़े उस्मान चौधरी की रिपोर्ट के मुताबिक, 13 फरवरी 2021 को मेरठ के रहने वाले वकील ओंकार सिंह ने आत्महत्या कर ली थी. पुलिस को मौके से जो सुसाइड नोट मिला, उसमें लिखा था कि बीजेपी विधायक दिनेश खटीक उनका उत्पीड़न कर रहे हैं. हालांकि, पुलिस कभी इस मामले में खटीक के दरवाज़े तक नहीं पहुंची. इस मामले के एक साल बाद, वो चुनाव जीते और योगी 2.0 में मंत्री बना दिए गए.

हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि खटीक मंत्री बन गए तो सबकुछ उनके मुताबिक ही चलने लगा. मंत्री बनने के कुछ ही महीने बीते थे, मेरठ में दो लोगों की गाड़ी की टक्कर हो गई. उनमें से एक टेंट व्यापारी था. अगले दिन इसकी शिकायत कराने टेंट व्यापारी थाने पहुंचा. उसने तहरीर में पुलिस कांस्टेबल पर जाति सूचक शब्द और ₹4000 छीनने की बात कही. 

मुकदमा दर्ज नहीं किया गया. टेंट व्यापारी पहुंचा दिनेश खटीक के पास. मंत्री जी ने थाने में फोन घुमाया. लेकिन मामला उल्टा पड़ गया. थाना इंस्पेक्टर ने तहरीर में लगाए गए आरोप को गलत ठहराते हुए मुकदमा करने से इनकार कर दिया. दिनेश खटीक खुद थाने गए. उनसे थानेदार की बहस भी हुई. खटीक डीएम के पास भी गए. अंत में पुलिस ने FIR दर्ज की. लेकिन दोनों तरफ से.

पुलिसवाले भले ही मंत्री दिनेश खटीक की बात ना सुन रहे हों. लेकिन सीएम योगी पूरी तवज्जो देते हैं. पिछले साल अगस्त की बात है. खटीक की तबीयत कुछ नासाज़ थी. उनकी सर्जरी हुई थी. सीएम योगी को पता चला तो उनका हालचाल लेने खुद उनके घर पहुंच गए.

खैर, तवज्जो न देने पर खटीक नाराज़ भी हो जाते हैं. 2022 में मंत्री बने कुछ ही महीने बीते थे कि मुख्यमंत्री के लिए सिरदर्द पैदा कर दिया. दिनेश खटीक ने एक चिट्ठी लिखकर इस्तीफे की पेशकश कर दी. लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री या राज्यपाल के साथ-साथ एक कॉपी सीधे अमित शाह को भी भेज दी. और क्या लगाया-

मैं एक दलित जाति का मंत्री हूं. इसीलिए इस विभाग में मेरे साथ बहुत ज्यादा भेदभाव किया जा रहा है. मुझे विभाग में अभी तक कोई अधिकार नहीं दिया गया है, इसलिए मेरे पत्रों का जवाब नहीं दिया जाता है. मेरे द्वारा लिखे पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. इस विभाग में नमामि गंगे योजना के अंदर भी बहुत बड़ा भ्रष्टाचार फैला है, जो ग्राउंड पर जाने से पता चलता है. और जब मैं कोई शिकायत किसी भी अधिकारी के विरुद्ध करता हूं तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. चाहें तो इसकी किसी एजेंसी से जांच भी कराई जा सकती है. जब विभाग में दलित समाज के राज्य मंत्री का विभाग में कोई अस्तित्व नहीं है तो फिर ऐसी स्थिति में राज्य मंत्री के रूप में मेरा कार्य करना दलित समाज के लिए बेकार है. इन्हीं सब बातों से आहत होकर मैं अपने पद से त्यागपत्र दे रहा हूं.

वैसे, ना तो वो इस्तीफा देना चाहते थे, ना ही इस्तीफा हुआ ही. लेकिन कहानी वो नहीं थी जो उन्होंने चिट्ठी में लिखी थी. सूत्रों ने बताया कि दिनेश खटीक अपने विभाग के कुछ इंजीनियर्स का तबादला अपने मुताबिक चाहते थे. जब उन्होंने अधिकारियों से ये मांग की तो जवाब आया कि ऊपर बात कर लीजिए. एक तरफ अधिकारियों ने दो टूक जवाब दिया, दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि विभाग के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी खटीक के मनपसंद का कोई तबादला नहीं किया.

इस विवाद के कुछ घंटे बाद मुख्यमंत्री ने एक ट्वीट किया- ‘मंत्री अपने राज्यमंत्रियों से तालमेल रखें.’

इसलिए, अबकी बार मुख्यमंत्री ने खुद ही तालमेल बढ़ाने की कोशिश की. लंबे-चौड़े संगीत सोम के पीछे छूटे जाने वाले दिनेश खटीक को खुद की आगे बुला लिया.

वीडियो: मेरठ में एक बैंक मैनेजर के ज़मीन पर कब्ज़ा, जान से मारने की कोशिश, दिनेश खटीक पर क्या आरोप लगे?

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