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जलते हुए रोम का बदनाम राजा बांसुरी क्यों बजाने लगा?

रोम के सबसे बदनाम सम्राट की कहानी!

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Great Fire of Rome, Nero
रोमन सम्राट नीरो के बारे में एक कहावत मशहूर है 'जब रोम जल रहा था,नीरो बांसुरी बजा रहा था' (तस्वीर- Getty)
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कमल
12 अक्तूबर 2023 (अपडेटेड: 12 अक्तूबर 2023, 10:44 AM IST)
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कहते हैं जब जर्मनी में यहूदियों को गैस की भट्टियों में झोंका जा रहा था. हिटलर आल्प्स की पहाड़ियों पर बने महल में अपने कुत्तों के साथ छुट्टियां मना रहा था. जब तय हो गया कि द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी हारेगा, हिटलर ने एक फरमान जारी किया- सब कुछ जला दो. ताकि दुश्मन सेनाएं किसी चीज का इस्तेमाल न कर सकें. हिटलर के इस फरमान को नाम दिया गया - नीरो डिक्री. (Great Fire of Rome)

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नीरो-इस नाम को सुनते की एक छवि दिमाग में उभरती है. जलता हुआ रोम. चीख पुकार मचाते लोग. और दूर अपने महल की छत से बांसुरी बजाता नीरो. छवि ऐसी कि कहावत बन गई. हालांकि एक सच ये भी है कि नीरो के वक्त में बांसुरी नहीं थी. फिर नीरो क्या बजा रहा था? और क्यों? (Roman Emperor Nero)

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नीरो रोमन साम्राज्य का आखिरी सम्राट था. उसने 54 से 68 ईसा पूर्व तक रोम पर शासन किया (तस्वीर- Wikimedia commons)
एक अनूठी शादी 

अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में काम करने वाले प्रोफ़ेसर एडवर्ड चैम्पलिन ने नीरो पर एक किताब लिखी है. शीर्षक है, नीरो. चैम्पलिन लिखते हैं,

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पोपिया सबीना- ये नीरो की दूसरी पत्नी थी. रोमन इतिहासकार कैशियस डियो के अनुसार सबीना की जब मौत हुई, वो गर्भवती थी. सबीना नीरो से नाराज थी, क्योंकि नीरो उसे वक़्त नहीं देता था. पत्नी की लगातार शिकायत से एक रोज़ नीरो को गुस्सा आया. और उसने सबीना के पेट पर लात मार दी. जिससे उसकी मौत हो गई. सबीना की मौत से नीरो को गहरा आघात लगा. पश्चाताप में उसने आदेश दिया कि सबीना की शव यात्रा पूरे शाही सम्मान से निकाली जाए. उसके शरीर को तमाम लेप लगाए गए और फिर उसे दफनाया गया. मौत के बाद नीरो ने सबीना को देवी का स्थान दे दिया. इसके बाद नीरो ने दो शादियां और की. जिनमें एक शादी तो ऐसी थी जिसकी रोमन इतिहास में दूसरी मिसाल नहीं मिलती.

सबीना की मौत के एक साल बाद एक रोज़ नीरो की नज़र एक लड़के पर पड़ी. जिसका चेहरा उसकी पूर्व पत्नी से मिलता था. नीरो ने आदेश दिया कि उसके अंडकोश निकालकर उसे नपुंसक बना दिया जाए. उसे लड़कियों के कपड़े पहनाकर नीरो के सामने पेश किया गया. नीरो ने उसे स्पोरस नाम दिया. ग्रीक भाषा के इस शब्द का अर्थ होता है, बीज. ये नाम रखने के पीछे नीरो का आशय था कि स्पोरस बच्चे नहीं पैदा कर सकता. नीरो जहां भी जाता स्पोरस को अपने साथ रखता. और कई बार भरे दरबार में सबके सामने उसे चूम लेता था. नीरो यहीं नहीं रुका. एक रोज़ उसने ऐलान किया कि वो स्पोरस से शादी करेगा. पूरे रीति रिवाज़ से शादी हुई. और स्पोरस नीरो की मौत के दिन तक उसके साथ रहा.

नीरो की मौत 68 ईस्वी में हुई थी. 16 साल की उम्र में सम्राट बनने के बाद वो केवल 30 वर्ष की उम्र तक जिन्दा रहा. इतिहासकारों के अनुसार उसके शासन के पहले पांच साल बहुत अच्छे थे. उसने रोमन सीनेट को आजादी दी और सुधार लागू किए. सड़कें बनवाई, पानी पहुंचाया, तमाम वो काम किए जो कोई अच्छा शासक करता है. फिर भी नीरो को रोमन इतिहास के सबसे क्रूर शासकों में से एक गिना जाता है. रोम जला, बांसुरी बजी. लेकिन इस बांसुरी के सुर कैसे तैयार हुए? इस सवाल का जवाब विलियम वर्ड्स वर्थ ने दिया- अ चाइल्ड इज़ द फादर ऑफ मैन.

Nero ने मां को मारा! 

नीरो का बचपन काफी मुश्किलों में गुजरा था. हालांकि उसकी नसों में रोमन सम्राटों का खून था. वो जूलियस सीजर का वंशज था. जूलियस सीजर ने एक औलाद को गोद लिया था- ऑगस्टस, जो आगे जाकर रोमन साम्राज्य का पहला सम्राट बना. नीरो ऑगस्टस का पड़पोता था. नीरो जब पैदा हुआ,तब रोम पर सम्राट कैलिगुला का शासन था. कैलिगुला ने नीरो की मां अग्रिपीना का सब कुछ छीनकर उसे देश से बाहर भेज दिया. नीरो की परवरिश गवैयों, कवियों और अदाकारो के बीच हुआ. सुनने में अच्छा लग सकता है. लेकिन रोम में कलाकार सबसे निचले दर्ज़े के लोग माने जाते थे. इसलिए नीरो को वैसा बचपन नहीं मिल पाया, जिसका वो खुद को हकदार मानता था.

नीरो की जिंदगी में बदलाव आया, जब उसने जवानी की दहलीज़ पर कदम रखा. वक्त ने करवट ली. कैलिगुला के बाद रोमन सत्ता क्लॉडियस के हाथ आई. मौका देखकर नीरो की मां अग्रिपीना ने क्लॉडियस से शादी कर ली और सत्ता में साझेदार बन गई. उसने नीरो की शादी ऑक्टेविया से कराई. ऑक्टेविया क्लॉडियस की बेटी थी. इस तरह उसने पक्का कर दिया कि क्लॉडियस के बाद सत्ता उसके बेटे को मिलेगी. नीरो को सत्ता मिली 54 ईस्वी में. क्लॉडियस की मौत के बाद.

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नीरो ने सत्ता में आने के लगभग पांच साल बाद अपनी मां की हत्या करा दी थी (तस्वीर- Getty)

एक दावा ये भी किया जाता है कि नीरो को राजा बनाने के लिए अग्रिपीना ने क्लॉडियस को जहरीले मशरूम खिलाकर मार डाला था. अग्रिपीना को इतिहासकारों ने एक शातिर महिला करार दिया है. लेकिन वक्त के हिसाब से देखें तो उसने वो सब कुछ किया जो कोई भी पुरुष शासक करता. नीरो के दौर में अग्रिपीना ने सारी शक्ति अपने हाथों में जुटा ली. अग्रिपीना इतनी ताकतवर हो चुकी थी कि उस दौर में जो सिक्के छापे गए. उनमें एक तरफ नीरो की तस्वीर होती तो दूसरी तरफ अग्रिपीना की. अग्रिपीना ने सत्ता को लम्बे वक्त तक कंट्रोल किया. लेकिन फिर यही बात उसके अंत का कारण भी बन गयी. कहानी कहती है कि नीरो अपनी शादी से खुश नहीं था. उसने अपना ज्यादातर वक्त सर्कस, दौड़ या खेलों में देना शुरू कर दिया. चैम्पलिन अपनी किताब में लिखते हैं,

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नीरो पत्नी से बेरुखा बर्ताव करता था. उसके इस बर्ताव से ऑक्टेविया काफी दुखी थी. जल्द ही उसे पता चला कि नीरो का एक दूसरी महिला के साथ संबंध भी बन गया है. सम्राट का गैर महिलाओं के साथ संबंध रखना, आम बात थी. लेकिन नीरो उस महिला के प्यार में ऐसा दीवाना हुआ कि उसने ऑक्टेविया को तलाक देने की ठान ली. इस घटना ने रोमन पब्लिक के.बीच नीरो की छवि पर एक बड़ा असर डाला. लोग ऑक्टेविया से सहानुभूति रखते थे. इसलिए ये बातें रोमन सीनेट में भी उठने लगीं. नीरो की खुद की मां ने उसका विरोध किया.

यहां मारो खंज़र 

चीजें अचानक ऐसे बदली कि नीरो आगबबूला हो उठा. उसने न सिर्फ ऑक्टेविया को तलाक दिया. बल्कि अपनी मां को भी मरवा डाला. उसने एक ऐसी नाव बनवाई जो समंदर में जाते ही डूब जाती. इसमें बिठाकर उसने अपनी मां को पानी की यात्रा पर भेजा. किस्मत से अग्रिपीना बच गई. लेकिन नीरो ने अपने सैनिक भेजकर उसके मरवा डाला. नीरो के बारे में कई इतिहासकारों ने ये भी लिखा है कि उसकी मां से उसके सेक्सुअल संबंध थे. जब रोम के सैनिक अग्रिपीना को मारने पहुंचे, उसने अपने पेट की ओर इशारा कर कहा,

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इससे एक आशय ये निकलता है कि अग्रिपीना के पेट में नीरो का बच्चा था. हालांकि कई इतिहासकारों ये भी मानते हैं कि अग्रिपीना का आशय शायद ये रहा हो कि खुद नीरो उसकी कोख से पैदा हुआ था. इसलिए वो अपने पेट की ओर इशारा कर रही थी. अग्रिपीना की मौत के बाद क्या हुआ? मां की हत्या करने के बाद भी नीरो का गुस्सा शांत नहीं हुआ. अगला नंबर ऑक्टेविया का आया. ऑक्टेविया को पहले रोम से निष्कासित किया गया. जब जनता ने इसका विरोध किया, नीरो ने गुस्से में ऑक्टेविया की भी हत्या करा दी. यहां से नीरो की कहानी वहां जाती है जहां से हमने शुरुआत की थी. नीरो ने जिस महिला के लिए पत्नी और मां को मार डाला था, उसका नाम था - पोपिया सबीना.

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इतिहासकारों द्वारा ये आरोप भी लगाया जाता है कि नीरो ने जानबूझकर रोम में आग लगवाई थी (तस्वीर- Wikimedia commons)

रोमन इतिहासकार टेसिटस के अनुसार सबीना नीरो के बच्चे की मां बनने वाली थी. जबकि ऑक्टेविया से उसे लम्बे समय से औलाद नहीं हुई थी. इसी कारण वो ऑक्टेविया से अलग होना चाहता था. ऑक्टेविया के बाद उसने सबीना से शादी की. लेकिन कुछ साल बाद उसके गुस्से ने सबीना की भी जान ले ली.

टेसिटस के अनुसार सबीना की मौत ने नीरो को मानसिक अवसाद में डाल दिया था. धीरे-धीरे वो सनकी होता चला गया. अगर पानी भी दिया जाता तो पहले वो उसे गर्म करवाता और फिर बर्फ में गिलास रखकर पानी को ठंडा करता, तब उसे पीता. नीरो दिन भर खेलों में डूबा रहता. या पोशाक पहनकर मंच पर चढ़ जाता. घंटों अभिनय करता. नाटकों की कहानियां भी ऐसी जो सिर्फ त्रासदी से भरी होती. हालांकि कल्पना में डूबे नीरो की जिंदगी में असली त्रासदी आई सन 64 ईसवी में. आग लगी या लगाई गई, ये पक्का नहीं. लेकिन आग लगी जरूर. और ऐसी लगी कि रोम को जलाकर ख़ाक कर दिया.
सैकड़ों लोग मारे गए, हजारों घर जल गए. इस घटना ने जन्म दिया एक कहावत को,

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नीरो बांसुरी क्यों बजा रहा था? 

माना जाता है कि नीरो ने खुद रोम में आग लगाई थी. स्विटोनियस और कैशियस डियो नाम के दो रोमन इतिहासकारों के अनुसार,

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स्विटोनियस के अनुसार नीरो ने आग लगाई क्योंकि वो अपने लिए एक नया महल बनाना चाहता था. जिसे उसने बाद में गोल्डन पैलेस का नाम दिया. हालांकि तीसरे इतिहासकार टेसिटस के अनुसार इस बात में कोई सच्चाई नहीं थी. टेसिटस के मुताबिक़ ये बात महज अफवाह थी. जब आग लगी नीरो खुद मदद के लिए आगे आया था. उसका खुद का महल आग की चपेट में आ गया था. इसके बावजूद उसने.लोगों को अपने यहां शरण दी.

टेसिटस नीरो के वक्त में खुद भी रोम में मौजूद था. इसलिए कई मॉडर्न इतिहासकारों का मानना है कि उसकी बात ज्यादा प्रामाणिक मानी जानी चाहिए. इसके बरअक्स स्विटोनियस और कैशियस डियो ने नीरो की कहानी बाद में जाकर लिखी. नीरो का नाम आग और बांसुरी के साथ इसलिए भी जुड़ गया क्योंकि आगे जाकर जब ईसाई बहुमत में आए, उन्होंने नीरो को इस घटना का जिम्मेदार माना. रोम की आग का सबसे बुरा अंजाम ईसाइयों ने भुगता. आग की घटना से जनता आग बबूला थी. सवाल उठा कि दोषी कौन, तो नीरो ने ये इल्ज़ाम ईसाइयों के मत्थे मढ़ दिया. ईसाई अल्पसंख्यक थे. उन्हें चुन-चुन कर निशाना बनाया गया. सरेआम फांसी दी गई. भूखे भेड़ियों के आगे जिंदा डाल दिया गया. नीरो का पतन कैसे हुआ?

एक आम धारणा ये भी है कि आग की घटना के कारण नीरो रोम की जनता में विलेन बन गया था. लेकिन असलियत में एक दूसरी घटना नीरो के खात्मे का कारण बनी. रोमन साम्राज्य में अलग अलग सूबों को गवर्नर कंट्रोल करते थे. नीरो के समय में फ़्रांस का एक गवर्नर हुआ करता था. जिसका नाम विनडेक्स था. नीरो की नीतियों से तंग आकर विनडेक्स ने सन 68 ईसवी में विद्रोह कर दिया. साथ ही ये ऐलान कर डाला कि स्पेन का गवर्नर गल्बा, नीरो का विरोधी है और वो उसे समर्थन देता है. गल्बा बेचारा नीरो से लड़ाई नहीं चाहता था. लेकिन विनडेक्स ने उसे भी फंसा दिया.

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रोमन इतिहास में नीरो के शासनकाल को रोम के सबसे खराब और निराशजनक दौर में से एक माना जाता है (तस्वीर- Getty)

नीरो ने पहले विनडेक्स को हराया और फिर गल्बा के पीछे पड़ गया. गल्बा ने अपनी रक्षा के लिए दूसरे सूबों का समर्थन जुटाया. और धीरे धीरे रोमन फौज के एक बड़े धड़े को नीरो के खिलाफ खड़ा कर दिया. कुछ मिलिट्री कमांडर्स ने रोम तक जाने वाली रसद सप्लाई रोक दी. रोम में जैसे ही चीजों के दाम बढ़ने शुरू हुए, लोग भी नीरो के विरोध में आकर खड़े हो गए. ये विरोध बढ़ता गया और जल्द ही रोमन सीनेट तक पहुंच गया. रोमन सीनेट ने एक सभा बुलाकर नीरो को जनता का दुश्मन घोषित कर डाला.

ये घोषणा नीरो के डेथ वॉरंट पर दस्तख़त के समान थी. जब नीरो तक ये खबर पहुंची, उसने जान बचाने के लिए भागने की ठानी. कई दिनों तक वो दर दर भटकता रहा. एक रोज़ जब थक हार कर वो एक घर में पहुंचा, उसने स्पोरस से पूछा, पकड़े जाने पर मेरे साथ क्या होगा? स्पोरस ने जवाब दिया,

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ये सुनकर नीरो ने तय कर लिया कि इससे बेहतर अपनी शर्तों पर मरना है. नीरो अपनी शर्तों पर ही मरा. मौत के समय उसके आख़िरी शब्द थे, क्वालिस आर्टिफेक्स पेरियो. जिसका मतलब था,

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और इस तरह अंत हुई उस रोमन सम्राट की कहानी, जिसे नाटक में भाग लेने का शौक था. और उसकी जिंदगी भी एकदम नाटकीय गुजरी.

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