जब पर्रिकर ने अपने दोस्त को बचाने के लिए उसके हाथ से शराब और सिगरेट ले ली
जिस दोस्त को बचाया उसके पिता बोले 'ऐसे लड़कों की संगत मत किया करो'
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62 की उम्र में कैंसर से जंग लड़ रहे थे मनोहर पर्रिकर.
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गोवा के 4 बार मुख्यमंत्री रहे. देश के रक्षा मंत्री रहे. उत्तर भारत के लोगों के जेहन में मनोहर पर्रिकर की वही तस्वीर ज्यादा आती है, जिसमें वो स्कूटर से ऑफिस जाते दिखते हैं. ऐसी तस्वीरें देखने के लिए गोवा आदी हो चुका था. कभी स्कूटर पर, कभी बस में ऑफिस, कभी फुटपाथ पर चाय की दुकान पर बैठकर गपशप, तो कभी किसी शादी समारोह में सबके साथ लाइन में लगकर खाना लेना. मनोहर पर्रिकर की ये कुछ ऐसी पहचान हैं, जो गोवा के लोग ताउम्र शायद ही भूल पाएं. सरल और शांत स्वभाव के मनोहर भारत के पहले ऐसे सीएम थे, जो आईआईटी बैकग्राउंड से थे. आमतौर पर इंजीनियरिंग पढ़ने के बाद स्टूडेंट्स को अपना करियर बनाने की धुन सवार होती है. मगर मनोहर पर्रिकर को जीवन भर गोवा बनाने की धुन सवार रही.
26 साल की उम्र में संघ की शाखा प्रमुख बने पर्रिकर का जन्म मापुसा गांव में साल 1955 में हुआ था. गोवा के लोयोला हाई स्कूल से उन्होंने अपनी शिक्षा हासिल की थी. अपनी 12वीं की पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने मुंबई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी में दाखिला लिया था और यहां से उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी. पर्रिकर बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे. 26 साल में वे अपने गांव मापुसा में शाखा प्रमुख बन गए थे. पहला चुनाव 1991 में लड़ा, पर हार गए. 1994 के विधानसभा चुनाव में वे पहली बार जीते थे. जून 1999 में नेता प्रतिपक्ष बन गए.

मनोहर पर्रिकर गोवा के 4 बार सीएम रहे. फाइल फोटो. पीटीआई.
मुख्यमंत्री से रक्षा मंत्री और फिर मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर गोवा के 4 बार सीएम रहे. पहली बार 2000 से 2002 तक, दोबारा 2002 से 2005 तक, तीसरी बार 2012 से 2014 तक और चौथी बार 14 मार्च, 2017 से अब तक. यानी 17 मार्च 2019 तक. साल 2017 में जब भाजपा गोवा विधानसभा चुनाव में बहुमत से दूर थी, तब दूसरे दलों ने पर्रिकर को सीएम बनाने की शर्त पर ही समर्थन दिया था. बीच में ढाई साल देश के रक्षा मंत्री रहे. साल 2013 में गोवा में भाजपा अधिवेशन के दौरान बहस हो रही थी कि नरेंद्र मोदी पीएम पद के उम्मीदवार होंगे या नहीं. पर भाजपा की ओर से मोदी का नाम कोई खुलकर आगे बढ़ाने को तैयार नहीं था. इसी अधिवेशन के मंच से पहली बार पर्रिकर ने मोदी के नाम को पीएम पद के उम्मीदवार के लिए प्रस्तावित किया. बाद में साल 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने पर्रिकर से रक्षा मंत्रालय संभालने को कहा. पर्रिकर इसके लिए राजी नहीं थे. कुछ दिन बाद वे दिल्ली आ गए. और रक्षा मंत्रालय संभाल लिया. पर्रिकर के समय में ही 28–29 सितंबर, 2016 को सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की थी. रक्षा मंत्री बनने के बाद उनको उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुना गया.
स्कूटर वाले सीएम के नाम से फेमस मनोहर पर्रिकर बेहद सादगी पसंद नेता थे. उत्तर भारत के तो लोग ऐसे सीएम की कल्पना भी नहीं कर सकते. स्कूटर से ऑफिस जाना, किसी वीआईपी रेस्टोरेंट की बजाय फुटपाथ पर ही चाय नाश्ता. फुटपाथ पर भी चाय पीने के पीछे उनकी अपनी फिलॉसफी थी, वो ये कि चाय की दुकान से मुहल्ले भर की खबरें मिल जाती हैं. वे कहते थे, नेताओं को टी स्टॉल पर चाय पीनी चाहिए. यहां से दुनिया जहान की जानकारी मिल जाती है.

रक्षा मंत्री बनने के बाद उनको उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुना गया. फाइल फोटो.
बेहद सादा जीवन जीते थे पर्रिकर पर्रिकर बहुत ही आम जीवन जीते थे. कॉलेज के दिनों की एक घटना का जिक्र करते हुए बताते थे कि हॉस्टल में मेरा एक साथी सिगरेट, शराब पीता था, वह ब्राह्मण परिवार से था. एक दिन मैं कमरे में उसी साथी के साथ बैठा था. लड़के के हाथ में सिगरेट और दूसरे में शराब का पैग था. अचानक कमरे में उस लड़के के पिताजी आ गए. वो परेशान हो गया. मैं इन चीजों को हाथ नहीं लगाता था, पर उस दिन मैंने फौरन सिगरेट और शराब उसके हाथ से ले लिए. इससे पहले कि उसके पिता कुछ समझ पाते मैं रूम से बाहर आ गया. इस पर उस लड़के के पिता की टिप्पणी बड़ी दिलचस्प थी, बोले- बेटा ऐसे बच्चों की संगत में फिर कभी मत रहना.
घर परिवार वाले आदमी साल 2000 में गोवा में पर्रिकर पहली बार गोवा के सीएम बने थे. ठीक उसी वक्त उनकी पत्नी मेधा कैंसरग्रस्त हो गईं. पर्रिकर के मुख्यमंत्री बनने के ठीक एक साल बाद उनकी पत्नी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. पत्नी के जाने के बाद पर्रिकर ने गोवा के सीएम की कुर्सी तो संभाली है, बच्चों की जिम्मेदारी भी अच्छे से निभाई. पर्रिकर के दो बेटे हैं, बड़े बेटे उत्पल पर्रिकर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं. दूसरे बेटे अभिजीत बिजनेस करते हैं.

साल 2000 में गोवा में पर्रिकर पहली बार गोवा की सीएम बने थे. फाइल फोटो.
कुछ विवाद जो जुड़े रहे पर्रिकर से साल 2001 में पर्रिकर उस समय विवाद में आए जब उन्होंने 51 सरकारी स्कूलों को संघ की शैक्षणिक शाखा विद्या भारती को दे दिया.
यूरोपीय कचरा प्रबंधन संयंत्रों से जुड़ा विवाद साल 2013 में भारत की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल यूरोप गया था. इसमें गोवा के उपमुख्यमंत्री फ्रांसिस डिसूजा सहित कई विधायक मौजूद थे. ये प्रतिनिधिमंडल यूरोप के कचरा प्रबंधन पर अध्ययन करने के लिए गया था. यात्रा के दौरान करीब 1 करोड़ रुपए खर्च हुए, इस पर पर्रिकर को विवाद का सामना करना पड़ा था.
फीफा विश्व कप दावत साल 2014 में ब्राजील में हुए फीफा विश्व कप से जुड़ी हुई एक दावत को लेकर भी पर्रिकर पर विपक्ष ने हमला किया था. आरोप थे कि इस दावत पर करीब 89 लाख रुपए का खर्चा किया गया. जनता के पैसों को पानी की तरह इस्तेमाल किया गया है.
पाकिस्तान को बताया था नरक रक्षा मंत्री रहते पर्रिकर ने पाकिस्तान पर एक बयान दिया था. इसमें उन्होंने कहा था कि इस देश में जाना किसी नरक में जाने से कम नहीं है. पर्रिकर के इस बयान पर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई थी.
वीडियोः BSNL पहली बार अपने पौने दो लाख कर्मचारियों को सैलरी क्यों नहीं दे पाई?
26 साल की उम्र में संघ की शाखा प्रमुख बने पर्रिकर का जन्म मापुसा गांव में साल 1955 में हुआ था. गोवा के लोयोला हाई स्कूल से उन्होंने अपनी शिक्षा हासिल की थी. अपनी 12वीं की पढ़ाई खत्म करने के बाद उन्होंने मुंबई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी आईआईटी में दाखिला लिया था और यहां से उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी. पर्रिकर बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे. 26 साल में वे अपने गांव मापुसा में शाखा प्रमुख बन गए थे. पहला चुनाव 1991 में लड़ा, पर हार गए. 1994 के विधानसभा चुनाव में वे पहली बार जीते थे. जून 1999 में नेता प्रतिपक्ष बन गए.

मनोहर पर्रिकर गोवा के 4 बार सीएम रहे. फाइल फोटो. पीटीआई.
मुख्यमंत्री से रक्षा मंत्री और फिर मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर गोवा के 4 बार सीएम रहे. पहली बार 2000 से 2002 तक, दोबारा 2002 से 2005 तक, तीसरी बार 2012 से 2014 तक और चौथी बार 14 मार्च, 2017 से अब तक. यानी 17 मार्च 2019 तक. साल 2017 में जब भाजपा गोवा विधानसभा चुनाव में बहुमत से दूर थी, तब दूसरे दलों ने पर्रिकर को सीएम बनाने की शर्त पर ही समर्थन दिया था. बीच में ढाई साल देश के रक्षा मंत्री रहे. साल 2013 में गोवा में भाजपा अधिवेशन के दौरान बहस हो रही थी कि नरेंद्र मोदी पीएम पद के उम्मीदवार होंगे या नहीं. पर भाजपा की ओर से मोदी का नाम कोई खुलकर आगे बढ़ाने को तैयार नहीं था. इसी अधिवेशन के मंच से पहली बार पर्रिकर ने मोदी के नाम को पीएम पद के उम्मीदवार के लिए प्रस्तावित किया. बाद में साल 2014 में मोदी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने पर्रिकर से रक्षा मंत्रालय संभालने को कहा. पर्रिकर इसके लिए राजी नहीं थे. कुछ दिन बाद वे दिल्ली आ गए. और रक्षा मंत्रालय संभाल लिया. पर्रिकर के समय में ही 28–29 सितंबर, 2016 को सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की थी. रक्षा मंत्री बनने के बाद उनको उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुना गया.
स्कूटर वाले सीएम के नाम से फेमस मनोहर पर्रिकर बेहद सादगी पसंद नेता थे. उत्तर भारत के तो लोग ऐसे सीएम की कल्पना भी नहीं कर सकते. स्कूटर से ऑफिस जाना, किसी वीआईपी रेस्टोरेंट की बजाय फुटपाथ पर ही चाय नाश्ता. फुटपाथ पर भी चाय पीने के पीछे उनकी अपनी फिलॉसफी थी, वो ये कि चाय की दुकान से मुहल्ले भर की खबरें मिल जाती हैं. वे कहते थे, नेताओं को टी स्टॉल पर चाय पीनी चाहिए. यहां से दुनिया जहान की जानकारी मिल जाती है.

रक्षा मंत्री बनने के बाद उनको उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुना गया. फाइल फोटो.
बेहद सादा जीवन जीते थे पर्रिकर पर्रिकर बहुत ही आम जीवन जीते थे. कॉलेज के दिनों की एक घटना का जिक्र करते हुए बताते थे कि हॉस्टल में मेरा एक साथी सिगरेट, शराब पीता था, वह ब्राह्मण परिवार से था. एक दिन मैं कमरे में उसी साथी के साथ बैठा था. लड़के के हाथ में सिगरेट और दूसरे में शराब का पैग था. अचानक कमरे में उस लड़के के पिताजी आ गए. वो परेशान हो गया. मैं इन चीजों को हाथ नहीं लगाता था, पर उस दिन मैंने फौरन सिगरेट और शराब उसके हाथ से ले लिए. इससे पहले कि उसके पिता कुछ समझ पाते मैं रूम से बाहर आ गया. इस पर उस लड़के के पिता की टिप्पणी बड़ी दिलचस्प थी, बोले- बेटा ऐसे बच्चों की संगत में फिर कभी मत रहना.
घर परिवार वाले आदमी साल 2000 में गोवा में पर्रिकर पहली बार गोवा के सीएम बने थे. ठीक उसी वक्त उनकी पत्नी मेधा कैंसरग्रस्त हो गईं. पर्रिकर के मुख्यमंत्री बनने के ठीक एक साल बाद उनकी पत्नी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. पत्नी के जाने के बाद पर्रिकर ने गोवा के सीएम की कुर्सी तो संभाली है, बच्चों की जिम्मेदारी भी अच्छे से निभाई. पर्रिकर के दो बेटे हैं, बड़े बेटे उत्पल पर्रिकर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं. दूसरे बेटे अभिजीत बिजनेस करते हैं.

साल 2000 में गोवा में पर्रिकर पहली बार गोवा की सीएम बने थे. फाइल फोटो.
कुछ विवाद जो जुड़े रहे पर्रिकर से साल 2001 में पर्रिकर उस समय विवाद में आए जब उन्होंने 51 सरकारी स्कूलों को संघ की शैक्षणिक शाखा विद्या भारती को दे दिया.
यूरोपीय कचरा प्रबंधन संयंत्रों से जुड़ा विवाद साल 2013 में भारत की ओर से एक प्रतिनिधिमंडल यूरोप गया था. इसमें गोवा के उपमुख्यमंत्री फ्रांसिस डिसूजा सहित कई विधायक मौजूद थे. ये प्रतिनिधिमंडल यूरोप के कचरा प्रबंधन पर अध्ययन करने के लिए गया था. यात्रा के दौरान करीब 1 करोड़ रुपए खर्च हुए, इस पर पर्रिकर को विवाद का सामना करना पड़ा था.
फीफा विश्व कप दावत साल 2014 में ब्राजील में हुए फीफा विश्व कप से जुड़ी हुई एक दावत को लेकर भी पर्रिकर पर विपक्ष ने हमला किया था. आरोप थे कि इस दावत पर करीब 89 लाख रुपए का खर्चा किया गया. जनता के पैसों को पानी की तरह इस्तेमाल किया गया है.
पाकिस्तान को बताया था नरक रक्षा मंत्री रहते पर्रिकर ने पाकिस्तान पर एक बयान दिया था. इसमें उन्होंने कहा था कि इस देश में जाना किसी नरक में जाने से कम नहीं है. पर्रिकर के इस बयान पर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई थी.
वीडियोः BSNL पहली बार अपने पौने दो लाख कर्मचारियों को सैलरी क्यों नहीं दे पाई?

