नोटबंदी के बाद वेश्याएं: 'सात दिनों से एक भी कस्टमर नहीं देखा'
इस बुरे समय में कैसे जी रही हैं जीबी रोड की औरतें.
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फोटो - thelallantop
ये कहना है सेक्स वर्क के एक एजेंट का जो साकेत और महिपालपुर से काम करता है. और उसके मुताबिक़ ये गिरावट जीबी रोड के छोटे-छोटे रंडीखानों से लेकर बड़े कोठों तक देखी गई है. कस्टमरों की संख्या आधे से भी कम हो गई है. दुनिया का सबसे पुराना पेशा भारत में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है.
एक और एजेंट के मुताबिक: हमने अपने रेट एक-तिहाई कम कर दिए हैं. जो सेवा पहले 5 हजार में मिलती थी, अब साढ़े 3 हजार में मिल रही है. हम मसाज सर्विस के नाम से अपने कस्टमर्स को फ़ोन कर घटे हुए दामों के बारे में बता रहे हैं.
Symbolic Image (Source: Reuters)
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कोठे पर काम करने वाली राबिया कहती है कि सात दिनों से उसने कोई कस्टमर नहीं देखा. 'मेरे पास पहले रोज 7-8 कस्टमर आते थे. दूसरी सेक्स वर्कर्स का कहना है कि हमने पहले 500 का नोट लेने से मना किया. लेकिन फिर एजेंटों के कहने पर हम उसे लेने लगे. इसके बावजूद कोई कस्टमर नहीं आता.
जीबी रोड में कुल 150 कोठे हैं. जिनमें 5 हजार सेक्स वर्कर्स काम करती हैं. इनमें से अधिकतर का कोई बैंक अकाउंट नहीं है. ये अपने पुराने बक्सों में पैसे जमाकर रखती हैं. एजेंट जीतू का कहना है, 'लड़कियां इस पेशे में इसलिए हैं क्योंकि उन्हें पैसे कैश में मिलते हैं, जल्दी मिलते हैं.' एक अनुमान बताता है कि दिल्ली में सेक्स के व्यापर से करोड़ों के कैश ट्रांसैक्शन रोज होते हैं. लेकिन जबसे ये नया नियम आया है, सेक्स वर्क में तेजी से गिरावट आ गई है.'52 साल की सविता कहती हैं: हमें वैसे ही लोग इंसान नहीं समझते. हम बुरी परिस्थितियों में जीते हैं. अब ऐसा फैसला लेकर मोदी ने हमें बहुत बुरी परिस्थिति में ढकेल दिया है.'
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