The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • delhi is surrounded by thick layer of smog and governments are not working properly

...तो इस वजह से इस साल फैला है इतना सारा स्मॉग!

दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील हो चुकी है और सरकारों की नींद अब टूटी है.

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
विशाल
6 नवंबर 2016 (Updated: 6 नवंबर 2016, 12:14 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share

दिल्ली जहर में डूबी हुई है. एड़ी से चोटी तक. सुबह से शाम तक. अव्वल तो खतरनाक ये कि हम PM 2.5 और PM 10 जैसे जहरीले पार्टिकल्स के बीच सांस ले रहे हैं, लेकिन उससे भी खतरनाक ये है कि लोगों को इसका जरा भी अंदाजा नहीं है. स्मोक और फॉग के इस जानलेवा मिक्सचर को 'घना कोहरा' समझकर अपने बच्चों के साथ सड़कों पर निकल रहे हैं. सांस लेने में तकलीफ है, आंखों में जलन है, नाक बहती रहती है, पर धीरे-धीरे हम इसके आदी होते जा रहे हैं. सवाल एक ही है: जिम्मेदार कौन?

smog2


क्यों है इतना स्मॉग?

दीवाली के अगले ही दिन से दिल्ली-NCR स्मॉग में डूबा हुआ है. पिछले रविवार को तो फिर भी गनीमत थी, लेकिन सोमवार से तो हालत बेहद खराब है. सड़कों पर फैली धूल, खुले में जलाई जा रही आग, वाहनों से निकलने वाले धुआं, इंडस्ट्रीज से निकलने वाले कचरा और धुएं, दीवाली पर जलाए गए पटाखे और पड़ोसी राज्यों में जलाए जा रहे फसलों के अवशेषों की वजह से दिल्ली गैस-चेंबर में तब्दील हो चुकी है. दिल्ली के आसपास टनों कचरा जलाया जा रहा है. अब इंसान सांस लेना तो रोक नहीं सकता, तो ये सब भी फेफड़ों तक पहुंचाता जा रहा है.


क्या पराली (फसल काटने के बाद बचा हिस्सा) जलाने से फैला इतना स्मॉग?
क्या पराली (फसल काटने के बाद बचा हिस्सा) जलाने से फैला इतना स्मॉग?
क्या कहते हैं आंकड़ें

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र ने गुरुवार को कहा था कि इस बार दिल्ली के हालात पिछले 17 सालों में सबसे खराब हैं. विजिबिलिटी लगातार 200 से 400 मीटर के बीच झूल रही है. आंकड़े बताते हैं कि हम CNG शुरू होने से पहले के दौर में वापस लौट आए हैं. 1998 से लेकर 2003 तक वाहनों और पेट्रोलियम के उपयोग को लेकर बनाए गए नियमों से जो भी फायदे हुए थे, हम वो सब गंवा चुके हैं. हर क्यूबिक मीटर में PM 2.5 के पार्टिकल्स 355 माइक्रोग्राम हैं और PM 10 के पार्टिकल्स 482 माइक्रोग्राम हैं. जब ये 300 के पार हो जाते हैं, तभी हवा जहरीली होने लगती है. दिल्ली में तो ये 500 पार होने वाले हैं.

smog3

पिछले दो सालों से दिल्ली की हवा हर साल खराब ही हुई है. दिल्ली पल्यूशन कंट्रोल कमिटी की रियल टाइम रिपोर्ट के मुताबिक आज रविवार सुबह 11 बजे हर क्यूबिक मीटर में 4,273 माइक्रोग्राम 10 PM पार्टिकल्स थे और रात ढाई बजे हर क्यूबिक मीटर में 748 माइक्रोग्राम PM 2.5 पार्टिकल्स थे. 30 सितंबर से 2 नवंबर के बीच PM 2.5 के पार्टिकल्स 62.7% तक बढ़ गए थे.

smog4


क्या हाल है लोगों का

सड़कों पर फैला स्मॉग पिछले दो दिनों से घर में घुस रहा. बंद कमरों में भी हल्की-हल्की धुंध छाई रहती है. जिन लोगों को इसका अंदाजा नहीं है, जानकारी के अभाव में वो बच्चों और बूढ़ों को लेकर सड़क पर निकल रहे हैं. सांस लेने में तकलीफ होने पर चाय या गर्म पानी का सहारा ले रहे हैं, लेकिन नुकसान इससे कहीं ज्यादा हो रहा है. स्मॉग पार्टिकल्स फेफड़े से लेकर दिमाग तक में जगह बना रहे हैं और इसका कोई इलाज नहीं है. कोशिश यही करनी चाहिए कि इससे जितना ज्यादा बचा जा सकता हो, बचा जाए. रविवार को दिल्ली में गुजरात और पश्चिम बंगाल के बीच रणजी ट्रॉफी का मैच हो रहा था और इसे भी स्मॉग की वजह से रद्द कर दिया गया.

smog1


क्या कर रही हैं सरकारें

स्मॉग ऐसी समस्या है, जिसे एक-दो दिनों में खत्म नहीं किया जा सकता. कोई भी सरकार कुछ भी कर ले, इसे एकदम से खत्म नहीं कर सकती. फिर भी, जितनी कोशिश की जा सकती थी, उतनी नहीं की गई. केंद्र सरकार से लेकर दिल्ली सरकार तक ये बताने की स्थिति में नहीं है कि स्मॉग से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए.


दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने इसका ठीकरा पड़ोसी राज्यों के किसानों पर फोड़कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की. कहा कि पड़ोसी राज्यों में फसलों के अवशेष जलाए जाने की वजह से दिल्ली की हवा खराब हुई है, लेकिन क्या ये कहने से काम चलेगा. दिल्ली का स्वास्थ्य विभाग तो केजरीवाल के अंडर में ही आता है, फिर भी एक सप्ताह बीतने के बावजूद विभाग की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. इंतजार होता रहा कि पिछले सालों की तरह इस बार भी चीजें अपने-आप ठीक हो जाएंगी. अफसोस, ऐसा नहीं हुआ.

smog5

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन से स्मॉग पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने दलील दी कि दूसरे राज्यों के शहरों का भी तो दिल्ली जैसा ही हाल है. उन्होंने कहा, 'पल्यूशन लेवल काफी शहरों में हाई है. दिल्ली के लोगों का धन्यवाद, इस बार पटाखे कम थे.' केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल दवे से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'राजधानी के लिए ये आपातकाल स्थिति है, लेकिन इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. स्वास्थ्य मंत्रालय से बात करने के बाद केंद्र सरकार एक अडवाइजरी जारी कर सकती है. दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण कचरा है.'

smog6


प्रधानमंत्री से राष्ट्रपति तक, सब दिल्ली में. फिर भी...


संसद दिल्ली में है. राष्ट्रपति भवन दिल्ली में है. प्रधानमंत्री भवन दिल्ली में है. देश के दिग्गज नेताओं और मंत्रियों के घर और ऑफिस दिल्ली में हैं. फिर भी दिल्ली की जनता ही जहर में सांस लेने को मजबूर है. केजरीवाल सरकार गलियों की सफाई से लेकर अफसरों की बर्खास्तगी के होर्डिंग लगवाती है, रेडियो-अखबारों में ऐड देती है, लेकिन स्मॉग पर चादर ताने हुए है. जानकारी न होने की वजह से N95 के बजाय सर्जिकल मास्क और रुमाल ने नाक ढक रहे लोगों को जागरूक करने के लिए कोई विज्ञापन या अडवाइजरी क्यों नहीं दी गई. प्रधानमंत्री से लेकर केंद्र के न जाने कितने मंत्री सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, लेकिन इस मसले पर किसी ने कोई समाधान देने की कोशिश नहीं की.

smog7




क्या कोशिशें हो रही हैं

स्मॉग का खतरा देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से फसलों के अवशेष जलाने की रिपोर्ट देने के लिए कहा है. इसके पैनल ने NCR में आने वाले राज्यों की सरकारों को 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों को सड़क से हटाने का आदेश दिया है. इस मामले में अगली सुनवाई 8 नवंबर को होगी.


न जाने ये तुलना कितनी जायज है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग दिल्ली सरकार से सवाल कर रहे हैं कि केजरीवाल ने OROP पर खुदकुशी करने वाले रामकिशन के परिवार को जो एक करोड़ रुपए देने का वादा किया है, उतने रुपए में कितने लोगों को मास्क बांटे जा सकते थे. इतने रुपयों का विज्ञापन देकर कितने लोगों को उनकी जिंदगी के लिए जागरूक किया जा सकता है. जवाब किसी के पास नहीं है.

smog8


एक सप्ताह बाद जागीं सरकारें

स्मॉग में 7 दिन बिताने के बाद अब सरकारों की नींद खुली है. रविवार को अपने घर पर एक मीटिंग के बाद केजरीवाल ने कुछ फैसले लिए हैं.

1. अगले 5 दिनों के लिए दिल्ली में कंस्ट्रक्शन बंद.2. तीन दिन के लिए दिल्ली के सारे स्कूल बंद3. सड़कों पर कल से पानी का छिड़काव किया जाएगा.4. बदरपुर प्लांट 10 दिनों के लिए बंद किया जा रहा है. उसके ट्रांसपोर्टेशन से काफी प्रदूषण हो रहा था.5. वैक्यूम क्लीनिंग 10 तारीख से शुरू होगी. पीडब्ल्यूडी की 100 फुट चौड़ाई वाली हर सड़क हफ्ते में एक बार इससे जरूर क्लीन होगी.6. पत्तियां जलानी बंद, इसके लिए ऐप कल तक आ जाएगा. जिसपर शिकायत मिलते ही टीम एक्शन लेगी. जिन अफसरों के इलाकों में पत्तियां जलाई जाएंगी, उनकी सैलरी कटेगी.

smog9

इसके अलावा केजरीवाल ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल दवे से गुजारिश की कि पड़ोसी राज्यों में फसलों के अवशेष जलाने पर रोक लगवाई जाए. केंद्र सरकार भी अब अपने मंत्रियों और राज्यों के मुख्यमंत्री के साथ बैठकर इसका समाधान ढूंढना चाहती है.

ये समाधान जितना जल्दी मिल जाए, उतना बेहतर होगा. सबके लिए.




ये भी पढ़िये…

क्या दिल्ली में एक साथ सारे लोग मर जाएंगे?

इन जगहों पर सांस लेने की वजह से मर जाते हैं लोग

स्मॉग से बचने के लिए रुमाल मत बांधिए, ये वाले मास्क खरीदिए

Advertisement

Advertisement

()