जब बच्चे थे तब दूरदर्शन पर एक सीरियल आता था. चंद्रकांता. ऐयारी और तिलिस्म कीजादुई दुनिया. उसमे एक किरदार था चुनारगढ़ के महाराज शिवदत्त का. पंकज धीर अपनी लंबीजुल्फों के साथ कहर ढाए थे इस किरदार में. शिवदत्त की जो सबसे भयानक बात थी वो येकि वो ज़ुबान पर सांप से कटवाता था.सोर्स: यूट्यूबबच्चे थे, ऐसे अतिरंजित दृश्यों से दहशत होती थी. महज़ इस एक वजह से शिवदत्त कीखलनायकी ऐस्टैब्लिश हो जाती थी. सांप का ज़हर अपनी रगों में ले लेना और फिर भी ज़िंदारहना एक ऐसी दहशतनाक बात थी जिसकी सच्चाई पर यकीन नहीं होता था. कैसे कोई ज़हर पी करभी जीता रह सकता है! दिल्ली का एक लड़का ऐन यही कर रहा है. वो नशे के लिए, मज़े केलिए ज़हर पी रहा है. फिर भी जी रहा है. दिल्ली में रहने वाला तीस साला का युवक शिव(बदला हुआ नाम) नशे के लिए सांप का ज़हर पी रहा है. जब अफ़ीम, गांजा, डोडा, हेरोइनजैसे तमाम नशों से किक मिलना बंद हो गई, तो पट्ठे ने सांप के ज़हर को ही ट्राई करलिया. अब ये हाल है कि उसकी रगों में 'ख़ून कम ज़हर ज़्यादा' है. ये किसी हिंदी फिल्मका डायलॉग नहीं बल्कि हक़ीकत है. शिव दिल्ली के शादीपुर का रहने वाला है. खुद को इसनशे की गिरफ्त से छुडाने के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल में अपना इलाज करवा रहाहै. यहां के एक्सपर्ट डॉक्टर्स भौंचक्के है शिव के ब्लड-स्ट्रीम में ज़हर की मात्रादेख कर. उनका कहना है कि शिव का ख़ून बहुत ज़्यादा ज़हरीला हो चुका है. यहां तक किउसका थूक भी किसी के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. पेशे से ड्रमर शिव ने अपने टीनएज से ही ड्रग्स की दुनिया में कदम रख दिया था. उसने बताया कि उसके दोस्त शराब,अफ़ीम, गांजा जैसे तमाम नशे करते थे. वो भी लेने लगा. लेकिन जब उन्होंने शिव पर असरकरना बंद किया तो उसने सांप का ज़हर ट्राय करने का फैसला किया. ये ज़हर उसे कम से कम24 घंटों तक सुरूर में रखता है.शिव ये ज़हर ड्रग-पेडलर्स से खरीदता है जो उसे चोरी-छिपे इसकी सप्लाई करते हैं. एकछोटे से पैकेट की कीमत तीन से चार हज़ार रुपए होती है. जब पैसों के लिए शिव ने अपनेपरिवार वालों पर दबाव बनाना शुरू किया तो उन्होंने उसे हॉस्पिटल में भरती करवादिया. आरएमएल हॉस्पिटल के मानसिक चिकित्सा और नशा-मुक्ति डिपार्टमेंट की हैड डॉ.स्मिता देशपांडे का कहना है कि ऐसे केस बहुत ही दुर्लभ होते हैं और पेशंट अक्सर इसतरह के नशे के आदी होने की बात आसानी से कबूलते भी नहीं. शिव ने बताया कि उसने हाल ही में ज़हर लेना शुरू किया है. और भी सिर्फ पीने की हदतक. उसके कुछ दोस्त तो ज़्यादा नशे के लिए अपने आप को सांप से कटवाते हैं. सांप कोअगर धीरे से दबाया जाए तो वो तिलमिलाके डसता है. इस दंश को ज़ुबान के नीचे लिया जाताहै और इसका नशा तकरीबन एक हफ्ते तक रहता है. नशे की क्वालिटी इस बात पर भी निर्भरकरती है कि जिसका आप दंश ले रहे हो वो किस प्रजाति का सांप है. ज़ाहिर है जितनाज़हरीला सांप उतना ज़्यादा घातक ज़हर. नशे का कारोबार बहुत बड़ा है. एक्सटेसी की महंगीगोलियों से लेकर नशे के इंजेक्शनों तक भरमार है ऐसी नशीली चीज़ों की जो आपको दूसरीदुनिया की सैर करा दे. न जाने कितने युवा इनकी गिरफ्त में आकर बरबाद हुए जा रहेहैं. साल-दर-साल इसका आंकडा बढ़ता ही रहता है. इधर एक ये ट्रेंड भी चल पडा है किपुराने प्रचलित नशे की जगह कोई नया, अनोखा तरीका खोजा जाए. सांप से कटवा लेना भीइनमे से एक है. भगवान बचाए ऐसे लानती नशे से!