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Marvel वाले Deadpool जैसों से भरी पड़ी है ये दुनिया, असल दुनिया के इन जीवों की सुपर पावर जान लीजिए

Deadpool and Wolverine का खुमार तो जनता में खूब है. छिपकली की पूंछ के बारे में तो हम जानते हैं. लेकिन क्या कुदरत में ऐसा कोई जानवर है? जो अपने हाथ-पांव फिर से ग्रो कर पाए? अगर है, तो हम इंसान ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं?

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Deadpool and Wolverine
Deadpool and Wolverine
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राजविक्रम
31 जुलाई 2024 (अपडेटेड: 31 जुलाई 2024, 02:52 PM IST)
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हाल में Ryan Reynolds और Hugh Jackman की नई फिल्म, Deadpool & Wolverine आई है. फिल्म ने कमाई के मामले में तो बवाल काट ही रखा है. मार्वल (Marvel) के सुपर हीरो डेडपूल का किरदार भी जनता को खूब पसंद आ रहा है. लेकिन इस किरदार के पास ना तो, डॉक्टर स्ट्रेंज जैसा फैंसी जादू है. ना ही आयरन मैन जैसा जलवा. इसके पास है चारा-साज़ माने डॉक्टरों वाली शक्तियां. माने ये बहुत जल्दी ठीक हो सकता है. इसका हाथ-वाथ कट जाए, तो फिर से उग आता है. 

डेडपूल फिल्म के एक सीन में इसके पैर कट जाते हैं. फिर कई दिन मस्ती से घर पर पड़े ये अपने पैर फिर से ग्रो करता है. वैसे कॉमिक्स वर्ल्ड से इतर, हकीकत की दुनिया में भी कुछ जानवर हैं, जो इस मामले में डेडपूल के दूर के रिश्तेदार कहे जा सकते हैं.

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Deadpool फिल्म में पांव कटने के बाद फिर से ग्रो कर जाते हैं. 
आग और बिजली का देवता

प्राचीन मैक्सिकन सभ्यता (Aztec) में एक्सलॉट (Axolotl) को आग और बिजली का देवता (God of fire and lightning) माना जाता था. दंतकथाओं के मुताबिक, कुर्बानी से बचने के लिए एक्सलॉट खुद को सैलामैंडर में बदल लेता है. जो छिपकली जैसा दिखने वाला उभयचर जीव होता है. माने ये पानी और जमीन दोनों जगहों के आदी होते हैं.

कथाओं से इतर मैक्सिको के उभयचरों की बात करें, तो एक्सलॉट नाम का ही जीव, किसी देव से कम नहीं. क्योंकि ये अपने हाथ-पांव फिर से ग्रो करके, उम्र भर जवान रह सकते हैं. इतना ही नहीं ये स्पाइनल कॉर्ड और दिल भी फिर से बना सकते हैं. विज्ञान की भाषा में इसे रिजनरेशन (Regeneration) कहा जाता है. माने जैसे बाल काटने पर फिर से उगते हैं वैसे ही हाथ-पैर.

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लेकिन ये इस मामले में अकेले नहीं हैं. फ्लैटवर्म (Flatworm) जो इंसानों समेत कई जानवरों में परजीवी की तरह रहते हैं. इनमें भी कमाल की रिजनरेशन पावर होती है. ये अपने शरीर का कोई भी हिस्सा फिर से उगा सकते हैं.

इस लिस्ट में दूसरा दावेदार है, स्टारफिश (Starfish). ये भी काफी हद तक अपने शरीर के अंगों के रिजनरेट कर सकते हैं. अगर इनका केंद्रीय तंत्रिका तंत्र सलामत रहे, तो पूरी बॉडी ही बना लेते हैं. 

फिर और भी उभयचरों की बात करें, तो मेंढक के बच्चे यानी टैडपोल भी कुछ कम नहीं हैं. हालांकि इनमें रिजनरेशन पावर थोड़ा कम होती है. ये सिर्फ हाथ फिर से ग्रो कर सकते हैं, पर ये शक्ति इनके बड़े होने पर खो जाती है.

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ये जीव इन-इन अंगों को फिर से ग्रो कर सकते हैं. (Credit: sitn.hms.harvard.edu)
अब आते हैं इंसानों पर

हम इंसानों में भी कुछ अंगों को रिजनरेट किया जा सकता है. मसलन हमारी त्वचा को ही ले लीजिए, जो लगातार बनती रहती है. हमारा लिवर भी इस मामले में कम नहीं है. इसमें भी कमाल की रिजनरेटिव पावर होती है. लेकिन हम इंसानों में हाथ फिर से नहीं ग्रो हो सकता. इस मामले को समझने के लिए, पहले समझते हैं कि ये एक्सलॉट ऐसा कैसे कर लेते हैं? 

एक्सलॉट का हाथ जब कट जाता है, तो इंसानों से इतर इसमें अलग खेल होता है.

  • पहले तो जल्दी से खून का थक्का जमता है. ताकि घाव को भर के खून बहने से रोका जा सके. 
  • इसके बाद उस जगह पर कोशिकाओं की एक परत बनती है. जिसे वुंड एपिडर्मिस (Wound epidermis) कहा जाता है. 
  • घाव भरने के कुछ दिनों तक एपिडर्मिस लगातार विभाजित होती हैं. अपनी संख्या बढ़ाती हैं. 
  • जिसके तुरंत बाद ही एपिडर्मिस के नीचे की कोशिकाएं भी बढ़ने लगती हैं. और एक कोन जैसी संरचना बनाती हैं, जिसे ब्लास्टेमा (Blastema) कहा जाता है.
  • ब्लास्टेमा की कोशिकाओं को हड्डी, कार्टिलेज और मसल्स की कोशिकाओं से मिलकर बना माना जाता है. जो अपनी पहचान खोकर रिसेट हो चुकी होती हैं. 
  • ये रिसेट हुई कोशिकाएं फिर से शरीर के अंग को बनाना शुरू करती हैं. धीरे-धीरे ये पूरा हाथ बना लेती हैं. जो तंत्रिकाओं के जरिए बाकी के शरीर के साथ संपर्क में भी रहता है. 
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कई स्टेप में अंग फिर से बनता है
एक्सलॉट ऐसा कैसे करते हैं?

इन जीवों में ऐसा कर पाने की शक्ति को लेकर सालों से रिसर्च चल रही है. ताकि इंसानों में ऐसा करने का कोई तरीका खोजा जा सके. लेकिन इस सब में एक पेंच है. कौन सी कोशिका क्या करेगी, इस सब की जानकारी हमारे DNA वगैरह में स्टोर रहती है. सभी जीवों में कोशिकाओं के गाइड बुक की तरह ये काम करते हैं.

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हो सकता है एक्सलॉट, स्टारफिश वगैरह के जीन्स या DNA में जानकारी रहती हो. जिससे उनकी कोशिकाएं ऐसा करने को तैयार रहती होंगी. 

लाइवसाइंस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के प्रोफेसर डेविड गारडाइनर बताते हैं, 

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गारडाइनर सालों से सैलामैंडर पर रिसर्च कर रहे हैं. और इनकी डेडपूल वाली सुपर पावर के पीछे की असल वजह, पता लगाना चाहते हैं. वो ये भी कहते हैं कि संभावना है भविष्य में इंसान भी ऐसा कर सकें. हो सकता है अंगों का रिजनरेशन मेडिकल टूल किट का हिस्सा ही बन जाए.

पर यह डगर मुश्किल है. क्योंकि ऐसा करने के लिए हड्डी, मांसपेशी, खून की धमनियां और तंत्रिकाएं सब फिर से बनाना होगा. डेविड के मुताबिक, हम कुछ खून की धमनियां, यहां तक तंत्रिकाओं को रिजनरेट कर सकते हैं. कमोवेश सैलामैंडर वगैरह और इंसानों जेनेटिक एक जैसी ही है. यानी बुनियादी काम बताने वाला DNA दोनों में एक सा ही है.

लेकिन कहीं कोई एक-आध स्टेप हो सकता है, जो इंसानों में अलग हो. जिसकी वजह से हम में ये शक्ति नहीं है.

आपको क्या लगता है कि क्या भविष्य में हम अंगों को फिर से ग्रो कर पाने की तकनीक बना पाएंगे? कॉमेंट के ज़रिए बताएं. 

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