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100 करोड़ वैक्सीन लगने पर मोदी सरकार टीकाकरण की पूरी बात नहीं बता रही?

क्या वाकई भारत ने टीकाकरण में दुनिया को पीछे छोड़ दिया?

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कोविड वैक्सीनेशन के मामले भारत ने जादुई आंकड़े को छू लिया है लेकिन अब भी लंबी दूरी तय करनी है. (फोटो-PTI)
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सुरेश
21 अक्तूबर 2021 (अपडेटेड: 21 अक्तूबर 2021, 05:08 PM IST)
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कोरोना संक्रमण से सुरक्षा का एकमात्र उपाय है टीकाकरण. आज, गुरुवार, 21 अक्टूबर को भारत में कोरोना के टीके की 100 करोड़ खुराकें पूरी हो गईं. सरकार इस आंकड़े का उत्सव मना रही है. तो हमने भी सोचा कि इसी बहाने देश में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम की सुध लेंगे. इस 100 करोड़ खुराक के आंकड़े को समझने की कोशिश करेंगे कि ये उपलब्धि कितनी बड़ी है और अभी आगे और कितना काम बाकी है.  सवाल उठे तो बदलनी पड़ी थी टीकाकरण नीति अप्रैल और मई में जब कोरोना की दूसरी लहर आई तो मोदी सरकार की टीकाकरण नीति पर खूब सवाल उठे. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कई बार फटकारा, टीकाकरण की नीति पर हलफनामा मांगा, सख्ती से पूछा गया कि बताइए कब तक कितने टीके लगाएंगे. जब देश में कोरोना से लोग मर रहे थे और सरकार विदेश में वैक्सीन मैत्री के तहत टीके भेज रही थी, तो विपक्ष ने मोदी सरकार को खूब घेरा. ये भी कहा गया कि सरकार अगर टीके लगाने को लेकर गंभीर होती तो शायद दूसरी लहर में इतनी जानें ना जाती. जब अमेरिका, इज़रायल, यूके जैसे देशों ने अपनी बड़ी आबादी का टीकाकरण कर दिया था, तब भारत में नाम मात्र का टीकाकरण हुआ था. जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीका उत्पादक देश है. जब बहुत किरकिरी हुई तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि साल के आखिर तक 216 करोड़ टीके लगा देंगे. इस भरोसे पर हैरानी जताई गई. तो जून में सरकार ने कहा कि 135 करोड़ लोगों को 31 दिसंबर तक टीके लगा देंगे.
100 Crore Covid 19 Vaccination Celebrations
100 करोड़ टीका लगने का जश्न मनाता मेडिकल स्टाफ (फोटो-PTI)

अब अक्टूबर के तीसरे हफ्ते तक देश में 100 करोड़ डोज़ लगा दी गई हैं. सरकार दूसरी लहर का अतीत भूलाकर जश्न के मूड में दिख रही है. आज पीएम मोदी दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में गए और उनके सामने 100 करोड़वीं डोज़ लगाई गई. प्रधानमंत्री ने इस उपलब्धि का श्रेय भारत की साइंस और डॉक्टर्स-स्वास्थ्यकर्मियों को दिया. उनके मंत्रियों ने इस उपलब्धि का श्रेय पीएम मोदी को दिया. पीएम मोदी ने कहा,
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श्रेय की हकदार वैक्सीन बनाने वाली दोनों कंपनियां -सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक भी हैं. वैक्सीन के सरकारी लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनियों ने अपना प्रोडक्शन कई गुना बढ़ाया. 100 करोड़ वैक्सीन में से लगभग 90 करोड़ सीरम इंस्टिट्यूट ने सप्लाई की. सीरम इंस्टिट्यूट ने किस तरह और कितना प्रोडक्शन बढ़ाया, सीईओ अदार पूनावाला ने कहा,
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भारत बायोटेक के चेयरमैन कृष्णा ऐला ने कहा,
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100 करोड़ वैक्सीन लगाने के मायने क्या हैं? अब 100 करोड़ वैक्सीन लगाने के मायने क्या हैं, किस तरह से इस आंकड़े को समझना चाहिए, इस पर आते हैं. 100 करोड़ टीके लगाने का मतलब है कि हमने अमेरिका से दोगुने टीके लगा दिए हैं. जापान से 5 गुना, जर्मनी से 9 गुना और फ्रांस से 10 गुना ज्यादा टीके लगाए हैं. अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में मिलाकर जितने टीके लगाए हैं, भारत में उससे ज्यादा टीके लगे हैं. हालांकि इन देशों से हमारी आबादी भी ज्यादा है, तो जाहिर है टीकों का कुल नंबर ज्यादा ही होगा. अब तक भारत के अलावा 100 करोड़ टीके सिर्फ चीन ने लगाए हैं.
Pm Modi On Covid Vaccination Milestone
100 करोड़ टीके लगने के मौके पर राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचे पीएम मोदी. (फोटो-PTI)

लेकिन कुल टीकाकरण के अलावा, टीकाकरण की रफ्तार भी भारत में बाकी देशों के मुकाबले ज्यादा रही है. देश में 16 जनवरी से टीकाकरण शुरू हुआ था. पहले फेज़ में हेल्थ केयर वर्कर्स का टीकाकरण शुरू हुआ. फरवरी से फ्रंट लाइन वर्कर्स को टीके लगाने शुरू किए. इसमें पुलिस के जवान या डिजास्टर मैनेजमेंट के वॉलटियर्स या म्युनिसिपल वर्कर्स या टीचर्स शामिल थे, जो कोरोना के खिलाफ लड़ाई में शामिल थे. 1 मार्च से 60 साल से ऊपर के लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ. उसके बाद के टीकाकरण को भी हम दो हिस्सों में बांट सकते हैं.
21 जून से पहले और बाद का टीकाकरण. 21 जून से पहले सरकार ने 18-44 आयु वर्ग के लोगों के टीकाकरण की जिम्मेदारी राज्यों को दे दी थी. केंद्र सरकार ने राज्यों से कह दिया था कि आप टीके लगवाए, चाहे तो फ्री में लगवाइए या पैसा लीजिए. हमें नहीं पता. इस नीति पर खूब सवाल उठे. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि आप दोहरी नीति क्यों अपना रहे हैं. इसलिए 21 जून से सरकार ने फिर से टीके सप्लाई करने का जिम्मा अपने पास ले लिया और सबको फ्री टीके लगाए गए. 21 जून से पहले और बाद में टीकाकरण की रफ्तार में भी अंतर दिखता है.
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तमाम रिसर्च यही सलाह दे रही हैं कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी कोविड प्रोटोकॉल्स में बिल्कुल भी ढिलाई बरतना ठीक नहीं है. (फोटो- PTI)

पहले रोज़ाना औसतन 18 लाख टीके लगाए गए, लेकिन 21 जून के बाद टीकाकरण का औसत 60 लाख आता है. कुल मिलाकर 16 जनवरी से 21 अक्टूबर तक 281 दिनों में भारत ने 100 करोड़ टीके लगाए हैं. मतलब भारत ने औसतन हर दिन 35 लाख टीके लगाए हैं. जबकि यूएस में साढ़े चौदह लाख डोज़ रोज़ाना लगी हैं. ब्राज़ील में 11 लाख 30 हजार और इंडोनेशिया में 7 लाख 40 हजार वैक्सीन डोज़ रोजाना लगाए गए. रूस में साढ़े चार लाख और यूके में 3 लाख 40 हजार वैक्सीन डोज़ रोज़ लगाए गए . विपक्ष क्या कह रहा है? तो इन पैमानों पर भारत के आंकड़े सुकून देने वाले हैं. हालांकि एक दिक्कत वाली बात भी है. पूरी तरह से वैक्सीनेटेड, यानी दोनों डोज़ लेने वाली आबादी के मामले में हम दुनिया के कई देशों से पीछे हैं. अभी भारत में करीब 29 करोड़ व्यस्क लोगों को ही वैक्सीन के दोनों डोज़ लगे हैं. यानी व्यस्क आबादी का करीब 30 फीसदी. और कुल आबादी का करीब 21 फीसदी ही पूरी तरह से वैक्सीनेटेड है. जबकि दुनिया के कई देश अपनी ज्यादातर आबादी का टीकाकरण कर चुके हैं. यूके में 67 फीसदी यानी दो तिहाई आबादी को वैक्सीन के दोनों डोज़ लग गए हैं. यूएस में 56 फीसदी, ब्राज़ील में 50 फीसदी लोगों को वैक्सीन के दोनों डोज़ लगाए जा चुके हैं. और इसलिए विपक्षी सरकार की उपलब्धि में सुराख निकाल रहे हैं.
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा,
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दोनों डोज़ वालों के अलावा पूरे भारत में टीकाकरण भी एक ऐसा नहीं है. कई इलाकों में ज्यादातर आबादी को टीके लग चुके हैं, लेकिन कहीं कहीं आधी आबादी का भी अभी टीकाकरण नहीं हुआ.उत्तर प्रदेश की आबादी सबसे ज्यादा है, तो वहां टीकाकरण भी सबसे ज्यादा हुआ है. 21 अक्टूबर तक यूपी में 12 करोड़ 26 लाख टीके लगाए जा चुके हैं. ये देश में सबसे ज्यादा है. उत्तराखंड ने हाल ही में दावा किया है कि उसने अपने 100 फीसदी लोगों को कम से कम एक डोज़ वैक्सीन दे दी है. जम्मू कश्मीर ने भी सभी व्यवस्कों को कम से कम एक टीका लगाने का दावा किया है. इसी तरह का एक बेहतरीन कीर्तिमान हिमाचल प्रदेश ने भी बनाया है. हिमाचल प्रदेश देश का अकेला राज्य है जहां 50 फीसदी लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज़ लग चुकी हैं.
अब टीकाकरण की इस रफ्तार के बीच ये सवाल भी पूछा जा रहा है कि क्या कोरोना चला गया है, क्या तीसरी लहर नहीं आएगी, और मास्क कब तक रखना पड़ेगा. अभी करीब 15 हजार कोरोना के केस रोज़ाना आ रहे हैं. तीसरी लहर के बारे में AIIMS रणदीप गुलेरिया ने क्या कहा, सुनिए
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दो साल के दौराना कोरोना में हमने बहुत कुछ झेला है. कइयों ने अपनों को खोया है. अब कोरोना की रुखसती के संकेत सुकूनदायक हैं.

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