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‘अब लौट आओ’, पुराने कर्मचारियों को दीपिंदर गोयल का न्योता, क्या है बूमरैंग ट्रेंड?

Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने अपने पुराने कर्मचारियों को वापस बुलाकर कॉरपोरेट दुनिया में बढ़ते ‘बूमरैंग एम्प्लॉयी’ ट्रेंड पर ध्यान खींचा है. जानिए क्या होता है बूमरैंग कर्मचारी, क्यों कंपनियां पूर्व स्टाफ को दोबारा हायर कर रही हैं, और भारत समेत दुनिया में यह ट्रेंड तेजी से क्यों बढ़ रहा है.

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पुराने कर्मचारियों को दीपिंदर गोयल का मैसेज, ‘दरवाजा खुला है’, क्यों?
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दिग्विजय सिंह
4 फ़रवरी 2026 (पब्लिश्ड: 09:25 AM IST)
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कॉरपोरेट दुनिया में एक दिलचस्प खबर आई है. Zomato के फाउंडर दीपिंदर गोयल ने अपने पुराने कर्मचारियों को खुला न्योता दिया है. उन्होंने साफ कहा, अगर आपने कंपनी छोड़ी थी, या आपको कभी बाहर जाना पड़ा था, तो दरवाजा बंद नहीं है. वापस आना चाहें तो आइए.

अब सवाल उठता है, कोई कंपनी पुराने कर्मचारियों को खुद क्यों बुलाएगी? और क्या यह सिर्फ एक भावुक संदेश है, या इसके पीछे कोई बड़ा ट्रेंड छिपा है? जवाब है, यह कहानी सीधे जुड़ती है एक नए HR ट्रेंड से, जिसका नाम है, बूमरैंग एम्प्लॉयी.

खबर क्या है?

दीपिंदर गोयल ने अपने मैसेज में माना कि पहले कंपनी का माहौल या लीडरशिप हर किसी के लिए सही नहीं रही होगी. लेकिन अब कंपनी ज्यादा व्यवस्थित हो चुकी है, कम अराजक है, और खुद उन्होंने भी बहुत कुछ सीखा है. 

अपने ‘एक्स’ पोस्ट में उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी Eternal में पहले से ही 400 से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो दूसरी या तीसरी बार लौटकर काम कर रहे हैं. यानी यह कोई प्रयोग नहीं, बल्कि चलन बन चुका है.

गोयल ने यह भी कहा कि जो लोग कंपनी को पहले से जानते हैं, वही भविष्य बनाने में सबसे ज्यादा मदद कर सकते हैं. इसलिए अगर किसी को लगता है कि यहां उनका कोई अधूरा काम रह गया है, तो वापस आने के लिए ज्यादा सोचना नहीं चाहिए.

साधारण भाषा में समझें तो यह एक तरह का कॉरपोरेट रीयूनियन है, फर्क बस इतना कि यहां चाय नहीं, नौकरी मिलती है.

क्या होता है बूमरैंग एम्प्लॉयी?

HR की भाषा में बूमरैंग एम्प्लॉयी वह कर्मचारी होता है जो कंपनी छोड़ देता है और कुछ समय बाद उसी कंपनी में लौट आता है.

नाम क्यों पड़ा? क्योंकि बूमरैंग एक ऐसा हथियार होता है जिसे फेंको तो वह घूमकर वापस आता है. ठीक वैसे ही कर्मचारी जाते हैं, अनुभव लेकर लौटते हैं.

पहले कंपनियां ऐसा कम करती थीं. सोच यही होती थी कि जो चला गया, वह गया. लेकिन अब सोच बदल रही है.

कंपनियों को समझ आ गया है कि पुराने कर्मचारी, 

  • कंपनी की संस्कृति जानते हैं
  • टीम के साथ जल्दी घुलते हैं
  • ट्रेनिंग में कम समय लेते हैं
  • और कई बार बाहर से नई स्किल भी लेकर आते हैं

यानी फायदा ही फायदा.

यह ट्रेंड कब से बढ़ा?

यह आइडिया नया नहीं है, लेकिन पहले बहुत कम लोग वापस लौटते थे. 2010 के आसपास यह संख्या बेहद छोटी थी.

फिर आया कोविड का दौर. लोगों ने नौकरियां छोड़ीं, कंपनियों ने छंटनी की, बाजार अनिश्चित हो गया. कई लोगों को बाहर उतना अच्छा अवसर नहीं मिला जितना सोचा था. और तब वापसी शुरू हुई.

इसके बाद Great Resignation का दौर आया, जब लाखों लोगों ने नौकरी बदली. कुछ समय बाद कंपनियों ने महसूस किया कि नए लोगों को ढूंढने से आसान है, पुराने भरोसेमंद लोगों को वापस बुलाना.

आज हालत यह है कि कई कंपनियों में हर चौथी या तीसरी भर्ती तक बूमरैंग कर्मचारियों की हो रही है. टेक सेक्टर में तो यह और ज्यादा दिखता है.

दुनिया में कहां दिख रहा है यह ट्रेंड?

यह सिर्फ भारत की कहानी नहीं है. Google ने अपनी AI टीम में बड़ी संख्या में पुराने कर्मचारियों को फिर से हायर किया. Microsoft, Deloitte और McKinsey जैसी कंपनियां तो बाकायदा alumni नेटवर्क चलाती हैं, ताकि जो कर्मचारी जाएं, उनसे रिश्ता बना रहे.

Meta का एक उदाहरण भी चर्चा में रहा. एक इंजीनियर को layoffs में जाना पड़ा, लेकिन कुछ साल बाद कंपनी ने बेहतर रोल देकर वापस बुला लिया. मैसेज साफ है, कॉरपोरेट दुनिया अब रिश्ते तोड़ने के बजाय संभालकर रखने लगी है.

भारत में भी बढ़ रहा चलन

India Inc. भी पीछे नहीं है. IBM, Lenovo, Coca Cola Beverages जैसी कंपनियां पूर्व कर्मचारियों को दोबारा मौका दे रही हैं. Compass Group India ने हजारों लोगों को वापस लिया. Paytm, MakeMyTrip, InMobi जैसी कंपनियों में भी यह ट्रेंड दिख रहा है. वजह वही, भरोसेमंद और तैयार कर्मचारी.

दीपिंदर गोयल और उनकी कंपनी का सफर

दीपिंदर गोयल ने 2010 में Zomato की शुरुआत की थी. शुरुआत एक रेस्टोरेंट लिस्टिंग वेबसाइट से हुई, लेकिन धीरे धीरे यह भारत की सबसे बड़ी फूड टेक कंपनियों में शामिल हो गई.

फिर कंपनी ने अपने दायरे को बढ़ाया. Blinkit के जरिए क्विक कॉमर्स, Hyperpure से सप्लाई, Feeding India जैसी सामाजिक पहल, और कई नए प्लेटफॉर्म जोड़े गए.

Zomato का कॉरपोरेट नाम बदलकर Eternal रखा गया, ताकि कंपनी को एक बड़े टेक इकोसिस्टम के रूप में पेश किया जा सके. गोयल अब CEO नहीं हैं, लेकिन कंपनी के विजन में उनकी भूमिका अब भी मजबूत मानी जाती है.

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कंपनियां पुराने लोगों को वापस क्यों चाहती हैं?

सीधी सी बात है, समय और पैसा दोनों बचते हैं. नई भर्ती में रिस्क होता है. पुराना कर्मचारी एक तरह से टेस्टेड होता है. ऊपर से वह बाहर का अनुभव लेकर लौटता है, यानी ज्यादा तैयार.

और एक दिलचस्प बात भी है. कई कर्मचारी बाहर जाकर समझते हैं कि हर जगह घास उतनी हरी नहीं होती. तब पुरानी कंपनी ज्यादा अपनी लगने लगती है.

कहानी का मतलब क्या है?

दीपिंदर गोयल का संदेश सिर्फ नौकरी का ऑफर नहीं है. यह बदलती कॉरपोरेट संस्कृति का संकेत है. आज करियर सीधी लाइन नहीं रहा. लोग जाते हैं, सीखते हैं, लौटते हैं, फिर आगे बढ़ते हैं.

कंपनियां भी अब यह मानने लगी हैं कि रिश्ता खत्म नहीं होता, बस थोड़ा ठहराव आता है. तो अगली बार अगर कोई कहे, मैं अपनी पुरानी कंपनी में वापस जा रहा हूं, तो हैरान मत होइएगा. हो सकता है, वह पीछे नहीं, बल्कि एक बेहतर शुरुआत की तरफ जा रहा हो.
 

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