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पाकिस्तान में आई भयानक बाढ़ के पीछे की असली वजह क्या है?

पाकिस्तान में इस बार सामान्य से बहुत ज्यादा बारिश क्यों हुई? ग्लेशियर तेजी से क्यों पिघले?

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Pakistan Flood
Pakistan Flood. (फोटो: सोशल मीडिया)
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5 सितंबर 2022 (अपडेटेड: 6 सितंबर 2022, 11:57 AM IST)
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पाकिस्तान (Pakistan) सदी की सबसे विनाशकारी बाढ़ का सामना कर रहा है. ये बाढ़ सामान्य से ज़्यादा हुई बारिश और ग्लेशियर के पिघलने की वजह से आई है. इस बाढ़ की वजह से अबतक पाकिस्तान में 1300 से ज्यादा लोगों की जान चुकी है. लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. विशेषज्ञ इस बाढ़ की वजह जलवायु परिवर्तन को बता रहे हैं. 

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फोटो : AP 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंध और बलूचिस्तान में हालात बहुत ज्यादा खराब हैं. अगस्त महीने में सिंध में सामान्य से 784 फीसदी ज़्यादा और बलूचिस्तान में 500 फीसदी ज़्यादा बारिश हुई. वहीं पाकिस्तान के पंजाब और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा में भी जलस्तर बढ़ता जा रहा है. सैटेलाइट तस्वीरों से ये पुष्टि हुई कि एक तिहाई पाकिस्तान पानी में डूब चूका है. हालात देखते हुए 25 अगस्त को पाकिस्तान की सरकार में देश में इमरजेंसी घोषित कर दी.

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पाकिस्तान में बाढ़ प्रभावित इलाके. (फोटो: यूएन)
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सिंध का क़म्बर इलाका फोटोः NOAA -20 , VIIRS 
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सिंध का शिकारपुर इलाका। फोटोः NOAA -20 -VIIRS 

इस बीच सवाल उठ रहे हैं कि पाकिस्तान में अचानक से बाढ़ आ जाने का कारण क्या है? इस बार बारिश हर बार के मुकाबले इतनी ज़्यादा क्यों हो रही है? इतना ज़्यादा पानी आ कहां से रहा है कि पुल तक डूब गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असल में ये बाढ़ अचानक से नहीं आई है और ये चेन रिएक्शन का रिजल्ट है. ये चेन रिएक्शन शुरू होता है जलवायु परिवर्तन यानि क्लाइमेट चेंज से. इस जलवायु परिवर्तन के इतने प्रभाव हैं, जो रुकने का नाम नहीं लेते. 

जलवायु परिवर्तन का असर

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस साल पाकिस्तान में अप्रैल और मई में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया. ये पाकिस्तान के लिए सामान्य से ज़्यादा रहा. मई में एक दिन तो जकोबाबाद शहर में तापमान 51डिग्री सेल्सियल के पार हो गया था. पाकिस्तान में लगातार हीट वेव्स चलीं. दरअसल, गरम हवा नमी ज़्यादा होल्ड कर सकती है और उससे एक मज़बूत थर्मल लो बन जाता है जिससे भारी बारिश के आसार बन जाते हैं. 

नेचर साइंस जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद के ग्लोबल चेंज इम्पैक्ट स्टडीज सेंटर में जल संसाधन इंजीनियर जिया हाशमी ने इन हालात को देखते हुए भारी बारिश की चेतावनी दे दी थी. उन्होंने बताया था कि जुलाई से सितंबर के बीच सामान्य से कहीं ज्यादा बारिश होगी. और फिर ऐसा हुआ भी. पाकिस्तान में औसत वर्षा का स्तर 130 mm था, वो इस साल बढ़कर 385 mm हो गया. बारिश ने देश में पिछले 30 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. 

बलूचिस्तान में 522 प्रतिशत और गिलगित बाल्टिस्तान में 225 फीसदी ज़्यादा बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इसी तरह पंजाब में 62 प्रतिशत और खैबर पख्तूनख्वा में 54 फीसदी ज्यादा बारिश हुई.

वैज्ञानिकों का कहना है कि हिंद महासागर दुनिया में सबसे तेज़ी से गर्म होने वाले महासागरों में से एक है. जो इन हीट वेव्स के कारण अब प्री-इंडस्ट्रियल लेवल से एक डिग्री सेल्सियल ज़्यादा गरम हो चुका है. माना जाता है कि समुद्र की सतह जितनी ज्यादा गरम होगी, मॉनसून में बारिश उतनी ही ज़्यादा होगी. इसी वजह से दक्षिण एशिया में स्थित देशों में सामान्य से 5 फीसदी ज़्यादा बारिश हो रही है. क्लाइमेट चेंज होने के कारण पूरा रेनफॉल पैटर्न ही चेंज हो गया है. 

तेजी से पिघलते ग्लेशियर

क्लाइमेट चेंज का एक और असर पाकिस्तान पर पड़ा है. अब उसकी बात करते हैं. पाकिस्तान के उत्तरी हिस्से में हिमालय, काराकोरम और हिन्दुकुश जैसी पर्वती श्रृंखलाएं हैं. जिनमें 55 हजार से भी ज़्यादा ग्लेशियर हैं और उनमें कई सारी झीले हैं, जिन्हें हम ग्लेशियल लेक्स कहते है. हीट वेव्स की वजह से ये ग्लेशियर तेज़ी से पिघलते हैंऔर जैसे-जैसे ये ग्लेशियर पिघलते है, इन झीलों में पानी बढ़ता है. और एक दिन ज़्यादा पानी होने के कारण ये झीलें टूट जाती हैं. और फिर पूरा पानी पहाड़ो से तेज़ी से नीचे आ जाता है. जिसकी वजह से मैदानी क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बन जाती है. इस प्रक्रिया को “Glacier Lake Outburst Flood” कहते हैं. 

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ग्लैशिअल लेक 

ऐसा ही कुछ पाकिस्तान में भी हुआ. ज़िआ हाशमी ने बताया कि जुलाई में हुन्ज़ा नदी, जो सिंधु नदी की सहायक है, उसमें मटमैला पानी देखा गया. ये पानी पहाड़ों से तेज़ी से नीचे आ रहा था और साथ में खूब सारी मिट्टी, कंकड़ भी ला रहा था. हाशमी ने बताया कि ये तभी होता है, जब कोई ग्लेशियल लेक टूट जाती है. इस वजह से हुन्ज़ा नदी में पानी काफी बढ़ गया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्लेशियर पिघलने से सिंधु नदी की सहायक नदियों में पानी तेजी से बढ़ने लगा. इसकी वजह से सिंधु नदी में भी पानी तेजी से बढ़ा. इतना बढ़ा कि सिंधु नदी ने पाकिस्तान में एक 100 वर्ग किलोमीटर चौड़ी इनलैंड लेक बना दी. सिंधु पाकिस्तान की सबसे बड़ी नदी है और उत्तर से दक्षिण तक पूरे देश को कवर करती है. पानी इतना बढ़ जाने की वजह से बाढ़ की स्थिति, जो बारिश की वजह से पहले ही खराब थी, वो और भी ज़्यादा खराब हो गई.

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फोटोः Getty Images

पाकिस्तान में इस बाढ़ की वजह से ना तो लोगों के पास रहने की जगह बची है और ना ही कुछ खाने पीने के लिए. इसके साथ-साथ पानी की वजह से बीमारियां भी फ़ैल रही हैं. स्वात घाटी की तो हालत कुछ ज़्यादा ही खराब है, और वहां तक राहत कार्य भी नहीं पहुंच पा रहा है. लोगों को कई कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है. जान बचाने के लिए अपना घर छोड़कर जाना पड़ रहा है.

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फोटोः AP 
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इंडस नदी. फोटोः ट्विटर 

 

देश की सेना और NDRF बचाव कार्य में लगे हुए हैं. पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियां और गैर सरकारी संगठन भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मदद पंहुचा रहे हैं. पाकिस्तान सरकार ने दुनिया भर के देशों से मदद की गुहार लगाई है. संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंटोनिओ गुटेरेस आने वाले सप्ताह में पाकिस्तान की यात्रा पर जाएंगे.जियो न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस से सबसे पहले मदद पहुंच गई है. नुकसान का शुरुआती अनुमान 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर लगाया गया है.  

इधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने अपने हालिया ट्वीट में मदद की अपील की है, उन्होंने कहा है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से आई बाढ़ में मरने वालों में एक तिहाई बच्चे शामिल हैं. शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद मांगी है. 

(ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहीं शिवानी ने लिखी है.)

वीडियो- पाकिस्तान में बाढ़ से मची तबाही पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है

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