एक फिल्म ने आग लगा दी है. मैं अंग्रेज़ी ख़बर लिख रहा होता तो इस वाक्य के बाद'Literally' भी लिख देता. हिंदी में यही समझिए कि ये प्रतीक मात्र नहीं है. मामलावाकई आगज़नी तक पहुंच चुका है. एक से ज़्यादा घटनाओं में तोड़फोड़ और आगज़नी हो चुकी है.शनिवार-रविवार तीन ख़बरें आई. 1. फरीदाबाद के सीटीसी मॉल में घुसकर चार-पांच लोगोंने टिकट काउंटर पर आग लगा दी. कोई ज्वलनशील पदार्थ छिड़क कर. फिर भाग गए. भागते हुएकरणी सेना ज़िंदाबाद के नारे लगाए.2. गुजरात के मेहसाणा, गांधीनगर और अहमदाबाद में 'पद्मावत' का विरोध सड़कों तक आपहुंचा. वहां बसों में आग लगा दी गई.3. दिल्ली में डीएनडी फ्लाईवे पर करणी सेना ने बूथ तोड़ डाले. बैरियर उखाड़ फेंके. अबदो और ख़बरें आई हैं. गुंडे अब सिनेमा हॉल तक पहुंच गए हैं.पहली ख़बर में लगभग तीन दर्जन लोग गुडगांव के रहेजा मॉल में घुस गए और तोड़फोड़ की.उनका मेन निशाना सिनेमा का टिकट काउंटर था. उसके बाद उन्होंने वहां के खाने-पीने कीदुकानों में उत्पात मचाया. जो सामने दिखा तोड़ डाला. कुछ देर के लिए सड़क पर काट्रैफिक भी रोक दिया.एक और घटना में उत्तर प्रदेश के हापुड़ का एक सिनेमा हॉल गुंडों की भेंट चढ़ गया.वहां भी वही सब हुआ. टिकट काउंटर पर नंगई का प्रदर्शन. सारे शीशे तोड़ डाले गए.ये सब देखकर वो तमाम आशंकाएं सच होती नज़र आ रही हैं जो इस विवाद के शुरुआत से थीं.बाबा राम रहीम के समर्थकों के उत्पात को जैसे पहले ही भांप लिया गया था, ठीक वैसेही 'पद्मावत' के विरोधियों की गुंडागर्दी भी पहले से ही प्रेडिक्टेबल थी. इस बात काडर बना ही हुआ था कि किसी सख्त कार्रवाई से बेखतर ये लोग देश की प्रॉपर्टी कोनुकसान पहुंचाने पर उतारू हो जाएंगे.देश की प्रॉपर्टी का नुकसान करने से सम्मान बढ़ता है क्या?करणी सेना का कहना था कि अगर फिल्म रिलीज़ हुई तो वो आंदोलन करेंगे. अभी तो वो भीनहीं हुआ है भई! सिर्फ तारीख आई है. हिंसक तत्वों का पहले से ही एक्शन में आना इसबात का सबूत है कि ये लोग विशुद्ध अराजक तत्व हैं. इन्हें बस गुंडागर्दी करने काबहाना चाहिए. डर है कि इनकी इस बढ़ती आक्रामकता पर लगाम न लगाई गई, तो किसी न किसीबेक़सूर की नाहक जान चली जाएगी. ज़रूरी नहीं कि वो जान किसी आम आदमी की ही हो. कोईअति-उत्साही प्रदर्शनकारी भी अपना दुश्मन आप बन सकता है. किसी बवाल में फंसकर जानगंवा सकता है.फिर 'पद्मावत' रिलीज़ हो जाएगी. भंसाली दूसरी फिल्म बनाने में लग जाएंगे. करणी सेनाको कोई और शगल मिल जाएगा. बस मरने वाले का परिवार इस तकलीफ़ के पहाड़ तले उम्र भरघिसटता रहेगा कि उनके घर का चिराग़ किस बेकार की आंधी में बुझ गया!--------------------------------------------------------------------------------पद्मावत मसले पर और भी बहुत कुछ यहां पढ़िए:पद्मावत का विरोध अब उस आदमी ने किया जिसे अपनी जिंदगी का भरोसा नहीं है!पद्मावत को हिट कराने के लिए रणवीर ने आखिरी चाल चल दी हैकरणी सेना को भंसाली नहीं रानी पद्मिनी के तोते के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करना चाहिएरानी पद्मिनी की इज्जत 'बिक' रही थी, कंप्यूटर ने बचा लीवीडियो: कौन है ये लड़की जो कांग्रेस, सलमान और भंसाली तीनों के साथ काम कर चुकीहै?