पता नहीं, ये खबर सच है या नहीं. लेकिन अगर सच है, तो इसके असर के बारे में सोचकरही हाथ-पैर ठंडे हो जाते हैं. कह रहे हैं कि चीन एक सुरंग खोदने की सोच रहा है.1,000 किलोमीटर लंबी सुरंग. उसकी प्लानिंग इसी सुरंग के रास्ते ब्रह्मपुत्र नदी कापानी अपने यहां ले जाने की है. इस सुरंग के रास्ते वो ब्रह्मपुत्र का पानी मोड़करअपने यहां ले जाएगा. अगर ऐसा होता है, तो भारत के करोड़ों लोग तिल-तिल कर मरजाएंगे. न केवल भारत के, बल्कि बांग्लादेश के भी करोड़ों लोग बर्बाद हो जाएंगे. असमतो शायद पूरा खत्म हो जाएगा. हॉन्ग कॉन्ग का एक अखबार है. साउथ चाइना मॉर्निंगपोस्ट. उसी ने ये बताया है. चीन के इंजीनियरों के हवाले से. अखबार का कहना है किसुरंग वाला प्रॉजेक्ट, मय डिजाइन के ऊपर के अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया गया है.बनना है या नहीं, ये फैसला भी जल्दी हो जाएगा. सुरंग बनानी होगी, तो सरकार हरी झंडीदिखाएगी. नहीं बनानी होगी, तो लाल झंडी दिखा देगी.तिब्बत में बहने वाली यार्लूंग सांगपो नदी के रास्ते का हवाई चित्र. तिब्बत मेंब्रह्मपुत्र को इसी नाम से पुकारते हैं (फोटो: अलामी स्टॉक फोटो)तिब्बत से निकलती है ब्रह्मपुत्र, अरुणाचल होते हुए भारत में घुसती है ब्रह्मपुत्रतिब्बत से निकलती है. अंगसी ग्लैशियर से. ये उत्तरी हिमालय में है. तिब्बत का एकप्रांत है. बुरांग. वहीं. तिब्बत में इसका नाम अलग है. यार्लूंग सांगपो. ये है वोनाम. वहां से बहती हुई ये नदी आगे बढ़कर दक्षिणी तिब्बत पहुंचती है. और फिर इसकीएंट्री होती है अरुणाचल प्रदेश में. वहां से बहती हुई ब्रह्मपुत्र पहुंचती है असम.बांग्लादेश में इसका नाम है जमुना. नहीं, हमारी वाली यमुना का अपभ्रंश नहीं. येजमुना अलग है. फिर गंगा के डेल्टा में ये पद्मा से मिल जाती है. पद्मा. इसी नाम सेतो गंगा को जानता है बांग्लादेश. फिर ये नदी मेघना का नाम धरकर बंगाल की खाड़ी मेंमिल जाती है. ब्रह्मपुत्र बस एक नदी का नाम नहीं है. इस पूरे इलाके की खेती, इसकेतीज-त्योहार, सब इस नदी की बदौलत है. इसका धानी रंग, इसकी खुशियां, सब ब्रह्मपुत्रकी देन हैं.ब्रह्मपुत्र पर केवल लोगों की जिंदगी निर्भर नहीं है. इस नदी के साथ लोगों का बहुतभावुक रिश्ता है. गानों में, लोकगीतों में और परंपराओं में है ब्रह्मपुत्र.ब्रह्मपुत्र के पानी में सेंधमारी कर अपने रेगिस्तान को हरा-भरा बनाएगा चीन सुननेमें आ रहा है कि चीन ब्रह्मपुत्र में सेंधमारी करेगा. इसका पानी मोड़कर अपनेशिनजियांग प्रांत ले जाएगा. तिब्बत का पठार भारत में पानी बरसाने वाले मॉनसून कोशिनजियांग नहीं पहुंचने देता. इस शिनजियांग के एक ओर गोबी रेगिस्तान है. दूसरी ओरहै ताकला माकन रेगिस्तान. इसके कारण शिनजियांग का 90 फीसद से ज्यादा हिस्सा इंसानोंके रहने लायक नहीं है. अगर ये सुरंग बन गई, तो शिनजियांग खूब फल-फूल जाएगा. मगरभारत और बांग्लादेश के एक बहुत बड़े इलाके पर शायद चील-कौए उड़ते नजर आएंगे. हर सालजो ब्रह्मपुत्र अपने साथ बाढ़ लाती है, उसकी जगह सूखा पड़ सकता है. इतना ही नहीं.नदी की शुरुआत में इतना सारा पानी रोककर उसे सुरंग के सहारे कहीं और भेजना, इस पूरेइलाके की प्रकृति के साथ खिलवाड़ होगा.तिब्बत को एशिया का वॉटर टावर कहते हैं. तिब्बत हर साल 400 अरब टन से ज्यादा पानीपैदा करता है. इसी तिब्बत से निकलकर आती है ब्रह्मपुत्र.भारत ने भी तो दी थी पाकिस्तान को प्यासा मारने की धमकी हो सकता है कि ये खबर सच्चीहो. वैसे, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में झूठी खबरें और अफवाहें भी फैलाई जाती हैं.दूसरे देश की कमजोर नस पकड़ लेते हैं. फिर उसे दबाने-डराने के लिए मीडिया में फर्जीखबरें प्लांट की जाती हैं. बहुत होता है ये. अगर ये सच में होने वाला है, तब तोविनाश ही समझिए. वैसे, चीन अकेला नहीं जो ऐसा करने की सोच रहा हो. उड़ी हमले के बादभारत की मीडिया भी लगातार पाकिस्तान को ऐसी ही धमकी दे रही थी.तिब्बत में कई नदियां पैदा होती हैं. पानी के लिहाज से तिब्बत की काफी अहमियत है.ये तिब्बत में बहने वाली यार्लूंग सांगपो की एक तस्वीर है (फोटो: अलामी स्टॉक फोटो)आने वाले समय में पानी के सहारे भी फैलाया जाएगा आतंकवाद सिंधु नदी भारत से बहतेहुए पाकिस्तान पहुंचती है. तो भारत में खूब मांग हो रही थी. कि सिंधु का पानी रोकलिया जाए. सिंधु का पानी मोड़ दिया जाए. पाकिस्तान को प्यासा मार देना चाहिए. भारतसिंधु नदी पर कई जगह बांध बनवा रहा है. पाकिस्तान को इस पर ऐतराज है. इसे लेकरदोनों के बीच वर्ल्ड बैंक में कशमकश भी हो रही है. पाकिस्तान इसे भारत का 'वॉटरटेररिजम' कहता है. यानी, पानी का आतंकवाद. ऐसा आतंक, जो पानी के दम पर फैलाया जारहा हो. भारत के नजरिये से कहें, तो चीन भी ऐसा ही 'वॉटर टेररिजम' फैलाने की राह परनजर आ रहा है. वैसे भी, दुनिया जलवायु परिवर्तन के रास्ते पर रिले रेस दौड़ रही है.आने वाले समय में हवा और पानी से ज्यादा कीमती कुछ नहीं होगा. फिर वो जो अनुमान हैन कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा, वो शायद सच साबित हो जाए.ब्रह्मपुत्र के अकूत पानी बिना असम की कल्पना भी कैसे की जा सकती है. मगर इसे भीअनदेखा नहीं किया जा सकता कि पिछले कुछ सालों से चीन लगातार अपने यहां बड़े-बड़ेबांध और सुरंग बनवा रहा है.खैर, साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक इस प्रॉजेक्ट से जुड़ी जो खासजानकारियां हैं, उनको मोटा-मोटी यूं समझ लीजिए: * मार्च 2017 में सरकार को सौंपी गई थी इस प्रॉजेक्ट की प्लानिंग * 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने मिलकर तैयार किया है ये प्लान * चीन में सुरंग बनाने का जो सबसे माहिर इंसान है, वांग मेंगसु, उन्होंने ही इसके पीछे भी दिमाग लगाया है * जमीन के अंदर खोदी जाएगी ये सुरंग. कई अलग-अलग हिस्से होंगे इसके * इस सुरंग की मदद से चीन अपने सूखे और बंजर शिनजियांग प्रांत को 'कैलिफॉर्निया' जैसा बना देगा * 137 किलोमीटर लंबी दुनिया की सबसे बड़ी सुरंग न्यू यॉर्क में है. इससे शहर में पानी की सप्लाई की जाती है * चीन अपने यूनान प्रांत में पहले ही एक 600 किलोमीटर लंबी सुरंग बना रहा है * इससे पहले 19वीं सदी में चिंग साम्राज्य के दौर में ऐसा ही एक प्रस्ताव रखा गया था--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: परमाणु शक्ति से संपन्न भारत और चीन में 'पत्थर वॉर' शुरू हो गया हैभारत ने चीन की कौन सी भैंस खोल ली, जो वो मोदी जी की दोस्ती को घास नहीं डालता?भारत-चीन में लड़ाई शुरू और 158 भारतीय सैनिकों के शहीद होने का सच ये हैझालर बैन से कुछ नहीं होगा, चीन की पुंगी बजानी है तो ये करोहमारे सैनिकों को इस तरह फंसा उनसे इनफॉर्मेशन निकाल रहा है चीनआप सोते रहे और इधर भारत की आबादी चीन से ज़्यादा हो गई!तो ये है चीन के अंडे का बदबूदार सच!घर बैठे अगर इंडिया ये काम कर दे तो पाकिस्तान तिलमिला जायेगा--------------------------------------------------------------------------------हिमाचल चुनाव: WhatsApp के ज़माने में, क्यों यहां अब भी SMS की किताबें बिकती हैं?