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अरुणाचल प्रदेश में चीन की इस ओछी हरकत का भारत ने कैसे दिया जवाब?

चीन की इस हरकत का दलाई लामा से क्या संबंध है?

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भारत की तरफ से अभी इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. (सांकेतिक फोटो- आजतक)
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सोम शेखर
4 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 4 अप्रैल 2023, 12:06 AM IST)
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3 अप्रैल को चीन ने "नए शहरों की स्टैंडर्डाइज़्ड लिस्ट" जारी की. यानी शहरों के नाम बदले. लेकिन ये तो होता रहता है. हमारे देश में भी होता है. ख़बर क्या है? ख़बर है कि चीन ने लिस्ट में अरुणाचल प्रदेश की 11 जगहों का भी नाम जोड़ लिया है. चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी का अख़बार है ग्लोबल टाइम्स. इसकी एक रिपोर्ट के मुताबिक़, ये नाम तिब्बती, चीनी और पिनइन लिपि में रखे गए हैं. जिन जगहों के नाम रखे गए हैं, उनमें दो रिहाइशी इलाक़े, पांच पहाड़ी इलाक़े और दो नदियां हैं. ये चीन की एक पुरानी प्रेशर टेक्टिक है.  

इतना तो आप जानते ही हैं कि चीन ने तिब्बत को कब्ज़ा लिया है. और उसका नाम रख दिया है शिज़ांग. लेकिन शिज़ांग भर से चीन का पेट भरा नहीं है. उसका कहना है कि अरुणाचल प्रदेश का 90 हज़ार वर्ग किलोमीटर तिब्बत का दक्षिणी इलाका 'ज़ंगनान' है. और इसीलिए इस कथित ज़ंगनान पर भी चीन का हक है. यही राग अलापते हुए चीन हर कुछ दिन में अरुणाचल प्रदेश के भीतर पड़ने वाले इलाकों के नाम ''रख'' देता है. ये तीसरा मौका है, जब चीन ने ये किया. 2017 में छह जगहों के नाम ''रखे'' थे और 2021 में 15 जगहों के.

ये सब जितना रैंडम लगता है, उतना है नहीं. 2017 को लीजिए. उस साल दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश गए थे. चीन ने इस दौरे पर कड़ी आपत्ति दर्ज की थी और इसी के बाद ''नए नामों'' की पहली लिस्ट जारी की थी. चीन को दलाई लामा से जितना डर लगता है, शायद ही किसी और से लगता हो. और ये कहने के पर्याप्त आधार हैं. दरअसल तिब्बती समाज में दलाई लामा दोनों तरह से प्रधान हैं - दीनी और दुनियावी. माने धर्म और समाज, दोनों पर उनके मत को बड़ा महत्व मिलता है. 1959 में जब चीन ने तिब्बत पर क़ब्ज़ा किया, दलाई लामा अरुणाचल प्रदेश के रास्ते भारत आ गए. लेकिन चीन को दलाई लामा के प्रभाव का वज़न मालूम था. इसीलिए उसने एक और ओछी हरकत की.

दरअसल तिब्बती बौद्ध समुदाय में दलाई लामा एक व्यक्ति न होकर एक परंपरा है. और इसे दो लोग चलाए रखते हैं. दलाई लामा और पंचेन लामा. मान्यता है कि जब एक दलाई लामा का देहांत होता है, तो वो एक बच्चे के रूप में कहीं दोबारा जन्म लेते हैं. इस बच्चे की पहचान करते हैं पंचेन लामा. इसी तरह जब पंचेन लामा की मृत्यु होती है, तो नए पंचेन लामा की पहचान दलाई लामा करते हैं. और इसी तरह ये सिलसिला चलता रहता है. मौजूदा, माने 14 वें दलाई लामा ने मई 1995 में गेधुन चोएकी न्यीमा की पहचान 11 वें पंचेन लामा के रूप में की. तब न्यीमा की उम्र 6 साल थी. जानते हैं चीन ने क्या किया? चीन ने इस 6 साल के बच्चे को अगवा कर लिया. और तब से आज तक इसका कोई पता नहीं चला है. चीन ने अपनी मर्ज़ी से एक फर्ज़ी पंचेन लामा बनाने की कोशिश की, लेकिन तिब्बतियों ने कभी उसे स्वीकार नहीं किया. इस संदर्भ के साथ आप समझ सकते हैं कि दलाई लामा जब अरुणाचल गए होंगे, तब चीन को कितनी मिर्ची लगी होगी.

अब आइए 2021 पर. तब चीन में एक नए बॉर्डर क़ानून को लाने पर बात हो रही थी. और, इस क़ानून को पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के अतिक्रमण को वैध बनाने के प्रयास के रूप में देखा गया था. किसने देखा? भारत सरकार ने. 2021 के मार्च में क़ानून पेश किया गया. अक्टूबर में भारत के विदेश मंत्रालय ने अपनी आपत्ति ज़ाहिर की थी. कहा था, 

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इसी माहौल में नामों की दूसरी लिस्ट आई थी. इसीलिए हमने इसे शुरुआत में प्रेशर टैक्टिक कहा था. चीन के भीतर और बाहर लोगों को एक संदेश देने की कोशिश है. कि वो जगह हमारी है, हमारी भाषा में उस जगह के लिए नाम है. इस तरह एक फर्ज़ी संस्कार पैदा किया जा रहा है. ताकि आज से 20 साल बाद जब बहस हो, तो चीन के कह पाए, कि इन जगहों को तो दशकों से अमुक नाम से बुलाया जाता है.

चीनी नामों की सूची पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक बयान ट्वीट किया है. जिसमें लिखा है,

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सरकार ने अपना पक्ष रख दिया. लेकिन विपक्ष संतुष्ट नहीं है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का कहना है कि प्रधानमंत्री ने गलवान विवाद के बाद चीन को क्लीन चिट दे दी थी और देश प्रधानमंत्री की चुप्पी का ही ख़ामियाज़ा भुगत रहा है. राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने भी इसी लहजे में मोदी सरकार की आलोचना की है. तो आज के दिन आपने देखा कि भारत के दुश्मन कितने हैं. कौन हैं. और उनका मोडस ओपरंडी क्या है. कोई भीतर आग लगा रहा है, कोई उस आग को बढ़ावा दे रहा है. और कोई बाहर से बैठकर हमारी ज़मीन पर नज़र गड़ाए हैं. 

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: अरुणाचल प्रदेश में चीन की इस ओछी हरकत का भारत ने कैसे दिया जवाब?

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