चार्ली चैपलिन. वो कलाकार जो कहता था कि बिना हंसे गुज़ारा एक दिन बरबाद हुए एक दिनके बराबर है. कॉमेडी के लीजेंड कहलाए इस महान कलाकार के बारे में चंद लफ़्ज़ों मेंकुछ कहना बेहद मुश्किल काम है. चार्ली चैपलिन का हास्य जहां आपके ज़हन को फ्रेश करनेकी कूव्वत रखता है, वहीं आपकी अंतरात्मा को झिंझोड़ने की बेमिसाल ताकत भी है उसमें.उनके द्वारा हंसते-खेलते कही गई ऐसी ढेरों बातें हैं जिनकी प्रासंगिकता आज भी है.चार्ली का जन्म 1889 में आज ही के दिन हुआ था. 'द ग्रेट डिक्टेटर' फिल्म के अंत मेंजो स्पीच है वो कई कारणों से कालजयी है. मशीनी युग की तार्किक आलोचना हो यातानाशाही की मुखर मुखालफत. या फिर मनुष्यता की भावना को सर्वोपरि रखने की सीख. येस्पीच हर लिहाज़ से बार-बार सुनी जाने लायक है. आपके लिए इसका अनुवाद और वीडियोदोनों ले के आए हैं. 1940 में कही गई ये बातें आज भी मौजूं हैं. और ये दुख की बातहै. चार्ली का किरदार इस स्पीच में कहता है, "माफ कीजिए, लेकिन मैं सम्राट बननानहीं चाहता. यह मेरा काम नहीं है. मैं किसी पर हुकूमत नहीं करना चाहता, किसी कोहराना नहीं चाहता. बल्कि मैं हर किसी की मदद करना पसंद करूंगा. युवा, बूढ़े, काले,गोरे सभी की. हम सब एक दूसरे की मदद करना चाहते हैं. इंसान की फितरत ही यही है. हमसब साथ मिल कर खुशी से रहना चाहते हैं, ना कि एक दूसरे की परेशानियां देखकर खुशहोना. हम एक दूसरे से नफरत और घृणा नहीं चाहते. इस दुनिया में हर किसी के लिएगुंजाइश है और धरती इतनी अमीर है कि सभी की जरूरतें पूरी कर सकती है. ज़िंदगी जीनेका तरीका आजाद और खूबसूरत हो सकता है, लेकिन हम रास्ते से भटक गए हैं. लालच नेइंसान के ज़मीर को जहरीला बना दिया है. दुनिया को नफ़रत की दीवारों में जकड़ दियाहै. हमें मुसीबत और खून-खराबे की हालत में धकेल दिया है. हमने रफ़्तार विकसित कीहै, लेकिन खुद को उसमें बंद कर लिया. मशीनें बेशुमार पैदावार करती हैं, लेकिन हमकंगाल हैं. हमारे ज्ञान ने हमें पागल बना दिया है. चालाकी ने कठोर और बेरहम बनादिया है. हम सोचते ज्यादा हैं और महसूस कम करते हैं. मशीनों से ज़्यादा हमेंइंसानियत की जरूरत है. होशियारी कि जगह हमें नेकी और दयालुता की जरूरत है. इनखूबियों के बिना ज़िंदगी हिंसा से भर जाएगी और सब कुछ खत्म हो जाएगा. हवाई जहाज़ औररेडियो जैसे अविष्कारों ने हमें एक दूसरे के करीब ला दिया. इन खोजों की स्वाभाविकप्रवृत्ति इंसानों से ज्यादा शराफत की मांग करती है. दुनिया भर में भाईचारे की मांगकरती है. इस समय भी मेरी आवाज दुनिया भर में लाखों लोगों तक पहुंच रही है, लाखोंनिराश-हताश मर्दों, औरतों और छोटे बच्चों तक, व्यवस्था के शिकार उन मासूम लोगों तक,जिन्हें सताया और कैद किया जाता है. जो मुझे सुन पा रहे हैं, मैं उनसे कहता हूं किनाउम्मीद ना होइए. जो बदहाली आज हमारे ऊपर थोपी गयी है, वो लोभ-लालच का, इंसानों कीनफ़रत का नतीजा है. लेकिन एक न एक दिन लोगों के मन से नफरत खत्म होगी ही. तानाशाहख़त्म होंगे और जो सत्ता उन लोगों ने जनता से छीनी है, उसे वापस जनता को लौटा दियाजाएगा. आज भले ही लोग मारे जा रहे हो, लेकिन उनकी आज़ादी कभी नहीं मरेगी. सिपाहियो!अपने आप को धोखेबाजों के हाथों मत सौंपो. उन लोगों को जो तुमसे नफरत करते हैं,तुम्हें गुलाम बनाकर रखते हैं. जो तुम्हारी ज़िंदगी के फैसले करते हैं. तुम्हेंबताते हैं कि तुम्हें क्या करना है, क्या सोचना है और क्या महसूस करना है. जोतुम्हें खिलाते हैं, तुम्हारे साथ पालतू जानवरों जैसा बर्ताव करते हैं. अपने आप कोइन बनावटी लोगों के हवाले मत करो. मशीनी दिल और मशीनी दिमाग वाले इन मशीनी लोगों केहवाले. तुम मशीन नहीं हो! तुम पालतू जानवर भी नहीं हो! तुम इंसान हो! तुम्हारेदिलों में इंसानियत के लिए प्यार है. तुम नफरत नहीं करते! नफरत सिर्फ वो लोग करतेहैं जिनसे कोई प्यार नहीं करता, सिर्फ अप्रिय और बेकार लोग. सैनिकों, गुलामी के लिएनहीं, आज़ादी के लिए लड़ो. सैंट ल्युक के 17 वे अध्याय में लिखा है , 'भगवान कासाम्राज्य इंसान के भीतर ही है'. यह साम्राज्य किसी एक इंसान या किसी ख़ास समूह केभीतर नही, बल्कि सभी इंसानों के अंदर है. तुम में भी. तुम में ही मशीनों को बनानेकी शक्ति है. खुशियां इजाद करने की शक्ति है. तुम में ही अपनी ज़िंदगी को खूबसूरत औरआज़ाद बनाने की ताकत है. तुम ही इसे रोमांचक यात्रा बना सकते हो. तो लोकतंत्र के नामपर आइए इस ताकत का इस्तेमाल सब को एकजुट करने के लिए करें. एक ऐसी दुनिया के लिएलड़ें, जो सभी इंसानों को काम करने के समान मौके दे. जो देश के युवाओं का भविष्यसुनिश्चित और बूढें लोगों का बुढ़ापा सुरक्षित करे. इन्हीं वादों के साथ क्रूर लोगसत्ता में आये हैं. लेकिन वो झूठ बोलते हैं. उन्होंने अपने वादे पूरे नहीं किए. कभीकरेंगे भी नहीं. तानाशाह खुद तो आज़ाद हैं, लेकिन लोगों को गुलाम बनाते हैं. आइए उनवादों को पूरा करवाने के लिए जंग लड़ें. दुनिया को मुक्त करने के लिए लड़ें.राष्ट्रीय सीमाओं से मुक्त हो जाए. लालच, नफरत और घृणा से मुक्त हो जाएं. एक ऐसीदुनिया के लिए संघर्ष करे, जहां विज्ञान और विकास खुशियों के पथ-प्रदर्शक हो.जवानों! आओ लोकतंत्र के नाम पर हम सब एक हो जाए!" चार्ली चैपलिन को इन शब्दों कोजीते हुए यहां देखिए: https://www.youtube.com/watch?v=J7GY1Xg6X20--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:सफ़दर हाशमी : जिन्हें नाटक करते वक्त मार डाला गयाकपिल देव की वो सेंचुरी जिसके बारे में कोई बात नहीं करताइस शख्स की बात मान लेते तो समाज से जाति-व्यवस्था ही ख़त्म हो जातीपापा के ज़माने की वो हीरोइन, जिसका सबसे बड़ा डर हार्ट अटैक था