क्या है बंगाल में चल रहा गौ-तस्करी का मामला जिसकी CBI कर रही है तफ्तीश
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि गौ-तस्करी में बीएसएफ, पुलिस, कस्टम अधिकारी और नेता मिले हुए हैं
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पिछले तकरीबन 2 सालों में रासुका के ज्यादातर केसेज गोहत्या को लेकर ही आए हैं . प्रतीकात्मक तस्वीर
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पश्चिम बंगाल में गौ-तस्करी (Cow Smuggling) को लेकर सीबीआई की दबिश में बीएसएफ, कस्टम अधिकारी, बंगाल पुलिस, कई स्मगलर और तृणमूल कांग्रेस के एक नेता की सांठ-गांठ से चल रहे गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है. दरअसल बीजेपी कुछ समय से बंगाल में अवैध कोयला खनन और गौ-तस्करी का मुद्दा उठाती रही है. बीजेपी का आरोप है कि ये अवैध गतिविधियां तृणमूल नेताओं की सांठ-गांठ से चल रहीं है. लेकिन विधानसभा चुनावों से ठीक पहले सीबीआई की फुर्ती पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं. आपको बताते हैं आखिर क्या है पूरा मामला.
कब हुई शुरुआत
वरिष्ठ पत्रकार शांतनु गुहा रे बताते हैं कि 1994 में पहली बार एनामुल हक़ नाम के एक व्यक्ति ने एक बछड़े को अपने कंधे पर लादकर भारत-बांग्लादेश का बार्डर पार करा दिया. इसके लिए एनामुल हो 3000 रुपये मिले. लेकिन करीब 24 साल से ज्यादा बीतने के बाद साल 2018 के जनवरी महीने में बीएसएफ के कमांडेंट जिबू टी मैथ्यू को अल्लपुज़हा रेलवे स्टेशन से 47 लाख रुपये के साथ सीबीआई ने गिरफ्तार किया. मैथ्यू ने सीबीआई को बताया की उन्हें गौ-तस्करी के एवज में एनामुल हक़ से ये पैसे घूस में मिले. जिसके बाद सीबीआई ने उनका नाम दर्ज़ करते हुए उन्हें मार्च महीने में गिरफ्तार कर लिया. इसके ठीक चार महीने बाद, पुख्ता सबूत न होने की वजह से उन्हें बेल मिल गई.
नया मामला क्या है
इसके बाद सीबीआई ने सितंबर 2020 में एक और एफ़आईआर दर्ज़ की जिसमे बीएसएफ़ के मालदा में स्थित 36 बटालियन में 19 दिसंबर 2015 से 22 अप्रैल 2017 तक पोस्टेड कमांडेंट सतीश कुमार, स्मगलर एनामुल हक़, अनारुल शेख, घुलाम मुस्तफा के नाम कई धाराएं लगाई. इस एफ़आईआर में सतीश कुमार के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाए गए. सीबीआई ने कहा कि सतीश की पोस्टिंग के दौरान बीएसएफ़ ने 20,000 मवेशियों की अवैध तस्करी को रोका . लेकिन इन तस्करी के मामलों में इस्तेमाल हो रही गाड़ियों को ज़ब्त नहीं किया गया और ना ही किसी व्यक्ति का नाम दर्ज़ किया गया.
मामला दर्ज़ होने के कुछ ही दिनों के बाद यानि नवंबर 2020 में सीबीआई ने सतीश कुमार को छत्तीसगढ़ से और एनामुल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद एनामुल के साथी बाद अनारुल शेख और गुलाम मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया गया.
वरिष्ठ पत्रकार शांतनु गुहा रे बताते हैं कि एनामुल की हजारों करोड़ की संपत्ति है और जब उन्हें दिल्ली में गिरफ्तार किया था तब उन्होंने पाक साफ़ होने का दावा भी किया था. एनामुल ने सीबीआई को कहा था की वो एक ईमानदार टैक्स पेयर हैं और 25 से 30 करोड़ तक का टैक्स सालाना अदा करते हैं.
कैसे होता था घपला
अंग्रेजी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी ये बताती है बीएसएफ़ द्वारा इन मवेशियों को पकड़े जाने के बाद उनकी संख्या को कम करके लिखा जाता था. इसके अलावा जब बीएसएफ़ इनका जब ऑक्शन करती थी तो ये सुनिश्चित किया जाता था की ये मवेशी एनामुल के लोगों को ही मिलें. जिसके लिए एनामुल बीएसएफ़ अधिकारियों को हर एक मवेशी के लिए 2000 रुपये और कस्टम अधिकारियों को हर एक मवेशी के लिए 500 रुपये देता था.
कहां से होती थी तस्करी
भारत बांग्लादेश का बॉर्डर 2,216 किलोमीटर लंबा है. शांतनु रे बताते हैं कि एनामुल तस्करी मालदा-मुर्शीदाबाद के 141 किलोमीटर के इलाके में ही किया करता था. रात के अंधेरे में मवेशियों को बार्डर पार कराया जाता था. इन मवेशियों पर एक विशेष नंबर लिखा जाता था ताकि इनकी पहचान करने में कोई दिक्कत न हो. बारिश के समय में इनके साथ केले ले पेड़ बांध दिए जाते थे और बार्डर पार कराया जाता था. उस पार के तस्कर एनामुल से मिले हुए होते थे और वो हाई स्पीड स्टीमर में आकर इन मवेशियों को ले जाते थे.
गरीबों के मसीहा हैं एनामुल
शांतनु के मुताबिक मालदा-मुर्शीदाबाद के बॉर्डर इलाकों में एनामुल की छवि किसी “रॉबिनहुड” से कम नहीं है. बीएसएफ़ ने उन्हें पकड़ने की कई नाकाम कोशिशें कीं हैं. कई बार गांव की औरतें बर्तनें पीटकर एनामुल और उनके साथियों को आगाह कर देती थीं.
काफी बड़ा है तस्करी का व्यापार
वेबसाइट मनी कण्ट्रोल में छपी एक रिपोर्ट में नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड के भूत पूर्व अधिकारी दीपांजन कहते हैं कि 5000 से भी ज्यादा मवेशी हर रोज़, हफ्ते में पांच दिन भारत से बांग्लादेश भेजे जाते हैं. दीपांजन ये भी कहते हैं की बांग्लादेश में एक बड़े गाय या बैल की कीमत करीब 50-60 हज़ार रुपये तक होती है.
एनामुल के साथी अनारुल शेख और गुलाम मुस्तफा ने भी सीबीआई को बताया है कि औसतन हर रोज़ इनका गिरोह 5000 मवेशियों की तस्करी करता था.
ईद-अल-अज़हा के वक़्त बांग्लादेश में बीफ की डिमांड काफी बढ़ जाती है और आमतौर पर भारत में आवारा मवेशियों का मिलना बांग्लादेश के मुकाबले बहुत आसान है. द वाशिंगटन पोस्ट कि एक रिपोर्ट दावा करती है कि भारत में 50 लाख से भी ज्यादा आवारा मवेशी हैं जो शहरों की सड़कों पर घूमते हैं या फिर ग्रामीण इलाकों में खेती को नुकसान पहुंचाते हैं.
राजनीतिक सांठ-गांठ से चलता था कारोबार
सीबीआई ने अपने चार्जशीट में दावा किया है कि एनामुल को स्थानीय नेताओं का श्रेय मिला हुआ था. सीबीआई ने इस मामले में तृणमूल कांग्रेस यूथ विंग के राज्य महासचिव विनय कुमार मिश्र को समन किया था. जब वो समन पर हाज़िर नहीं हुए तो उनके ठिकानों पर सीबीआई ने रेड किए. लेकिन उनको पकड़ने में सीबीआई को अब तक कामयाबी नहीं मिली है.
कब हुई शुरुआत
वरिष्ठ पत्रकार शांतनु गुहा रे बताते हैं कि 1994 में पहली बार एनामुल हक़ नाम के एक व्यक्ति ने एक बछड़े को अपने कंधे पर लादकर भारत-बांग्लादेश का बार्डर पार करा दिया. इसके लिए एनामुल हो 3000 रुपये मिले. लेकिन करीब 24 साल से ज्यादा बीतने के बाद साल 2018 के जनवरी महीने में बीएसएफ के कमांडेंट जिबू टी मैथ्यू को अल्लपुज़हा रेलवे स्टेशन से 47 लाख रुपये के साथ सीबीआई ने गिरफ्तार किया. मैथ्यू ने सीबीआई को बताया की उन्हें गौ-तस्करी के एवज में एनामुल हक़ से ये पैसे घूस में मिले. जिसके बाद सीबीआई ने उनका नाम दर्ज़ करते हुए उन्हें मार्च महीने में गिरफ्तार कर लिया. इसके ठीक चार महीने बाद, पुख्ता सबूत न होने की वजह से उन्हें बेल मिल गई.
नया मामला क्या है
इसके बाद सीबीआई ने सितंबर 2020 में एक और एफ़आईआर दर्ज़ की जिसमे बीएसएफ़ के मालदा में स्थित 36 बटालियन में 19 दिसंबर 2015 से 22 अप्रैल 2017 तक पोस्टेड कमांडेंट सतीश कुमार, स्मगलर एनामुल हक़, अनारुल शेख, घुलाम मुस्तफा के नाम कई धाराएं लगाई. इस एफ़आईआर में सतीश कुमार के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाए गए. सीबीआई ने कहा कि सतीश की पोस्टिंग के दौरान बीएसएफ़ ने 20,000 मवेशियों की अवैध तस्करी को रोका . लेकिन इन तस्करी के मामलों में इस्तेमाल हो रही गाड़ियों को ज़ब्त नहीं किया गया और ना ही किसी व्यक्ति का नाम दर्ज़ किया गया.
मामला दर्ज़ होने के कुछ ही दिनों के बाद यानि नवंबर 2020 में सीबीआई ने सतीश कुमार को छत्तीसगढ़ से और एनामुल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद एनामुल के साथी बाद अनारुल शेख और गुलाम मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया गया.
वरिष्ठ पत्रकार शांतनु गुहा रे बताते हैं कि एनामुल की हजारों करोड़ की संपत्ति है और जब उन्हें दिल्ली में गिरफ्तार किया था तब उन्होंने पाक साफ़ होने का दावा भी किया था. एनामुल ने सीबीआई को कहा था की वो एक ईमानदार टैक्स पेयर हैं और 25 से 30 करोड़ तक का टैक्स सालाना अदा करते हैं.
कैसे होता था घपला
अंग्रेजी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी ये बताती है बीएसएफ़ द्वारा इन मवेशियों को पकड़े जाने के बाद उनकी संख्या को कम करके लिखा जाता था. इसके अलावा जब बीएसएफ़ इनका जब ऑक्शन करती थी तो ये सुनिश्चित किया जाता था की ये मवेशी एनामुल के लोगों को ही मिलें. जिसके लिए एनामुल बीएसएफ़ अधिकारियों को हर एक मवेशी के लिए 2000 रुपये और कस्टम अधिकारियों को हर एक मवेशी के लिए 500 रुपये देता था.
कहां से होती थी तस्करी
भारत बांग्लादेश का बॉर्डर 2,216 किलोमीटर लंबा है. शांतनु रे बताते हैं कि एनामुल तस्करी मालदा-मुर्शीदाबाद के 141 किलोमीटर के इलाके में ही किया करता था. रात के अंधेरे में मवेशियों को बार्डर पार कराया जाता था. इन मवेशियों पर एक विशेष नंबर लिखा जाता था ताकि इनकी पहचान करने में कोई दिक्कत न हो. बारिश के समय में इनके साथ केले ले पेड़ बांध दिए जाते थे और बार्डर पार कराया जाता था. उस पार के तस्कर एनामुल से मिले हुए होते थे और वो हाई स्पीड स्टीमर में आकर इन मवेशियों को ले जाते थे.
गरीबों के मसीहा हैं एनामुल
शांतनु के मुताबिक मालदा-मुर्शीदाबाद के बॉर्डर इलाकों में एनामुल की छवि किसी “रॉबिनहुड” से कम नहीं है. बीएसएफ़ ने उन्हें पकड़ने की कई नाकाम कोशिशें कीं हैं. कई बार गांव की औरतें बर्तनें पीटकर एनामुल और उनके साथियों को आगाह कर देती थीं.
काफी बड़ा है तस्करी का व्यापार
वेबसाइट मनी कण्ट्रोल में छपी एक रिपोर्ट में नेशनल सिक्यूरिटी गार्ड के भूत पूर्व अधिकारी दीपांजन कहते हैं कि 5000 से भी ज्यादा मवेशी हर रोज़, हफ्ते में पांच दिन भारत से बांग्लादेश भेजे जाते हैं. दीपांजन ये भी कहते हैं की बांग्लादेश में एक बड़े गाय या बैल की कीमत करीब 50-60 हज़ार रुपये तक होती है.
एनामुल के साथी अनारुल शेख और गुलाम मुस्तफा ने भी सीबीआई को बताया है कि औसतन हर रोज़ इनका गिरोह 5000 मवेशियों की तस्करी करता था.
ईद-अल-अज़हा के वक़्त बांग्लादेश में बीफ की डिमांड काफी बढ़ जाती है और आमतौर पर भारत में आवारा मवेशियों का मिलना बांग्लादेश के मुकाबले बहुत आसान है. द वाशिंगटन पोस्ट कि एक रिपोर्ट दावा करती है कि भारत में 50 लाख से भी ज्यादा आवारा मवेशी हैं जो शहरों की सड़कों पर घूमते हैं या फिर ग्रामीण इलाकों में खेती को नुकसान पहुंचाते हैं.
राजनीतिक सांठ-गांठ से चलता था कारोबार
सीबीआई ने अपने चार्जशीट में दावा किया है कि एनामुल को स्थानीय नेताओं का श्रेय मिला हुआ था. सीबीआई ने इस मामले में तृणमूल कांग्रेस यूथ विंग के राज्य महासचिव विनय कुमार मिश्र को समन किया था. जब वो समन पर हाज़िर नहीं हुए तो उनके ठिकानों पर सीबीआई ने रेड किए. लेकिन उनको पकड़ने में सीबीआई को अब तक कामयाबी नहीं मिली है.

