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विधानसभा चुनाव से पहले पटवारी की परीक्षा में जबरदस्त धांधली, क्या एक्शन लेंगे सीएम शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सरकार पर क्या-क्या आरोप लगे हैं? किस आधार पर परिक्षा के नतीजों को घोटाला कहा जा रहा है?

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NRI कॉलेज के चौकीदार का कहना है कि वहां न को छात्र है न टीचर, लेकिन सरकारी एग्ज़ैम की परीक्षाएं होती हैं
12 जुलाई 2023 (Updated: 20 जुलाई 2023, 20:35 IST)
Updated: 20 जुलाई 2023 20:35 IST
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इसी साल की जनवरी में मध्य प्रदेश में भर्ती निकलती है. ग्रुप-2 सब-ग्रुप 4 की भर्ती. इसमें

सहायक समपरीक्षक,
सहायक जनसंपर्क परीक्षक,
सहायक नगर निवेक्षक,
सहायक राजस्व अधिकारी,
सहायक अग्निशमन अधिकारी और भू-अभिलेख,
राजस्व विभाग के अंतर्गत पटवारी की पोस्ट थीं.

यहां से आप एक कीवर्ड पकड़िए: 'पटवारी'. राजस्व विभाग का वो सरकारी कर्मचारी, जो जनता से सीधा मुखातिब होता है. जैसे पुलिस में सिपाही, वैसे ही राजस्व में पटवारी. इनका काम होता है ज़मीन की नाप-जोख़ करना.

मार्च में पेपर हुआ. क़रीब 14 लाख लोगों ने पेपर दिया. इस संख्या पर गौर कीजिए. इस संख्या में देश में व्याप्त बेरोज़गारी की गूंज को सुनने का प्रयास कीजिए. ये 14 लाख युवा पेपर देकर सकते में थे. अभ्यर्थियों का कहना था, कि पेपर टफ़ बनाया गया था. 200 कुल नंबर थे. और 140-150 नंबर से ज़्यादा किसी के आएंगे नहीं.

लेकिन 30 जून को जब रिज़ल्ट आया, तो सबके होश फ़ाख़्ता हो गए. किसी को कुछ समझ नहीं आया. किसी के 177 नंबर आए, किसी के 164. और, इन सब टॉपर्स में एक चीज़ कॉमन थी. इग्ज़ाम सेंटर. आरोप लगे कि एक ही एग्ज़ाम सेंटर पेपर देने वाले टॉप कर रहे हैं. इस सेंटर का कनेक्शन एक भाजपा विधायक से है. तो लोगों ने दो और दो चार कर लिया. सेंटर के अलावा संदेह पैदा करने वाले और तथ्य भी दिए जा रहे हैं. और, इस कथित घोटाले का स्केल 300 करोड़ से भी ज़्यादा बताया जा रहा है. और अभ्यर्थी प्रशासन से सवाल भी कर रहे हैं.

> आरोप क्या-क्या हैं? किस आधार पर परिक्षा के नतीजों को घोटाला कहा जा रहा है?
> कौन-कौन स्टेक-होल्डर्स हैं? क्या कोई जांच शुरू हुई है?
> मध्य प्रदेश सरकार का क्या रुख है?
> और, इस तरह के और घोटालों की क्या कहानी रही है?

ये सब जानने से पहले 30 जून को जारी हुई टॉपर्स की लिस्ट देखिए

1. पूजा शर्मा - 183.36 -  ग्वालियर
2. रिंकू सिंह गुर्जर - 177.75 - भोपाल
3. पूनम रजावत - 177.4 -  ग्वालियर
4. कृष्णा कुशवाहा - 177.06 - ग्वालियर
5. पूजा रावत - 177.0 - ग्वालियर
6. मधुलता गड़वाल - 176.12 - ग्वालियर
7. रामनरेश सिंह गुर्जर - 173.03 - भोपाल
8. आकाश शर्मा - 175.75 - ग्वालियर
9. कृष्ण कुमार पटेल - 175.25 - सागर
10. अंकित मीना - 174.88 - ग्वालियर

अब इसमें से पूजा, पूनम, कृष्णा, पूजा, मधुलता, आकाश और अंकित का नाम पकड़िए. टॉप 10 में से इन सात नामों के साथ एक चीज़ कॉमन है: एग्ज़ाम सेंटर.

ग्वालियर का जो कॉलेज निशाने पर है, उसका नाम है: NRI कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट. अब संयोग तो हो ही सकता है कि एक ही सेंटर से सारे टॉपर्स निकले हों. लेकिन जब संयोग too good to be true हो, तो शक पैदा होता है. परीक्षा में शामिल हुए दूसरे उम्मीदवारों ने भी सवाल उठाए कि टॉप तो कोई भी कर सकता है, लेकिन एक ही एग्ज़ाम सेंटर में परीक्षा देने वालों के ही नंबर ज्यादा क्यों आ रहे हैं? क्या इस एग्जाम सेंटर में पहले से सेटिंग की गई है?

इस सवाल के जवाबदेहों तक चलें, इससे पहले अभ्यार्थियों के कई सवाल हैं. रोल नंबर को लेकर, दस्तख़त को लेकर, आंसर-की को लेकर. पहले एक-एक कर के इन मसलों को समझ लेते हैं.

> पहला मसला है: हिंदी में दस्तख़त

आम तौर पर लोग अपने दस्तख़त को लेकर बहुत स्पेसिफ़िक होते हैं. जानबूझकर तिगड़म करते हैं, कि कोई उनका साइन चेप न पाए. और एक और बात ग़ौरतलब है. चूंकि, हमारी शिक्षा और नौकरी में अंग्रेज़ी को तवज्जो ज़्यादा है, सो ज़्यादातर लोग अंग्रेज़ी में ही दस्तख़त करते हैं. कम ही लोगों का साइन हिंदी में हों. और इनमें से शायद विरले ही होंगे, तो हिंदी में सीधे शब्दों में अपना नाम लिखकर साइन करते हैं. लेकिन इस परीक्षा में टॉप करने वालों ने - सब ने - हिंदी में ही साइन किया है. वो भी सीधे और साफ शब्दों. जैसे पूजा, कृष्णा, रिन्कू.
आरोप हैं कि इन क्या वाक़ई में ये टॉपर ऐसे ही साइन करते हैं या जानबूझकर हिंदी में सीधे शब्दों में दस्तख़त किए गए हैं. ताकि कोई भी ऐसे ही साइन बना सके और परीक्षा में फर्ज़ीवाड़ा कर सके?

> दूसरा मसला: टॉपर लिस्ट जारी नहीं हुई

इन भर्तियां कराने वाली एक ही संस्था है, व्यापमं. मध्यप्रदेश में. व्यापमं कोई भी परीक्षा आयोजित कराता है, तो उसकी टॉपर लिस्ट जारी होती है. लेकिन सिर्फ़ इसी परीक्षा की टॉपर लिस्ट क्यों नहीं जारी की गई? और जब लिस्ट जारी हुई, तो उस पर तारीख़ पड़ी थी 30 जून की. माने लिस्ट 10 दिनों तक पब्लिक डोमेन में नहीं आई.

> तीसरा मसला: सवालों के ग़लत जवाब

हमने जब सोशल मीडिया पर लोगों से पूछा कि परीक्षा को लेकर उनकी क्या शिकायतें हैं, तो बहुतेरे लोगों ने आंसर-की यानी सवालों की कुंजी पर सवाल उठाए. आप जानते ही हैं कि किसी भी एग्ज़ाम के बाद और नतीजों से पहले, 'आंसर की' में प्रश्न पत्र के जवाब बताए जाते हैं. इससे होता ये है कि परीक्षार्थी अपने जवाब मिला कर एक अनुमान लगा लेते हैं कि पास होंगे या फ़ेल? अब अगर आंसर-की में ही किसी सवाल का ग़लत जवाब दिया हो, तो उसके लिए ऑब्जेक्शन डाला जा सकता है. ऑब्जेक्शन में दम हो, तो जवाब को दुरुस्त कर लिया जाता है.

छात्रों का कहना है कि आंसर की में कुछ जवाब ग़लत थे और उनके ऑब्जेक्शन के बावजूद, सवालों को नहीं हटाया गया. बल्कि जो सवाल सही थे, उन्हें हटा दिया गया. इस तरह के इम्तेहान में एकाध सवाल से ही मामला गड़बड़ा जाता है. सही सवाल हटाने से पूरी मेरिट लिस्ट गड़बड़ हो गई.

> चौथा मसला: अनारक्षित और आरक्षित में गड़बड़ी

इसको एक उदाहरण से समझिए. अर्पित पांडे ने परीक्षा दी. उनके नंबर आए 147. EWS माने आर्थिक तौर पर कमज़ोर कैटगरी के कैंडिडेट हैं. उनका कहना है "कई उम्मीदवारों ने फॉर्म भरते वक़्त गलती से संविदाकर्मी के प्रिफ़रेंस पर क्लिक कर दिया. जिसकी वजह से उन्हें संविदा वाली पोस्ट मिली. लेकिन उन्होंने ये ग़लती नहीं की थी. बावजूद इसके, उन्हें संविदाकर्मी का पद दिया गया. उन्हें अन-रिज़र्व्ड कैटेगरी से कई ज़िलों में पटवारी का पद मिल सकता है. लेकिन EWS के चलते उन्हें MP शासन पंचायत एंव ग्रामीण विकास विभाग में संविदाकर्मी का पद मिला है.

सवाल उस कॉलेज पर भी हैं, जहां से 10 में से 7 टॉपर्स ने बैठ कर परीक्षा दी. और, इस कॉलेज का संबंध बीजेपी के विधायक संजीव कुशवाहा का बताया जा रहा है. संजीव MP के भिंड से बीजेपी के विधायक हैं. उनके पिता राम लखन भी बीजेपी से सांसद रह चुके हैं. संजीव कुशवाहा ने मीडिया से कहा,

"परीक्षा करवाने में कॉलेज का कोई रोल नहीं होता. कॉलेज तो सिर्फ अपनी बिल्डिंग और कंप्यूटर उस एजेंसी को ठेके पर देते हैं, जो एजेंसी परीक्षा करवा रही हो. कॉलेज का इसमें कोई रोल नहीं."

माने विधायक जी ने पल्ला झाड़ लिया है. संजीव के साथ इस कॉलेज में केपी सिंह भदौरिया की भी हिस्सेदारी है. भदौरिया भिंड में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं. हमने उनसे फ़ोन पर बात की, तो उन्होंने बस इतना ही कहा -- कॉलेज पिछले कुछ सालों से बंद है. लेकिन हमारे यहां परीक्षाएं आयोजित कराई जाती हैं.

जानकारी को पुख़्ता करने आजतक की एक टीम NRI कॉलेज पहुंची. कॉलेज के बाहर लगे बोर्ड पर दिखा क़रीब-क़रीब धुंधला चुके शब्दों को ध्यान से पढ़ने पर पता लगेगा कि इस पर कॉलेज का नाम ही लिखा है. NRI collage of engineering and managment, college of nursing science and researches. इंजीनियरिंग और नर्सिंग की पढ़ाई कराने का दावा करने वाले कॉलेज के अंदर न तो कोई स्टूडेंट दिखा और न ही टीचर्स-स्टाफ. बस मिले तो ये सिक्योरिटी गार्ड्स. जिसमें से एक ने बताया कि सिवाय उनके यहां न तो कोई स्टाफ है और न ही क्लास होती है.  

अब सवाल उस संस्था पर है, जो ये परीक्षा कराती है. सरकारी भर्तियों को दो मोटे खांको में बांटा जा सकता है: अधिकारी लेवल और कर्मचारी लेवल. अधिकारियों की भर्ती - जैसे SDM, DSP, तहसीलदार - राज्य लोक सेवा आयोग (स्टेट PCS) कराती है.  और कर्मचारी लेवल - माने सिपाही, दरोगा, पटवारी - की परीक्षा व्यापमं करवाती है. व्यापमं मतलब व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड.अंग्रेज़ी में Madhya Pradesh Professional Examination Board. एक self-financed और स्वायत्त संस्था, जो राज्य में कई प्रवेश परीक्षाएं आयोजित कराती है.

व्यापमं का रिकॉर्ड बहुत साफ़ नहीं रहा है. इससे पहले भी दो घोटाले "व्यापमं घोटालों" के नाम से कुख्यात है.

पहला, 2013 का. 90 के दशक से ही ये घोटाला चल रहा था. 2009 में जा कर इसका पर्दाफाश हुआ. साल 2013 में मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े रहे आनंद राय ने इंदौर पुलिस को शिकायत दी थी, कि व्यापम की तरफ से मेडिकल भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है. इस स्कैम में राजनेता, वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारी और व्यवसायी -- सब शामिल थे. किसी और के नाम से पेपर लिखने से लेकर अधिकारियों को रिश्वत देने तक में इनकी संलिप्तता थी. FIR हुई. गिरफ़्तारियां हुईं. मास्टरमाइंड को गिरफ़्तार किया गया. CBI जांच की मांग हुई. जुलाई 2015 में जा कर CBI जांच को मंज़ूरी मिली. अंततः 2019 में जाकर ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि व्यापमं के अंदर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. अगस्त, 2022 में CBI की एक विशेष अदालत ने व्यापम घोटाले में पांच लोगों को सात साल की सज़ा सुनाई.

दूसरा, केस है 2022 का. मार्च 2022 में MP-TET यानी शिक्षक भर्ती के लिए इम्तेहान हुआ. कथित तौर पर परीक्षा से पहले ही इसका पर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. पिछले घोटाले के विसलब्लोअर डॉ आनंद राय ने इस घोटाले के आरोप मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात उपसचिव लक्ष्मण सिंह मरकाम पर लगाया. और CBI जांच की मांग की. छात्र संगठनों और दिग्विजय सिंह समेत विपक्ष ने भी सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला. पलट कर उपसचिव लक्ष्मण सिंह मरकाम ने आनंद राय के खिलाफ़ शिकायत दर्ज करवा दी. लक्ष्मण सिंह की शिकायत के बाद मामला क्राइम ब्रांच में भेज दिया गया. आनंद राय के खिलाफ़ नोटिस जारी किया गया. उन्हें तलब किया और वो आए नहीं, तो उन्हें दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया. इस मामले की सुनवाई अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.

और अब आ गया है 'व्यापम घोटाला - 3.0'. हालिया मामले में हमने मध्य प्रदेश के कर्मचारी चयन मंडल का पक्ष जानने की कोशिश की. लेकिन अब तक उनकी तरफ़ से कोई बात करने को तैयार रही है. हमने मंडल के PRO को फोन किया. उन्होंने कहा कि वो इस मसले पर बोलने के लिए उपयुक्त नहीं हैं. इस पर डायरेक्टर मैडम से ही जवाब लेना चाहिए. वेबसाइट पर दिए गए नंबर पर हमने डायरेक्टर को फोन मिलाया, तो फोन मिला नहीं. वेबसाइट पर दिए इंक्वायरी के नंबर पर फोन मिलाया, तो फोन उठा नहीं. फिर हमने इस एग्जाम की कंट्रोलर हेमलता जी को फोन मिलाया, तो सवाल सुनते ही उन्होंने कहा कि डायरेक्टर मैडम का फोन आ रहा है. आप बाद में बात करिएगा. इसके बाद हमने PRO जेपी गुप्ता और एग्ज़ाम कंट्रोलर हेमलता जी को कई दफे़ फोन मिलाया. लेकिन फोन उठा नहीं. हमने बेवसाइट पर बताई गई ईमेल आइडी पर 8 जुलाई को मेल किया था. लेकिन उसका जवाब भी अब तक नहीं आ पाया है.

जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उस आदिवासी व्यक्ति का पांव धो रहे थे - जिसके मुंह पर प्रवेश शुक्ला ने पेशाब कर दी थी - तब उनके "डैमेज कंट्रोल" की तस्वीरें सबने देखीं. लगभग हर टीवी चैनल और वेबसाइट पर दिखाई ही गई. लेकिन उसी राज्य से ये भी एक ख़बर है, जो जगह बनाने की कोशिश कर रही है. उसकी सुद किसी ने नहीं ली. लल्लनटॉप का कौल है कि युवाओं के मुद्दे लगातार कवर किए जाएं. हमारे साथी सौरभ त्रिवेदी ने 8 जुलाई को ही इस मसले पर विस्तार से स्टोरी की थी और आज तो हमने शो भी किया. इसलिए कि ये सवाल 14 लाख छात्रों का है. वोटबैंक का नहीं. शायद मुख्यमंत्री और लोगों के मुद्दों की पल पल दुहाई देने वाले बाकी पक्ष-विपक्ष के नेताओं की नज़र से भी इसीलिए रह गया होगा. बहरहाल, हमारी कोशिश है कि उन लोगों तक ये बात पहुंचे जहां पहुंचनी चाहिए.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: चुनाव से पहले CM शिवराज सिंह की नाक के नीचे भर्ती घोटाला?

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