हॉस्टल में वो रात जब लाइव चुम्मा देखकर हनुमान जी याद आ गए थे
कैंपस किस्सा: हॉस्टल के फर्स्ट ईयर की कहानी. जब 'पवित्र' प्यार के दिनों में 'गंदी' चीजें दिख गई थीं.
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फोटो - thelallantop
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कॉलेज का पहला साल था. सेमिस्टर शुरू हुए कुछ महीने हो चुके थे. मैं हॉस्टल में पहली बार रह रही थी. इसलिए बहुत एक्साइटेड थी. पहुंचते ही एक लड़की के बारे में पता चला. सबा. उसकी ईयर बैक लगी थी. यानी थी तो वो हमारी सीनियर. लेकिन इस साल भी हमारे साथ ही फर्स्ट इयर में पढ़ने वाली थी. जद्दा से आई थी. उसके बारे में बहुत सारी कहानियां हॉस्टल में फेमस थी. हर रोज़ एक नई बात पता लगती थी.
मैं इलाहाबाद से थी. बहुत ही सीधी. चीज़ों का नॉलेज बहुत सीमित था. ज़्यादातर नॉलेज किताबी ही था. उस वक़्त मेरे लिए ये बहुत बड़ी बात थी. मेरे हॉस्टल की कोई लड़की 'कॉलगर्ल' थी.
सर्दियों का टाइम था. शायद इंटरनल एग्जाम चल रहे थे. करीब 3 बजे का टाइम था. मैं रात में फ़ोन पर बात कर रही थी. हॉस्टल में एक बहुत बड़ा सा कॉमन रूम था. उस रूम में छोटे-छोटे कई केबिन थे. उसकी एक कॉमन बालकनी थी. मैं वहीं बालकनी में टहल रही थी.
उसका वार्डन से अफेयर चल रहा है. उसकी ब्लू फिल्में बहुत सारी वेबसाइट पर हैं. वो कॉलगर्ल है. एक बार वो एक रेड में पकड़ी गई थी. वार्डन ने अपना सोर्स लगवा कर उसको छुड़ा लिया. क्लास के दो लड़कों से उसका एक साथ अफेयर चल रहा है. और दोनों लड़कों को भी ये बात पता है. दोनों इस बारे में एकदम कूल हैं.एक से एक बातें. कितनी सच, कितनी सिर्फ एक गॉसिप चेन का हिस्सा. किसी को नहीं पता था. वो एक मिस्ट्री सा कैरेक्टेर थी सारे फर्स्ट इयर वालों के लिए.
मैं इलाहाबाद से थी. बहुत ही सीधी. चीज़ों का नॉलेज बहुत सीमित था. ज़्यादातर नॉलेज किताबी ही था. उस वक़्त मेरे लिए ये बहुत बड़ी बात थी. मेरे हॉस्टल की कोई लड़की 'कॉलगर्ल' थी.
सर्दियों का टाइम था. शायद इंटरनल एग्जाम चल रहे थे. करीब 3 बजे का टाइम था. मैं रात में फ़ोन पर बात कर रही थी. हॉस्टल में एक बहुत बड़ा सा कॉमन रूम था. उस रूम में छोटे-छोटे कई केबिन थे. उसकी एक कॉमन बालकनी थी. मैं वहीं बालकनी में टहल रही थी.
अचानक मुझको खुसुर-फुसुर की आवाज़ें आईं. लगा कोई पढ़ाई कर रहा होगा. मैंने सारे छोटे रूम्स में झांक कर देखा. एक रूम की लाइट जल रही थी. दरवाज़ा अन्दर से लॉक्ड था. शीशे की खिड़कियां थीं. धुंध जमी थी. कोहनी से खिड़की का कांच थोड़ा सा साफ़ किया. देखा तो कमरे में सबा थी. उसके साथ एक और लड़की थी. दोनों चुम्मी कर रहे थे. दोनों के हाथ एक दूसरे की बॉडी पर थे.उस दिन से पहले मैंने कभी पॉर्न तक नहीं देखा था. मैं बहुत ज्यादा डर गई. और हनुमान चालीसा पढ़ते हुए भागी. लगा कि कोई गुनाह कर दिया है. जल्दी से अपने रूम में पहुंची. मैं कांप रही थी. दिमाग एकदम ब्लैंक था. अपनी खुद की हार्टबीट सुनाई पड़ रही थी. पीछे से सबा आ गई. उसने शायद मुझे देख लिया था. बहुत रिलैक्स थी वो. आराम से मेरे बेड पर आकर बैठ गई. बोली, 'यार हैंडवॉश दे दो. मेरा हाथ गंदा हो गया है. हाथ धोना है.' पता नहीं क्यों मेरे मुंह से आवाज़ नहीं निकली. सबा ने मुझसे कहा, 'जो तुमने देखा, अगर किसी से कहा. तो तुमको पता नहीं है मैं क्या कर सकती हूं. मेरे कॉन्टेक्ट्स बहुत दूर-दूर तक हैं.' मैंने घबरा कर हां में सिर हिला दिया. तुरंत मुस्कुरा कर वो बोली. 'चलो ठीक है. मुझे एक एक्स्ट्रा बेडशीट दे दो. हम दोनों को सोना है. हमारी रूममेट्स ने रूम बंद कर लिए है. हम लोग कॉमन रूम में ही सो जाएंगे'. मैंने बेडशीट्स दे दीं. भाईसाब. उस रात मुझको नींद नहीं आई. भयानक एंग्जायटी हो रही थी. उस दिन के बाद सबा जब भी मुझे देखती, घूरने लगती. मुझे सच में बहुत अपराधी वाली फीलिंग आती थी. कई सालों तक मैंने ये बात किसी को नहीं बताई. जब बताई, लोग बहुत हंसे मुझ पर. लेकिन वो रात और सबा की मुझको दी हुई धमकी. वो सब काफी वक़्त तक मेरे दिमाग में चलता रहा.

