'बंटी कहती थी, पैसों के लिए जहन्नुम में भी जा सकती है'
कैंपस किस्सा: 4 रातों बाद जब वो पीजी लौटी, शरीर पर 'लव बाइट्स' थीं. मैंने सोचा, कितनी भद्दी लड़की है ये.
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फोटो - thelallantop
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जब घरवाले आंचल पीजी का थ्री-सीटर रूम दिला गए, तो नई लड़कियों से मिली मैं. एक अरुणाचल से थी, दूसरी हरियाणा से. मैंने अंग्रेजी ले रखी थी और हरियाणा वाली लड़की ने बीकॉम. जिसका नाम था बंटी. नाम से ही खुराफाती लगती थी.
बंटी को देखते ही लग गया था कि इससे तो बेटा पटने वाली नहीं है. पर हरियाणा से थी तो अपनापन जाग गया मेरा. और मैंने उसे टेम्पररी बेस्ट फ्रेंड मान लिया. बंटी को छोड़ने उसकी मम्मी आई थीं. दो-चार चीजों की जानकारी देने के बाद आंटी ने बंटी की तारीफें फेंकनी शुरू कर दीं. न ये आईब्रो बनवाती है, न बालों का फैशन मारती है. 94 पर्सेंट आए हैं इसके. वगैरह, वगैरह.
फिर उसको कुछ हिदायतें देकर आंटी दो-तीन घंटे में चली गयीं. जाते ही बंटी ने किसी को फ़ोन मिलाया. आधे घंटे तक मीठा-मीठा बतियाई. फ़ोन रखते ही एक्सप्लेनेशन दी- "भाई था मेरा. मामा का लड़का. थोड़े क्लोज हैं हम."
पर मुझे मन ही मन समझ में आ गया था, कौन सा भाई था उसका. मेरी गांव वाली 'शरीफ' लड़की की मॉरेलिटी हर्ट हो गयी इस बात से. छी, मम्मी-पापा ने क्या कुछ सोचकर भेजा है और ये? मैं दो-चार दिन बाद घर गई, तो सारी बात मम्मी को भी बताई. मम्मी ने वही टिपिकल सा ज्ञान दिया. उससे दूर रहने का.
बंटी थोड़ी डॉमिनेटिंग सी थी. लाइट जलाना और बंद करना उसी के हिसाब से होता था. रात को फिर फ़ोन पर बातें करती. बिना बुरा फील किए. कई बार नींद डिस्टर्ब होती. उसके जितनी हिम्मत मुझमें नहीं थी. एक लड़के से बात करना तो दूर, स्कूल में तो मैं देखती भी नहीं थी लड़कों की ओर.
ये किस्सा 'दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही ज्योति ने लिखा है.
बंटी को देखते ही लग गया था कि इससे तो बेटा पटने वाली नहीं है. पर हरियाणा से थी तो अपनापन जाग गया मेरा. और मैंने उसे टेम्पररी बेस्ट फ्रेंड मान लिया. बंटी को छोड़ने उसकी मम्मी आई थीं. दो-चार चीजों की जानकारी देने के बाद आंटी ने बंटी की तारीफें फेंकनी शुरू कर दीं. न ये आईब्रो बनवाती है, न बालों का फैशन मारती है. 94 पर्सेंट आए हैं इसके. वगैरह, वगैरह.
फिर उसको कुछ हिदायतें देकर आंटी दो-तीन घंटे में चली गयीं. जाते ही बंटी ने किसी को फ़ोन मिलाया. आधे घंटे तक मीठा-मीठा बतियाई. फ़ोन रखते ही एक्सप्लेनेशन दी- "भाई था मेरा. मामा का लड़का. थोड़े क्लोज हैं हम."
पर मुझे मन ही मन समझ में आ गया था, कौन सा भाई था उसका. मेरी गांव वाली 'शरीफ' लड़की की मॉरेलिटी हर्ट हो गयी इस बात से. छी, मम्मी-पापा ने क्या कुछ सोचकर भेजा है और ये? मैं दो-चार दिन बाद घर गई, तो सारी बात मम्मी को भी बताई. मम्मी ने वही टिपिकल सा ज्ञान दिया. उससे दूर रहने का.
बंटी थोड़ी डॉमिनेटिंग सी थी. लाइट जलाना और बंद करना उसी के हिसाब से होता था. रात को फिर फ़ोन पर बातें करती. बिना बुरा फील किए. कई बार नींद डिस्टर्ब होती. उसके जितनी हिम्मत मुझमें नहीं थी. एक लड़के से बात करना तो दूर, स्कूल में तो मैं देखती भी नहीं थी लड़कों की ओर.
धीरे-धीरे बंटी के किस्से पीजी में फैलने लगे. एक दिन कुलविंदर दी ने बताया कि बंटी 'बीएफ़' देखती है. मने के बेरा था इस 'बीएफ' का. दीदी ने थोड़ा ज्ञान दिया मुझे. 'बीएफ' का फुल फॉर्म समझाया. उसके बाद तो मैंने बंटी से जो दूरी बनाई, क्या कहना. आज जब सोचती हूं, वो बचकानी सी हरकत लगती है. मैं तो दिन भर प्लान बनाती रहती थी कि इस बार बंटी की मम्मी आएं तो चुपके से सब बता देंगे. या STD से जाकर फ़ोन करके सब बता देते हैं.थोड़े दिन ऐसे ही निकले फिर आ गई गूगा जांटी. हरियाणा में गूगा जांटी बोलते हैं, यहाँ जन्माष्टमी. तो जन्माष्टमी की दो-तीन दिन की छुट्टियों में बंटी पीजी से गायब रही. कुछ अता-पता नहीं मिला. पीजी वाले सोच रहे थे कि बिना बताये घर चली गयी होगी. चार दिन बाद वो पीजी लौटी. साथ बहुत कुछ लेकर. थका हुआ शरीर. और शरीर पर काले-काले निशान. आंखें सूजी हुईं. ऐसा लग रहा था मानो किसी ने बुरे तरीके से पीटा हो. बस बात पीजी में आग की तरह फ़ैल गयी. बड़ी दीदियां बात कर रही थीं कि ये 'लव बाइट्स' हैं. बंटी नहाने चली गयी आते ही. कुलविंदर दी तो इतनी क्यूरियस थी कि बाथरूम के बाहर सुनने तक गईं. फिर नेक्स्ट डे पता चला कि बंटी के पास टच वाला फ़ोन भी है. पता नहीं कहां से लायी होगी? जब गयी थी तब तो नहीं था. एक बार सब बैठे थे तो बंटी ने यू ही बातों-बातों में कह दिया था कि वो जहन्नुम में भी जा सकती है पैसों के लिए. अब उसकी इस बात के सबने मिलकर हज़ार मतलब निकाले.
क्या बंटी सेक्स करके आई है इस फ़ोन की खातिर? च-च! डीयू आकर ये लड़कियां कैसी चीज़ों की तरफ आकर्षित हो जाती हैं. और कैसे-कैसे काम करती हैं. फिर मिरांडा हाउस के चिट्ठे खोले पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही लड़कियों ने. कैसे खुलेआम सिगरेट पीती हैं, शॉर्ट्स में घूमती हैं. कतई बिगड़ी हुई लड़कियां.बंटी को मिरांडा वाली लड़कियों से कंपेयर करा जा रहा था. कैसे एक फ़ोन के लिए चार रातें बाहर बिता आई है वो. पर किसी को नहीं पता था कि बंटी असल में कहां थी इन चार दिनों. क्या कर रही थी. कौन है वो फेक मामा का लड़का. इस इंसिडेंट के बाद पता नहीं क्यों बंटी फ्रस्ट्रेट सी रहने लगी. फ़ोन पर चिल्लाने लगी थी. "तेरा मतलब निकल गया ना, अब ये फ़ोन वापस चाहिए तुझे. जा मैं नहीं दे रही. यार प्लीज़! तूने ही बोला था कि अब ये फ़ोन मेरा हो गया है." एक दिन मैंने आराम से पूछा तो इमोशनल होकर सब बता दिया उसने. वो लड़का पड़ोसी था उसका. दोनों प्यार करते थे. चार दिन उसी लड़के के साथ थी वो. कहीं फार्म हाउस ले गया था. पर अगर घर पर पता चला तो मार देंगे उसको. इसलिए उसने तय किया था कि पढ़ाई ख़त्म कर फटाफट नौकरी करेगी. और तब तक उस लड़के का भी बिजनेस सेट हो जायेगा. हमारी इस बातचीत के बाद वो घर चली गयी. आई तो मम्मी के साथ. सुबह-सुबह आए और सामान पैक करके ले गये. शायद फ़ोन पकड़ा गया होगा घर पर. या फोटोज देख ली होंगी. पता नहीं क्या हुआ होगा. ना मैं पूछ पाई, ना बंटी ने जाते हुए बताया. और वो चली गयी. मैंने कई बार जानने की कोशिश की उसके बारे में. पर न वो कभी SRCC में दिखी, न विजयनगर में. ना आर्ट्स फैकल्टी में. कई बार पूछा भी बीकॉम वालों से, पर किसी को पता नहीं था कौन थी ये बंटी. जब भी कभी SRCC के सामने से निकलना होता है, मुझे बंटी याद आ जाती है. 94 पर्सेंट वाली लड़की आज पता नहीं कहां होगी. शादी करके किसी के घर में घुट रही होगी. या भाग गयी होगी. या जिंदा भी होगी कि नहीं.
ये किस्सा 'दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही ज्योति ने लिखा है.

