स्कूल खत्म हुआ. एडमिशन चाहिए था को-एड कॉलेज में. इसकी खास वजह ये थी कि मैंलड़कियों के साथ रह-रहकर पक गई थी. पहली से लेकर बारहवीं तक लड़कियों को ही दाएं-बाएंपाया. लड़कियों से दोस्ती करना मेरे लिए हमेशा से कठिन काम रहा. एक तरह से मेरीदोस्ती लड़कियों से कभी हो ही नहीं पाई. इसलिए सोचा ये था कि कॉलेज में इस चक्कर सेछुटकारा मिलेगा. स्कूल खत्म होने पर मेरी दो ख्वाहिशें थीं कॉलेज को लेकर. पहली,कॉलेज में सिर्फ लड़कियां नहीं होनी चाहिए और दूसरा कॉलेज घर से दूर होना चाहिए. परकिस्मत में लड़कियों का साथ एकदम चिप्पक के लिखा था. डीयू की पहली कट-ऑफ लिस्ट आई औरमेरा नंबर 16 कॉलेजों में आ गया. पर उन 16 में से सबसे अच्छा कॉलेज जो था, वो निकलागर्ल्स कॉलेज. पापा के जानकार एक मास्टरजी थे. उनसे सलाह करके पापा ने निर्णयसुनाया कि एडमिशन इसी गर्ल्स कॉलेज में होगा. लड़कियों के 'अच्छे' कॉलेज में मेराएडमिशन हो गया. डीयू का कॉलेज. पहले दिन कॉलेज के बाहर लड़कियों को बियर पीते देखा.कॉलेज को लेकर सबकी फैंटेसी होती है. मेरी भी बन रही थी. उन्हें देखते-देखते मैंआगे बढ़ गई. पर मेरा मन वहीं अटक गया था. मैंने भी सोच लिया कि मैं भी अपनी कॉलेजलाइफ को ऐसे ही हैपेनिंग बनाऊंगी. अब क्लासेज शुरू हुईं तो जैसे-तैसे सहेलियां भीमिल गईं. अब हममें इतनी हिम्मत तो नहीं थी कि कॉलेज के सामने बैठ कर बियर पिएं. तोसोच-विचार कर एक योजना बनाई गई. जिसमें क्लब जाना तय हुआ. कॉलेज घर से 2 घंटे दूरथा. देर होने पर जवाबी बहाने सोचे जा चुके थे. 6 लड़कियां जुटीं, जिन्होंने मेरी हीतरह अपनी कॉलेज लाइफ के सपने देखे थे. क्लब जाना तो तय हो गया था, पर इसके बारे मेंजानकारी किसी के पास नहीं थी.कोई ठोस रिसर्च नहीं की और ना ही किसी सीनियर से बातकी. सबने अपने-अपने लेवल पर खोजकर जो कच्ची-पक्की खबर निकाली, उसको लेकर निकल लिए.और हम पहुंच गए राजौरी गार्डन. ये हमारी आज़ादी का पहला स्वाद होने वाला था. अब जोथा न, मज़ा था. क्लब के अंदर लाल, नीली, पीली, रंग-बिरंगी लाइट्स. लड़कियों की एंट्रीका कोई पैसा तो लगता नहीं था तो एंट्री में कोई दिक्कत नहीं हुई. पर हमको हमारेअलावा लड़कियां वहां दिखीं नहीं. बस 6 लड़कियां थीं. बाकी कूदते-चिल्लाते लड़के. डरलग रहा था. इसलिए सबने जल्दी-जल्दी बियर की चार बोतलें मंगाईं. मैं इधर बियर लेनेगई, वहां वो नाच रहे लड़के आ गए लड़कियों के साथ गुटरगूं करने. लड़कों की बदतमीजीबराबर चल रही थी. माहौल किसी बॉलीवुड पिक्चर में विलन के घर हो रही पार्टी जैसा था.अब बात हेलो-हाय से बढ़कर जबरन हाथ पकड़ने पर आ गई थी. मैं बराबर दूर रहने की हिदायतदे रही थी. पर मेरी बात से किसी के कान पर जूं नहीं रेंग रही थी. बढ़ते-बढ़तेज़बरदस्ती दारू पिलाने पर आ गए थे वो लोग. अब बेट्टा! अब समय वो था जब दिल मैराथनकरने लगा था. 6 लड़कियों में से 2 लड़कियां उन लड़कों के साथ हो गईं. और बुलाने पेवो आएं न! मैं उधर जाती तो वो लड़के मुझको को भी पकड़ लेते. वहां गार्ड जैसा कोईदिखा नहीं. हम चारों लड़कियां डरी हुई थीं. मैं ज्यादा, क्योंकि प्लान मैंने बनायाथा. ज़िम्मेदारी भी मेरी थी. बड़ी हिम्मत करके दोनों लड़कियों को पकड़कर लाई. सबको बाहरले आया गया. हम लोग गए थे एक नया एक्सपीरियंस लेने. होना ये चाहिए था कि हम लोगवहां जाते, बियर पीते और अपनी यादों के बक्से में एक शानदार शाम को बंद कर लाते,ये एक आदर्श स्थिति होती. ऐसा नहीं हुआ. हुआ ये था कि: इस सबके बाद हम वहां से ऐसाभागे कि बस मेट्रो स्टेशन जाकर रुके थे. वहां से बाहर निकलकर सिर्फ नशा नहीं, बल्किहमारा वहम भी उतरा. ऐसा नहीं है कि हमें अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ और हमने बहुतबड़ी गलती कर दी थी. हां, हमारी रिसर्च और दुरुस्त होती तो हमारा ये वाकया किसीदूसरे रूप में लिखा गया होता. वो हमारी आजादी का पहला स्वाद था. जो उतना बेहतर नहींहुआ, जितना होना चाहिए था. इस घटना से बहुत कुछ सीखा था. कुछ समय बाद समझ आया किकॉलेज जाना इन सबसे बहुत बड़ा था. जो परिभाषा 4% लड़कियों को देखकर बनी थी, वो टूटी.किसी जगह जाने से पहले अब उसके बारे में जानना सबसे पहला काम होता है. उस दिन अगरहम अपने साथ किसी अनुभवी सीनियर को ले जाते या सलाह कर लेते तो शायद बात दूसरीहोती. हम दिन में क्लब गए थे क्योंकि रात में नहीं जा सकते थे. कॉलेज तो अब खत्म होजाएगा, पर इस घटना से मिली सीख हमेशा साथ रहेगी. किस्से और भी बहुत से हैं कॉलेजलाइफ के, पर जो सबसे पहले दिमाग में आता है वो यही है. इसने हमारी सांसें रोक दीथीं.--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी हमारे लिए नूतन ने की है, नूतन हमारे साथ इंटर्नशिप कर रही हैं.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेें: शुभ मुहूर्त के चक्कर में करवाया पत्नी का ऑपरेशन, पर बच्चा होनेके बाद कांड हो गया किस्सा उस IPS ऑफिसर का, जिसने 'तानाशाह' इंदिरा को आईना दिखादिया था एक ट्रांसजेंडर का प्राइवेट पार्ट कैसा होता है, इस उत्सुकता में खराबीक्या है? नेतन्याहू की भारत यात्रा से सबसे ज्यादा फायदा इजराइल को होगा!--------------------------------------------------------------------------------वीडियो देखें: