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स्वास्थ्य मंत्रालय से लेकर ग्रामीण विकास मंत्रालय तक CAG की रिपोर्ट में हुए बड़े खुलासे

CAG के मुताबिक अयोध्या डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में 8 करोड़ रुपए एक्स्ट्रा खर्च हुए हैं.

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11 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 11 अगस्त 2023, 11:06 PM IST)
CAG report
CAG की रिपोर्ट में कई मंत्रालयों को लेकर चौकाने वाले खुलासे हुए
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मोबाइल फोन का दौर जब शुरु हुआ था. तो एक होड़ रहती थी. मन पसंद नंबर लेने की. ऐसा नंबर जो तुरंत याद हो जाए. इसके लिए तो कुछ लोग अच्छा-खासा पैसा भी दे देते थे. तब भी, किसी को वो नंबर नहीं मिला होगा, जो हम आपको बताने जा रहे हैं - 99-99-99-99-99 जी हां. 10 बार 9. अगर आपको भी लगता है कि ये नंबर किसी को नहीं मिला होगा, तो आप गलत सोच रहे हैं. क्योंकि देशभर में साढ़ 7 लाख लोगों को तो यही नंबर मिला है. एक और नंबर है. 88-88-88-88-88. ये नंबर 1 लाख 93 हजार लोगों के पास है.

पर ऐसा न हम कह रहे हैं. और न ही कोई टेलिकॉम कंपनी ये नंबर दे रही है. ऐसा कहना है स्वास्थ्य मंत्रालय का. आयुषमान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का. क्योंकि लोकसभा के पटल पर रखी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक CAG की ऑडिट रिपोर्ट में तो यही लिखा है. और ये सिर्फ एक गड़बड़ी है. जिसे हमने आपको ट्रेलर में बता दिया. फिल्म अभी बाकी है.

बीते सोमवार यानी 7 अगस्त को सरकार ने आयुषमान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की ऑडिट रिपोर्ट लोकसभा में टेबल की. सीधे रिपोर्ट पर आते हैं. बात फोन नंबर से शुरू हुई थी. पहले उसी की कहानी समझते हैं. आगे से जब भी भी हम जन-आरोग्य योजना कहेंगे आप समझ जाइएगा. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की बात हो रही है.

इस योजना के तहत सरकार ने कहा कि 10 करोड़ गरीब परिवारों को स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा. यानी करीब 50 करोड़ भारतीय. इसके तहत हर परिवार को 5 लाख का बीमा कवर मिलेगा. किसी भी सरकारी या सरकार से जुड़े प्राइवेट अस्पताल में इलाज की सुविधा. बीमा कवर पाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराना होगा. किसी भी सरकारी रजिस्ट्रेशन में आमतौर पर नाम, पता, जेंडर, मोबाइल नंबर और आधार नंबर मांगा जाता है. और यहीं से शुरू होता है खेल.

सरकार ने  कैग की जो रिपोर्ट लोकसभा में टेबल की है उसमें बताया गया है कि आयुष्मान भारत योजना में-
7 लाख 49 हजार 820 लोगों का रजिस्टर्ड फोन है- 99-99-99-99-99. सबका एक ही नंबर है.
1 लाख 39 हजार 300 लोगों का रजिस्टर्ड फोन नंबर है- 88-88-88-88-88.
96 हजार 046 लोगों का रजिस्टर्ड नंबर है- 90-00-00-00-00. ऊपर के दो तो चलो एक बार सोचा भी जा सकता है. 00-00 वाला नंबर कौन टेलिकॉम कंपनी देती है भइया.

आपके लिए थोड़ा सरल कर देते हैं. 9 लाख 85 हजार 166 लोग हैं. लेकिन कॉन्टैक्ट नंबर सिर्फ तीन. इतना ही नहीं. 20 ऐसे फोन नंबर हैं. जिनमें किसी एक नंबर पर 10 हजार लोगों के नाम रजिस्टर्ड हैं तो किसी पर तो 50 हजार. मोबाइल नंबरों के खेल का मजमून आप समझ ही गए होंगे. अब थोड़ा आगे बढ़ते हैं. अब बात जन आरोग्य योजना में आधार नंबर की.

रिपोर्ट के मुताबिक योजना के तहत 12 सौ 85 स्कीम कार्ड ऐसे हैं जिन पर आधार नंबर लिखा है- 00-00-00-00-00-00.
12 सौ 45 कार्ड ऐसे हैं जिनमें आधार नंबर लिखा है- 784-545-XXX-XXX
975 कार्ड पर आधार नंबर लिखा है- 215-47-XXX-XXX

अब आइए इस सवाल पर कि जिन लोगों ने इस स्कीम में खुद को रजिस्टर कराया है उनके परिवार में सदस्य कितने हैं. स्क्रीन में दाहिनी तरफ आपको एक टेबल दिख रहा होगा. उसको सरल भाषा में समझते हैं. जन आरोग्य योजना के तहत 43 हजार 180 परिवार ऐसे हैं-
- जिनमें किसी में 11 सदस्य हैं तो किसी में 50. सही सुन रहे हैं. 50 सदस्य.
- 12 परिवार ऐसे हैं जिसमें 50 से लेकर 100 सदस्य हैं. 100 सदस्य. और
- एक परिवार तो ऐसा है जिसमें 200 लोग हैं. 200 लोग. मतलब इसे गांव नहीं तो कम से कम मुहल्ला तो घोषित कर ही देना चाहिए था.

मोदी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री गिरिराज सिंह ने शायद ये रिपोर्ट पहले ही देख ली थी. इसीलिए वो बार-बार कहते हैं देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत है.

कैग की रिपोर्ट में एक और अहम बिंदु को रेखांकित किया गया है. तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और चंडीगढ़ में हजारों लोग जो सरकार कर्मचारी थे और अब रिटायरमेंट की जिंदगी जी रहे हैं. वो भी गरीबों की इस स्कीम का फायदा उठा रहे हैं. कैग की रिपोर्ट पर स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जवाब आया है. मंत्रालय ने स्कीम का बचाव किया है. और कहा है कि फोन नंबर का इस्तेमाल सिर्फ तब होता है जब किसी को को मैसेज देना है. इसका लाभार्थियों के वेरिफिकेशन से कोई लेनादेना नहीं है.

अब अगली रिपोर्ट की तरफ चलते हैं. National Social Assistance Programme (NSAP)की ऑडिट रिपोर्ट 8 अगस्त को लोकसभा में टेबल की गई. ये प्रोग्राम गिरिराज सिंह के ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधीन ही है. इसकी ऑडिट रिपोर्ट में कई गड़बड़ियों को उजागर किया गया है. NSAP का मूल भावना बुजुर्गों, विधवाओं, विकलांगो की मदद करना है. उन्हें पेंशन के रूप में वित्तीय सहायता देना है. लेकिन ये इस प्रोग्राम के तहत जो फंड सरकार की तरफ से दिया जा रहा है वो आखिर जा कहां रहा है.  अब इस योजना की जो गड़बड़ियां कैग ने गिनवाई हैं उनको समझते हैं.

- साल 2017-18 में 12 हजार 347 लाभार्थियों के फंड को दूसरी जगह ट्रांसफर दिया गया. कहां दे दिया गया. पन्नाधाय जीवन अमृत योजना के तहत आस्था कार्ड धारकों और LIC में गरीबी रेखा से नीचे आने वालों के बीमा प्रीमियम का पेमेंट करने में.   ये सब हुआ राजस्थान में.
- ओडिशा में एक करोड़ 66 लाख रुपये के फंड को ऐसी जगहों में ट्रांसफर कर दिया गया जिनका NSAP से कोई लेना देना नहीं था. जैसे आंगनवाड़ी की बिल्डिंग बनाना और उसका मेंटेनेंस करना.
- जम्मू-कश्मीर में तो 3 करोड़ रुपये राज्य सरकार के खाते में भेज दिए गए. वहीं पड़े हैं अभी भी.
- गोवा में भी 1.37  करोड़ रुपये का फंड दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया गया.
- बिहार में 43 करोड़ रुपये फंड इधर से ऊधर किया गया. हालांकि ये NSAP के अंतरगत ही किया गया. लेकिन जहां खर्च होना होना वहां नहीं दूसरी जगह.

यानी कुल 57.45 करोड़ रुपये के NSAP के फंड को दूसरी जगहों को खर्च किया गया. कैग ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि- वित्तीय प्रबंधन में ऐसी गड़बड़ियां ना सिर्फ पेंशन के हकदारों को लाभ से वंचित करता है बल्कि NSAP की वित्तीय स्थिति के खस्ताहाल को भी प्रदर्शित करती है.

इसके अलावा NSAP की इस रिपोर्ट में और भी गड़बड़ियों को बताया गया है. पिछले 5 साल में बिहार, सिक्किम, अरुणाचल  प्रदेश, गोवा, केरल, जम्मू कश्मीर, त्रिपुरा, अंडमान निकोबार में 18.78 करोड़ रुपये सिर्फ रखे हैं. उनको खर्च नहीं किया गया.

इतना ही नहीं. अलग-अलग राज्यों में जरुरतमंदों की पेंशन का करीब 6 करोड़ रुपये तो ऐसी-ऐसी जगहों पर खर्च किया गया कि बताने में भी शर्म आ जाए.
- अरुणाचल में 1.36 करोड़ रुपये हारमोनियम का पेमेंट करने में खर्च हो गए.
- बिहार में 2.38 करोड़ रुपये सिक्योरिटी गार्ड्स की तनख्वाह देने में. गाड़ियों का किराया देने में. और चाय-नाश्ता करने में खर्च कर दिये गए.
- छत्तीसगढ़ में 24 लाख रुपये  में कोविड-19 के प्रति जागरूक करने के लिए और सीएम तीर्थ यात्रा की होर्डिंग लगाई गई, मास्क खरीदे गए, पैम्फ्लेट छापे गए.
- जम्मू-कश्मीर में 27 लाख रुपये में सैलरी बांटी गई,  गाड़ी बनवाई गई और टैवेलिंग अलाउंस बांटा गया.
- इसके अलावा जरूरतमंदो के पैसों से त्रिपुरा में लिफ्ट बनवाई गई, सफाई करवाई गई, पौधे लगवाए गए, बिजली के सामान खरीदे गए. उत्तराखंड में अलमारी खरीदी गई, पेट्रोल खरीदा गया, इनकम टैक्स भरने के लिए कंसल्टेंसी फीस दी गई. पश्चिम बंगाल में विशेष दिनों को सेलिब्रेट किया गया, AC खरीदा गया और फोन का बिल भरा गया.

और ये सब किया जा रहा था जरूरतमंदो की पेंशन से.

कैग की इस रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात को रेखांकित किया है. कई राज्यों में लोगों की पेंशन सालों से लटकी पड़ी है.
- दिल्ली में 13 हजार 760 लोगों की पेंशन बांटने में तीन साल से ज्यादा का समय लगा दिया गया.
- केरल में 42 सौ से ज्यादा लोगों को पेंशन देने में ढाई साल से ज्यादा लेट किया गया.
- असम में 4 हजार से ज्यादा लोगों को पेंशन देने में करीब 7 साल का समय लगा दिया गया.
- और जम्मू कश्मीर में तो 26 सौ से ज्यादा लोगों को पेंशन देने में 11 साल तक का टाइम ले लिया गया.

आगे बढ़ते हैं. टूरिज्म मिनिस्ट्री की स्वदेश दर्शन स्कीम के ऑडिट की तरफ. ये स्कीम 2015 में लॉन्च की गई. शुरुआती फंड अलॉट हुआ 500 करोड़ रुपये. मंत्रालय ने स्कीम के तहत फंड देता गया. और 2016-17 तक इसे चार हजार करोड़ दे दिए गए. लेकिन कैग ने कहना है कि इतना फंड देने के लिए मंत्रालय ने कैबिनेट का अप्रूवल नहीं किया. जबकि एक हजार करोड़ के फंड के लिए कैबिनेट का अप्रूवल जरूरी है.

और देखिए. कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि 6 राज्यों के अलग-अलग प्रोजेक्ट में 19.73 करोड़ रुपये ठेकेदारों को लाभ के तौर पर दिया गया है. इन प्रोजेक्ट्स में अयोध्या डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भी शामिल है. यही नहीं कैग ने अयोध्या विकास परियोजना में 8.22 करोड़ रुपये के खर्च पर ध्यान दिलाया है. कैग का कहा है या ये 8 करोड़ रुपये अनावश्यक है या फिर अतिरिक्त हैं.
अयोध्या विकास प्रोजेक्ट पर उठे सवालों के बाद यूपी सरकार का जवाब भी आया है. राज्य के टूरिज्म डिपार्टमेंट ने कैग की रिपोर्ट को स्वीकार किया है. और जिम्मेदार लोगों को निर्देश दिया है कि जितना भी अतिरिक्त पैसा खर्च किया गया है, वापस वसूला जाए.

अब बात संसद की. आज, मॉनसून सत्र की आख़िरी बैठक थी. और इस मौके पर गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में तीन बिल पेश किए:
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक;
भारतीय न्याय संहिता विधेयक;
और, भारतीय साक्ष्य विधेयक.

इन विधेयकों का मक़सद देश की आपराधिक न्याय प्रणाली के लिए जो क़ानून मौजूद हैं, उनमें सुधार करना है. कौन-कौन से क़ानून? भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC), आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1898 (CrPC) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872.
इन बिल्स में क्या है? और इन्हें लेकर संसद के अंदर-बाहर क्या प्रतिक्रिया हुई, ये सब बताते हैं.

आज भी दोनों सदनों में नारेबाज़ी और स्थगन का क्रम चलता रहा. अब आप सोच रहे होंगे कि विपक्ष की एक्कै मांग तो पूरी हो गई -- प्रधानमंत्री सदन में बोल दिए. मणिपुर पर कितना बोले, ये तो आप पूरा भाषण सुनकर अंदाज़ा लगा ही लेंगे. लेकिन बोल तो दिए ही. फिर विपक्ष किस बात पर नारेबाज़ी कर रहा है? मुद्दा है, कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी का निलंबन. इसी बात पर दोनों सदनों में विपक्ष हल्ला काटे हुए है. राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने यहां तक आरोप लगा दिया कि अधीर रंजन को छिछले आधार पर निलंबित किया गया है. तो पहले यही जान लिया जाए कि अधीर रंजन क्यों ससपेंड हो गए हैं?

दर्शक जानते ही हैं कि बीते रोज़ - 10 अगस्त को - नरेंद्र मोदी सरकार ने लोकसभा में विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को गिरा दिया. इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने बार-बार पीएम और अन्य मंत्रियों को टोका है, बेबुनियाद आरोप लगाए हैं. प्रह्लाद जोशी ने प्रस्ताव दिया कि स्पीकर, अधीर रंजन के बार-बार किए गए कदाचार को आगे की जांच के लिए सदन की विशेषाधिकार समिति के पास भेजें. और जब तक समिति अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती, अधीर रंजन को लोकसभा की कार्रवाई से निलंबित कर देना चाहिए. लोकसभा ने प्रस्ताव को ध्वनि मत से पारित कर दिया.

चूंकि ज़िक्र आ गया है, सो एक लाइन में समझ लीजिए कि विशेषाधिकार समिति क्या है? लोकसभा और राज्यसभा, आमतौर पर दोनों ही सदन किसी ऐसे मामले को विस्तृत जांच के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेजते हैं. समिति जांच करती है और फिर सदन को कोर्स ऑफ़ ऐक्शन सुझाती है, जो सदन मानता है. लोकसभा समिति के अध्यक्ष सांसद सुनील कुमार सिंह हैं और राज्यसभा की समिति के अध्यक्ष, उपसभापति हरिवंश हैं.

राज्यसभा और स्थगन की बात हो ही रही है, तो राघव चड्ढा की ख़बर भी सुन लीजिए. आम आदमी पार्टी सांसद राघव चड्ढा को सदन से निलंबित कर दिया गया है. विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट आने तक, वो निलंबित ही रहेंगे. AAP ही के दूसरे सांसद संजय सिंह का भी सस्पेंशन बढ़ा दिया गया है. वो भी राज्यसभा की कार्रवाई में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. संजय को बार-बार सभापति के निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए राज्यसभा से निलंबित किया गया था. वहीं, राघव चड्ढा पर कई सांसदों ने फ़र्ज़ी दस्तख़त के आरोप लगाए हैं. दरअसल, 7 अगस्त को राज्यसभा में दिल्ली सर्विस (अमेंडमेंट) बिल पास किया गया था. इसके पास होने से पहले AAP सांसद चड्ढा ने दिल्ली सर्विस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव दिया था. कथित तौर पर इस प्रस्ताव पर पांच सांसदों के साइन थे. हालांकि, इन सांसदों ने दावा किया कि प्रस्ताव पर उन्होंने साइन नहीं किए. इसमें भाजपा के तीन, एक बीजद के और एक अन्नाद्रमुक के सांसद हैं. इस मुद्दे को गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में उठाया था और जांच की मांग की है.

AAP का इन आरोपों पर क्या कहना है? राघव चड्ढा ने तो अपने ऊपर लगे आरोपों को झूठ बताया है. AAP का भी कहना है कि एक युवा और प्रभावी सांसद की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए उनके ख़िलाफ़ साजिश रची गई है.

ये तो हंगामे की कहानी हुई. सदन के अंदर क्या हुआ? लोकसभा की कार्रवाई शुरू ही हुई थी कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दो GST (संशोधन) बिल, 2023 पेश कर दिए. विधेयक में ऑनलाइन गेमिंग, कसीनो और हॉर्स-रेसिंग पर 28 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है. फिर नारेबाज़ी हुई, स्थगन हुआ. लोकसभा वापस शुरू हुई तो गृह मंत्री ने वो तीन विधेयक पटल पर रख दिए, जिनके बारे में हमने आपको पहले बताया. अमित शाह ने कहा कि "19वीं सदी के" तीन क़ानूनों को बदलने के लिए जो विधेयक पेश किया गया है, इस पर पिछले चार सालों से चर्चा चल रही थी और सभी स्टेकहोल्डर्स से सुझाव लिए गए हैं. और, शाह ने कहा कि नए बिल में राजद्रोह के अपराध का प्रावधान पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा. गृह मंत्री का कहना है कि राजद्रोह का प्रावधान ख़त्म हो जाएगा, लेकिन नए विधेयक में भारत की एकता और अखंडता को ख़तरे में डालने वाले अपराध का प्रावधान है. जिसे टिप्पणीकार राजद्रोह जैसा कानून ही बता रहे हैं.

वैसे इन तीनों बिलों को और जांच-परख के लिए संसदीय पैनल के पास भेजा जाएगा. तो अभी विधेयकों को कानून बनने में कुछ वक्त है.

गृह मंत्री के बाद वापस निर्मला सीतारमण खड़ी हुईं. और, दोनों GST संशोधन विधेयकों को बिना बहस के ध्वनिमत से पास कर दिया गया. फिर दोपहर 1.32 बजे, लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई.
इधर जब सत्र चल रहा था, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के साथ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. 'लोकतंत्र बचाओ', 'लोकतंत्र ख़तरे में है' की तख़्तियों के साथ संसद परिसर के अंदर ही अंबेडकर प्रतिमा की ओर मार्च निकाला. अधीर रंजन चौधरी के निलंबन के विरोध में INDIA गठबंधन ने लोकसभा की कार्यवाही का बहिष्कार किया और मॉनसून सत्र के समापन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा आयोजित की जाने वाली टी पार्टी का भी बहिष्कार कर दिया. राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मणिपुर पर दिए भाषण पर बोलते हुए कहा कि पीएम ने सिर्फ़ दो मिनट मणिपुर पर बात की और इन दो मिनटों में भी पीएम हंसकर मणिपुर का मजाक उड़ा रहे थे.

उधर बाद राज्यसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया क्योंकि विपक्षी दलों के सदस्य लगातार नारे लगा रहे थे - "प्रधानमंत्री सदन में आओ!"
2 बजे सदन वापस शुरू हुआ, तो वित्त मंत्री ने राज्यसभा में भी GST संशोधन बिल पेश किया. वहां तीन से चार मिनट की बहस के बाद ही दोनों बिलों को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया. नारेबाज़ी के बीच कुछ एक बिलों पर चर्चा हुई. फिर 3 बज कर 23 मिनट पर राज्यसभा को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया.

तो ये था हिसाब किताब. सरकारी खाते का CAG ने किया. और संसद का हमने और आपने. 

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