मोदी सरकार का सबसे सादगी पसंद मंत्री, जो आज भी स्कूटर से चलता है
1996 से अब तक कोई चुनाव नहीं हारे हैं. साफ़ छवि और सादगी की वजह से हैं मोदी की पसंद.
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फोटो - thelallantop
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नाम- वीरेंद्र कुमार
मंत्रालय- राज्य मंत्री (महिला और बाल विकास मंत्रालय) , राज्य मंत्री (अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय)
सांसद- टीकमगढ़, मध्यप्रदेश
2014 के चुनाव में कांग्रेस के कमलेश वर्मा अहिरवार को 2,08,731 वोट से हराया था. फिलहाल श्रम पर बनी स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं.
शिक्षा- एमए अर्थशास्त्र, बाल मजदूरी पर पीएचडी.

2014 के चुनाव प्रचार के दौरान पंचर की दुकान पर वीरेंद्र कुमार
सियासी पारी
# 1996 से 2009 तक सागर से चार बार सांसद रहे. 2004 तक सागर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. 2009 में यह सीट सामान्य श्रेणी में आ गई. उस समय वीरेंद्र कुमार सागर छोड़कर टीकमगढ़ आ गए. पिछली दो लोकसभा में टीकमगढ़ की नुमाइंदगी कर रहे हैं.
# अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरुआत. आपातकाल के दौरान जेपी आंदोलन में सक्रिय रहे और मीसा के तहत जेल गए. 1982 में सागर के युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. बाद में इसी जिले के बजरंग दल के संयोजक बने. राम मंदिर के दौर में बजरंग दल में सक्रिय रहे.
# दलित चेहरे की तरह प्रोजेक्ट किया जा रहा है लेकिन स्थानीय स्तर पर दलित राजनीति नहीं करते हैं. स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि खटिक समाज से आने वाले वीरेंद्र कुमार अपना पूरा नाम लिखने से बचते हैं. अपनी छवि के आधार पर चुनाव जीतते हैं.
# मध्यप्रदेश में बीजेपी के किसी भी धड़े में नहीं है. जमीनी नेता है. लोप्रोफाइल रहते हैं.
# 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान साइकिल पंक्चर सुधारते देखे गए थे. यह फोटो पहले अखबारों में फिर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई.
क्या है वजह-
# 2018 में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव है.
# बीजेपी दलित और आदिवासी समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करना चाह रही है.
# एक महीने पहले मध्यप्रदेश से ही आदिवासी महिला नेता संपतिया उइके को राज्यसभा सदस्य बनाया गया था.
# किसी भी खेमे से नहीं है. ऐसे में राज्य की सियासत में टकराव जैसी स्थिति नहीं बनेगी.
वीडियो देखें:
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सांसद- टीकमगढ़, मध्यप्रदेश
2014 के चुनाव में कांग्रेस के कमलेश वर्मा अहिरवार को 2,08,731 वोट से हराया था. फिलहाल श्रम पर बनी स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं.
शिक्षा- एमए अर्थशास्त्र, बाल मजदूरी पर पीएचडी.

2014 के चुनाव प्रचार के दौरान पंचर की दुकान पर वीरेंद्र कुमार
सियासी पारी
# 1996 से 2009 तक सागर से चार बार सांसद रहे. 2004 तक सागर सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. 2009 में यह सीट सामान्य श्रेणी में आ गई. उस समय वीरेंद्र कुमार सागर छोड़कर टीकमगढ़ आ गए. पिछली दो लोकसभा में टीकमगढ़ की नुमाइंदगी कर रहे हैं.
# अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से राजनीति की शुरुआत. आपातकाल के दौरान जेपी आंदोलन में सक्रिय रहे और मीसा के तहत जेल गए. 1982 में सागर के युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने. बाद में इसी जिले के बजरंग दल के संयोजक बने. राम मंदिर के दौर में बजरंग दल में सक्रिय रहे.
# दलित चेहरे की तरह प्रोजेक्ट किया जा रहा है लेकिन स्थानीय स्तर पर दलित राजनीति नहीं करते हैं. स्थानीय पत्रकार बताते हैं कि खटिक समाज से आने वाले वीरेंद्र कुमार अपना पूरा नाम लिखने से बचते हैं. अपनी छवि के आधार पर चुनाव जीतते हैं.
# मध्यप्रदेश में बीजेपी के किसी भी धड़े में नहीं है. जमीनी नेता है. लोप्रोफाइल रहते हैं.
# 2014 में चुनाव प्रचार के दौरान साइकिल पंक्चर सुधारते देखे गए थे. यह फोटो पहले अखबारों में फिर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई.
क्या है वजह-
# 2018 में मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव है.
# बीजेपी दलित और आदिवासी समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करना चाह रही है.
# एक महीने पहले मध्यप्रदेश से ही आदिवासी महिला नेता संपतिया उइके को राज्यसभा सदस्य बनाया गया था.
# किसी भी खेमे से नहीं है. ऐसे में राज्य की सियासत में टकराव जैसी स्थिति नहीं बनेगी.
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