आप वोटर हैं या बनने वाले हैं, चुनाव सुधार बिल की ये बातें आपके काम की हैं
कहा जा रहा है कि इस कानून से चुनावी धांधली पर रोक लगेगी
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चुनाव सुधार से जुड़े बिल को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी है. इनमें से एक है वोटर आईडी को आधार से जोड़ना. (सांकेतिक फोटो-PTI)
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केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार, 15 दिसंबर को चुनाव सुधार (electoral reforms) से जुड़े एक बिल को मंजूरी दे दी. इन सुधारों में से एक है आधार को वोटर आईडी से जोड़ना जिससे मतदाता सूची को पारदर्शी बनाया जा सके. हालांकि, वोटर आईडी से आधार को जोड़ना अनिवार्य नहीं होगा. यह स्वैच्छिक होगा. खबर है कि इस बिल को सरकार इस समय चल रहे संसद के शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है.आइए जानते हैं कि चुनाव सुधार बिल में क्या-क्या प्रावधान हैं?
जेंडर न्यूट्रल
जानकारी के मुताबिक, बिल में चुनाव से जुड़े कानून को सैन्य मतदाताओं के मामले में लैंगिक तौर पर निरपेक्ष बनाने का प्रावधान है. मौजूदा चुनावी कानून इसमें भेदभाव करता है. मसलन पुरुष फौजी की पत्नी को सैन्य मतदाता के रूप में अपना पंजीकरण कराने की सुविधा मौजूदा कानून में है, लेकिन महिला फौजी के पति के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है.
सांकेतिक फोटो
निर्वाचन आयोग ने कानून मंत्रालय से सिफारिश की थी कि चुनाव से जुड़े कानून में 'पत्नी' शब्द की जगह 'जीवन साथी' यानी वाइफ की जगह स्पाउस लिखा जाए, तो समस्या हल हो सकती है. क्योंकि अब बड़ी तादाद में फौज में महिला सैन्य कर्मियों की भर्ती हो रही है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सेना में कमीशन अधिकारियों के रूप में भी महिलाओं की भर्ती का रास्ता खुल गया है. सैनिक स्कूल, कॉलेज, अकादमी सभी जगह महिलाओं की तादात बढ़ रही है, ऐसे में नए चुनाव सुधार मौजूदा दौर की जरूरत भी हैं. वोटर के रूप में साल में 4 बार करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन प्रस्तावित बिल में प्रावधान है कि 18 साल के युवा साल में 4 बार वोटर के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. अभी साल में एक बार यानी एक जनवरी से पहले 18 साल के होने पर खुद को वोटर के रूप में रजिस्टर्ड कराने का प्रावधान है.
इलेक्शन कमीशन वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति देने के लिये कई ‘कटऑफ डेट्स’ की वकालत करता रहा है. चुनाव आयोग कहता रहा है कि एक जनवरी की कटऑफ के कारण कई युवा वोटर लिस्ट में नाम नहीं जुड़वा पाते. केवल एक कटऑफ डेट होने के कारण 2 जनवरी को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले लोग भी रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाते थे. उन्हें अगले साल तक इंतजार करना पड़ता था.
सांकेतिक फोटो-PTI
हाल ही में लॉ मिनिस्ट्री ने पार्लियामेंट्री पैनल को बताया था कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-14 बी में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि हर साल चार कटऑफ तारीख - एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्तूबर - को शामिल किया जा सके. वोटर आईडी को आधार से जोड़ना बिल में प्रस्ताव है कि अगर कोई व्यक्ति अपने वोटर कार्ड को आधार से जोड़ना चाहे, तो वह जोड़ सकता है. लेकिन यह अनिवार्य नहीं होगा. वोटर आईडी को आधार से जोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निजता के अधिकार के फैसले को ध्यान में रखा जाएगा. साल 2015 में ही आयोग ने वोटर आईडी को आधार से लिंक करने का काम शुरू कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी. चुनाव आयोग वोटर आईडी को आधार से क्यों जोड़ना चाहता है इसी साल मार्च में तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया था कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से आधार प्रणाली को जोड़ने का प्रस्ताव दिया है, ताकि एक ही व्यक्ति के विभिन्न स्थानों से कई बार पंजीकरण कराने पर लगाम लगाई जा सके. उन्होंने बताया था कि इसके लिए चुनावी कानूनों में संसोधन की जरूरत होगी.
अगस्त 2019 में चुनाव आयोग ने एक प्रस्ताव भेजा था, इसमें जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 और आधार अधिनियम में संशोधन के लिए प्रस्ताव लाने की मांग की गई थी. आयोग का कहना था कि इससे वोटर लिस्ट में होने वाली गड़बड़ियों से बचा जा सकेगा.
इसके अलावा चुनाव सुधार बिल में एक और प्रस्ताव है, जो चुनाव आयोग को ये पावर देता है कि वह चुनाव से जुड़ी किसी भी तरह की जररूत के लिए किसी कैंपस का अधिग्रहण कर सकता है. चुनाव आयोग इस कैंपस का इस्तेमाल EVM रखने, पोलिंग स्टेशन बनाने के अलावा अन्य तरह की जरूरतों के लिए भी कर सकता है.
सांकेतिक फोटोनिर्वाचन आयोग ने कानून मंत्रालय से सिफारिश की थी कि चुनाव से जुड़े कानून में 'पत्नी' शब्द की जगह 'जीवन साथी' यानी वाइफ की जगह स्पाउस लिखा जाए, तो समस्या हल हो सकती है. क्योंकि अब बड़ी तादाद में फौज में महिला सैन्य कर्मियों की भर्ती हो रही है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सेना में कमीशन अधिकारियों के रूप में भी महिलाओं की भर्ती का रास्ता खुल गया है. सैनिक स्कूल, कॉलेज, अकादमी सभी जगह महिलाओं की तादात बढ़ रही है, ऐसे में नए चुनाव सुधार मौजूदा दौर की जरूरत भी हैं. वोटर के रूप में साल में 4 बार करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन प्रस्तावित बिल में प्रावधान है कि 18 साल के युवा साल में 4 बार वोटर के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. अभी साल में एक बार यानी एक जनवरी से पहले 18 साल के होने पर खुद को वोटर के रूप में रजिस्टर्ड कराने का प्रावधान है.
इलेक्शन कमीशन वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन कराने की अनुमति देने के लिये कई ‘कटऑफ डेट्स’ की वकालत करता रहा है. चुनाव आयोग कहता रहा है कि एक जनवरी की कटऑफ के कारण कई युवा वोटर लिस्ट में नाम नहीं जुड़वा पाते. केवल एक कटऑफ डेट होने के कारण 2 जनवरी को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले लोग भी रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाते थे. उन्हें अगले साल तक इंतजार करना पड़ता था.
सांकेतिक फोटो-PTIहाल ही में लॉ मिनिस्ट्री ने पार्लियामेंट्री पैनल को बताया था कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा-14 बी में संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि हर साल चार कटऑफ तारीख - एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्तूबर - को शामिल किया जा सके. वोटर आईडी को आधार से जोड़ना बिल में प्रस्ताव है कि अगर कोई व्यक्ति अपने वोटर कार्ड को आधार से जोड़ना चाहे, तो वह जोड़ सकता है. लेकिन यह अनिवार्य नहीं होगा. वोटर आईडी को आधार से जोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निजता के अधिकार के फैसले को ध्यान में रखा जाएगा. साल 2015 में ही आयोग ने वोटर आईडी को आधार से लिंक करने का काम शुरू कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी थी. चुनाव आयोग वोटर आईडी को आधार से क्यों जोड़ना चाहता है इसी साल मार्च में तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया था कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से आधार प्रणाली को जोड़ने का प्रस्ताव दिया है, ताकि एक ही व्यक्ति के विभिन्न स्थानों से कई बार पंजीकरण कराने पर लगाम लगाई जा सके. उन्होंने बताया था कि इसके लिए चुनावी कानूनों में संसोधन की जरूरत होगी.
अगस्त 2019 में चुनाव आयोग ने एक प्रस्ताव भेजा था, इसमें जनप्रतिनिधित्व कानून 1950 और आधार अधिनियम में संशोधन के लिए प्रस्ताव लाने की मांग की गई थी. आयोग का कहना था कि इससे वोटर लिस्ट में होने वाली गड़बड़ियों से बचा जा सकेगा.
इसके अलावा चुनाव सुधार बिल में एक और प्रस्ताव है, जो चुनाव आयोग को ये पावर देता है कि वह चुनाव से जुड़ी किसी भी तरह की जररूत के लिए किसी कैंपस का अधिग्रहण कर सकता है. चुनाव आयोग इस कैंपस का इस्तेमाल EVM रखने, पोलिंग स्टेशन बनाने के अलावा अन्य तरह की जरूरतों के लिए भी कर सकता है.

