एक राजा थे, नाम था ‘हिम’. राजा हिम के बेटे को शाप था कि शादी के चौथे दिन उसकीमृत्यु हो जाएगी. आज भी लड़का या लड़की मंगली हो तो शादी में दिक्कतें आती हैं,लेकिन ये लड़का तो राजकुमार का था. शादी होनी ही थी, हो गई. राजकुमार की नयी-नवेलीपत्नी आई. पत्नी समझदार थी. सो जब उसे राजकुमार के शाप के बारे में पता चला तो उसनेएक प्लान बनाया, यमराज को चकमा देने का प्लान. जब चौथा दिन आया तो उसने पति से कहाकि आज रात वो सोये न. पति जागता रहे इसलिए वो उसे बाकायदा गीत-संगीत भी सुनाती रही,और इसके अलावा उसने दरवाज़े पर सोने-चांदी की कई बेशकीमती चीज़ें रख दीं. घर केआस-पास कई दीपक भी जला दिए. रात को यमराज सांप के भेस में राजा हिम के बेटे की जानलेने आए तो दियों और गहनों की चमक से अंधे हो गए और घर में घुस नहीं पाए. राजकुमारकी पत्नी ने जो गहनों का ढेर जमा किया था, यमराज उसी पर बैठे रहे, और रानी का गानासुनते रहे. सुबह यमराज को राजकुमार की जान लिए बिना ही लौटना पड़ा, क्यूंकि राजकुमारकी मृत्यु की घड़ी बीत चुकी थी.यमराज की प्रतीकात्मक तस्वीर (इंडिया टुडे)इस लघु-कथा का सोने से क्या लेना-देना?दरअसल माना जाता है कि चौथी रात को, यानी कार्तिक माह की त्रयोदशी को जब रानी कीचालाकी से राजकुमार की शाप से जान छूटी, वो धनतेरस की रात थी. इसीलिये इस दिन सोने,चांदी के जेवरात वगैरह खरीदे जाते हैं. हालांकि कहानियां, जनश्रुतियां और मान्यताएंऔर भी हैं. धन्वंतरि वैसे तो योग और आयुर्वेद के आदि देवता हैं, लेकिन मान्यता येभी है कि इस दिन माता लक्ष्मी के अलावा धन्वंतरि भी समुद्र मंथन से निकले थे. उनकेहाथ में अमृत-कलश था. इसलिए कार्तिक माह की त्रयोदशी के दिन उनकी जयंती के तौर परधनतेरस मनाते हैं और उसी अमृत-कलश के सांकेतिक रूप में बर्तन खरीदते हैं.इस साल धनतेरस 4 नवंबर को मनाई जाएगी (फोटो सोर्स - आजतक)धनतेरस से शुरू होकर टोटल त्योहार पूरे पांच दिन तक चलते हैं. पहला दिन धनतेरस,दूसरा नरक चौदस (दक्षिण भारत में इसका बहुत महत्त्व है), तीसरा दिन कार्तिक महीनेकी अमावस्या यानी दिवाली, चौथा दिन गोवर्धन पूजा और पांचवां दिन भाई-दूज का.माता लक्ष्मी धन-समृद्धि की प्रतीक मानी जाती हैं, इसलिए दिवाली के दिन गणेश जी केसाथ-साथ लक्ष्मी का भी पूजन होता है.टाइटल की तरफ़ वापस चलते हैं. दरअसल इस पंचदिवसीय कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चमकज्वेलरी बेचने वालों की आंखों में रहती है. बिकता और भी बहुत कुछ है, गाड़ी से लेकरप्लेट-चम्मच तक. लेकिन सोने की बात अलग है. इस बाज़ार को धार्मिक महत्त्व से इस कदरजोड़ दिया गया है कि आदमी धनतेरस को ज़रूरी या गैर-ज़रूरी सही लेकिन कुछ न कुछ खरीदताज़रूर है. हालांकि इन्वेस्टमेंट के लिए गोल्ड खरीदने वाले लोग कभी-कभी बड़ी गलती भीकरते हैं जो आगे समझाएंगे. #सोना इतना सोना क्यूं? सोने की खरीद और उसके दिवालीलिंक पर आगे बात करेंगे. पहले जानते हैं कि क्यों पूरी दुनिया सोने पर ही टिकी हुईहै, ये पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था में बादशाह की कुर्सी पर कैसे बैठा है, वो भीसदियों से. गांव की रामकली चाची से लेकर शहर के सिंहानिया अंकल तक सोने के पीछेदीवाने क्यूं हैं? मात्रा कम हो या ज्यादा, लेकिन सोने की खरीद आम बात क्यूं है? इनसवालों के जवाब के लिए वक़्त के पहिये को थोड़े उल्टा घुमाना होगा.दुनिया में पहले बार्टर सिस्टम था. हिंदी में वस्तु-विनिमय कहते हैं. अगर करेंसीयानी मुद्रा का कांसेप्ट नहीं आया होता तो ये सिस्टम आज भी होता. यानी आप अपने खेतमें उगे हुए कुछ या ढेर सारे गाज़र ‘एप्पल स्टोर’ में देते और एप्पल स्टोर वाला आपकोआई फोन इलेवेन दे देता. यानी सामान के बदले सामान. हर महीने की पहली तारीख को आपकोसैलरी के रूप में 32 किलो चावल, दो टूथपेस्ट, चार साबुन, एक महीने का नेटफ्लिक्स कासब्सक्रिप्शन और दिल्ली-मुंबई का एक रिटर्न टिकट मिलता. अगर करेंसी न होती तो. अबयदि आपको इनकी या इसमें से किसी चीज़ की जरूरत नहीं होती तो किसी से मिलकर अपनीचीज़ें बदल लेते. जिसे आपसे जो चाहिए होता वो ले लेता और बदले में आपको आपके काम कीचीज़ें दे देता.इस सिस्टम में एक बड़ी कमी थी, पैमाने की कमी. इस पैमाने की कमी से लोगों को अपनेसामान की ही क़ीमत ज़्यादा लगती थी. मतलब खेत के गाजर वाले को लगता था कि उसके गाजरकीमती हैं और आई फोन वाले को लगता था उसके आई फोन. ये तय नहीं था कि कितनी गाज़र केबदले एक आई-फ़ोन मिलेगा. या इसका उलटा भी. ऐसे में ज़रूरत थी एक पैमाने की. पैमाना येतय करता कि किसका दाम कितना होगा. पैमाने का मूल्य ईक्वल रहे, साथ ही सभी के लिएएक्सेप्टेबल भी हो. ये भी पता ही चल गया था कि मेटल यानी धातु से ऐसा एक पैमानाबनाया जा सकता है, जो लम्बे समय तक चलेगा.अब बस ये तय करना बाकी था कि सिक्के बनाने के लिए कौन सी धातु इस्तेमाल की जाएजिसकी ग्लोबल एक्सेप्टेंस हो, ऐसा मेटल कोई भी हो सकता था. लोहा भी, पीतल भी औरसोना (Gold) भी. चूंकि सोने की कीमत ज्यादा थी, कैरी करने में आसान था, इसलिए सोनेको चुना गया. तो इस तरह पूरी अर्थव्यवस्था में पहले पैमाने के रूप में ‘सोना’ सामनेआया. गाजर के बदले या आइफोन के बदले कितना सोना आएगा, या सोने के बदले के कितनीचीज़ें आएंगी, ये साफ़ होने लगा. इस पैमाने से ये भी साफ़ हो जाता कि गाजर और फ़ोनका परस्पर मूल्य कितना हो.बात सोने से आगे बढ़ी. विश्व की सरकारों ने काग़ज़, प्लास्टिक, फ़ाइबर के नोट छापनेशुरू किए. लेकिन तब भी अंडरलाइंग एसेट सोना ही था. ‘अंडरलाइंग एसेट’ मतलब, किसी देशकी सरकार उसी हिसाब से पैसे छापती जितना उसके पास ‘गोल्ड रिज़र्व’ यानी सोने काभंडार होता. हालांकि अब कई देशों ने इस नियम को तिलांजलि दे दी है. #सोने काट्रांसफॉर्मेशन सोना अब करेंसी नहीं रह गया था. और आते-आते आज आया जहां सोने सेनहीं, सोने की ही ख़रीद-फ़रोख़्त होती है. दो वजहों से. कंजंप्शन के लिए औरइंवेस्टमेंट के लिए. कंजंप्शन बोले तो, सुंदर दिखने के लिए, शादी के लिए, या घर मेंकोई स्वर्ण मूर्ति लगानी हो, या आप सोना-चांदी च्यवनप्राश बनाते हों. औरइंवेस्टमेंट बोले तो, ‘आज ख़रीद रहा, मुझे लगता है कल दाम बढ़ेंगे. जब दाम बढ़ेंगेतब बेच दूंगा.’हालांकि इंवेस्टमेंट के लिए जो लोग डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं वो एक तरह से फिजिकलगोल्ड बेचने वाले सर्राफ़ा मार्केट का नुकसान है.इस बारे में हमने अक्षय रस्तोगी से बात की. अक्षय जेमोलॉजिकल इंस्टिट्यूट ऑफ़अमेरिका से 'जेम्स और डायमंड ग्रेडिंग' का कोर्स कर चुके हैं और सर्राफे का अपनाफैमिली बिज़नेस भी चलाते हैं. अक्षय कहते हैं, सामान्य तौर पर ये ज़रूर कहा जाता हैकि फिजिकल गोल्ड लेना एक सही ऑप्शन नहीं है, लेकिन मैं इस बात को पूरी तरह सहीनहीं मानता हूं. ये बात ज़रूर है कि गोल्ड पर रिटर्न्स लॉन्ग पीरियड में मिलते हैं.लेकिन सब जानते हैं कि फिजिकल गोल्ड का हमारे लिए क्या महत्व है. घर में रखा सोनासुख -दुःख के वक़्त बहुत काम आता है. अक्षय फिजिकल गोल्ड की खरीदारी के पक्ष मेंदिखे और ख़ुद भी शोरूम के मालिक हैं, तो हमारा अगला सवाल ये था कि क्या फिजिकल गोल्डबेचने वाले लोग भी कोई ऐसी स्कीम चलाते हैं जो इन्वेस्टमेंट के लिहाज से रखी गईहों? माने अगर किसी को इंवेस्टमेंट के लिए फिजिकल गोल्ड ही खरीदना है तो विक्रेताक्या स्कीम ऑफर करते हैं? इस पर अक्षय कहते हैं, गोल्ड ख़ुद में अच्छा इन्वेस्टमेंटहै, ऐसे में इन्वेस्टमेंट के लिहाज से हम कोई स्कीम नहीं चलाते, लेकिन अगर आप किसीअच्छे शोरूम से सोना खरीदते हैं तो आपको रेट बेनिफिट मिल सकता है, डिस्काउंट मिलसकते हैं और इंटरेस्ट रेट्स में भी कुछ कन्सेशन मिल सकते हैं. सोना ख़रीदते वक़्तसबसे पहला सवाल ये होना चाहिए कि आप सोने को किसलिए ख़रीद रहे हैं. अगर इंवेस्टमेंटके वास्ते ख़रीद रहें हैं तो, कभी भी उसे ज़ेवर में न गढ़वाएं. बहुत से लॉस तोतुरंत हो जाएंगे.सोने के जेवरात इन्वेस्टमेंट का सही तरीका नहीं हैं.#फिजिकल गोल्ड का नुक़सान अगर आप गोल्ड में इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं तो जाहिरहै आप इससे रिटर्न की उम्मीद जरूर करेंगे. लेकिन फिजिकल गोल्ड में निवेश करना इसउम्मीद के उलट है. तमाम तरह की दिक्कतें हैं, जिनकी वजह से फिजिकल गोल्ड की खरीदइन्वेस्टमेंट के लिए ठीक नहीं कही जा सकती.पहला है मेकिंग चार्ज. अगर आप गोल्ड किसी ज्वेलरी स्टोर से खरीदते हैं तो आपको उसकेमेकिंग चार्ज के नाम पर ही 10-15% देना पड़ता है. मान लीजिए आपने 1 लाख का सोनाखरीदा तो उसमें 10 हजार रुपये तो मेकिंग चार्ज के ही हो गये, सोना नब्बे हज़ार का हीमिला.दूसरा ये कि अगर आप सोने के कंगन खरीद रहे हैं. तो उसमें सोने से कंगन बनाने केदौरान नाम मात्र को ही सही दूसरे मेटल्स भी मिक्स किये जाते हैं, रीज़न दो हैं, एककि प्योर सोने पे बारीक डिजाइन बनाना आसान नहीं है और दूसरा मजबूती लाने के लिए.तीसरा ये कि फिजिकल गोल्ड में आपको ठीक-ठाक रकम के साथ इन्वेस्ट करना पड़ता है, अबएकाध तोले से कम क्या ही लेंगे. इसके उलट आप ऑनलाइन गोल्ड कम-से-कम रकम के साथ भीखरीद सकते हैं. कैसे?, अगले सेक्शन में बताएंगे.चौथी और बड़ी दिक्कत फिजिकल गोल्ड के साथ सिक्योरिटी रिस्क की है. सुरक्षित घर हो,आस-पास के लोग भरोसेमंद हों, चेन स्नेचिंग से निपट पाने का साहस हो तो ही गोल्डलीजिये. बैंक के लॉकर में रखने जायेंगे तो वो भी ठीक-ठाक किराया लेते हैं.बैंक लॉकर की प्रतीकात्मक तस्वीर (आज तक)आख़िरी और सबसे बड़ी दिक्कत है लिक्विडिटी की. लिक्विडिटी को ऐसे समझिये कि इन्वेस्टतो आपने इसीलिये किया था कि इससे पैसा बढ़े, लेकिन तब क्या करेंगे जब पैसे की ज़रूरतआन पड़े. एक तो इसे तुरंत बेचना आसान नहीं होता, और फिर जब आप ज्वेलर के पास बेचनेजाएंगे तो वो मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट के नाम पर कर्दा काटेगा. इसे बीच का कमीशन हीसमझिए. कर्दे का परसेंटेज 15 से लगाके 30 टका तक हो सकता है. हालांकि कुछ बड़ेज्वेलर उनके यहां से खरीदा माल वहीं वापस बेचने पर कर्दा कम या नहीं लेते हैं,लेकिन फिर भी मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट काटते ही हैं.इस मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट को समझने के लिए हमने सर्राफ़ा व्यापारी प्रकाश रस्तोगी सेबात की. जो ऑल इंडिया बुलियन ज्वेलर एसोसिएशन के डिस्ट्रिक्ट प्रेसीडेंट भी हैं.प्रकाश कहते हैं, जब प्योर गोल्ड से ऑर्नामेंट्स बनाए जाते हैं तो सोना कईप्रक्रियाओं से गुज़रता है. मान लीजिए हार बनना है, तो सबसे पहले सोने की पत्ती कटतीहै, ढलाई और छिलाई होती है, सोने का तार बनाने में हर दस ग्राम सोने में से 50मिलीग्राम से 100 मिलीग्राम तक सोने का लॉस हो जाता है. उसके बाद सोने के तारों कोजोड़ा जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम पांच से 8 परसेंट सोने का लॉस होताहै. इसके अलावा कुछ परसेंटेज प्रॉफिट ज्वेलर ले लेता है. प्रकाश आगे ये भी कहते हैंकि अगर सोना ज्यादा कैरेट का है तो 10 से 15 परसेंट तक मैन्यूफैक्चरिंग कॉस्ट, लेबरकॉस्ट निकाल के उसको रीसेल कर बाकी कीमत मिल जाती है. हार वगैरह खरीदते वक़्त अगर डिज़ाइन सिंपल रहे तो रीसेल करने पर वैल्यू ज्यादा मिलेगीतो कुल-मिलाके इतना साफ़ है कि उंगली में रिंग पहन के वही उंगली दिखाते हुए सामनेवाले से बात करनी है, माने गहना दिखाने के लिए पहनना है तब तो ठीक है. लेकिन अगरइन्वेस्ट करना है तो फिजिकल गोल्ड के बजाय कुछ और बढ़िया तरीके हैं इन्वेस्ट करनेके, कौन से? आइये समझते हैं. #कैसे करें सोने में निवेश? # बिस्कुट-आप सोने के बिस्कुट ख़रीद सकते हो, लेकिन ये इंवेस्टमेंट का बहुत पारंपरिक तरीक़ाहै. इसमें भी वो सारे नुक़सान बने ही रहते हैं जो ‘कंजंप्शन’ वाले सोने को‘इंवेस्टमेंट’ की तरह यूज़ करने में होते हैं. और ‘कंजंप्शन’ वाले सोने का एकड्रॉबैक जो हमने अभी के लिए बचाकर रखा था, वो है GST. जो सोने के बिस्कुट पर भीलागू होती है, लेकिन बाक़ी गोल्ड इंवेस्टमेंट स्कीम्स पर नहीं.ऐसा ही कुछ प्रकाश ने भी कहा कि अगर फिजिकल गोल्ड लेना है तो थोड़ा भारी डिज़ाइन मेंलें, वापसी पर कमीशन कम कटता है.प्रकाश कहते हैं, गोल्ड सदैव लाइट वेट के बजाय हैवी वेट में लेना चाहिए, लोग कम वजनमें बड़े साइज़ की अंगूठी मांगते हैं, उसमें पत्तियों का काम बढ़ जाता है, गोल्डका लॉस होता है, पुराने वक़्त में सोने की मोहरें चलती थीं. उनमें प्योरिटी परसेंटेजज्यादा होता था. हल्के आइटम्स में टांका, कर्दा, बट्टा ज्यादा लगता है. प्रकाशहॉलमार्किंग के हिसाब से बताते हैं कि अगर 75 हॉलमार्किंग या 85 हॉलमार्किंग कासोना लेते हैं तो कर्दा ज्यादा कटता है, लेकिन अगर 916 हॉलमार्किंग का सोना लें तोइसमें सिर्फ 9 परसेंट कर्दा कटेगा. इसलिए ज्वेलरी हमेशा वेटेड यानी वजनीली लेनीचाहिए, डिजाइनिंग के ऊपर न जाके सिम्प्लिसिटी की तरफ़ मूव करना चाहिए.सोने के बिस्किट्स (फ़ोटो क्रेडिट - Reuters)# वर्चुअल सोना-आप सोने में इन्वेस्ट तो करते हो, पर सोने की फ़िज़िकल डिलीवरी आपको नहीं मिलती.बल्कि ऐसे पेपर्स मिलते हैं, जिनकी अंडरलाइंग वेल्यू सोना है. मतलब इन पेपर्स मेंकहा गया होगा कि आप इस सोने के मालिक हैं. पेपर्स भी छोड़िए, ऑनलाइन के दौर में तोएक क्लिक से सारा काम हो जाएगा.गोल्ड बार (रैंडम फोटो)ऐसा (वर्चुअल) सोना आप कई तरीक़े से ख़रीद सकते हो. सब कुछ पारदर्शी तरीक़े से होताहै. फ़्रॉड न हों इसके लिए सरकार की, RBI की या SEBI की नज़र आपके इंवेस्टमेंट पररहती है. बहरहाल, कई बार तो ये RBI वगैरह भी इंवेस्टमेंट स्कीम्स लेकर आते हैं. ऐसाही एक इंवेस्टमेंट प्लान है, ‘सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड’.#क्या है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम?एक साल में RBI कई बार एक टाइम विंडो खोलती है, जब आप सोने में इन्वेस्ट कर सकतेहो. ‘टाइम विंडो खोलती है’ मतलब, साल में कई बार ऐसे दिन आते हैं, जब आप सीधे सरकारसे सोना ख़रीद सकते हो. ऑफ़ कोर्स वर्चुअल सोना. इस साल सरकार ये विंडो 4 बार खोलरही है. इस लिंक पर क्लिक करके आप RBI का नोटिफिकेशन देख सकते हैं. पहली विंडो अक्टूबर 25 से 29, 2021 को खुली थी, इसे ‘2021-22 सीरीज़ सेवेन’ कहाजाएगा. उम्मीद है आपने इस विंडो से खरीदारी की ही होगी. नहीं की तो दूसरी विंडो 29नवम्बर से 3 दिसंबर तक खुलेगी. ये विंडो हमेशा 5 दिन की होती है.गोल्ड बांड्स में इन्वेस्ट करने से पहले कुछ ज़रूरी बातें जान लीजिए, इन्वेस्टमेंटका मूड बना तो आपके काम आएंगीं-पहली बात तो ये कि आप एक साल में मिनिमम एक ग्राम सोना और मैक्सिमम 4 किलो सोनाख़रीद सकते हैं. अगर आप NGO चलाते हैं तो ये अपर लिमिट 20 किलो प्रतिवर्ष की होजाती है. दूसरा ये कि सोना एक ग्राम के गुणांक यानी मल्टीपल में ही ख़रीद सकते हैं.ये वर्चुअल सोना 24 कैरेट का होता है. सरकार आपको इस पर 2.5% का ब्याज भी देती है.सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की मैच्योरिटी 8 साल की होती है, लेकिन आप 5 साल बाद इसेकभी भी कैश करवा सकते हैं. और लास्ट बट नॉट द लीस्ट कि ऑफ़लाइन आप ये किसी बैंक सेया पोस्ट ऑफ़िस से ख़रीद सकते हैं. पर वो बड़ा लफड़े वाला काम है. फ़ॉर्म भरो, जमाकरो. बेहतर है कि अगर आपका डीमेट अकाउंट है तो आप इसे ऑनलाइन ख़रीदें.#एक रुपया लगाकर भी कर सकते हैं गोल्ड में इन्वेस्टमेंटइस बार एक किफ़ायती स्कीम आई है. माने अगर गोल्ड में इन्वेस्ट करना चाहते हैं औरआपके पास रोकड़ कम है तो भी चिंता की बात नहीं. भारत सरकार ने स्विट्ज़रलैंड के साथमिलके एक प्राइवेट लिमिटेड उपक्रम शुरू किया है. MMTC Private Limited नाम से.MMTC-PAMP भारत का अकेला वर्ल्ड लेवल पर मान्यता प्राप्त गोल्ड रिफाइनर औरफैब्रिकेटर है. इस लिंक से गूगल पे सर्च करिएगा.यहां आप एक रुपया इन्वेस्ट करके भी 24 कैरेट का 999.9 प्योर गोल्ड ख़रीद सकते हैं.यहां भी 3 फ़ीसदी GST या बाकी किसी तरह का कोई टैक्स आपको नहीं देना है.ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से डिजिटल गोल्ड की खरीदारी को लेकर जब हमने अक्षय से ये पूछा किएक सर्राफ़ा व्यापारी इसे किस तरह देखता है, तो उनका जवाब हमें पॉजिटिव लगा. आपचाहें छोटे शहर से हैं या बड़े, गोल्ड इन्वेस्टमेंट को लेकर ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म सेलेकर सरकारी गोल्ड बॉन्ड तक बहुत सारे टैक्स बेनिफिट और डिस्काउंट मिल जाते हैं,इसलिए ये न सोचकर कि रिटर्न्स कितने वक़्त में मिलेंगे, सभी को गोल्ड में इन्वेस्टकरना चाहिए, ये बहुत सेफ़ है. इसके अलावा कई पेमेंट गेटवे प्लेटफॉर्म जैसे यूपीआई वॉलेट, पेटीएम, गूगल पे औरफ़ोनपे वगैरह पे भी आप ऑनलाइन सोने की खरीदारी कर सकते हैं. इन्वेस्ट करना है तोयहां भी आप एक रुपए से लेकर जितना चाहें गोल्ड में इन्वेस्ट कर सकते हैं. इनप्लेटफ़ॉर्म पर आपको गोल्ड डिलीवरी का भी ऑप्शन मिल जाता है. अगर घर मंगवाएंगे याकिसी के एड्रेस पर गिफ्ट भेजेंगेतो ये गोल्ड 1 ग्राम से लेकर 20 ग्राम तक के सिक्कों की शक्ल में डिलीवर होगा.डिजिटल गोल्ड कॉइन (प्रतीकात्मक तस्वीर)#सोने का दाम और सोने में निवेश का फ़्यूचर खरीदारी कैसे करनी है ये बात हो गई. अबज़रा समझने की कोशिश करते हैं कि गोल्ड में इन्वेस्टमेंट का फ्यूचर क्या है. दरअसलफ्यूचर का सवाल इसलिए उठाना लाज़िमी है क्यूंकि ये वक़्त कोरोना के बाद के पहलेत्योहारी सीज़न का है. जब मार्केट में थोड़ी रिकवरी हुई है, लेकिन महामारियों औरयुद्धों का असर तो जाते-जाते जाता है न.चूंकि बात इन्वेस्टमेंट और रिटर्न्स की है तो सोने की कीमतों का उतार चढ़ाव शेयरमार्केट की भाषा में समझने की कोशिश करेंगे. आज 1 नवम्बर को 24 कैरेट सोने का भावप्रति 10 ग्राम 51,100 रुपये था, जबकि 22 कैरेट सोने का रेट प्रति दस ग्राम 46,850था. बीते दो दिनों में ये रेट इतना ही रहा, लेकिन उसके पहले यानी शुक्रवार को 24कैरेट गोल्ड 51,270 और 22 कैरेट गोल्ड 47,000 प्रति दस ग्राम पर ट्रेंड कर रहा था.हालांकि हर दिन का रेट मार्जिन इतना स्पेसिफिकली बताने की ज़रूरत तबतक नहीं होतीजबतक आप गोल्ड को कंज़ंपशन के लिए खरीदते हैं.फिजिकल गोल्ड (रैंडम फ़ोटो)ग्लोबली बात करें तो जहां डॉलर की कीमत में तेज़ी आई है वहीं सोने के दाम मानेलेटेस्ट दाम कुछ घटे हैं. वजह? क्योंकि निवेशकों की नजर इस हफ्ते सेंट्रल बैंक कीआगामी बैठकों पर है. डॉलर में बात करें तो गोल्ड 0.1% के गिरावट के साथ 1,805.96डॉलर प्रति औंस के स्पॉट पर है. सोना 1800 डॉलर से ऊपर है. वजह ये भी है कि मार्केटमें हाइपरइन्फ्लेशन का दबाव है. US Fed Reserve इस इन्फ्लेशन को टेम्पररी बता रहाहै, लेकिन ग्लोबल मार्केट इन्वेस्टर ये मान रहे हैं कि US Federal Reserveइन्फ्लेशन के ग्राफ को कंट्रोल ही नहीं कर सकता. मई में जब इन्फ्लेशन बढ़ रहा था,USFR का कहना था कि ये इन्फ्लेशन टेम्पररी है और इस साल के अंत तक यानी दिसम्बर तकख़त्म हो जाएगा. लेकिन अब फ़ेडरल रिज़र्व का कहना है कि महंगाई अगले साल के मिड तकजारी रह सकती है.अब इससे गोल्ड प्राइस को फायदा होने वाला है. सोने की सप्लाई चेन ठीक करने के लिएफ़ेडरल रिज़र्व कुछ नहीं कर सकता, वजह ये है कि सोने की कीमतों में ये महंगाईकंज्यूमर डिमांड बढ़ने की वजह से नहीं, बल्कि सप्लाई में दिक्कतों की वजह से है.हालांकि हेज फंड्स यानी वो पैसा जो इन्वेस्टर्स लगाते हैं, उसका फ्लो गोल्ड की तरफ़नहीं है. ये स्थिति पिछले कुछ वक़्त से बनी हुई है, और ये इन्वेस्टर्स वेटिंग में तबतक रहेंगे जब तक कुछ और कन्फर्मेशन नहीं आते. #सोने के रेट्स का दिवाली लिंक पिछलीदिवाली और इस दिवाली सर्राफ़ा मार्केट कितना बदला है और गोल्ड रेट में क्या फ़र्क आयाहै, इस बारे में अक्षय कहते हैं, ख़राब दिन बहुत लम्बे वक़्त तक नहीं चलते हैं. पिछलेसाल कोविड के दौरान हम सभी मेडिकली, पर्सनली और फाइनेंशियली इफ़ेक्ट ज़रूर हुए लेकिनबिज़नेस पॉइंट ऑफ़ व्यू से देखें तो इकॉनमी बूम-अप कर रही है. स्मॉल और मीडियम स्केलइंडस्ट्रीज़ फिर से शुरू हो गई हैं. त्योहार से पहले हमारे व्यापार में भी तेज़ी आईहै. उम्मीद है कि त्योहार पर मार्केट और सुधरेगा. गोल्ड के रेट्स ठीक हो रहे हैं.आने वाले वक़्त में ये रेट्स 50,000 से ऊपर रह सकते हैं. हमने अक्षय से सवाल कियाकि गोल्ड रेट्स जब दिवाली पर बढ़ते हैं तो क्यूं न दिवाली से पहले ही गोल्ड ले लियाजाए. इसपर अक्षय कहते हैं, ऐसा नहीं है कि गोल्ड रेट्स त्योहारों पर ही बढ़ते हैं.बजाय इसके गोल्ड की कीमत इंटरनेशनल मार्केट के एकॉर्डिंग बढ़ती-घटती है. त्योहार कासीज़न न भी हो तो भी साल में कई बार सोना महंगा हो जाता है. इस दिवाली क्या गोल्डरेट्स रहेंगे? इस सवाल पर प्रकाश कहते हैं, इस दिवाली सोना 50,000 प्रति दस ग्रामके आस-पास ही रहेगा. अगर रेट्स में बढ़ोत्तरी होती भी है तो भले इसके बाद हो, लेकिनफ़िलहाल सोने का रेट जैसा आज है उसी के आस-पास रहेगा. आपने मूवीज में देखा होगा,कोर्ट में जज अपना फैसला सुनते वक़्त कहता है कि तमाम सबूतों और गवाहों के मद्देनज़रकोर्ट ये फैसला करता है. और फिर फैसला सुना देता है. हमने भी सोने के बाज़ार और उसकेदिवाली लिंक पर एक एनालिसिस करने के कोशिश की. एक्सपर्ट्स के ओपिनियन भी बताए,लेकिन हम कोई डिसीज़न मेकिंग नहीं कर रहे. माने कोई फैसला नहीं सुना रहे. सोने कीपीली चमक आपको कितना लुभाती है ये आपके ऊपर है. शुरुआत में हमने आपको राजा हिम कीकहानी सुनाई, उसपर भरोसा करें या किसी और कथा पर ये आपकी चॉइस है.