पंजाब की नाभा जेल में बीते दिनों जो घटना घटी, वो किसी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं.4 गाड़ियों में भर कर करीब 20 बंदूकधारी आए और इस हाई सिक्योरिटी जेल से 6 कैदियोंको छुड़ाकर ले गए. इन कैदियों में कुख्यात आतंकवादी और गैंगस्टर शामिल हैं. यहां परएक खास बात ध्यान देने लायक है. ये सभी कैदी जेल में भी मोबाइल इस्तेमाल करते थे.जेल में रहते हुए भी इनका कहर और आतंक बाहर वालों पर बना रहे, इसलिए फेसबुक पर कभीअपनी फोटो डालते तो कभी स्टेटस अपडेट करके अपने जुर्म कबूलते. इस बारे में लगातारखबरें भी छपती रहीं, लेकिन किसी के कान पर जूं तक ना रेंगी. मीडिया ने कई बार सवाल किए, लेकिन जेलअधिकारियों के पास एक ही जवाब था. "हम जांच कर रहे हैं."पर देखिए, इन कैदियों ने आपका (जेल अधिकारियों का) काम बढ़ा दिया. अब जेल मेंइस्तेमाल हो रहे मोबाइल फोन के साथ-साथ इस बात की भी जांच कीजिएगा कि कैसे 20बंदूकधारी जेल एरिया में घुसे. सिक्योरिटी में सेंध लगाई. गोलियां बरसाईं. अपनेसाथियों को लेकर फरार हो गए. और आप अंदर खड़े हवाई फायरिंग ही करते रहे. कम से कममेहमानों को बाहर तक छोड़ने तो आ जाते. खैर "जांच जारी है" और सर्च ऑपरेशन भी चलायाजा रहा है. मिंटू दिल्ली से पकड़ा भी गया है. बादल सरकार पर इन कैदियों को दोबारापकड़ने का दबाव भी होगा, 2-3 महीने बाद इलेक्शन जो हैं.पंजाब की नाभा जेल से ये 6 कैदी फरार हुए थे. (क्रेडिट:दैनिक भास्कर)इस से पहले एक जेल ब्रेक और हुआ था पंजाब में. जगह थी चंडीगढ़ के पास बुड़ैल कीमॉडल जेल. तारीख थी 22 जनवरी, 2004. हमें पता चला 23 जनवरी की सुबह. अच्छे-खासेबड़े और बोल्ड फॉन्ट में दी ट्रिब्यून की हेडलाइन थी, Beant case accussed flee.8वीं क्लास में पढ़ता था तब मैं. स्कूल जाने से पहले ब्रेकफास्ट करते वक्तन्यूज़पेपर पर नज़र मारने की आदत थी. तब तक मैं सिर्फ पंजाब के पूर्व सीएम बेअंतसिंह को ही जानता था. उनके कातिलों को नहीं. लेकिन उस हेडलाइन के नीचे छपे चारोंफरार कैदियों के नाम और शक्ल ज़हन में ऐसे बैठे कि दिन भर स्कूल में भी याद रहे.बड़ा सरप्राइज़िंग और इंट्रस्टिंग लग रहा था कि कैसे जेल से 94 फुट लंबी सुरंग खोदकर खूंखार आतंकवादी फरार हो गए.बुड़ैल की मॉडल जेल (फोटो: The Tribune)1995 में पंजाब के 12वें मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह को चंडीगढ़ के सेक्रेटेरिएटकॉम्प्लेक्स में ह्यूमन बम से मार दिया गया. बब्बर खालसा के आतंकवादी दिलावर सिंहजैसिंहवाला ने वारदात को अंजाम दिया. आत्मघाती हमलावर के बैक-अप में बलवंत सिंहराजोआणा और साज़िश रचने वाले जगतार सिंह हवारा, जगतार सिंह तारा और परमजीत सिंहभिओरा को कुछ टाइम बाद गिरफ्तार कर लिया गया. राजोआणा को छोड़ बाकि तीनों आरोपियोंको बुड़ैल की मॉडल जेल में रखा गया. जेल के उस 15 फुट चौड़े और 22 फुट लम्बे कमरेमें उनकी देवी सिंह नाम के शख्स से मुलाकात हुई. वो हत्या के आरोप में सज़ा काट रहाथा. आप इस तालमेल पर गौर फरमाइए. कुख्यात आतंकियों के साथ एक ऐसे शख्स को बंद कियागया, जिसने एक कत्ल किया था. बड़े और छोटे अपराधियों का एक ही कमरे में रहना महज़एक इत्तेफाक नहीं होता. दरअसल छोटे-मोटे अपराध करने वालों को बड़े अपराधियों के साथउनकी सेवा करने के लिए रखा जाता है. तो भला देवी सिंह इन तीन बब्बर खालसा आतंकियोंका हाथ कैसे ना बंटाता.मोहाली जेल ब्रेक के ग्राफिक्स. (फोटो: The Telegraph)कहा जाता है कि इन तीनों आतंकियों की जेलर और उच्च पुलिस अधिकारियों से अच्छीबोलचाल थी. इतनी कि जब किसी ने जेल अधिकारियों तक सुरंग खोदे जाने की बात भीपहुंचाई तो उसे हल्के में लेकर टाल दिया गया. और ऐसा केवल एक बारी नहीं हुआ. साल1998 और 2002 में भी खबरें आईं कि हवारा एंड ग्रुप जेल में सुरंग खोद कर भागने कोतैयार है. लेकिन आप पुलिस और इन आतंकवादियों का याराना तो देखिए, पुलिस बार-बारनकारती रही और इन आतंकियों के हौंसले बुलंद होते रहे. दीपक बाजपेयी, जिन्होंनेजनवरी 2004 में जेल ब्रेक की खबर को सबसे पहले डिसक्लोज़ किया, इस वक्त आम आदमीपार्टी के मीडिया सेल के मुखिया हैं. वे बताते हैं कि उन्होंने इस घटना के होने सेपहले जेल ब्रेक पर एक सिरीज़ की थी. उनके अखबार में लगातार कई दिन फ्रंट पेज पर खबरलगाई गई कि बुड़ैल जेल में सुरंग खोदने का काम चल रहा है. फोटो बनाकर एग्ज़ेक्टबताया गया कि सुरंग कहां से कहां जा रही है. अब अखबार में खबर छपी थी तो जांच कादिखावा करना भी ज़रूरी था. सीबीआई, चंडीगढ़ पुलिस, IB की टीम आई. जेल सुप्रिटेंडेंटसे मिले. बातचीत की. मेन गेट के पास अपना टेबल चेयर लगाया और जेल के अंदर तक जानेकी ज़हमत नहीं उठाई. कहा गया कि जेल में कोई सुरंग नहीं है. रिपोर्टर ने जेलसुप्रीटेंडेंट से आपसी मतभेद के चलते ये खबर की है.यहां पर ये बताना ज़रूरी है कि एक तरफ तो प्रशासन को हवारा एण्ड ग्रुप के भाग जानेका डर इतना सताता था कि उनको ट्रायल के लिए भी कोर्ट नहीं ले जाया जाता था. कोर्टजेल में ही लगती थी. और वहीं दूसरी तरफ दो बार रेड करने पर इनके पास से सिम कार्डबरामद हुए. दो टेलीविज़न तो जेल सुप्रीटेंडेंट ने खुद ही दे रखे थे.फिर आई 22 नवम्बर 2004 की सुबह. 2 बजे तीनों आतंकी और देवी सिंह 14 फुट गहरी, 2.5फुट चौड़ी और 94 फुट लम्बी सुरंग खोदकर फरार हो गए. और ज़ाहिर सी बात है कि इतनीलम्बी सुरंग एक-दो दिन में खुदी नहीं होगी. एक्सपर्ट्स की मानें तो इस काम में कमसे कम 6 महीने लगे होंगे. हैरानी की बात ये है कि इतनी लम्बी सुरंग खोदने के बाद जोमिट्टी निकलती थी, वो जाती कहां थी. इन आतंकियों के लिए जेल से सेफ जगह क्या होसकती थी. सुरंग से मिट्टी निकाल-निकाल कर अलमारी के पीछे डालते रहे. हालांकि पुलिसका कहना था कि इस मिट्टी को वो जेल से पानी के साथ बहा दिया करते थे. एक खास बात औरहुई उस रात. दो बार जेल की लाइट गई और जेनरेटर भी फेल हो गया. दरअसल इनका एक साथीनारायण सिंह चौरा जेल के बाहर खड़ा बिजली गुल करने का ही बंदोबस्त कर रहा था. कुछही दिन पहले वो हवारा को जेल में मिलने भी आया था. उसी दिन इस घटना को अंजाम देनेकी तारीख तय की गई थी.बुड़ैल जेल ब्रेक केस की जांच करती टीम. (फोटो: Hindustan Times)आप जेल में बैठे इन आतंकियों का आतंक तो देखिए, ये लोग किसी पुलिस अधिकारी को अंदरघुसने तक नहीं देते थे और इसके पीछे भी पुलिस वालों के पास एक दलील थी. उनका कहनाथा कि तीनों कैदी सिख अमृतधारी हैं और ऐसे में किसी गैर-अमृतधारी के अन्दर आनेसे उन्हें (कैदियों को) परहेज़ है.22 मार्च की सुबह पत्रकार दीपक बाजपेयी को इनके एक मित्र ने (जो कि जेल में ही कामकरते थे) ने सुबह 6 बजे फोन किया और कहा "वो चारों तो आपकी सुरंग से भाग गए." दीपकने हैरान हो कर पूछा कि तू पी (शराब) तां नहीं रखी. आगे से जवाब आया कि मैं इस वक्तमोहाली बस स्टैंड पर खड़ा हूं. सर्च ऑपरेशन जारी है. जेल टीम चंडीगढ़ और मोहाली मेंजगह-जगह छापे मार रही है. इस में भी एक कमाल की बात थी. इन आतंकियों को फरार हुए अबतक 4-5 घंटे हो चुके थे, लेकिन उच्च अधिकारियों को इत्तिला तक नहीं की गई थी. जेलसुप्रीटेंडेंट को लगा कि अपने ही आदमियों को भेज कर किसी तरह हवारा एंड ग्रुप कोवापस गिरफ्तार कर लिया जाए. वो क्या है ना, बड़े बुज़ुर्ग समझाकर गए हैं कि घर कीबात घर में ही रह जाए तो बेहतर है.लेकिन जब पानी सिर से ऊपर निकलने लगा और पत्रकारों के फोन खड़कने लगे तो शाम तक इसकांड को जग-ज़ाहिर करना पड़ा. पुलिस सर्च ऑपरेशन में जुटी रही और करीब डेढ़ सालबाद हवारा को गिरफ्तार कर लिया गया. जेल से फरार होने के दौरन वो कुछ समय संगरूरमें भी रुका हुआ था, जो बुड़ैल जेल से सिर्फ 120 किलोमीटर दूर थी. बिजली गुल करनेवाला नारायण सिंह सबसे पहले गिरफ्तार हुआ. फिर हवारा और तारा. परमजीत सिंह भिओरा कोफरार होने के करीब 10 साल बाद गिरफ्तार किया गया. और चौथा आरोपी देवी सिंह अभी भीपुलिस की गिरफ्त से बाहर है. देवी आज-कल पाकिस्तान में है और उसने सिख धर्म अपनालिया है. वहां पर वो दूध का कारोबार कर रहा है. और बेहंत हत्याकांड के मुख्यआरोपियों में से एक जगतार सिंह हवारा श्री अकाल तख्त के जत्थेदार हैं.गिरफ्तारी के बाद जगतार सिंह हवारा और परमजीत सिंह भिओरा.