किस्सा बुलाकी साव- 24, बड़का बाबा की चिता से उठता धुआं और बुलाकी
बच्चे जब खपरैल के छोटे टुकड़े से बड़का बाबा के तलुए खुजा रहे होते, बुलाकी साव उन्हें उनकी ही किताब से प्रेम की कोई पत्रावली सुनाता था.
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फोटो क्रेडिट- सुमेर सिंह राठौड़
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