शुभम हिंदी कविता की नौजवान खेप का हिस्सा हैं और जेएनयू से 'लिटरेचर: इंडियनलैंग्वेजेस' में पीएचडी कर रही हैं. स्त्री विषयों पर उनकी कविताएं खासी चर्चित हुईहैं. लेकिन आज उनकी जो कविता हम पढ़वा रहे हैं, वह इस दौर की एक प्रेम कविता है.प्यार तब तक नहीं होता, जब तक हरारत साथ न लाए. इस फलसफे में यकीन हो तो यह कविताआपको पढ़नी चाहिए.--------------------------------------------------------------------------------104 डिग्रीअब पुलिस मुझे आइपीसी लगाकर गिरफ़्तार कर ले तो भी नहीं कहूंगी कि मैंने तुमसेप्रेम किया है प्रेम नहीं किया यार प्रेम के लायक लिटरेचर नहीं पढ़ा देखो, बात बसये है कि.. ..कि तुम्हारे बिना रहा नहीं जा सकता कहो तो स्टांप पेपर पे लिख के देदूं नहीं.. नहीं..नहीं..-------------------------------------------------------------------------------- मैंने तुम्हारे दिमाग का दही बनाया है लड़ाई की है, तंग किया है ? हां किया है तोलड़ लो (वैसे तुमने भी लड़ाई की है पर अभी मैं वो याद नहीं दिला रही) तुम भी तंग करलो ब्रेक अप क्यों कर रहे हो ? ये मानव अधिकारों का कितना बड़ा उल्लंघन है कि आधेघंटे तक फ्रेंच किस करने के बाद तुम बोलो- हम ब्रेक अप कर रहे हैं !102 डिग्रीअफसोस कि मैं कुछ नहीं कर सकती तुम्हारा ‘नहीं’ चाहना इस ‘नहीं’ को हां कैसे करूं,कैसे ? प्लीज बोलो ना ‘नहीं’ दुनिया का सबसे कमीना शब्द है उससे भी ज्यादा है‘ब्रेकअप’--------------------------------------------------------------------------------अब एक प्यारे से लड़के की याद में होमर बनने का क्या उपाय है दोस्तों ? चाहती हूंवो लिखूं..वो लिखूं.. कि आसमान रोए और धरती का सीना छलनी हो पानी में आग लगे, तूफानआए पर रोती भी मैं ही हूं, सीना भी मेरा ही छलनी होता है आग तूफान सब मेरे ही भीतरहै बाहर सब बिंदास नॉर्मल रहता है काश पता होता प्यार करके तकलीफ़ होती है काश(हजारों सालों से कहते आ रहे हैं लोग लेकिन अपन ने भाव कहां दिया.. देना चाहिए था )99 डिग्रीतुम्हें याद है जब एग्जाम्स के वक़्त मुझे ज़ुकाम हुआ था कैसे स्टीम दिला दिला करतुमने पेपर देने भेजा था और बारिश में भीग कर बुखार हुआ था तो कितना डांटा था अब भीबुखार आता है मुझे आंसू भी आने लगे हैं आजकल साथ में--------------------------------------------------------------------------------कितनी आदतें बदलनी पड़ेंगी खुद को ही बदल देना पड़ेगा शायद जैसे कि अब बेफ़िक्रनहीं रहा जा सकता खुश नहीं हुआ जा सकता कभी और सेक्स भी तो नहीं किया जा सकता--------------------------------------------------------------------------------वो सारी किसेज जो पानी पीने और सूसू करने जितनी जरूरी थीं ज़िंदगी में किसी सपने कीमानिंद गायब हो गई हैं.. ओह कितनी यादें हैं, फिल्म है पूरी कभी खत्म न होने वालीमेरी सब फालतू बातें जिनसे मम्मी तक इरिटेट हो जाती थी तुम्हीं तो थे जो सुन करमुस्कुराया करते थे और तुम, जिसकी सब आदतें मेरे पापा से मिलती थीं और वो मैसेज यादहैं हजारों एसएमएस.. मैसेज बॉक्स भरते ही डिलीट होते गए उन्हें भरोसा था कि खुदडिलीट होकर भी उन्होंने एक रिश्ते को ‘सेव’ किया है दुनिया का सबसे प्यारा रिश्ता..तुम चिढ़ जाओगे कि ये सब लिखने की बातें नहीं हैं क्यों नहीं हैं ? तुम्हारे प्यारेहोठों से भी ज्यादा प्यारे डिंपल और उनसे भी प्यारी मुस्कुराहट की याद मुझे सेक्सकी इच्छा से कहीं ज्यादा बेचैन करती है तुम्हारे शरीर की खुशबू जिसके सहारे हमेशागहरी नींद सोया जा सकता है वही तुम, जिसे निहारते हुए लगता है- काश इसे मैंने पैदाकिया होता.. जिंदा रहने की चंद बुनियादी शर्तें ही तो हैं न हवा, पानी, खाना और तुमतुम..101 डिग्रीमैं उन तमाम लड़कियों से जो प्यार में तकिए भिगोती हैं और बेहोश होती हैं माफीमांगना चाहती हूं वो सभी लोग जो बीपीएल सूची के राशन की तरह फोन रीचार्ज होने काइंतजार करते हैं जो ऑक्सीजन की बजाय सिगरेट से सांस लेते हैं वोदका के समंदर मेंतैरते हैं हमेशा दुखी रहते हैं उन पर ली गई सारी चुटकियां, तंज, ताने, मजाक मैंवापस लेती हूं104 डिग्रीऔर तुम तुम तो कभी खुश नहीं रहोगे रिलेशनशिप..अंडरस्टैंडिंग.. ईगो.. स्पेस.. नहींजानती थी मैग्जीन्स से बाहर भी इन शब्दों की एक दुनिया है-------------------------------------------------------------------------------- तुम्हारे सारे इल्ज़ाम मैं कबूल करती हूं हां, मुझमें हजारों कमियां हैं मैंनेतुम्हें जंगलियों की तरह प्यार किया है कि तुम्हें गले लगाने के पहले फ्लैट कीकिस्त और इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं जोड़ी अपना साइकोएनालिसिस नहीं किया हां, मुझेनहीं समझ आता ‘ब्रेक अप’ का मतलब नहीं आता ! तुम्हें गुस्सा आता है तो आए लेकिन आइलव यू जितनी बार तुम्हारा ब्रेक अप, उतनी बार मेरा आइ लव यू..