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बटुकों के सम्मान में ब्रजेश पाठक मैदान में, निशाना CM योगी आदित्यनाथ या BJP गेम खेल रही?

शंकराचार्य अविमुक्तेशवरानंद विवाद में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक खुलकर सामने आ गए हैं. पहले उन्होंने कहा बटुकों की चोटी खींचना महापाप है. इसके बाद उन्होंने 101 बटुकों के सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया.

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UP BJP
बाएं से दाहिने. बटुकों के साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (PTI)
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सौरभ
20 फ़रवरी 2026 (अपडेटेड: 20 फ़रवरी 2026, 04:56 PM IST)
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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अभी शंकराचार्य को 'पूजनीय' बताने वाले डिप्टी सीएम केशव मौर्या से निपट नहीं पाए थे कि दूसरे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 'बटुकों' की आड़ में मोर्चा खोल दिया. यह तो जगजाहिर था कि मौर्या की तरह पाठक भी योगी के खेमे में नहीं हैं. साल-6 महीने में एकाध बयान ऐसा दे देते हैं कि लखनऊ के 5 कालीदास मार्ग (मुख्यमंत्री आवास) का असहज हो जाता है. लेकिन अब की डिप्टी सीएम पाठक खुलकर ही सामने आ गए हैं.

मुख्यमंत्री योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेशवरानंद के बीच विवाद जितना बढ़ रहा है, यूपी सरकार के भीतर की छिपी खींचतान भी उजागर होती जा रही है. इसकी बानगी 18 फरवरी को डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के उस बयान में साफ दिखी, जिसमें उन्होंने कहा,

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मौनी अमावस्या के दिन स्नान करने जा रहे शंकराचार्य अविमुक्तेशरानंद को कथित तौर पर मेला प्रशासन ने रोक दिया था. शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की घटना हुई थी. उनके शिष्यों से मारपीट की खबरें भी आईं. एक कम उम्र के शिष्य ने कहा कि पुलिस वालों ने मारपीट के दौरान उनकी चोटी खींची. इसी पर ब्रजेश पाठक ने उसी सरकार के प्रशासन पर सवाल उठा दिए, जिसमें वह डिप्टी सीएम हैं.

अगले दिन डिप्टी सीएम पाठक ने 101 बटुकों का सम्मान किया. हालांकि, इसके बाद मीडिया से ज्यादा कुछ बोलने से बचते नज़र आए.

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बटुकों का सम्मान करते ब्रजेश पाठक. (Aaj Tak)

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों में जिस तरह के मतभेद सामने आ रहे हैं, कहा जा रहा है कि ब्रजेश पाठक तो सीधे योगी आदित्यनाथ पर निशाना साध रहे हैं. लेकिन क्या ब्रजेश पाठक सिर्फ योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए यह सब कर रहे हैं? या इस कहानी में कुछ और भी पहलू हैं?

इंडिया टुडे मैग्जीन के एसोसिएट एडिटर आशीष मिश्र कहते हैं,

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हालांकि, द लल्लनटॉप के पॉलिटिकल एडिटर पंकज झा इस बात से पूरी तरह सहमत नज़र नहीं आते. वो कहते हैं,

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पकंज झा कहते हैं कि केशव मौर्य और ब्रजेश पाठक की राजनीति में यही अंतर है. केशव मौर्य अपनी लाइन लेंथ पर बोलते हैं. लेकिन ब्रजेश पाठक हमेशा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के कहे अनुसार ही बयान देते हैं.

हालांकि, बात सिर्फ ब्राह्मणों की राजनीति की नहीं है. ब्रजेश पाठक कई ऐसे बयान देते हैं जो योगी सरकार की लाइन से इतर होते हैं या सरकार पर सवाल उठाने वाले.

जुलाई 2024 में कानपुर में वाहन चेकिंग के दौरान बहस के बाद एक बीजेपी नेता और उनके भतीजे पर FIR दर्ज कर ली गई. पाठक इस पर भड़क गए. उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा. उन्होंने कहा कि गाड़ी रोककर चेकिंग अभियान ठीक नहीं है. यह अभियान रोका जाना चाहिए. यहां यह रेखांकित किया जाना जरूरी है कि यूपी में गृह विभाग मुख्यमंत्री योगी के पास है. यानी पुलिस की जवाबदेही मुख्यमंत्री की है.

थोड़ा और पीछे लौटेंगे. योगी आदित्यनाथ की दूसरी सरकार में कुछ ही महीने बीते थे. ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बने भी कुछ ही महीने बीते थे और स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग कर दी गई. पाठक ने सार्वजनिक तौर पर कह दिया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं दी गई. उनसे बिना पूछे ही कर ट्रांसफर पोस्टिंग की गई.

बीच-बीच में उनके बयान आए, योगी के कार्यक्रमों में नदारद भी रहे, लेकिन पाठक, मौर्या की तरह कभी खुलकर विरोध करते नहीं दिखे. लेकिन शंकराचार्य विवाद में वह सामने से आ गए. इस पर आजतक के एग्जिक्यूटिव एडिटर कुमार अभिषेक अलहदा राय रखते हैं. अभिषेक कहते हैं,

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इस पूरे विवाद के बीच एक और घटनाक्रम सामने आया है. RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत लखनऊ के दौरे पर थे. 18 फरवरी को करीब 35 मिनट तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनसे मुलाकात की. अगले दिन डिप्टी सीएम केशव मौर्या भी भागवत से मिलने पहुंचे. और ब्रजेश पाठक ने भागवत के यहां भी अपनी हाजिरी लगाई.

ये सारे विवाद और ये बैठकों का दौर इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यूपी विधानसभा चुनाव में अब लगभग एक साल से भी कम समय ही बचा है.

वीडियो: राजधानी: शंकराचार्य विवाद में ब्रजेश पाठक की एंट्री, जानें क्या कहा?

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