19 अक्टूबर को ‘ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस डे’ था. कविता देवगन ने Daily-O में इस परएक आर्टिकल लिखा था. इसे हम आपको पढ़ा रहे हैें.--------------------------------------------------------------------------------ये सही समय है कि सबसे कॉमन कैंसर से जुड़े मिथ को खत्म किया जाय. लास्ट वीकविशेषज्ञों का एक पैनल कैंसर पर बहस कर रहा था. मैं भी उस पैनल का हिस्सा थी. यहबहस दिल्ली के कनॉट प्लेस में ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर में हो रही थी. यह बहुत ही मजेदारसेशन रहा. जहां हमने इस जानलेवा बीमारी के तमाम महत्तवपूर्ण पहलुओं पर बातचीत की.जैसे कि ब्रेस्ट कैंसर क्या है, कितने तरह का होता है. क्या करना चाहिए जब हमेंइसका पता चलता है. ये फैक्ट्स मर्दों को भी पता होना चाहिए. इसकी रोकथाम संभव है.और कैंसर पेशेंट का डाइट क्या होना चाहिए. इन पेशेंट्स में से कुछ ही ऐसे होते हैं.जो अपनी कहानियां लोगों को बताते हैं. एक बहुत ही अलग तरह की कहानी राहुल यादव नेसब के साथ शेयर की. ये खुद भी तीन बार मेलोमा कैंसर से अपने जिंदगी की लड़ाई लड़ चुकेहैं. और अब एक हीरो की तरह दूसरे कैंसर पेशेंट्स की मदद कर रहे हैं. और उन्होंनेऐसी एक लड़की की कहानी सुनाई. जिसे 21 साल की उम्र में ही फर्स्ट स्टेज के ब्रेस्टकैंसर पता चला. इस स्टेज पर लम्पेक्टॉमी (जिसमें सर्जरी करके लम्प को हटा दिया जाताहै) की जरुरत पड़ती है. जिससे उसके ब्रेस्ट पर एक छोटा सा निशान छूट जाता. पर समाजमें फैली टैबू की वजह से उसके मां-बाप ने उसके ब्रेस्ट की सर्जरी नहीं करवाई. यहसोच कर कि उससे कौन शादी करेगा, उसकी बहन की शादी कैसे होगी, फलाना-ढिमकाना. और वेलोग इलाज के दूसरे तरीकों को अपनाते रहे. राहुल ने हमलोगों को बताया कि इस बात केदो साल हो गए हैं. और अब उसके ब्रेस्ट की सर्जरी करना बहुत ही मुश्किल है. यह कहानीसभी के लिए एक मैसेज है. खास कर जो इलाज के मामले में लापरवाही करते हैं. हम लोगलगभग अपने सेशन को खत्म ही करने जा रहे थे कि तभी ऑडियंस में से एक औरत जो कि हमेंबहुत गौर से सुन रही थी, अचानक से खड़ी हो गई. और हमसे एक सवाल करने लगी. बताया किवो 34 साल की है. अपनी मर्जी से अनमैरिड है. वो अपने ब्रेस्ट की गांठ को लेकरचिंतित थी. जिसे वो पिछले कुछ दिनों से महसूस कर रही थी. वो बोलते-बोलते रोने लगीऔर बताया कि वो डॉक्टर के पास जाने से डरती है. चेक-अप के बाद कहीं ये कैंसर न निकलजाए. वो कहने लगी कि मुझे मरने से डर लगता है. पर जबसे मुझे अपने ब्रेस्ट में गांठका पता चला है, मैं रोज मर रही हूं. इन सारी बातों का जिक्र उस औरत ने अब तक किसीसे भी नहीं किया था. और जब सभी लोगों को कैंसर पर खुल कर बोलते हुए देखा तब उसने इनसारी बातों का जिक्र किया. तब हमें भी इस बात का पता चला कि ऐसे सेशंस कितनेमहत्त्वपूर्ण हैं. वो इस बात से भी चिंतित थी कि बच्चे न होने की वजह से इस बीमारीका खतरा और भी बढ़ जाता है. फिर भी उसने कहा, “सिंगल रहना मेरे मर्जी की चॉइस हैक्योंकि मैं खुद को बदलने के लिए तैयार हूं”. यह बोलते हुए वो सबके सामने जोर-जोरसे रोने लगी. हम सभी लोगों ने उसको समझाया कि बिना देर किए हुए उसको डॉक्टर के पासजाना चाहिए. और अपनी गांठ का चेक-अप कराना चाहिए. जिससे पता लग सके कि कहीं यह गांठखतरनाक तो नहीं है. हमने उसे ये भी समझाया कि उसे अपनी शादी न करने वाली बात परज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. क्योंकि ये सैकड़ों रिस्क फैक्टर्स में से यह एकरिस्क फैक्टर है. मैंने उसे अपना वजन कम करने को कहा. जो कि एक हायर रिस्क फैक्टरहै. काफी समझा बुझा कर हमने उसे शांत कराया. ज्यादा समय नहीं बचा था. जिसकी वजह सेमैं उसे कैंसर के रिस्क से बचाने वाले उपायों के बारे में नहीं बता पाई. इसलिए मैंअभी उस एक्सरसाइज को बता रही हूं. उम्मीद करती हूं कि लोग इससे डरने के बजाय इसेपढ़ेंगे. और इस एक्सरसाइज को करने से रिस्क फैक्टर्स को बहुत हद तक कम किया जा सकताहै. जो कि हर किसी के अपने बस में है. यहां तक कि एक फीसदी मर्दों को भी ब्रेस्टकैंसर होने का खतरा रहता है.रिस्क को कम भी किया जा सकता हैआपका खाना एक बहुत बड़े फैक्टर के रूप में काम करता है. इसलिए अपने खाने का प्लेटसाफ-सुथरा रखना चाहिये. और जहां तक हो सके सफाई का पूरा ख्याल रखना चाहिए. ज्यादामोटा होना इस खतरे को बढ़ाता है. बॉडी में फैट टिश्यू का ज्यादा होना, बॉडी मेंएस्ट्रोजन के लेवल का ज्यादा होना, एस्ट्रोजन का तेजी से बढ़ना, इन सारी चीजों कीवजह से ब्रेस्ट में ट्यूमर हो सकता है. और हमें इस बात से भी सचेत रहना चाहिए किकहीं बॉडी में ज्यादा फैट तो नहीं इकट्ठा हो रहा है. क्योंकि ज्यादा मोटापा एकरिस्क फैक्टर हो सकता है. स्टडी से पता चलता है कि स्मोकिंग और ड्रिंकिंग इसकेरिस्क को 12 पर्सेंट और 13 पर्सेंट के हिसाब से बढ़ा सकता है. ज्यादा स्मोकिंग हाईरिस्की हो सकता है. जिसके लिए हमें सावधानी बरतने की जरुरत है. फिजिकल एक्सरसाइज कीकमी भी एक फैक्टर हो सकती है. एक स्टडी के हिसाब से हर हफ्ते सवा से ढाई घंटे तक कीब्रिस्क वॉकिंग ही ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को 18 पर्सेंट तक कम कर सकती है. वॉकिंगतो की जा सकती है.अंत में, अगर आप अपने काम और रिश्तों को लेकर ज्यादा चिंतित रहतेहैं तो तनाव, भय, चिंता और सैकड़ों गड़बड़ियां पैदा हो सकती हैं. और स्टडी केमुताबिक इस वजह से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा दोगुना हो जाता है. इस बहस की सारीबातें औरतों और दूसरों के लिए महत्त्वपूर्ण मैसेज रहीं. अपने ब्रेस्ट के गांठ कोलेकर हरदम चिंतित रहना. इलाज के लिए कुछ नहीं करना. यह उस महिला का डर था. जबकि होसकता है कि उसकी गांठ खतरनाक ना हो. तो पहले चिंता करना छोड़ दीजिए. अभी, इसी वक्त!--------------------------------------------------------------------------------तो रंग बिरंगी ब्रा पहनने से होता है ब्रेस्ट कैंसर!तुम लोगों के कॉन्डम न पहनने से जाने कितनी औरतें डिप्रेशन में हैंदेख लो मर्दों, बड़े ब्रेस्ट हों तो ऐसा लगता है