The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • book review: the legend of lakshmi prasad by twinkle khanna

'जब उसका पांचवां पति भी मानसिक रोगी निकलता है, तो वो उसे छोड़ देती है'

कौन है लक्ष्मी प्रसाद जिसके बारे में बात हो रही है?

Advertisement
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
pic
प्रतीक्षा पीपी
22 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 22 नवंबर 2016, 12:54 PM IST)
font-size
Small
Medium
Large
font-size
Small
Medium
Large
whatsapp share
किताब: द लीजेंड ऑफ़ लक्ष्मी प्रसाद ऑथर: ट्विंकल खन्ना पब्लिशर: जगरनॉट पन्ने: 233
  'द लीजेंड ऑफ़ लक्ष्मी प्रसाद' ट्विंकल खन्ना की लिखी दूसरी किताब है. फिक्शन पहला है. इसके पहले 'टाइम्स ऑफ़ इंडिया' के लिए लिखे गए ट्विंकल के कॉलम उनके ट्विटर हैंडल 'मिसेज फनीबोन्स' के नाम से प्रकाशित हुए थे. इस किताब में 4 कहानियां हैं. ये चारों कहानियां अलग-अलग हैं. अपने आप में मुकम्मल. लघु उपन्यास, या लंबी कहानियों जैसे. लेकिन इन्हें एक चीज जोड़ती है. वो हैं औरतें. उनका जीवन, उनकी तकलीफें, उनकी छोटी-छोटी खुशियां, दुख.  पीरियड से लेकर प्रेगनेंसी तक हर तरह की शारीरिक समस्याएं.

1.

पहली कहानी लक्ष्मी की है, जिसके नाम से नॉवेल को अपना टाइटल मिलता है. ये गांव में रहने वाली एक लड़की की कहानी है जिसकी बड़ी बहन को एक आदमी के साथ ब्याह दिया गया है. आदमी उसे पीटता है, दहेज़ के लिए तंग करता है. प्रेगनेंट होकर जब उसकी बहन घर आ जाती है, लक्ष्मी उसके शरीर की तकलीफों को करीब से देखती है. जब उसकी बहन को लड़की पैदा होती है, उसके ससुराल वाले उसे बुलाने से मना कर देते हैं. और तब लक्ष्मी के मन में उपजता है एक बीज. बल्कि यूं कहें, एक आम की गुठली. लक्ष्मी को याद आता है कैसे उसने एक दिन खेल खेल में अपनी बहन के साथ आम की एक गुठली बो दी थी. और बड़ा होकर वो पेड़ स्वादिष्ट आम देने लगा था. लक्ष्मी अपनी भांजी के नाम आम के दो पेड़ लगाती है. और गांव वालों को सिखाती है उन्हें भी हर लड़की के पैदा होते ही ऐसा ही करना चाहिए. और उस दिन के बाद से गांव में पैदा होने वाली हर बच्ची के नाम दो -दो आम के पेड़ हो जाते हैं. जिससे होने वाली कमाई से उन्हें किसी के आगे हाथ नहीं फैलाने पड़ते.

2.

दूसरी कहानी में हम दो बहनों को देखते हैं. बुढ़ाती, मेकअप पोतती. दोनों बहनों के पति मर चुके हैं और दोनों ही अब अपने अपने घर में अकेले रहती हैं. कभी शॉपिंग, तो कभी किसी काम के लिए मिलती हैं. तभी छोटी बहन बिन्नी पर योग सीखने का भूत सवार होता है. और वो एक योग टीचर को रख लेती है. बिन्नी का तो जी दो ही क्लास के बाद ऊब जाता है, लेकिन बड़ी बहन नोनी अप्पा को अपने अकेलेपन का साथी मिल जाता है. 68 साल की एक औरत कैसे एक शादीशुदा मर्द से प्रेम कर बैठती है, उसकी कहानी है ये. ये बूढ़ा कपल एक दूसरे के प्रेम में खोने लगता है. एक ऐसा प्रेम, जिसमें जवानी का आकर्षण नहीं है, बल्कि बुढ़ापे का ठहराव है. दोनों एक दूसरे के शरीर नहीं , मन के करीब आते हैं. एक दूसरे के अकेलेपन को भरने लगते हैं. तब तक, जब तक योग टीचर की पत्नी को ये सब मालूम नहीं पड़ जाता. घर में उठा-पटक, लड़ाई झगड़ा होता है. लेकिन अंत में योग टीचर बिन्नी के पास वापस चला जाता है.

3.

तीसरी कहानी एक ऐसी इसाई लड़की की है, जिसे अपनी शर्तों पर जीना पसंद है. और समाज के तयशुदा मानकों के हिसाब से जिसको कभी ऐसे पति नहीं मिले जिनके लिए उसके अंदर से प्रेम उमड़ सके. वो 5 शादियां करती है. और एक अजीब सी आदत के चलते हर शादी के पहले वेदर फोरकास्ट पढ़ती है. मानो आने वाले तूफ़ान का अंदेशा खोज रही हो. जब उसका पांचवां पति भी मानसिक रोगी निकलता है, वो उसे छोड़ देती है. और एक दिन खुद मौत के हवाले हो जाती है.

4.

चौथी कहानी अरुणाचलम मुरुगानान्थम की रियल लाइफ कहानी से इंस्पायर्ड है. एक पुरुष जो अपनी पत्नी से खूब प्रेम करता है. उसके लिए अक्सर गिफ्ट लाता है. एक दिन वो पाता है कि उसकी पत्नी पीरियड में कपड़े का इस्तेमाल करती है. इस बात से विचलित होकर वो उसके लिए पैड खरीदने जाता है तो उसे मालूम पड़ता है कि पैड इतने महंगे हैं कि आम औरतें उसे खरीद ही नहीं सकतीं. वो रुई और बकरी के खून से तरह-तरह के एक्सपेरिमेंट करता है एक सस्ता पैड बनाने के लिए. उसका जुनून इस हद तक पहुंच जाता है कि गांव की औरतें मुंह दबाकर उस पर हंसने लगती हैं. लोग उसे पागल कहने लगते हैं. पत्नी मायके चली जाती है. मां और बहन घर छोड़ के मौसी के यहां चले जाते हैं क्योंकि और बदनामी उनसे बर्दाश्त नहीं होती. लेकिन वो जुटा रहता है. गांव छोड़ देता है. शहर में छोटी नौकरी करता है. एक प्रोफेसर की मदद से रिसर्च करता है. अंग्रेजी के ट्यूशन लेता है. और एक दिन वो पा लेता है जो उसे चाहिए. एक चौथाई दाम के सेनेटरी पैड बनाता है. फेमस हो जाता है और अपने परिवार में वापस लौट जाता है.
 
Embed
ये फिल्म होती तो मैं आपसे कहती कि एक बार देख सकते हैं. लेकिन किताब है इसलिए मैं कहूंगी कि आप इसमें इन्वेस्ट न ही करें तो अच्छा है. हालांकि एक राइटर के तौर पर ट्विंकल अपनी पिछली किताब से बेहतर लिख रही हैं. लेकिन अगर पिछली किताब भी फिक्शन होती तो शायद कोई फैसला सुनाने में आसानी होती. अगर आप बसों और मेट्रो में हल्की किताबें पढ़ना पसंद करते हैं, तो इसे पढ़ सकते हैं. लेकिन ये कोई ऐसी चीज नहीं जिसे आप अपने कलेक्शन में जोड़ना चाहें.
lakshmir_111116094138

Advertisement

Advertisement

()