रामचंद्र गुहा ने जब 1965 में इस खेल को फॉलो करना शुरू किया था, तब विश्व क्रिकेटमें भारत का कद बहुत छोटा था. देश ने तब तक विदेशी धरती पर एक भी टेस्ट मैच नहींजीता था. कुछ 50 साल बाद जब वो बीसीसीआई में शामिल हुए, भारत इस खेल पर एकछत्र राजकर रहा था. क्रिकेट का कॉमनवेल्थ इस बदलाव की कहानी है. इस किताब के जरिये आप भारतमें स्कूल, कॉलेज, क्ल, राज्य और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेले जाने वाले क्रिकेट कीनस-नस से वाकिफ हो सकते हैं. ये किताब स्थानीय नायकों, प्रांतीय उस्तादों औरअंतर्राष्ट्रीय सितारों की चमकदार तस्वीर पेश करती है.