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प्रमोद सावंत: आयुर्वेदिक डॉक्टर से 11 साल में गोवा के मुख्यमंत्री बनने की कहानी

जानिए RSS मैन प्रमोद सावंत कैसे पहुंचे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक?

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19 मार्च 2019 (अपडेटेड: 19 मार्च 2019, 07:03 AM IST)
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मनोहर पर्रिकर की विरासत प्रमोद सावंत के हाथ है. साभार फेसबुक.
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गोवा के कोई 15 लाख लोगों को नया सीएम मिल गया. नए सीएम होंगे प्रमोद सावंत. 57 साल 3 महीने पहले 19 दिसंबर, सन 61 को गोवा पुर्तगाल से आजाद हुआ. और भारत का अटूट अंग बन जाता है. तब से गोवा पूरब और पश्चिम की सभ्यता का संगम बना हुआ है. और ये संगम इस छोटे से राज्य की पहचान है. गोवा की इस विरासत को मनोहर पर्रिकर ने सालों साल संभालकर रखा. अब पर्रिकर की विरासत प्रमोद सावंत के हाथ है. आयुर्वेद के डॉक्टर रहे प्रमोद सावंत बीजेपी के 12 विधायकों में से अकेले हैं, जो आरएसएस की बैकग्राउंड से हैं. सीएम पद की शपथ लेने से पहले तक वे गोवा विधानसभा के अध्यक्ष थे. 46 साल के सावंत को राजनीति में लाने का श्रेय मनोहर पर्रिकर को ही जाता है. सावंत ज्यादा वक्त तक आरएसएस में नहीं रहे. वे गोवा के बिचोलिम तालुका की आरएसएस शाखा के बौद्धिक प्रमुख थे. पर जल्द ही राजनीति में आ गए.
प्रमोद सावंत का आरएसएस से जुड़ाव कैसे हुआ? प्रमोद सावंत 24 अप्रैल, 1973 को पैदा हुए. पिता पांडुरंग सावंत जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं. वे भारतीय जनसंघ और भारतीय मजदूर संघ में भी एक्टिव थे. बीजेपी में काफी समर्पित कार्यकर्ता के तौर पर उनकी पहचान है. घर में संघ का माहौल था. असर प्रमोद पर भी पड़ा. स्कूल की पढ़ाई के बाद प्रमोद ने महाराष्ट्र के कोल्हापुर की गंगा एजुकेशन सोसायटी से आयुर्वेदिक चिकित्सा में ग्रेजुएशन किया. फिर पुणे की तिलक महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से प्रमोद ने सोशल वर्क में पोस्ट ग्रेजुएशन किया. प्रमोद सावंत आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के डॉक्टर हैं. उन्होंने मेडिको-लीगल सिस्टम का भी अध्ययन किया है. प्रमोद सावंत की पत्नी सुलक्षणा केमिस्ट्री की टीचर हैं. वे बीकोलिम के श्री शांतादुर्गा हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षिका हैं. सुलक्षणा सावंत भाजपा महिला मोर्चा की गोवा इकाई की अध्यक्ष भी हैं.
प्रमोद सावंत आरएसएस के रास्ते भाजपा में आए. संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ प्रमोद सावंत. फोटो साभार फेसबुक.
प्रमोद सावंत आरएसएस के रास्ते भाजपा में आए. संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ प्रमोद सावंत. फोटो साभार प्रमोद सावंत फेसबुक.

डॉक्टरी छोड़कर राजनीति में कैसे आ गए? प्रमोद सावंत पढ़ाई के बाद सरकारी नौकरी में आ गए थे. साल 2008 में मनोहर पर्रिकर उनको राजनीति में ले आए. उस वक्त प्रमोद मापुसा के उत्तरी जिला अस्पताल में आयुर्वेद के डॉक्टर थे. बीजेपी नेतृत्व के कहने पर उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया. पार्टी ने उनको सांकेलिम सीट से उपचुनाव लड़ाया. प्रमोद चुनाव हार गए. इस बीच सांकेलिम सीट का नाम बदलकर साखली हो गया. प्रमोद 2012 में यहां से चुनाव जीते. फिर साल 2017 में यहां से एक बार फिर विधायक बने. मनोहर पर्रिकर मुख्यमंत्री बने. प्रमोद सावंत विधानसभा अध्यक्ष. गोवा के राजनीतिक इतिहास में वे सबसे कम उम्र के विधानसभा अध्यक्ष थे. प्रमोद भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और युवा मोर्चा के ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे हैं.
सीएम की कुर्सी तक कैसे पहुंचे प्रमोद सावंत? एक तरफ मनोहर पर्रिकर की अंतिम विदाई. दूसरी ओर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पणजी के एक होटल में सत्ता की गोटियां सेट करने में जुटे थे. वे प्रमोद सावंत, सहयोगी दलों में महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी के नेता सुदीन धवलीकर और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई के साथ बैठक में बिज़ी थे. अमित शाह और गडकरी गोवा की सत्ता बीजेपी के हाथ से जाने नहीं देना चाह रहे थे. इससे पहले गडकरी ने कहा था, 'मुख्यमंत्री हर हाल में बीजेपी से होगा और हम सहयोगियों से इसके लिए बातचीत करेंगे.' ये बात प्रमोद सावंत के पक्ष में गई. प्रमोद सावंत की दावेदारी पर्रिकर ने भी मजबूत की. ये बात भाजपा का हर नेता जानता था कि सावंत पर्रिकर की पहली पसंद थे. पर्रिकर चाहते थे कि अगला सीएम भाजपा से ही होना चाहिए. प्रमोद सावंत की पार्टी के लिए वफादारी भी संदेह से परे थी. भाजपा को गोवा में एक ऐसे नेता की जरूरत थी, जो पार्टी को अगले 10-15 साल तक पार्टी की अगुवाई कर सके. इन सब हालात ने माहौल सावंत के पक्ष में कर दिया.
प्रमोद सावंत को राजनीति में लाने का श्रेय मनोहर पर्रिकर को जाता है. फोटो सभार, फेसबुक.
प्रमोद सावंत को राजनीति में लाने का श्रेय मनोहर पर्रिकर को जाता है. फोटो सभार, फेसबुक.

 
राजनीति में कैसा रहा है अब तक का सफर? पहला चुनाव 2008 में लड़े जो हार गए. 2012 के चुनाव में प्रमोद सावंत ने कांग्रेस के प्रताप गौंस को हराया था. तब सावंत को 14,255 वोट मिले थे. साल, 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रमोद सावंत ने 10,058 वोट हासिल किए थे. उन्होंने कांग्रेस के धर्मेश प्रभुदास सगलानी को हराया था. प्रमोद सावंत को सगलानी से 32 फीसद ज्यादा वोट मिले थे.  2017 में वो चुनाव जीते और विधानसभा अध्यक्ष बने. सितंबर, 2018 में कांग्रेस ने उनको विधानसभा अध्यक्ष पद से हटाने का नोटिस दिया था.
गोवा विधानसभा की दलीय स्थिति कैसी है? 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में भाजपा के पास महज 12 विधायक हैं. भाजपा को गोवा फॉरवर्ड पार्टी, एमजीपी और 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है. भाजपा विधायक फ्रांसिस डिसूजा और मनोहर पर्रिकर का निधन हो चुका है. कांग्रेस के दो विधायक इस्तीफा दे चुके हैं. इससे विधानसभा में 36 सदस्य बचे हैं. कांग्रेस के पास कुल 14 विधायक हैं.
 
प्रमोद बोले- मैं जो भी कुछ हूं मनोहर पर्रिकर की वजह से ही हूं. फोटो साभार, फेसबुक.
प्रमोद बोले- मैं जो भी कुछ हूं मनोहर पर्रिकर की वजह से ही हूं. फोटो साभार, फेसबुक.

क्या बोले प्रमोद सावंत?
 
'पार्टी ने जो जिम्मेदारी मुझे दी है, उसे निभाने की मेरी पूरी कोशिश रहेगी. मैं जो भी कुछ हूं मनोहर पर्रिकर की वजह से ही हूं. वे ही मुझे राजनीति में लाए और उन्हीं की बदौलत मैं गोवा विधानसभा का स्पीकर बना.'
-प्रमोद सावंत, गोवा के नए मुख्यमंत्री, शपथ ग्रहण से पहले. 
शपथ लेने के बाद प्रमोद सावंत ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा,
'मैंने अपने आदर्श और गुरु पिता के प्रति आभार के साथ मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया है. राज्य में शोक है. इसलिए मैं अपने सभी मित्रों, परिवार और कार्यकर्ताओं से अपील करता हूं कि मुझे बधाई के साथ गुलदस्ते देने से बचें. मैं सुशासन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने में आपका आशीर्वाद और समर्थन चाहता हूं. जय हिन्द!'
उनके फेसबुक प्रोफाइल को देखने के बाद पता चलता है कि प्रमोद सावंत को उनके समर्थक बहुत पहले से उनको भावी सीएम मान रहे थे. सावंत के समर्थक अक्सर उनको नेक्स्ट सीएम कहकर उत्साहित करते रहते थे.


वीडियोः पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की जिंदगी के किस्से |दी लल्लनटॉप शो| Episode 176

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