सेना का इस्तेमाल बॉर्डर सुरक्षित करने के लिए नहीं, चंदा इकट्ठा करने के लिए हो रहा है
बीजेपी चंदा इकट्ठा करने के लिए सेना से लेकर गरीब तक की तस्वीर यूज कर रही है.
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फोटो - thelallantop
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हमारे देश की सेना बड़े काम की है. बॉर्डर पर तैनात रहते हैं ताकि आतंकियों को आदमपुर भेज सकें. कहीं बाढ़ आती है तो सेना को याद किया जाता है. वो अपने जिस्म का पुल बनाकर लोगों को निकालते हैं. कहीं भूकंप आता है तो रेस्क्यू में सेना की मदद ली जाती है. कहीं दंगा भड़कता है तो सैनिक मोर्चा थाम लेते हैं. पूरे देश में कहीं भी किसी ताकतवर दुश्मन से मुकाबला करना हो, आखिरी उम्मीद सेना होती है. और तो और कोई बहस में हार रहा हो तो उसकी मदद भी सेना करती है. वो भड़ाक से बोल देता है "वहां सीमा पर जवान मर रहे हैं." अक्षय कुमार ने बताया है कि एक सैनिक कभी हॉलिडे पर नहीं रहता. वो हमेशा काम पर रहता है. अभी देश की सबसे बड़ी पार्टी ने सेना को चंदा बटोरने के लिए इस्तेमाल किया है. देखिए.

चंदा इकट्ठा करना हर पार्टी का अधिकार है. बीजेपी ने मिस्डकॉल के बेस पर खुद को सबसे बड़ी पार्टी घोषित किया है. अभी पांच राज्यों में मिली हार छोड़ दी जाए तो ज्यादातर राज्यों में उसकी सरकार है. केंद्र में उसकी सरकार एक कार्यकाल पूरा कर रही है. चुनाव में लगभग 6 महीने बाकी हैं. अगर बीजेपी देश और प्रदेशों की अपनी एक एक उपलब्धि पर रोज एक पोस्टर लगाए तो 6 महीने आराम से निकल जाएंगे. साढ़े चार साल में इतना काम तो कर ही दिया है. जितने शहरों, स्टेशनों के नाम बदले हैं, महीना भर तो उन्हीं के नाम का कोलाज बनाकर चला सकते हैं. स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसी कितने काम किए हैं बीजेपी की सरकारों ने, सब उठा लें. सेना को बख्श दें. सेना देश के लिए है, पार्टियों के लिए नहीं. इतिहास में इससे पहले भी सेना की फोटो का इस्तेमाल कभी पार्टी के लिए चंदा एकत्र करने के लिए किया गया हो तो प्लीज स्क्रीनशॉट दिया जाए. इस परंपरा का टूटना बहुत जरूरी है. और अगर सेना की तस्वीर लगा रहे हैं तो सेना के लिए क्या क्या किया, इसके आंकड़े भी साथ में लगाएं. इससे पूरा जस्टिफाई तो नहीं होगा लेकिन लोगों को पता तो चलेगा कि फिजूल फुटेज नहीं खाई जा रही है.
अब ये वाली तस्वीर देख लीजिए. 6 नवंबर को पोस्ट की गई थी. बीजेपी के पेज पर. फिर पोस्ट स्पॉन्सर भी की गई. चंदा फेसबुक पोस्ट स्पॉन्सर करने के लिए नहीं, पीएम को दोबारा पीएम बनाने के लिए चाहिए. लेकिन गरीब पर गर्व कौन करता है भई? अगर गरीब गर्व करने के लिए है तब तो गरीबी कभी खत्म नहीं होनी चाहिए. नहीं तो हमारे पास गर्व करने की एक चीज खत्म हो जाएगी. इस पोस्टर से तो यही समझ आता है कि गरीब की गरीबी मिटाने की कोई मंशा किसी सरकार की है ही नहीं. आप खुद सोचिए. हम अपनी सेना पर गर्व करते हैं, क्या उसे कभी खत्म होने देंगे? हमको अपनी संस्कृति पर गर्व है, हम क्या उसे खत्म करना चाहेंगे? हमको गरीब पर गर्व है, हम क्या गरीबी खत्म करना चाहेंगे?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स का ग्राफ
भुखमरी भारत में एक बड़ी समस्या है. 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 103वीं पायदान पर है. खुश होना है तो इससे हो लीजिए कि पाकिस्तान हमसे बदतर है. लेकिन बुरी खबर ये कि नेपाल और बांग्लादेश की हालत हमसे बेहतर है. ये आंकड़ा ग्लोबल हंगर इंडेक्स का है. बीजेपी की सरकार बनने के बाद भुखमरी का आंकड़ा बढ़ता गया और देश रैंकिंग में गिरता गया. 2014 में भारत 55वें स्थान पर था, 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और 2017 में 100वें स्थान पर आ गया. अब आप भूखे मरते गरीब पर गर्व कर सकते हैं. दूसरी तरफ बीजेपी इस साल देश की सबसे अमीर पार्टी बन गई है. फाइनेंसियल इयर 2017 में पार्टी ने कुल 1034 करोड़ रुपए कमाए थे.
देखो ऐसा है कि सभी पार्टियां चंदा लेती हैं. आम आदमी पार्टी का तो नाम ही चंदा पार्टी कर दिया गया था. किसी भी पार्टी को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए अपनों का साथ और धन दोनों चाहिए. अच्छी डेमोक्रेसी के लिए ये बेहद जरूरी है कि लोग खुद अपनी पार्टी को चंदा दें. क्योंकि चुनाव लड़ने में आजकल बहुत पैसा लगता है. अगर वो पैसा आपका चंदा होगा तो बनने वाली सरकार की जवाबदेही आपके प्रति होगी. अगर उद्योगपतियों से चंदा लिया जाएगा तो सरकार बनने पर जवाबदेही उद्योगपति के प्रति होगी. लेकिन पार्टी की जिम्मेदारी भी ये है कि वो चंदा चुनाव लड़ने के लिए ले तो अपनी प्रायोरिटी सामने रखे और चंदा देने वालों को उनके पैसे का ब्यौरा दे. कितना पैसा 5 स्टार पार्टी दफ्तर बनने में लगा और कितना चुनाव प्रचार में खर्च हुआ. इसमें जनता के टैक्स का पैसा इस्तेमाल न हो. और चंदा मांगने में तो सेना की तस्वीर या गरीब पर गर्व करने वाली तस्वीरें इस्तेमाल न ही हों.
देखें वीडियो, जज ने क्यों लिखा कि भारत को हिंदू देश घोषित कर देना था?

चंदा इकट्ठा करना हर पार्टी का अधिकार है. बीजेपी ने मिस्डकॉल के बेस पर खुद को सबसे बड़ी पार्टी घोषित किया है. अभी पांच राज्यों में मिली हार छोड़ दी जाए तो ज्यादातर राज्यों में उसकी सरकार है. केंद्र में उसकी सरकार एक कार्यकाल पूरा कर रही है. चुनाव में लगभग 6 महीने बाकी हैं. अगर बीजेपी देश और प्रदेशों की अपनी एक एक उपलब्धि पर रोज एक पोस्टर लगाए तो 6 महीने आराम से निकल जाएंगे. साढ़े चार साल में इतना काम तो कर ही दिया है. जितने शहरों, स्टेशनों के नाम बदले हैं, महीना भर तो उन्हीं के नाम का कोलाज बनाकर चला सकते हैं. स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का इस्तेमाल कर सकते हैं. ऐसी कितने काम किए हैं बीजेपी की सरकारों ने, सब उठा लें. सेना को बख्श दें. सेना देश के लिए है, पार्टियों के लिए नहीं. इतिहास में इससे पहले भी सेना की फोटो का इस्तेमाल कभी पार्टी के लिए चंदा एकत्र करने के लिए किया गया हो तो प्लीज स्क्रीनशॉट दिया जाए. इस परंपरा का टूटना बहुत जरूरी है. और अगर सेना की तस्वीर लगा रहे हैं तो सेना के लिए क्या क्या किया, इसके आंकड़े भी साथ में लगाएं. इससे पूरा जस्टिफाई तो नहीं होगा लेकिन लोगों को पता तो चलेगा कि फिजूल फुटेज नहीं खाई जा रही है.
गरीब पर गर्व?

अब ये वाली तस्वीर देख लीजिए. 6 नवंबर को पोस्ट की गई थी. बीजेपी के पेज पर. फिर पोस्ट स्पॉन्सर भी की गई. चंदा फेसबुक पोस्ट स्पॉन्सर करने के लिए नहीं, पीएम को दोबारा पीएम बनाने के लिए चाहिए. लेकिन गरीब पर गर्व कौन करता है भई? अगर गरीब गर्व करने के लिए है तब तो गरीबी कभी खत्म नहीं होनी चाहिए. नहीं तो हमारे पास गर्व करने की एक चीज खत्म हो जाएगी. इस पोस्टर से तो यही समझ आता है कि गरीब की गरीबी मिटाने की कोई मंशा किसी सरकार की है ही नहीं. आप खुद सोचिए. हम अपनी सेना पर गर्व करते हैं, क्या उसे कभी खत्म होने देंगे? हमको अपनी संस्कृति पर गर्व है, हम क्या उसे खत्म करना चाहेंगे? हमको गरीब पर गर्व है, हम क्या गरीबी खत्म करना चाहेंगे?

ग्लोबल हंगर इंडेक्स का ग्राफ
भुखमरी भारत में एक बड़ी समस्या है. 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 103वीं पायदान पर है. खुश होना है तो इससे हो लीजिए कि पाकिस्तान हमसे बदतर है. लेकिन बुरी खबर ये कि नेपाल और बांग्लादेश की हालत हमसे बेहतर है. ये आंकड़ा ग्लोबल हंगर इंडेक्स का है. बीजेपी की सरकार बनने के बाद भुखमरी का आंकड़ा बढ़ता गया और देश रैंकिंग में गिरता गया. 2014 में भारत 55वें स्थान पर था, 2015 में 80वें, 2016 में 97वें और 2017 में 100वें स्थान पर आ गया. अब आप भूखे मरते गरीब पर गर्व कर सकते हैं. दूसरी तरफ बीजेपी इस साल देश की सबसे अमीर पार्टी बन गई है. फाइनेंसियल इयर 2017 में पार्टी ने कुल 1034 करोड़ रुपए कमाए थे.
देखो ऐसा है कि सभी पार्टियां चंदा लेती हैं. आम आदमी पार्टी का तो नाम ही चंदा पार्टी कर दिया गया था. किसी भी पार्टी को अपने पैरों पर खड़े होने के लिए अपनों का साथ और धन दोनों चाहिए. अच्छी डेमोक्रेसी के लिए ये बेहद जरूरी है कि लोग खुद अपनी पार्टी को चंदा दें. क्योंकि चुनाव लड़ने में आजकल बहुत पैसा लगता है. अगर वो पैसा आपका चंदा होगा तो बनने वाली सरकार की जवाबदेही आपके प्रति होगी. अगर उद्योगपतियों से चंदा लिया जाएगा तो सरकार बनने पर जवाबदेही उद्योगपति के प्रति होगी. लेकिन पार्टी की जिम्मेदारी भी ये है कि वो चंदा चुनाव लड़ने के लिए ले तो अपनी प्रायोरिटी सामने रखे और चंदा देने वालों को उनके पैसे का ब्यौरा दे. कितना पैसा 5 स्टार पार्टी दफ्तर बनने में लगा और कितना चुनाव प्रचार में खर्च हुआ. इसमें जनता के टैक्स का पैसा इस्तेमाल न हो. और चंदा मांगने में तो सेना की तस्वीर या गरीब पर गर्व करने वाली तस्वीरें इस्तेमाल न ही हों.
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