ओपिनियन: कंगना रनौत और आहत होने की लोकतांत्रिक प्रतियोगिता
मनुष्य ने जितनी सदियां मुखौटे बनाने में लगाई है, उतनी शायद आईने बनाने में भी नहीं लगाई. यह बात सभी जानते हैं कि हम अपने समय में विचारों से कम, विचारों की पैकेजिंग से ज़्यादा प्रभावित होते हैं. कंगना के हर बयान से सहमत नहीं हुआ जा सकता.
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कंगना के Gen Z बयान पर विवाद छिड़ गया. (तस्वीर- पीटीआई)
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