किसी ज्ञानी ने कहा है, जो खेल के मैदान में जाते हैं, उन्हें युद्ध के मैदान मेंजाने की ज़रूरत नहीं होती. खिलाड़ी शांति के दूत हैं. वीरेंद्र सहवाग और शोएब अख्तरमें लाख स्लेजिंग और कहासुनी हुई हो लेकिन कभी गोली चलाने की नौबत नहींआएगी. हाल-फिलहाल में ही नहीं, रह-रहकर भारत-पाकिस्तान में ऐसी तनातनी बनती है किसरहद और खेल के मैदान दोनों पर नुकसान होता है. आमतौर पर दोनों आपस में नहीं खेलपाते. पाकिस्तान में तो हालात ऐसे हैं कि खुद आतंकी संगठन वाले खेलना चाहें, तो कोईदूसरा आतंकी संगठन हमला कर दे. ऐसे माहौल में जब कभी दोनों देशों को आपस में खेलनाही पड़ जाए तो खेल सिर्फ खेल नहीं रह पाता, युद्ध हो जाता है. इसी दौरान कुछ घटनाएंऐसी हो जाती हैं जो उम्मीद की किरणें जगा देती हैं. अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दोंमें ये दीवार गिरा तो नहीं सकते लेकिन एक-दो ईंट तो खिसका सकते हैं ताकि ताक-झांकहो सके. कल भारत के डिफेंडर बीरेंद्र लाकड़ा ने ऐसी ही एक कोशिश की.एचआईएलकल भारत ने पाकिस्तान को एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में 3-2 से हराकर 5 सालबाद यह खिताब जीता. भारत-पाक मैच में रफ-टैकल, मारा-मारी होना साधारण बात है. इस आगमें घी का काम करती हैं दर्शक-दीर्घा से आनी वाली गालियां. ऐसा माहौल हो तो कम हीखिलाड़ी खेल-भावना दिखा पाते हैं. पर इस सबके बावजूद बीरेंद्र लाकड़ा ने ऐसीखेल-भावना दिखाई कि पाकिस्तानी कोच ने भी आकर गले लगा लिया.भारत ने 51वें मिनट में गोल करके 3-2 की बढ़त बना ली थी, पाकिस्तानी टीम ऑल-आउटहमला कर रही थी. पाकिस्तान के गोल स्कोरर बिलाल अमील को भारत के सर्कल पर गेंदमिली. बिलाल 2 खिलाड़ियों को छकाकर सर्कल में खड़े अपने साथियों को गेंद पास करनाचाह रहे थे. गेंद लाकड़ा को छूकर बैकलाइन से बाहर चली गई और अंपायर ने कोने से हिटलेने के लिए कह दिया. पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने तुरंत पेनल्टी कॉर्नर की अपील की.पाकिस्तानी टीम ने अपना रिव्यू इस्तेमाल करने के लिए कह दिया. जैसे ही अंपायर नेसीटी बजाई और खेल रोका गया, बीरेंद्र लाकड़ा भागकर अंपायर के पास गए और कहा, 'येपेनल्टी कॉर्नर है, कृपया पाकिस्तान का आखिरी रैफरल इस्तेमाल ना करें. आप ऐसी जगहखड़े थे कि शायद आप देख नहीं पाए.' ऐसा मैच जो आपको नायक-खलनायक बना दे, ऐसी स्थितिकी कोई भी हार-जीत जाए, उस मौके पर अंपायर को भी लाकड़ा की ईमानदारी पर अचंभा हुआऔर उन्होंने रिव्यूवर को चेकिंग रोक देने के लिए कहा और पाकिस्तान को ऐन मौके परमिल गया पेनल्टी कॉर्नर.समय तेज़ी से गुज़रा रहा था और पाकिस्तानी खिलाड़ी लाक़ड़ा की पीठ थपथपा कर सर्कलपर आए. हालांकि ईमानदारी भी बहादुरी ही है और किस्मत बहादुर का साथ देती है.पाकिस्तानी खिलाड़ी धड़क-धड़क मैच में पेनल्टी कॉर्नर पर शॉट लेने के लिए गेंद कोनहीं रोक पाए.मैच के बाद पाकिस्तानी कोच खुद लाकड़ा के पास गए और गले लगा लिया. पाकिस्तानी कोचख्वाजा जुनैद ने कहा, 'हम कभी-कभार ही हॉकी खेल पाते हैं. अनुभव की कमी खली. लेकिनएक ऐसे मैच में जिसका खेल और राजनीति दोनों पर असर होना था, लाकड़ा की ये साफगोईहकीकत में ये दिखाती है कि दोनों टीमें अपनी श्रेष्ठ काबिलियत के साथ खेलना चाहतीहैं.'एसीटीलाकड़ा की ईमानदारी के बाद अगर वो गोल हो जाता, तो मामला पेनल्टी शूटआउट में जासकता था और चोटिल श्रीजेश की जगह कल युवा आकाश चिकते गोलची थे. पिछली बार भारत,पाकिस्तान से हार के बाद इसी टूर्नामेंट में भारत 6ठे नंबर पर रहा था. और ये वहीटीम थी जिसने बीरेंद्र लाकड़ा के घर उड़ीसा में भारत पर जीत के बाद दर्शकों की ओरअश्लील इशारा किया था. ये सब भूल-भालकर बीरेंद्र ने खेल को सबसे ऊपर रखा.राउरकेला स्टील प्लांट की सेल हॉकी अकेडमी से निकले बीरेंद्र लाकड़ा घुटने की चोटकी वजह से ओलंपिक भी नहीं खेल पाए थे. इस टूर्नामेंट में विपक्षी टीमों की भारत केखिलाफ ये रणनीति रहती थी कि बैकलाइन में चोट से वापसी कर रहे लाकड़ा को निशानाबनाकर गोल किया जाए. 2014 के इंडियन प्लेयर ऑफ द ईयर लाकड़ा हर अटैक को नेस्ताबूदकरते हैं, गेंद फंसाते हैं और फिर काउंटर अटैक बनाते हैं. ज़िम्मेदार और धारदारबीरेंद्र लाकड़ा!