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मोदी-नीतीश साथ बैठकर ये देख लें, तो उनका गठबंधन आज ही टूट जाए

अब क्या बताएं मौसी, बोलते समय कोई कहां कुछ सोचता है.

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27 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 27 जुलाई 2017, 12:03 PM IST)
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26 जुलाई की शाम को नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफा देने के कुछ ही मिनटों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें ट्विटर पर बधाई दी. ये वही नीतीश कुमार हैं, जिन्होंने मोदी पर 2002 दंगों के दाग होने की वजह से सालों तक उनके साथ मंच नहीं साझा किया. हालांकि, इस साल जनवरी में जब पीएम मोदी बिहार गए, तो नीतीश कुमार उनके साथ स्टेज हंसते-बतियाते नज़र आए. अब जबकि नीतीश इस्तीफा दे चुके हैं, तो कयास लगाए जा रहे हैं कि जेडीयू और बीजेपी का दोस्ताना कब और कहां से शुरू हुआ था.

इसके सिरे मिलना मुश्किल है, क्योंकि राजनीति में कभी कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता. देश को संघ-मुक्त बनाने की बात कहने वाले नीतीश ने जोरदार विरोध के बावजूद मोदी के नोटबंदी के फैसले का समर्थन किया था. अब जब दोनों छोर साथ आ गए हैं, तो ये देखना रोचक है कि बिहार विधानसभा चुनाव से अब तक नीतीश ने बीजेपी, संघ और नरेंद्र मोदी के खिलाफ क्या-क्या बयान दिए हैं. आइए देखते हैं:-

#1. 10 फरवरी, 2017 को दिल्ली में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की किताब 'फियरलेस इन अपोजीशन' की लॉन्चिंग के इवेंट में नीतीश ने कहा,

'वो (बीजेपी) एजेंडा क्यों सेट करें? राहुल जी एजेंडा क्यों नहीं सेट करते? अभी विपक्ष सबसे ज्यादा एकता की जरूरत है. जिस दिन सारा विपक्ष एक हो जाएगा, वो दिन देखने लायक होगा. डरने की कोई बात नहीं है. सब ठीक होगा. हमें 90% अपने एजेंडे पर काम करना चाहिए और दूसरों के एजेंडे पर सिर्फ 10% ध्यान देना चाहिए.'

#2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में मई 2016 में एक रैली संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा,

'हमें अपने देश भारत को बेहतर बनाने के लिए इसे संघ-मुक्त और शराब-मुक्त बनाना होगा.'

#3. 17 अप्रैल 2016 को पटना में 'अडवांटेड कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा,

'भारत को संघ मुक्त बनाने के लिए देश की हर विपक्ष पार्टी को हाथ मिलाना होगा. अब ऐसी परिस्थिति में आज सीधे दो धुरे होंगे. बीजेपी एक तरफ है और दूसरी तरफ सब लोगों को मिलना पड़ेगा. वरना अलग-अलग रहेंगे, तो अलग-अलग ये सबका बुरा हार कर देंगे. सबको एकत्रित होना होगा. एक बार लोहियाजी ने गैर-कांग्रेसवाद की बात कही थी. आज वही दौर आ गया है, जब आपको गैर-संघवाद करना पड़ेगा. इसके लिए सबको एकजुट खड़ा होना होगा. संघ-मुक्त भारत बनाने के लिए सभी गैर-बीजेपी पार्टियों को एक होना होगा.'

#4. बिहार में महागठबंधन बनने के बाद 24 सितंबर 2015 को जब नीतीश उम्मीदवारों का ऐलान कर रहे थे, तब उन्होंने कहा,

'RSS बीजेपी के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरह है. बीजेपी विकास के बारे में बात करती है, लेकिन बांटने की राजनीति करती है. फिर चाहे वो जाति के नाम पर हो या धर्म के नाम पर.'

#5. बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान पीएम मोदी ने नीतीश पर निशाना साधते हुए कहा था, 'इनके डीएनए में कुछ खराबी है जिसकी वजह से उन्होंने अपने दोस्तों को छोड़ दिया.' इसके जवाब में नीतीश ने कहा,

'उनकी टिप्पणी असभ्य और बिहार का अपमान करने वाली है.' इसके बाद नीतीश ने 'TakeYourWordsBack' कैंपेन भी चलाया, जिसके तहत सितंबर 2015 में बिहार के 50 हजार लोगों ने पीएम मोदी को अपना DNA सैंपल भेजा था.

#6. बीजेपी से अलग होने के कुछ ही दिनों बाद 6 अगस्त 2013 को नीतीश को दिल्ली में अल्पसंख्यकों के लिए बनाए गए नेशनल कमीशन के छठे सालाना लेक्चर में बुलाया गया था, जहां उन्होंने मोदी-लहर के बारे में कहा था,

'इन दिनों ये जो चल रहा है, ये कुदरत की हवा नहीं, ये तो ब्लोअर का हवा है.'

#7. नरेंद्र मोदी के खिलाफ मोर्चा खोलते समय 29 अक्टूबर 2013 को नीतीश ने कहा था,

'हमने स्टेशन में चाय तो नहीं बेचा, लेकिन हम भी साधारण परिवार से आते हैं. पिता जी वैद्य थे, तो उनके साथ बैठकर दवा की पुड़िया बनाते थे और हम पुड़िया बढ़िया बनाते थे. फेंक दो, तो पुड़िया खुलेगा नहीं.'

#8. भारत जैसे बड़े देश को चलाने के बारे में नीतीश ने मोदी को नसीहत देते हुए कहा था,

'भारत जैसे बड़े देश को चलाने के लिए कभी टोपी भी पहननी पड़ती है, कभी तिलक भी लगाना पड़ता है.' उनकी इस टिप्पणी को मोदी पर तंज के रूप में देखा गया, क्योंकि सितंबर 2011 में मोदी ने अहमदाबाद के एक कार्यक्रम में मुस्लिम टोपी पहनने से इनकार कर दिया था.

#9. बिहार का स्पेशल पैकेज देते समय पीएम मोदी की शैली की आलोचना करते हुए नीतीश ने कहा था,

'प्रधानमंत्री बिहार को बीमारू राज्य कह रहे हैं. यहां के लोगों के डीएनए पर सवाल उठा रहे हैं. वो स्पेशल पैकेज देकर चले गए, लेकिन पैसा कब मिलेगा, कहां से मिलेगा, कैसे मिलेगा... कुछ पता नहीं. एक सरकारी कार्यक्रम में बाकायदा बिहार की बोली लगाई गई और बिहार की जनता का खुलेआम अपमान किया गया.'

इन बयानों के अलावा नीतीश के ट्विटर अकाउंट पर कुछ ट्वीट्स भी हैं, जिनमें उन्होंने नरेंद्र मोदी, बीजेपी और संघ की आलोचना की है. देखिए...

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वैसे नीतीश कितने भी तल्ख बयान दे लें, ये बात किसी से छिपी नहीं है कि वो हर किसी से बनाकर चलने वाले नेताओं में से हैं. उनकी ये प्रवृत्ति उनके ट्विटर अकाउंट पर साफ दिखती है. देखिए:-

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बिहार के इस बड़े उलटफेर के बारे में पढ़िए और भी बहुत कुछ:

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