दिवाली का सीजन है. चारों ओर झमाझम खुशियों का माहौल है. कोई पूजा-पाठ की तैयारी कररहा है, तो कई लोग शॉपिंग करने में बिजी हैं. मिठाइयों की दुकान का हाल न पूछो.बनते नहीं कि बिक जाते हैं. ऐसा ही हाल पटाखों की दुकानों का भी है. बाजार मेंरंग-बिरंगे हाई-फाई लक्ष्मी-गणेश बिक रहे हैं. मार्केट का मीटर एकदम अप हुआ जा रहाहै. बाजार सस्ते चाइनीज सामानों से बिछी हुईं हैं. ये अलग बात है कि इन सब के साथचाइनीज सामानों को बायकॉट करने की बात भी चल रही है. कोई चीनी सामानों को जला रहाहै तो कोई हाथ में बैनर लिए प्रोटेस्ट ठोक रहा हैं. दूसरी तरफ राजीव दीक्षित केतर्ज पर बाबा रामदेव भी विदेशी सामान को बायकॉट करने को कह चुके हैं. जब माहौल बनाही है, तो ऐसे में भोजपुरी सिंगर्स काहे पीछे रहते. उन्होंने भी गाने के जरिएचाइनीज माल को बायकॉट करने का मैसेज दिया है. हम ले आए हैं वो सारे गानों कापिटारा.1. करुआ तेलपहला गाना है 'करुआ तेल'. इसमें बोला जा रहा है कि करुआ तेल का दीप जलाकर स्वेदेशीका रेलम रेल कर दो. और विदेशी सामानों का खेलम खेल. करुआ तेल बोले तो सरसों का तेल.जब बाजार में चाइना का झाल-माल नहीं था तो लोग दिये और मोमबत्ती से अपने-अपने घरोंको जगमगाते थे. पर फिर एक दिन चाइनीज झालर आया और सब बहा ले गया. अच्छी बात ये हैंकि लोग आज भी गांवों में दिये ही जलाते हैं. सदियों से चले आ रहे परम्पराओं कोफॉलो कर रहे हैं. गाने में सिंगर का भी यही कहना है. इसके साथ ही सिंगरलक्ष्मी-काली की पूजा करने को भी कह रहे हैं. पर अब तो भगवान भी चाइनीज हो चुकेहैं. कहने का मतलब उनकी मूर्तियां चाइना में बन रही हैं. इसपर सिंगर ने कुछ नहींकहा है गाने में. ये है गाने का लिरिक्स. नीचे वीडियो भी है. भाई खूबे जरईह करुआतेल, ऐ भाई खूबे जरईह करुआ तेल. आ हो जाए दियरी रेलम रेल. ‘पूरा दियरी मेंभैया..करुआ तेल, शुद्ध करुआ तेल डाल के, आ दीपावली मनाबे के बा.. आ ई बिदेसी बत्तीके दूर करे के बा.’ भाई खूबे जरईह करुआ तेल, आ हो जाए दियरी रेलम रेल. हो जाईबेदेसी बत्ती फेल, जाए दियरी रेलम रेल. ‘क्या बात है, क्या बात है..बहुत बहुत बधाईबा दिवाली के..’ भाई खूबे जरईह करुआ तेल, हो भाई खूबे जरईह करुआ तेल. आईल दिवालीलक्ष्मी, कली पूजीह घर आई खुशिहाली. जनि करिह पटाखा से तू खेल, हो जाई दियरी रेलमरेल. भाई खूबे जरईह करुआ तेल, ऐ भाई खूबे जरईह करुआ तेल.https://www.youtube.com/watch?v=JK4rEQuPh04&feature=youtu.be2. आईल दिवाली के परबदूसरा गाना धार्मिक किस्म का है. लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने की बात हो रही है. बड़ामजेदार बा इ गाना. पहिले लिरिक्स देखल जाए फेर सुनल जाए. आईल दिवाली के परब इ पावन,जगमग दीप से सजे घर आंगन. अईहो, आईल दिवाली के परब इ पावन, जगमग दीप से सजे घरआंगन. खुशियन के आईल बहार हो.. लक्ष्मी-गणेश के होता पूजन आज, आईल शुभ के बहार हो.साल भर से रहे अहि दिन के इंतजार हो, आईल दिवाली सबका लऊ त्योहार हो. भईल जग उजियारहो.. लक्ष्मी-गणेश के होता पूजन आज, आईल शुभ के बहार हो. सुख-समृद्ध के होई घर मेंबढंती, रिद्धि-सिद्धि अहिंए मिले मन के शांति. गायक गोविंद पर बरसईहें प्यार हो.https://www.youtube.com/watch?v=J7v48kM3e_s3. जग मग जग मग दीप जलेतीसरा गाना ऑसम है. गांव-घर में मनाई जाने वाली दिवाली देखेंगे आप. इसमें घर कोकेले के पत्ते से सजाने कि बात हो रही है. गाय के घी से दीप जलाने की बात हो रहीहै. भुकभुकिया चाइनीज लाइट का फैशन तो अब का है. पहले तो दिवाली पर घर-बाड़मोमबत्ती और दीप से ही जगमगाता था. केरा के पात से द्वारिया बा साजल, इन्द्रधनुष सेरंगोली बा बनल. चरही सामान घर जगमग करे, सबके बा नेहिया चरनिया में लागल.लक्ष्मी-गणेश अईले घरे-घरे, जगमग जगमग दीप जरे. गइया के घीइवा से दीप सब बारे,लक्ष्मी-गणेशजी के आरती उतारे. नया नया बस्तर नया आभारंवा, हाथ जोड़ सब मां लक्ष्मीपुकारे. रिद्धि-सिद्धि के चरनिया पड़े चरनिया पड़े, जगमग जगमग दीप जरे.https://www.youtube.com/watch?v=82YswMBrvWs4. चाइना को दूर भगाएं मिट्टी वाले दिये भगाएंचौथा गाना संजय फैजाबादी का है. इसकी बोली भी फैजाबादी है. इस गाने में सिंगर हाथमें आरती लेकर खड़े हैं. कह रहे हैं कि सेना का सम्मान करना है और इस दिवाली चाइनीजसामानों का बहिष्कार करना है. सिंगर पूरे फॉर्म हैं. और मदमस्त होकर जनता कोदेशभक्ति का पाठ पढ़ा रहें हैं. “प्रिये देशवाशियों श्री मोदी जी का कहना है, इसदीपावली सरहद पर तैनात वीर सिपाहियों को एक संदेश अवश्य भेजें. और ध्यान रहे, इसबार चाइनीज सामानों का बहिष्कार करना है...” राष्ट्रीयहित का गला घोंट कर छेद नकरना थाली में,मिटटी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में. देश के धन को देश मेंरखना, नहीं बहाना नाली में.. बने जो अपने मिटटी से वो दिये बिके बाजारों में, घरमें आता है ये सभी तीज-त्योहारों में. कार्तिक दीप से बदले पितृ-दोष खुशहाली में,मिटटी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में. अबकी अमावास वाली ये रात न अबकी कालीहो, दिये बनाने वालों की भी खुशियों भरी दिवाली हो. अब अपने जेब का पैसा भी जाए भाईकी झोली में, मिटटी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में. चीनी झालर से आकर्षित येकिट-पतंगें लाते हैं, जल के दिये में बरसाती कीड़े मर जाते हैं. जान-बूझकर देश कोअपने लाओ न तुम बदहाली में, मिटटी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में. गए जोदुश्मन देश में पैसा बम-बारूद बनाएगा, संजय फैजाबादी हमको बार-बार उकसाएगा. देश कीसीमा रहे सुरक्षित चूक न हो रखवाली में, मिट्टी वाले दिए जलाना अबकी बार दिवालीमें. https://www.youtube.com/watch?v=FsbROa3T14w--------------------------------------------------------------------------------ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है.