6 साल का था. किसी का देहांत हो गया था तो स्कूल में जल्दी छुट्टी हो गई. घर आया तोदेखा. रात में जी वीसीपी (वीडियो कैसेट प्लेयर) और रंगीन टीवी मंगवाया गया था. वोअभी तक रखा है. कुछ फिल्में और चलने का तय हुआ बड़ों के बीच. फिल्म चली मैंने प्यारकिया. पहली चीज याद हुई कबूतर.हमारे यहां तो निरे बुरे से दिखते सिलेटी कबूतर होते थे. मगर रंग बिरंगे सूट वालीभाग्यश्री के हाथ में सफेद कबूतर था. सुंदर सा. और था प्रेम. नहीं नहीं. सलमान खान.उसमें सबने अपने मतलब की बातें खोज लीं. भइया बोले. देखा, एक हाथ से पुशअप करता है.हमने देखा. प्रेम डढीकते हुए गा रहा है. आजा शाम होने आई. शाम तो नहीं आती. मगरमोगरे की एक डली जरूर उसकी तरफ झुकी चली आती है. साइकिल चलाना भी फैशनेबल हो सकताहै, ये तभी जाना. अब जब किक में सलमान साइकिल चला रहा है तो इस धूम युग में शायदगांधी जी की याद दिलाती मगर अब बाजारू हो चुकी साइकिल का पुनरुद्धार हो.Source - Tumblrआज ये सब याद आ रहा है क्योंकि आज सलमान खान को सिलसिलेवार और ईमानदार ढंग से उनकीसिनेमाई छवि के तहत समझने की कोशिश कर रहा हूं. कुछ महीनों पहले किक देखकर लौटा था.हॉल में उत्सव सा माहौल था. तीन भाभी जी स्नैक्स से लेकर स्टेटस अपडेट तक हर चीजफिल्म शुरू होने से पहले ही तय कर लेना चाहती थीं. लड़कों के गिरोह के गिरोह, जत्थेके जत्थे गिर रहे थे. जो पहले पहुंच गए थे, वे बाद में आने वालों को ऐसे टेरा लगारहे थे, जैसे माता के जगराते के लिए कोई माला लेकर पहुंचा हो.कई कपल थे और कई हिरण. जिन्हें पब के बाहर स्टैग बोला जाता है और एंट्री के लिए अलगसे बापू गिनवाए जाते हैं. सबको निहार रहा था और फिर फिल्म को देख रहा था. दोहरे सफरकी शुरुआत थी ये. रह रहकर पुराने सलमान खान एलबम भी खुल रहे थे. मैंने प्यार कियाके बाद कई फिल्में आई होंगी. पर हमें याद रही कानपुर के बड़े बस स्टैंड के सामनेमंजूश्री टॉकीज में हफ्तों चली हम आपके हैं कौन. इसके बारे में सिर्फ सुन ही पाए उसवक्त. हॉल में जाकर पिक्चरें देखने की मनाही थी तब. मगर जब बाद में सीडी पर फिल्मदेखी तो इतनी बार देखी कि दुपट्टा तो छोड़िए सोफे का रंग भी याद हो गया. वहां सेप्रेरणा मिली कि सलमान खान की तरह अच्छे इंसान बनो. भाई से, परिवार से प्यार करो.शरारत भी करो. मगर एक रमतूला बजाना भी आना चाहिए. ताकि लेडीज संगीत में हीरोइन उसपर नाच सके और फिर आप पर निसार भी हो सके. मगर तब तक गिटार सीखना इंग्लिश मीडियम केलोगों को ही नसीब था. हम हिंदी मीडियम वाले बस इस बारे में सोचते थे.Source - koimoiफिर वो उघारे बदन और ब्लेड से कई जगह दंतुरित तटरेखा बनाती जींस वाला गाना आया. ओओजाने जाना. अरविंद मिल्स की पौ बारह हो गई. भाई लोग रफ एंड टफ और न्यू पोर्टखरीदते. पहनते बाद में छुरा लेकर उसके अगवाड़े को छेदने पहले बैठ जाते. हम हाईस्कूल में थे. जीन में जींस नहीं आया था तब तक. मगर पेपर देने के बाद इस गाने वालीफिल्म प्यार किया तो डरना देखने गए. गिटार और जींस तो नहीं सीखा. मगर ये सीखा किबेटा बॉडी होनी चाहिए तो सलमान जैसी. तय किया कि पेपर खत्म होते ही दंड पेलना शुरू.इंटरमीडिएट में पहुंचे तो संसार की सबसे सुंदर औरत को पर्दे पर देखा. ताल में गीलीमिट्टी से घास नोचती ऐश्वर्या राय. हम दिल दे चुके सनम में रंगीन कंदीलों को रौशनीबख्शती ऐश्वर्या राय. और उससे हमारे सलमान खान को प्यार हो गया. लगा कि ये तोपरीकथा जैसा कुछ हो रहा है. हम खुश थे सलमान के लिए, ऐश्वर्या के लिए और खुद अपनेलिए. ऐसा लग रहा था कि ये रिश्ता हमें भी एक यकीन दे रहा है. अपनी कुंडली में भीकोई ऐश्वर्या होगी, जो शौर्य दिखाने के बाद मिलेगी, जैसा भाव जाग रहा था.एक और छवि टंकी है इस दौर की. फिल्म का नाम था बंधन. उसमें एक सीन था. सलमान खान केपेट में खलनायक ने गुप्ती घोंप दी थी. और भाई उसे पूरे जोर से निकाल रहा था. कैसाकालिदास के रूपक सा सुंदर बिंब बन रहा था उस वक्त. देह देह नहीं रह गई थी.भित्तिचित्र बन गई थी. बरसों के श्रम से सुंदर बनी.मगर तभी कहानी में ट्विस्ट आया. सलमान बुरा हो गया. जैसे हम इंटर के बाद बुरे होजाते हैं. सिगरेट, शराब, सेक्स, झगड़ा, पैसा, ईगो, घर वालों से टकराव, जैसे तमामपंच माथे पर टकटकाने लगते हैं. सलमान ने कार चढ़ा दी. सलमान ने हिरण मार दिया.सलमान ने ऐश्वर्या को भी कथित तौर पर चलते चलते ढिशुम कर दिया. लगा कि सब कुछ बुराहो गया है. जैसे चीख चीखकर कह रहा हो. हां मैं ऐसा ही हूं. नफरत करो मुझसे.Source -catchsmileफिर फिल्म आई तेरे नाम. मोहल्ले के तमाम दिलजले जिन्होंने दर्द बर्दाश्त कर टैटूपूर्व युग में अपनी माशूकाओं के नाम ब्लेड और मोम से उकेरे थे. अचानक नाई की दुकानको हिकारत से देखने लगे. उनके भीतर का राधे जाग गया और बाल पांच बिलांत लंबे होनेलगे. सबका एक ही मकसद था. फूल सी दिखती एक परी की रक्षा करना. उससे बार बार दुत्कारपाना और आखिर में उसे ये एहसास कराना कि देखो. तुम गलती थी. मैं बुरा दिखता हूं. परहूं नहीं. गुंडई करता हूं. पर अंदर से अच्छा हूं. उसी दौरान जाति का एक कड़वा सच भीसामने आया. जब हमने बाल बढ़ाने चाहे तो डपटा गया. कहा गया. लंबे बाल तो गुंडे औरलुच्चे रखते हैं. देखा नहीं पीछे के मोहल्ले में जहां सुअर पालक संप्रदाय के लोगरहते हैं. कैसे लंबे बाल रखते हैं और सुआपंखी रंग की चमकीली टीशर्ट पहनते हैं. गलेमें स्टील की चेन धारण करते हैं.यहीं से सलमान का वर्ग भेद भी समझ आ गया. जो गुंडे हैं, मवाली हैं. परपीड़क हैं.स्त्रियों की इज्जत नहीं करते. वही सलमान खान होते हैं. और जो दोस्त बनते हैं.सीढ़ी चढ़ फूल और चॉकलेट लाते हैं और वैलंटाइन के दिन सीटी बजा दुलहनिया ले जातेहैं. वे शाहरुख होते हैं. और उस वक्त आमिर लगान वसूलने में बिजी थे, सो वहविचारार्थ ही नहीं हुए.राधे भइया फेज बीता और करियर के दबाव में सलमान पीछे छूटने लगा. कुछ सैटल हुए तोसमझ आया. चार्म तो असल बने रहने में है. देसी बने रहने में. और तभी दबंग आई. लगा किजैसे सलमान का पुनर्जन्म हुआ हो. मिट्टी के बर्तन, करधनी, पांडे जी का पादना, पितासे झगड़ा, कमीज के बटन की टंकाई, भिंडी की कटाई, सब कुछ सुरीला लगने लगा. लगातार छहफ्लॉप झेल रहे सलमान खान की दबंग के पहले आई फिल्म वॉन्टेड से वापसी हुई थी. वर्नातो कई लोग उनका मर्सिया पढ़ ही चुके थे. दबंग ने उनके स्टारडम पर नए सिरे से मुहरलगाई. चंडीगढ़ में लोग पीवीआर में सीटों पर नाच रहे थे सल्लू की एंट्री पर.Source - bollywoodhungamaऔर इसके बाद सलमान खान नाम के मिथक की रचना शुरू हुई. कटरीना कैफ आई गईं. लोगों कोलगा, भाई ने तो करियर में मदद की. यही नाम बढ़ने के बाद आगे बढ़ गई. ये बीइंगह्यूमन के सुरूर के हावी होने का दौर था. सलमान पारस हो गए. उनका फैन होना गर्व कीबात होने लगा. रेडी जैसी फिल्में भी 100 करोड़ के पार होने लगीं.Source- Being Human Online facebookसलमान खान को अभिनय आता है या नहीं, इस पर घमासान हो सकता है. मगर विरोधी भीमानेंगे कि उन्हें डांस आता है. मगर सलमान का डांस शास्त्रीय नहीं है. लोक है.उन्होंने नाच का जनवादीकरण कर दिया. कभी तौलिया, को कभी कॉलर तो कभी महज जींस कीपॉकेट में हथिलियों की चोंच निकाल स्टेप बना दिया. बेल्ट में अंगूठा फंसा तो अदा बनगई. बाद में महाराजा और गणेश बैंड की बेसुर धुनों पर रेशमी कढ़ाई वाली कालर धारणकिए मुहल्ले के लड़कों ने रमेश ठेकेदार की उखड़ी सड़क पर लोट लोट इनके डीजे वर्जनभी निकाले.इस दौरान न सिर्फ सलमान की चैरिटी, बल्कि उनके बॉडीगार्ड, उनके नए एक्टर्स की मददके किस्से भी विकसित होने लगे. और फिर शाहरुख खान की इंग्लिश चिकनाहट के विरुद्धअचानक से देसी बॉयज को एक लट्ठ मिल गया. पिलर सा सॉलिड. लोग जहां तहां शाहरुख खानमें, उनके फेयर एंड हैंडसम तौर तरीकों में. उनकी एक्टिंग में. उनकी हरकतों में ऐबखोजने लगे. उन्हें लगा कि ये अच्छा गाकर, अच्छा नाचकर, अच्छे विदेशी कपड़े पहनस्टाइल मारने वाला शाहरुख अब उनका नहीं रहा. अब ये वो मोटी नाक और सांवली रंगत वालाशाहरुख नहीं रहा जो किकिकि किरण कहता था और अपनी बुराइयों के साथ हमारे पाले में आखड़ा होता था. अब ये पॉलिश्ड था. अब ये वो विलेन था, जिसका जिक्र रांझणा में कुंदनकरता है. हम लव करते रह गए और ये बीटेक एमबीए हमारा मुहल्ले का प्यार ले उठे.शाहरुख उड़ गया और हमें किनारे पान की दुकान पर अपनी ऐंठ के साथ खड़ा सलमान खान मिलगया.वो मीडिया की, आलोचकों की, सुंदर लड़कियों की स्वीकृति की परवाह नहीं करता था. सबकुछ अपने अलबेले ढंग से करता था. और तब दिमाग में ये सूत्र कौंधा. लड़कियां आमिरखान सा दोस्त, शाहरुख खान सा पति चाहती हैं. मगर प्रेमी तो उन्हें सलमान खान सा हीचाहिए. हैंडसम, आक्रामक, पाकीजगी से भरा, दीवानगी से भरा. सनक की हद तक प्यार करनेवाला. कभी बेचारा, तो कभी अतार्किक और आक्रामक.Source- Youtube screengrabअब सलमान खान एक स्कूल बन चुके हैं. किक में उनकी एंट्री होती है. झटका लगता है औरजैकलिन झूमकर उनके कंधे पर टिक जाती हैं. पब्लिक को लगता है कि उनके हिस्से में भीबहार आ गई है. इस फिल्म में सलमान की स्क्रीन इमेज, पब्लिक इमेज कहानी में इस कदरपैबस्त किए जाते हैं कि हमें लगता है कि सलमान खान के तमाम अवतारों और अवधारणाओं काविस्तार है ये फिल्म.Source -Youtube screengrabनायक आगे बढ़ता है और उसकी मोटरसाइकिल के अगले टायर पर धड़ाम से एक बारात मेंतुततुरी बजाता बंदा गिरता है. उसे सलमान या देवी सिंह नहीं दिखते. उसे दबंग केपांडे जी दिखते हैं. ये है फंतासी के भीतर की फंतासी. जो दर्शक को बाकायदा आगाहकरती है. मत भूल कि ये जो लीलाएं कर रहा है, उसकी दबंगई के दीवाने रह चुके हैं आप.ये सलमान खान एक आदर्श पितृसत्तामक व्यवस्था का पोषक है. इसे प्यार करने वाला भारतभी ऐसा ही है. ये सलमान कभी शराब नहीं पिएगा. अगर पिएगा तो किसी मकसद के लिए पिएगा.ये हीरोइन को ज्यादा छुएगा चूमेगा नहीं. अच्छे भारतीय संस्कारी लड़के की तरह सब कुछकमरे के भीतर के लिए बचाकर रखेगा. ये गुंडों से हीरोइन को बचाएगा. अच्छाई का प्रसारकरेगा. मां-बाप का हर हाल में कहना मानेगा. इस देश का पुरुष ऐसा ही होना चाहता हैअकसर. ताकतवर. बुराई को मुंहतोड़ जवाब देने वाला. औरत जाति का रक्षक.इसीलिए तो जब देवी देखता है कि एक रेस्तरां में कुछ गुंडे लड़कियों को छेड़ रहे हैंतो उसकी किक जाग जाती है. वो पहले उन मर्दों को थपेड़ता है जो तमाशा देख रहे हैं.जन जागरण के बाद गुंडों की पिलाई तो होनी ही है. उस दौरान लड़कियों से मुखातिब हैसलमान. फिरोजी रंग का ब्रैसलेट घुमाता. मजाक में बात करता और बीच में अर्धविराम कीतरह बाजू घुमाकर बुराई को जमीन पर लुटाता. कई नीलम देश की राजकन्याओं को उस वक्त वहराजकुमार ही तो दिखता है. ये सलमान लड़कियों को पसंद है, ऐसा बाजू वाली लड़की नेबताया.फिर उसका एक और रूप सामने आता है. जब वो देसी दारू के हक में बोलता है. चड्डी केरंग, थूक, छींक, पाद, पुंगी जैसे कथित रूप से गैरसभ्य और फूहड़ स्तर पर उतरता है.कुछ कुछ द्विअर्थी भी हो जाता है. हुए छोकरे जवां जो, वे उस वक्त उससे अपने तारजोड़ लेते हैं. उन्हें भी जिद हो जाती है. लड़की मुझे भी मेरे बुरे रूप समेत कुबूलकरे. ‘हम सांड़ हैं’ की तख्ती लटका लेते हैं वे. मगर गौर करिए. ये वही लड़के हैं जोशाहरुख नहीं हो पाए. जिन्हें पिंक स्लिप मिली. पिंक लिप्स नहीं. और फिर सलमान उनकेलिए अपनी माशूका संग एक स्वप्न लोक रचते हैं. बैकग्राउंड में गाना बजता है. तेरीमेरी प्रेम कहानी है मुश्किल. कभी काले, को कभी सरसों वाले पीले लिबास में लिपटीकटरीना, करीना, जैकलिन आंखों के सामने तैर जाती हैं. उनके सामने देवता की मूर्ति सेसड़क पर गिरा फूल है. सलमान है. चोट खाए लड़के हैं. जो अपने पौरुष को लेकर आश्वस्तहैं, मगर कभी एक रेशमी स्कार्फ की छुअन को लालायित थे. दो लफ्जों में ये बयां न होपाए. वे यकीन करते हैं. जैसे सलमान के दिन फिरे हमारे भी फिरें.https://www.youtube.com/watch?v=46oDJIXxW40और इसके लिए क्या करना होगा. बुराई को भी भलाई में लगाना होगा. दुनिया शराबी,झगड़ालू सलमान पर बात करती रहे. मगर वो तो बीइंग ह्यूमन का प्रचार करेगा. बिग बॉसमें बदतमीजी करते लोगों को टीवी परिवार के सामने प्रेम बन डांटेगा. किसी ड्राइवर कोब्रैसलेट दे देगा. किसी बॉडीगार्ड को घड़ी दे देगा. और इस लेन देन की खबर सुनते हीतमाम लोग अपने भाई के प्रति और आसक्ति से भर जाएंगे.उनके लिए सलमान किक में गाता है. इश्क प्यार वार खुलेआम करूं. खुल्लमखुल्ला का येसंदेश और साहस सलमानों को दिव्य लगता है. उन्हें दिखता है एक शख्स, जो पुलिस से भागरहा है. भारी ट्रक पर सवार होकर. मगर जब सामने एक महिला अपने बच्चे के साथ सड़क पारकरते दिखती है. तो डेविल किनारे हो जाता है. प्रेम बाहर आ जाता है. ट्रक की रफ्तारसुस्त हो जाती है. जान की बाजी लग जाती है. मगर एक नन्ही जान बच जाती है.फिर अंत में वीडियो गेम सा सनाका खिंच जाता है. सामने गुंडे हैं. उन्हें बेतहाशापीटता सलमान है. जैसे हमारी वीडियो गेम के रिमोट पर अंगलियों कस गई हों. जैसे आखिरीस्टेज में सुस्ताया बैठा राक्षस हमारे मारे ही मरेगा. हम आगे बढ़ते जाते हैं.अट्टाहसों को चुनौती मानते जाते हैं. और अंत में जीत जाते हैं.सलमान खान ने हमें हमारी बुराइयों के साथ जीतना सिखाया. तमाम सिविलाइज्ड, सभ्य,चिकिनाहट भरे नर्म तरीकों को तज कर. और इसीलिए इस देश के बहुसंख्यक बालक और कईबालिकाएं सलमान खान के साथ रिश्ता जोड़े हैं. सलमान हमारी दमित इच्छाओं का रूपक है.जिसमें तमाम काबिलियत हैं. मगर फिर भी ऐश्वर्या, कटरीना को लुटाया प्यार किनारानहीं पा पाता. परिवार का साथ है, मगर अपना बेहद अपना परिवार नहीं. क्यूट कुत्तेहैं. लाइफ में एक कॉज है. बस नहीं है तो कुछ भी नॉर्मल जैसा. है तो एक बेशरम केपौधे सा फिर फिर पनपता अतीत. जैसे हमारे साथ होता है हर दम.और इन सबके बीच यही मेंटल, जब जय, देवी या प्रेम बनकर बुरों को लूटता है. अच्छों कीमदद करता है, तो हम कुछ बेहतर कुछ हल्का महसूस करने लगते हैं. यही है बीइंग सलमानखान.Source- sultan first lookसलमान सिर पर सवार हैं. मगर एक और बात तभी भजन सी गर्माहट लिए, याद आती है. ये वक्तभी बीत जाएगा. जाहिर है कि सलमान खान होना भी यूं ही बीत जाएगा. बची रहेंगीमुस्कुराहटें. इंसान होने की.चलते चलते एक जोक भी सुन लीजिए. एकैदम फ्रेश है. किक 2 में सलमान खान मर जाएगा.क्योंकि जब वो ट्रेन के सामने साइकिल ले जाएगा, तो साइकिल निकल जाएगी. वो दब जाएगा.अरे भाई तब तक मोदी जी की बुलेट ट्रेन आ जाएगी न.हमारा नहीं है. व्हाट्स एप पर आया है. इसलिए इसके लिए तारीफ या गालियों से ननवाजें. किक लें. दें.ऊपर अल्लाह नीचे धरती, बीच में तेरा जुनून, रे सुल्तान, रे सलमान!