लल्लनटॉप अड्डे पर जमे लल्लनटॉप आरजे रौनक. सारा शहर इन्हें बउवा के नाम से जानताहै. शहर मतलब दिल्ली और एनसीआर. बताते हैं कि पेपर डालने वाले, दूध वाले भाई लोगउनको सुनते हैं. काहे कि इत्ते सुबह आता है इनका प्रोग्राम. और शहर में इत्ते सुबहसिर्फ मॉर्निंग शिफ्ट वाले उठते हैं. तो वो भी सुन पाते हैं. खैर(ये बातचीत के बीचमें बोलते हैं रौनक) एफएम सुनने वालों को एक बड़ी खास बात बतानी है. वैसे जिनकेनाते रिश्तेदार पुलिस या फौज में रहते हैं. वो फौज और पुलिस की तमाम अंदरूनी बातेंजानते हैं. जानने से ज्यादा बनाकर बताते हैं. वैसे ही जिनका रेडियो और यफयम से जरासा भी कनेक्शन होता है या जिनके दोस्त रिश्तेदार इसके बारे में जरा भी जानते हैं,वो कान में बताते हैं. कि आरजे का काम खाली बोलना है. प्रोग्राम उसको प्रोड्यूसरबनाकर देता है. उनकी जानकारी के लिए बता दें कि रौनक अपने सारे प्रोग्राम लगभग खुदही बनाते हैं. रौनक ने बउवा और सुकुमार अविश्वास की पैदाइश की कहानी बताई. अब हम हीसब कुछ न बताएंगे. अड्डा देखो. रौनक देखो. रौनक में आओ.https://youtu.be/8ZT9LgrrTYE?list=PL1BQkm1ZUCaVApTuvIzoSGHEJaj-DMZm5--------------------------------------------------------------------------------लल्लनटॉप अड्डे से और: मैं हिंदी का सिद्ध नहीं, प्रसिद्ध कवि हूं: हरिओम पवार"रणबीर कपूर से लल्लनटॉप बंदा कोई नहीं है": पीयूष मिश्रा जब जहाज उतरे तो जयबोलिए, जब जहाज उड़ जाए तो जय बोलिए: रवीश मुनव्वर राना ने शरारती अंदाज में बताया,हवाई जहाज में बेल्ट क्यों बांधते हैं? पत्रकार दोस्त को गोवा का सीएम कैंडिडेटबनने के लिए मना रहा हूं: आशुतोष मैं अपनी बात तो रखूंगी ही, चाहे कुछ भी हो: अंजनाओम कश्यप मैंने सब कुछ हिंदी से कमाया है: प्रसून जोशी