इन चमगादड़ों में ऐसा क्या खास है, जो इन्हें बचाने में सरकार जुट गई है?
सिर्फ कर्नाटक की 2 गुफाओं में पाए जाते हैं ये चमगादड़
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कर्नाटक के कोलार की खदानों में पाए जाने वाले खास चमगादड़ दुनिया में सिर्फ 150 ही बचे हैं. इनको बचाने के लिए सरकार और एनजीओ सामने आए हैं.
साल 2020 में कोरोना बीमारी को लेकर सबसे ज्यादा बदनामी चमगादड़ों की हुई. कहा गया कि उनकी वजह से ही कोरोना का वायरस इंसानों में पहुंचा. हालांकि इस बात की पुष्टि कोई रिसर्च नहीं कर पाई है. इसी बीच इस साल कर्नाटक की सरकार और बैट कंजर्वेशन इंडिया ट्रस्ट एक खास चमगादड़ के संरक्षण के लिए बैटमैन बनकर आई है. ये खास चमगादड़ कोलार की गुफाओं में पाए जाते हैं. आखिर क्या खास है इस चमगादड़ में कि इसे बचाने की इतनी कोशिशें हो रही हैं.
कहां मिलते हैं ये खास चमगादड़?
कर्नाटक में कोलार नाम की एक जगह है. जगह क्या जिला है. यह जिला अपने मिल्क, सिल्क और माइन्स के लिए जाना जाता है. यहां पर सोने की खदानें हैं. भारत में कुछ जगहों पर ही सोने की खदानें हैं, जिसमें कोलार का नाम भी शामिल है. कोलार में एक गांव है हनुमानहल्ली. इस गांव में 2 ऐसी गुफाएं हैं, जिसमें खास तरह के चमगादड़ पाए जाते हैं. इन चमगादड़ों को वैज्ञानिकों ने इनकी बनावट के हिसाब से अलग कैटगिरी में रखा है. इन्हें कोलार लीफ नोज्ड बैट कहा जाता है.
क्या खास है इस चमगादड़ में?
इस चमगादड़ की शक्ल और बनावट बाकी चमगादड़ों से अलग है. इसकी नाक पत्ते की तरह दिखती है. बाकी चमगादड़ों के कान काफी बड़े होते हैं जबकि इसके कान सामान्य लेकिन कुछ घूमे हुए होते हैं. इसके अलावा इनके शरीर पर दूसरे चमगादड़ों के मुकाबले बाल भी कम हैं. इन चमगादड़ों के सिर्फ 2 गुफाओं में पाए जाने की वजह से ही इनके बारे में जानकारी भी बहुत कम है.
यह खास चमगादड़ न सिर्फ दुनिया बल्कि भारत में भी सिर्फ कर्नाटक की 2 खदानों में ही पाया जाता है.
क्यों बचाए जा रहे हैं?
इन खास चमगादड़ों पर जानकारों का ध्यान 2014 के आसपास गया. ये खास तरह के चमगादड़ इलाके में दिखने बंद हो गए. पता चला कि इनकी संख्या में तेजी से कमी आई है. लेकिन तब भी इन्हें बचाने का कोई खास प्रयास नहीं किया गया. इस वक्त दुनियाभर में इस तरह के सिर्फ 150 चमगादड़ ही बचे हैं. अब इन्हें बचाने के लिए कर्नाटक का वन्यजीव संरक्षण विभाग और बैट कंजर्वेशन इंडिया ट्रस्ट (Bat Conservation India Trust, BCIT) ने कदम उठाने शुरू किए हैं.
कर्नाटक सरकार में वन सेवा के उप निदेशक विजय मोहन राज का कहना है कि BCIT के राजेश पुट्टास्वामैय्या बताते हैं- बता दें, कोविद -19 के चमगादड़ों के फैलने की खबर के बाद पश्चिमी घाट, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों में किसानों द्वारा चमगादड़ों को मारने के कई मामले सामने आए थे.
कहां मिलते हैं ये खास चमगादड़?
कर्नाटक में कोलार नाम की एक जगह है. जगह क्या जिला है. यह जिला अपने मिल्क, सिल्क और माइन्स के लिए जाना जाता है. यहां पर सोने की खदानें हैं. भारत में कुछ जगहों पर ही सोने की खदानें हैं, जिसमें कोलार का नाम भी शामिल है. कोलार में एक गांव है हनुमानहल्ली. इस गांव में 2 ऐसी गुफाएं हैं, जिसमें खास तरह के चमगादड़ पाए जाते हैं. इन चमगादड़ों को वैज्ञानिकों ने इनकी बनावट के हिसाब से अलग कैटगिरी में रखा है. इन्हें कोलार लीफ नोज्ड बैट कहा जाता है.
क्या खास है इस चमगादड़ में?
इस चमगादड़ की शक्ल और बनावट बाकी चमगादड़ों से अलग है. इसकी नाक पत्ते की तरह दिखती है. बाकी चमगादड़ों के कान काफी बड़े होते हैं जबकि इसके कान सामान्य लेकिन कुछ घूमे हुए होते हैं. इसके अलावा इनके शरीर पर दूसरे चमगादड़ों के मुकाबले बाल भी कम हैं. इन चमगादड़ों के सिर्फ 2 गुफाओं में पाए जाने की वजह से ही इनके बारे में जानकारी भी बहुत कम है.
यह खास चमगादड़ न सिर्फ दुनिया बल्कि भारत में भी सिर्फ कर्नाटक की 2 खदानों में ही पाया जाता है.
क्यों बचाए जा रहे हैं?
इन खास चमगादड़ों पर जानकारों का ध्यान 2014 के आसपास गया. ये खास तरह के चमगादड़ इलाके में दिखने बंद हो गए. पता चला कि इनकी संख्या में तेजी से कमी आई है. लेकिन तब भी इन्हें बचाने का कोई खास प्रयास नहीं किया गया. इस वक्त दुनियाभर में इस तरह के सिर्फ 150 चमगादड़ ही बचे हैं. अब इन्हें बचाने के लिए कर्नाटक का वन्यजीव संरक्षण विभाग और बैट कंजर्वेशन इंडिया ट्रस्ट (Bat Conservation India Trust, BCIT) ने कदम उठाने शुरू किए हैं.
कर्नाटक सरकार में वन सेवा के उप निदेशक विजय मोहन राज का कहना है कि BCIT के राजेश पुट्टास्वामैय्या बताते हैं- बता दें, कोविद -19 के चमगादड़ों के फैलने की खबर के बाद पश्चिमी घाट, राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों में किसानों द्वारा चमगादड़ों को मारने के कई मामले सामने आए थे.

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