जब अवध ओझा दिन में कोचिंग पढ़ाते थे, रात में बार में काम करते थे!
अवध ओझा ने बताया कि ज़िंदगी किस 'फ़ॉर्म' ने बदली!

गेस्ट इन द न्यूज़रूम में आए लल्लनटॉप शिक्षक अवध ओझा (Ojha Sir). ख़ूब क़िस्से सुनाए. कर्म से लेकर बड़े-बड़े कांड तक. किस पर गोली चलाई, कितने मुक़दमे खाए, कैसी रंगदारी की. और, सबसे ज़रूरी बदले कैसे. लाइफ़ में टर्निंग पॉइंट कब-कब आए और जीवन क्या से क्या हो गया.
अवध ओझा पिता का अपनी बनावट में ख़ूब ज़िक्र करते हैं. कहते हैं, "मैं जो कुछ भी हूं, 98% अपने पिता जी की वजह से हूं." अपने पिता को 'पिताओं' की तरह सख़्त, बरगद और रूढ़ि नहीं बताते. कहते हैं कि उन्होंने कभी पढ़ने के लिए नहीं कहा. केवल विश्वास किया कि लड़के को जब समझ आ जाएगा, तो वो अपना रास्ता बना लेगा. और, ये रास्ता खुला एक फ़ॉर्म से. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का ऐडमिशन फ़ॉर्म.
फिर सौरभ ने एक दूसरे टर्निंग पॉइंट के बारे में पूछा - जब अवध ओझा सुबह क्लास पढ़ाते थे और शाम को बीयर सर्व करते थे. तब उन्होंने बताया
इन दोनों क़िस्सों के अलावा भी ख़ूब सारे क़िस्से सुनाए. एक गोली कांड के बारे में बताया, जिनके बाद उनपर धारा-307 लगी थी. आध्यात्म और अध्ययन ने जीवन कैसे बदला और आगे क्या करने का सोचा है, वो भी बताया. देखिए पूरा इंटरव्यू -
गेस्ट इन द न्यूज़रूम: अवध ओझा ने सुनाए किस्से, लल्लनटॉप वाले बुक्काफाड़ हंसे

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