पत्रकार दोस्त को गोवा का सीएम कैंडिडेट बनने के लिए मना रहा हूं: आशुतोष
कांशीराम के साथ हुए वाकये पर भी बोले आशुतोष
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फोटो - thelallantop
'साहित्य आज तक' का दूसरा दिन था. 13 नवंबर. संडे था. गुनगुनी धूप थी. पहले दिन अनुराग कश्यप, स्वानंद किरकिरे, रवीश कुमार, पीयूष मिश्रा, प्रसून जोशी आये. दूसरे दिन 'लल्लनटॉप अड्डा' पर फिर माहौल जमना शुरू हुआ. शुरुआत हुई अनुपम खेर से. उस दिन उनका प्ले 'कुछ भी हो सकता है' भी होना था. उनसे हल्की-फुल्की बातें हुईं. प्यार, मोहब्बत, रिश्तों की. हरिओम पवार वीर-रस कविता के लिए जाने जाते हैं सो उन्होंने वही सुनाया. उन्होंने बताया कि मैंने काले धन के खिलाफ चार साल पहले ही कविता लिखी थी. अब सरकार ने काले धन के खिलाफ मुहिम छेड़ दी है.
कई पत्रकारों और 'आज तक' के एंकरों ने अपने किस्से बताए. राजदीप सरदेसाई, राहुल कंवल, अंजना ओम कश्यप ने अपनी पहली बड़ी रिपोर्टिंग के बारे में बात की. एक्स-पत्रकार और आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष भी आए थे. उनसे खूब सवाल जवाब हुए. अब नेता भी हैं तो कुछ लोगों ने अपनी शिकायतें भी सुनाईं.
अपने बारे में बताते हुए उन्होंने कहा जब वो दिल्ली आए थे तब उन्हें कनॉट प्लेस में सड़क क्रॉस करने में भी डर लगता था. जब किसी फाइव स्टार होटल में जाता था तो मुझे डर लगता था. लेकिन जेएनयू में पढ़ने की वजह से मेरे अन्दर आत्मविश्वास आया.
उत्तर प्रदेश के चुनावों में आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी या नहीं इस पर उन्होंने कहा कि ये मान कर चलिए, हम चुनाव नहीं लड़ेंगे. लेकिन अंतिम फैसला पीएसी लेगी. हमारे पास उतने सोर्स नहीं है. रणनीतिक स्तर पर हम गोवा और पंजाब के चुनाव लड़ रहे हैं और हम दो-तिहाई बहुमत से जीतेंगे. पंजाब का आदमी ही पंजाब का मुख्यमंत्री बनेगा.
संगम विहार से आई एक बच्ची ने उनसे शिकायत की कि उसके स्कूल में निष्ठा और प्रतिभा का भेदभाव है. उसका मतलब ये था कि जो बच्चे पढ़ाई में कमजोर होते हैं उन्हें निष्ठा सेक्शन में रखा जाता है और जो अच्छे होते हैं उन्हें प्रतिभा सेक्शन में रखा जाता है. प्रतिष्ठा वालों को अच्छे टीचर्स मिलते हैं. कई लोगों ने कहा कि ऐसा दिल्ली के दूसरे स्कूलों में भी होता है. आशुतोष ने कहा उन्हें मामले की जानकारी नहीं है. अगर किसी आधार पर भेदभाव होता है तो ये गलत है. वो इसे देखेंगे. एक और बच्ची ने पूछा कि वो कांग्रेस या भाजपा में क्यों नहीं गए. इस पर आशुतोष ने कहा कि मुझे लगा कुछ लोग हैं जो ईमानदारी से राजनीति कर रहे हैं और मुझे लगा कि इस तरह से भी राजनीति की जा सकती है.
एक और अनौपचारिक सवाल उनसे पूछा गया कि न तो उन्हें पार्टी में कोई पद मिला हुआ है. न ही वो अब पत्रकारिता करते हैं. ऐसे में उनका घर कैसे चलता है. इस पर हंसते हुए बोले कि मैं पैसों या पद की वजह से राजनीति में नहीं आया था. बाकी मैं कुछ न कुछ लिखता रहता हूं, जिससे मेरा अपना जेब-खर्च चलता है और घर का खर्च मेरी पत्नी मनीषा संभालती हैं. वो दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाती हैं.
योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण के बारे में पूछने पर बोले उनसे कोई दुश्मनी नहीं है. बस हमने अलग-अलग रास्ते चुने. बाकी उद्देश्य सबका एक ही है कि देश में हमारी वजह से कुछ बदलाव आ सके. हालांकि उन्होंने ये भी बता दिया कि दोनों से आखिरी बार फ़ोन पर डेढ़ साल पहले बात हुई थी.
उनसे हुई पूरी बातचीत देखने के लिए यहां क्लिक करें-
https://www.youtube.com/watch?v=7FItPlZo_fQ
ये स्टोरी निशान्त ने की है.
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