16 अगस्त 2011 को अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में जनलोकपाल बिल के लियेअपना ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया था. इसके कुछ दिन पहले मेरे एक मित्र मुझसे मिलनेआये. वो आरएसएस के प्रचारक रह चुके थे. उस वक्त मैं अन्ना हजारे और India AgainstCorruption (IAC) के लिये खुल के समर्थन कर रहा था. मेरे प्रचारक दोस्त बोले कि वोमुझे इस बात की बधाई देने आये थे. मेरे लिये ये सरप्राइजिंग था. थोड़ा खोदने के बादउन्होंने बताया कि उज्जैन में एक सीक्रेट मीटिंग है. संघ के टॉप लोगों की. संघ नेअन्ना को फुल सपोर्ट देने का प्लान बनाया है. कांग्रेस को करप्शन पर घेर देना हैइसके माध्यम से. पर ये लोग अपने बैनर से ये काम क्यों नहीं कर रहे थे. बीजेपी क्योंबाहर थी इससे. मेरे दोस्त के पास तर्क था. लास्ट इलेक्शन में आडवाणी जी ने करप्शनको मुद्दा बनाया था. काले धन के ऊपर देश में यात्रा भी की. पर लोगों की नजर मेंबीजेपी और कांग्रेस में ज्यादा फर्क नहीं था. क्योंकि बीजेपी शासित राज्यों में भीकरप्शन था. तो प्लान यही था कि कांग्रेस को बेइज्जत कर दिया जाये. और बीजेपी कोइससे बाहर ही रखा जाये. मैंने तर्क दिया कि India Against Corruption (IAC) के पीछेअरविंद केजरीवाल का दिमाग है. जो कि स्मार्ट आदमी है. और आरएसएस को अन्ना आंदोलन कोहाईजैक नहीं करने देगा. फिर प्रशांत भूषण भी थे. देश को तलाश थी एक ऑल्टरनेटिव कीजो कांग्रेस और बीजेपी दोनों से अलग हो. मेरा दोस्त हंसने लगा और बात खत्म हो गई.जैसे-जैसे अन्ना का आंदोलन बढ़ा इस चीज को मिस करना मुश्किल था. अन्ना के पीछे बैठेउनकी टीम के लोग भारत माता चिल्लाते. फिर वहां आरएसएस के नेता राम माधव और तरुणविजय का स्वागत हुआ. कैडर के लोग खाकी शॉर्ट पहने बिना आये थे. मैंने अपने आर्टिकलमें इस चीज को लिखना शुरू किया कि कैसे आरएसएस के लोग India Against Corruption(IAC) में घुसे जा रहे थे. नरेंद्र मोदी ने आंदोलन जॉइन तो नहीं किया था लेकिनअन्ना ने जरूर कहा था कि वो नरेंद्र मोदी के काम से खुश हैं. फिर जन्म हुआ आम आदमीपार्टी का. अन्ना लड़खड़ाते रहे इनको लेकर. अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में सरकारबना ली. और इंडिया में सरकार बनाने की सोचने लगे. 56 दिन में दिल्ली की सरकार छोड़दी. 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की खटिया खड़ी हो गई. अरविंद केजरीवाल केड्रामे के बाद आम आदमी पार्टी भी निपट गई. उसके बाद इतिहास बन गया. फिर 2015 कादिल्ली चुनाव आया. एंटी-बीजेपी और एंटी-मोदी वोट पड़े. आम आदमी पार्टी के लिये सबलोग पिच करने लगे. इतना कि कांग्रेस के एक सपोर्टर ने अपने ही पार्टी के कैंडिडेटसे कहा कि भाई साहब, आपको वोट दें तो बर्बाद ही जायेगा. बीजेपी को फायदा हो जायेगाइससे. और अरविंद केजरीवाल को लगा कि पांच साल केजरीवाल ने ये काम कर दिखाया है.दिल्ली की ये जीत उनके दिमाग में घुस गई. जो उनको प्रश्न करता, पार्टी से बाहर भगादिया जाता. प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव को बाउंसर लगा के हटा दिया गया. केजरीवालका टेप भी आया जिसमें वो योगेंद्र यादव को गाली दे रहे थे. अरविंद ने वो हर कामकिया जिसके खिलाफ उन्होंने खड़ा होने की बात की थी. और अब वो पंजाब का मुख्यमंत्रीबनना चाहते हैं. बैकडोर से. आरोप हैं कि उनको खालिस्तानियों ने घूस दी है. ये गंभीरआरोप हैं. एक बॉर्डर स्टेट में ये चीज खतरनाक है. आने वाले दिनों में पंजाब कोअरविंद केजरीवाल से सतर्क रहने की जरूरत है.-------------------------------------------------------------------------------- ये आर्टिकल Daily-O में हेमेंदर शर्मा ने लिखा था.