सेनेटरी पैड पर एक शख्स ने कलाकारी दिखाई है
विरोध करने के बहुत तरीके हैं. मगर कला से बेहतर क्या है?
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Credit: rupi kaur
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टीन के डिब्बे से फ्लॉवर पॉट बने देखे होंगे. कूड़े के कागज़ से सुंदर फ्रेम बनाए होंगे. प्लास्टिक की बोतलों से गमले सजाए होंगे. ये सब काबिलियत बहुत लोग लोग दिखा चुके हैं. कुछ बचा नहीं है. लेकिन एक नई कलाकारी सामने आई है. ख़ून से सने टैम्पॉन और सेनेटरी पैड से खूबसूरती को जोड़ा है. सेनेटरी पैड, जिसे यूज़ करने से पहले ही इतना गंदा माना जाता है कि 'छिपाकर' रखना पड़ता है. यूज़ करने के बाद तो कागज़ में लपेटकर रात का इंतज़ार होता है फेंकने के लिए. अब इस पर कोई आर्ट बना दे तो?
वो कलाकार आदमी है राजकमल आइच. राजकमल ने टैम्पॉन से आर्ट बनाई है. अब भी देश में सिर्फ 12 फीसदी औरतें सेनेटरी पैड यूज़ करती हैं. उस पर भी सरकार ने 12 फीसदी का टैक्स लगा दिया है. अब इन्हें कौन बताए कि ये हमारी पसंद की नहीं बल्कि ज़रूरत की चीज़ है. इसे खरीदना 'लक्ज़री' नहीं है. ख़ैर, औरतों को जागरूक करने के लिए कुछ लोग दौड़ा-भागी कर रहे हैं तो कुछ काली पन्नी ढूंढ रहे हैं. इन सब बातों पर बहस करने के लिए ही राजकमल ने ये अनूठी कलाकारी की है.
एक छोटी बच्ची है. जिसका बचपन अभी अपने चरम पर है. पीरियड को समझ पाना बेहद मुश्किल है उसके लिए. राजकमल ने उसे टैम्पॉन से बने कमोड पर बैठा दिखाया है. झुका चेहरा उसकी तकलीफ दिखा रहा है.
इसी तरह एक बच्ची गुब्बारे के पीछे भाग रही है. लेकिन वो गुब्बारा एक टैम्पॉन है.

टैम्पॉन से एक गमला बनाया गया है. इस गमले में फूल खिले हैं.
कई लोग जुटे हैं कि हर औरत की ज़िंदगी के बेहद अहम पर सब सहज हो जाएं. जिससे औरत भी सहज हो सके. लेकिन मंज़िल अभी दूर है. अभी तो हमने चलना शुरू किया है.
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वो कलाकार आदमी है राजकमल आइच. राजकमल ने टैम्पॉन से आर्ट बनाई है. अब भी देश में सिर्फ 12 फीसदी औरतें सेनेटरी पैड यूज़ करती हैं. उस पर भी सरकार ने 12 फीसदी का टैक्स लगा दिया है. अब इन्हें कौन बताए कि ये हमारी पसंद की नहीं बल्कि ज़रूरत की चीज़ है. इसे खरीदना 'लक्ज़री' नहीं है. ख़ैर, औरतों को जागरूक करने के लिए कुछ लोग दौड़ा-भागी कर रहे हैं तो कुछ काली पन्नी ढूंढ रहे हैं. इन सब बातों पर बहस करने के लिए ही राजकमल ने ये अनूठी कलाकारी की है.
कुछ तस्वीरें-

एक छोटी बच्ची है. जिसका बचपन अभी अपने चरम पर है. पीरियड को समझ पाना बेहद मुश्किल है उसके लिए. राजकमल ने उसे टैम्पॉन से बने कमोड पर बैठा दिखाया है. झुका चेहरा उसकी तकलीफ दिखा रहा है.
इसी तरह एक बच्ची गुब्बारे के पीछे भाग रही है. लेकिन वो गुब्बारा एक टैम्पॉन है.

टैम्पॉन से एक गमला बनाया गया है. इस गमले में फूल खिले हैं.
कई लोग जुटे हैं कि हर औरत की ज़िंदगी के बेहद अहम पर सब सहज हो जाएं. जिससे औरत भी सहज हो सके. लेकिन मंज़िल अभी दूर है. अभी तो हमने चलना शुरू किया है.
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