इस साल 70वां स्वतंत्रता दिवस मनाया जायेगा. आपको हम सुनायेंगे स्वतंत्रता के सातपड़ावों के बारे में. 9 अगस्त से 15 अगस्त तक. रोज एक किस्सा. आज पढ़िए कैसे गांधी नेगाड़ दिया अपना खूंटा.द्वितीय विश्व-युद्ध ख़त्म होने के बाद भारत में माहौल बड़ा ही रोदलू सा हो गया था.लोग लसराये रहते थे. नेता लेंझड़िया गए थे. लग रहा था अब देश को कोई बचा नहीं सकता.अंग्रेज और क्रूर हो गए थे. जनता को कुछ पता ही नहीं चल रहा था कि क्या हो रहा है.टैक्स हर साल बढ़ जाते थे. जमीनें जब्त हो जाती थीं. गरीबी सपने में भी नाचती थी.ऐसे ही वक़्त में आये थे मोहनदास करमचंद गांधी. पढ़िए क्या हुआ उसके बाद:1. अफ्रीका के जेम्स बॉन्ड गांधी आये इंडियामहात्मा गांधी अफ्रीका मेंसाउथ अफ्रीका से आये थे. अफ्रीका गए थे 20 दिन के लिए. एक केस के सिलसिले में. रहगए 20 साल. वहां एक अंग्रेज ने उनको लात मारी थी. गांधी ने इस लात का बदला बड़ा जमाके दिया. वहां पर भारत से गए बहुत लोग थे. उनके साथ अंग्रेजों का व्यवहार बड़ा हीबुरा था. भारतीयों को ID कार्ड ले के घूमना पड़ता था. गांधी ने सबको इकठ्ठा किया.बोले कि लड़ेंगे. वहां के भारतीयों में सिर्फ गांधी को अंग्रेजी आती थी. खूब मेहनतकी. सबके पेपर बनाये. अंग्रेजों के साथ एक बात थी कि वो कानून खूब बघारते थे. गांधीने इन्हीं कानूनों का इस्तेमाल किया. पता था कि मासूम जनता को लेकर लड़ाई कानून सेही लड़ी जा सकती है. तो इंग्लैंड से लेकर अमेरिका तक चिट्ठी लिख भेजी. इज्जत वापसपाई. ये आसान नहीं था. अंग्रेज तो सिर पर चढ़े ही थे, हिन्दुस्तानी भी गांधी के सिरहो लेते. एक पठान तो इनसे इतना नाराज हुआ कि बीच रोड पर मारने लगा. कपड़े फाड़ दिए.गांधी ने सब बर्दाश्त कर लिया. ये ट्रेनिंग थी उनकी. 50 की उम्र में भारत आकर बड़ीलड़ाई जो लड़नी थी.2. शुरू हुई गांधीगिरी, सब हैरान थेजब मोहनदास भारत आये तो यहां के नेताओं को बड़ी उम्मीदें थीं उनसे. पर मोहनदास काअलग स्टाइल था. तुरंत कूद नहीं पड़े. पहले पूरी स्टडी की. चंपारण, खेड़ा और अहमदाबादमें किसानों और मजदूरों की मांगें मनवा लीं अंग्रेजों से. अंदाज़ वही था. कलक्टरकहते कि यहां आना मना है. गांधी सन्देश भेजवा देते कि जा रहे हैं दस बजे, गिरफ्तारकर ल्यो. जनता गांधी के अंदाज पर भौंचक थी. मुस्कुराते थे लोग. पहले कलक्टर से डरलगता था. अब गांधी बाबा के साथ खड़े रहते और सोचते कि क्या ऐसा भी हो सकता है किसामने-सामने बात करें?1919 में अंग्रेज 'रौलेट एक्ट' लेकर आये. इसमें था कि किसी को भी पुलिस जब चाहे तबउठा सकती है. बिना किसी चार्ज के. इरादा था कि कोई क्रांतिकारी ना बनने पाए. देशमें लोग फ्रस्टिया गए. किसी को भी धर लिया जाता था. गांधी ने तय किया कि अप्रैल1919 में इसके खिलाफ 'सत्याग्रह' 'होगा. ये सब कुछ गांधी स्टाइल में होना था.शांतिपूर्ण ढंग से. मार खानी है, खा लो. हाथ ना उठाना. अपनी बात कहना. सब चल रहाथा. इसी दौरान पंजाब के जालियांवाला बाग़ में एक सभा हो रही थी. तसल्ली से. कोईदिक्कत नहीं थे. तभी अचानक से पुलिस ने चारों तरफ से घेर लिया. किसी को जब तक कुछसमझ आता, गोलियां चलनी लगीं. पुलिस अफसर डायर वहां खड़े होकर डायरेक्शन दे रहा था.किसी को कोई मौका नहीं मिला. कोई बात नहीं हुई. कोई लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट नहीं.नो हेल्लो चेक. सीधा गोली. जो बच गए, उनको घुटनों पर चलवा के मैदान से बाहर खदेड़ागया.गांधी ने अपना आन्दोलन वापस ले लिया. लोग एकदम नाराज हो गए कि यही तो मौका था. झपटपड़ने का. बदला लेने का. गांधी बाबा ने ये क्या किया? यही वो दौर था, जब कुछ लोगोंने कहना शुरू किया कि गांधी अंग्रेजों के एजेंट हैं. उनका काम अंग्रेजी राज कोबनाये रखना है.पर गांधी को पता था कि जनता ज्यादा देर तक झेल नहीं पाती गोलियां. और अंग्रेजों केपास ताकत बहुत है. सबसे अजीब बात तो यही थी कि अंग्रेजी सेना में हिन्दुस्तानीसिपाही थे, जो एक ही इशारे पर अपने ही लोगों को मार डालते. ऐसे में कैसे लड़ाई कीजाती?3. चौरी-चौरा और गांधी पर आरोपगांधी ने इंतजार किया. मौका मिला. 1919 में अंग्रेजों ने फिर ड्रामा शुरू किया.बोले कि अब हम लोग यहां चुनाव करवाएंगे. और धर्म के आधार पर कैंडिडेट खड़े कियेजायेंगे. एक धर्म का आदमी दूसरे धर्म वाले को वोट नहीं करेगा. अब गांधी ने 1920 मेंफिर माहौल बनाया. इस बार तैयारी की 'असहयोग आन्दोलन' के लिए. इरादा साफ़ था.अंग्रेजी राज हिन्दुस्तानियों के दम पर ही चल रहा था. जब हेल्प नहीं करेंगे तोसरकार बैठ जाएगी. शुरू हो गया. सरकार लड़खड़ाने लगी. आन्दोलन एकदम पीक पर था. बौखलाहटमें पुलिस सबके पीछे पड़ गई. गांधी का सख्त आदेश था कि हम लोग हिंसा नहीं करेंगे. परभीड़ तो भीड़ होती है. बहकावे में आ जाती है.फ़रवरी 1921 में गोरखपुर के चौरी-चौरा में एक उन्मादी भीड़ ने पुलिस थाना फूंक दिया.उसमें पुलिसवाले जल के मर गए. गांधी ने आन्दोलन वापस ले लिया. कुछ लोगों के लिए अबकन्फर्म हो गया कि गांधी को अंग्रेजों ने ही भेजा है. 'क्रांतिकारियों' का कामलगाने के लिए. पर गांधी की वही थ्योरी थी. हम अपने आदर्श से पीछे हट नहीं सकते. अगरहटेंगे तो अंग्रेजों को मौका मिल जायेगा. फिर हम उनका मुकाबला नहीं कर पाएंगे. हमेंअपना तरीका बरक़रार रखना है.4. जनता गांधी बाबा पर फ़िदा हो गईउस वक़्त देश में खलबली मची हुई थी. किसान, साधु, व्यापारी, भिखारी सभी गांधी बाबाके भक्त थे. प्रतापगढ़ में बाबा रामचंद्र ने किसानों को इकट्ठा कर लिया था कि अब बढ़ाहुआ टैक्स नहीं देंगे. पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. तभी एक अफवाह उड़ गई कि रामचंद्रको छुड़ाने गांधी बाबा खुद आ रहे हैं. जनता मतवाली एकदम जेल के पास पहुंच गई. दर्शनकरने. पुलिस ने रामचंद्र को छोड़ दिया. उन्होंने बाहर आकर सब क्लियर किया.उस वक़्त कांग्रेस पर 'सवर्ण हिन्दुओं' की पार्टी होने का आरोप लगता था. तो शुरू हुईमुसलमानों को जोड़ने की कवायद. 1922 में हिंदुस्तान के मुसलमानों ने तुर्की मेंखलीफा के खिलाफ अत्याचार को लेकर 'खिलाफत आन्दोलन' शुरू किया. गांधी ने इसमें फुलसपोर्ट किया. लोगों का इतना भरोसा था कि मुसलमान औरतों को समझाने सिर्फ गांधी जातेथे. किसी और मर्द का उनके कमरे में जाना मना था. गांधी मस्जिद में अपने भाषण देतेथे. ये गांधी की एक कोशिश थी मुसलमानों को अपने साथ लेकर चलने की. पर इस कोशिश नेउनके दुश्मन बना दिए. हिन्दुओं में भी और मुसलमानों में भी.गांधी बाबा को लेकर जनता में बड़ी कहानियां थीं. कि बाबा पानी पर चलते हैं. एक कोढ़के रोगी को छूकर ठीक कर दिया. उनको देख लो तो 'सरग' मिलेगा. लाठी लेकर आये हैं.अंग्रेजों को मारकर भगायेंगे. उनकी लाठी चला के मार दो, वापस आ जाती है. पहले ये सबपढ़ते थे तो बड़ी हंसी आती थी. अब रोने को दिल करता है. इतने सालों बाद जनता के लिएकुछ भी तो नहीं बदला है. अभी भी जनता कितने ही अरमानों से किसी के भी पीछे चल देतीहै. कितने ही लोग ठग रहे हैं. हर कोई गांधी नहीं होता. आगे पढ़ेंगे, उन नौजवानों केबारे में जिन्होंने भारत में जवानी की परिभाषा बदल दी.तब तक पिछली किस्तें पढ़िए:दिल्ली में 22 हज़ार मुसलमानों को एक ही दिन फांसी पर लटका दिया गया!कांग्रेस बनाकर अंग्रेजों ने अपना काम लगा लियाखुदीराम बोस नाम है हमारा, बता दीजियेगा सबको.