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अन्ना! स्मार्टफोन से खतरा सिर्फ आपको नहीं दुनिया को है

अन्ना हजारे ने ये शिकायत की है कि उनकी सिक्योरिटी में लगे गार्ड्स फोन पर चैट में बिजी रहते हैं. लल्लन ने इसके खतरे को कायदे से समझाया है.

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आशुतोष चचा
7 मार्च 2016 (अपडेटेड: 7 मार्च 2016, 05:38 AM IST)
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भूतपूर्व सैनिक और वर्तमान सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को सिक्योरिटी मिली हुई है. जेड कैटेगरी की. लेकिन उनको इससे फायदा कम फ्रस्टेशन ज्यादा है. बोल दिए हैं साफ साफ. कि भैया ये सुरक्षा हटा लो. हमारा गांव है रालेगढ़ सिद्धि. ढाई हजार कुल जनसंख्या है. यहां 9 ठो बॉडीगार्ड और 28 पुलिस वाले रखना मुश्किल है. ये मेरी सुरक्षा के लिए कतई नहीं हैं. दिन भर फोन पर चटियाते रहते हैं. अगर अंदर कोई आकर मुझे मार दे तो इनको पता भी न लगे. लल्लन कहता है अन्ना जी ये आपकी अकेले की प्रॉब्लम नहीं है. हर बुजुर्ग कूल डूड और अर्ध युवा से इस लत की वजह से परेशान है. आपकी बात से मन इत्ता खिन्न है बद्दुवा निकल रही है. सत्यानाश हो. सिक्योरिटी का नहीं रे बाबा मोबाइल का. अइसा ही मम्मी बोलती हैं हमको. जब हम खाना खाते हुए फोन में आंखें गड़ाए रहते हैं. और रोटी को सब्जी की जगह पानी में डुबो देते हैं. तो वो कहती हैं पहले मोबाइल को खा ले. ये तुझे खा जाएगा. जबसे स्मार्टफोन आया है, दुनिया परेशान है. सिर्फ दुनिया ही नहीं. ये परेशानी अब ऊपर आकाश पर जा पहुंची है. जहां कहीं स्वर्ग और नर्क का डिपार्टमेंट है. यमराज के CA चित्रगुप्त हलकान रहने लगे हैं. यहां टट्टी में बइठा लौंडा भटसप पर मैसेज प्राप्त करता है. "ये भगवान राम के 108 नाम हैं. जय श्री राम. सच्चे हिन्दू हो तो आगे फॉरवर्ड करो." वह जय श्री राम कहते हुए फॉरवर्ड कर देता है. अब यहां बाबे और नकली गुरु लोग बता चुके हैं कि भगवान को कहीं भी भज लो. पुण्य मिलता है. लेकिन ऊपर का सिस्टम अभी अपडेट नहीं हुआ है. वहां सब पुराना स्टाफ है. जो ये मान कर चलता है कि गंधैला बिना नहाया धोया आदमी अगर भगवान का नाम ले तो नाम गंदा हो जाता है. यहीं गड़बड़ हो जाती है. चित्रगुप्त फाइल लेकर घंटों घूरते हैं. किस नाम के आगे पाप वाले खाने में 'सही' निशान लगाएं किसमें पाप के खाने में. मोबाइल काम की चीज है. लेकिन काम के वक्त. चौबीस घंटे उसको टकटकी लगाकर घूरने से इच्छा पूर्ति करने वाला जिन्न नहीं निकलेगा. पता है पठानकोट ऑपरेशन के वक्त लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन के शहीद होने की वजह मोबाइल थी. सेना को मुठभेड़ के वक्त मोबाइल ले जाने की मनाही होती है. क्योंकि वो ध्यान भटकाता है. चश्मदीद बताते हैं कि सर्च ऑपरेशन के दौरान वो आतंकी की लाश के पास पहुंचे तो उनके पास येब्बड़ा मोबाइल था. बस ध्यान भटकते ही हादसा हो गया. इसलिए मितरों भाइयों और बहनों. चाहे फौज में हो या न हो. लेकिन स्मार्टफोन को इत्ता ही टाइम दो जितने में उसको मौका न मिले. तुम्हारी स्मार्टनेस खा जाने का.

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