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अमिताभ का एक और भाई था, छेनू, जो बात-बात पर गोली दाग देता था

जन्मदिन पर विशेष.

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9 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 9 दिसंबर 2018, 07:29 AM IST)
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बॉलीवुड में अक्सर एक ऐसा हीरो आता है जो कि परंपरा से अलग होता है. उसे स्वीकारने में लोगों को झिझक होती है. पर वो अच्छा भी लगता है. कुछ उठा-पटक के बाद उसकी जगह बन जाती है. और वो भी मेनस्ट्रीम हो जाता है. सत्तर के दशक में एक लड़का आया बॉलीवुड में. बिहार से. मूंछें थीं. चेहरे पर कटे का निशान था. नाचने नहीं आता था. पर हाथों को बड़े स्टाइल से घुमा के बोलता था- कह देना छेनू आया था. शत्रुघ्न सिन्हा. रस्टिक और अर्बन लुक मिक्स कर के आये थे शत्रुघ्न. अमिताभ और धर्मेंद्र का दौर था. दौर तो सबके थे. जिसका अखबार में लिख के आ गया, उसका मान लेते थे. तो शत्रुघ्न को हमेशा इन के समक्ष खड़ा करने की कोशिश की गई. एक राइवलरी बिल्ड करने की कोशिश की गई. जो कि इन कलाकारों के साथ अन्याय ही था. कौन जानता है कि किसकी फिल्म कितनी चलेगी. कौन क्या करेगा. शत्रुघ्न सिन्हा को पहले विलेन के रूप में आजमाया गया. वो विलेन जो समाज के अन्याय और परिवार की अनदेखी के चलते दिल में गुस्सा रखे हुए है. अंत में मारा जाता है या जेल जाता है, पर दर्शकों की सहानुभूति ले जाता है. शत्रु कभी भी उस क्रूर खलनायक की भूमिका में नहीं लाए गए जिसको समाज में देखा जाना ही अपराध होता है. शायद ये उनके चेहरे का इनोसेंस था. कि ऐसी भूमिकाएं नहीं मिलीं. और यही उनके हीरो बनने का आधार भी रहा. जब पहला बड़ा ब्रेक मिला प्रेम पुजारी में तो इसमें पाकिस्तानी अफसर बने थे. उस वक्त ये तो नहीं जानते थे कि बाद में नेशनलिस्ट पार्टी भाजपा जॉइन करेंगे. हालांकि ये तो कोई नहीं बता सकता कि कौन क्या करेगा. पर कहने में अच्छा लगता है. तो शत्रु के बारे में शुरू से कहा जाता है कि ये बड़बोले थे. कहीं भी कुछ भी बोल देते थे. पर ये उनके व्यक्तित्व का हिस्सा था. इसे लोगों ने समझ लिया था. बाद में इनकी दोस्ती संजीव कुमार और मुमताज से हो गई थी. उसके बाद इनका करियर चल निकला. रामपुर का लक्ष्मण, दोस्त, हीरा, भाई हो तो ऐसा जैसी फिल्में आईं. पर नाम हुआ 1976 में आई फिल्म कालीचरण से. सुभाष घई से शुरू हुआ ये रिश्ता कई फिल्मों तक रहा. इसी फिल्म की हीरोइन रीना रॉय से भी इनका नाम जुड़ा. शत्रु का नाम कई लड़कियों से जुड़ता रहा. अपनी आत्मकथा में बड़ी तफ्सील से जिक्र किया है. कहते हैं कि पूनम से शादी के बाद रीना बड़े इमोशनल उठा-पटक से गुजरीं. पाक क्रिकेटर मोहसिन खान से शादी कर ली. इस दौरान शत्रु भी रोते थे. पर ये तय था कि घर से भागा हुआ घोड़ा घर ही आएगा. ऐसा इनकी पत्नी पूनम कहती थीं. कुछ दिनों पहले ये अफवाह उड़ी थी कि सोनाक्षी सिन्हा रीना रॉय की ही लड़की हैं. होंगी तो होंगी. क्या फर्क पड़ता है. उन लोगों का नितांत निजी मसला है. अगर अपनी जिंदगी में वो लोग खुश हैं तो हम भी हैं. नहीं हैं तो हम क्या कर सकते हैं. 13shatru4 उस दौर की एक और अफवाह भी है. हुआ ये था कि एक पार्टी में किसी एक्ट्रेस को लेकर शम्मी कपूर और शत्रु में लड़ाई हो गई थी. शत्रु ने शम्मी को पीट दिया. पर बाद में शम्मी अपने दोस्त लेकर आये और एक दूसरी जगह शत्रु को पीटा. साथ में वीडियो भी बनाई. बनाया होगा. देखने को तो नहीं मिला. पर यंग लाइफ में ऐसी बातें होती रहती हैं. नॉट ऑफ मच इंपॉर्टेंस. बट इंटरेस्टिंग. पर अस्सी के दशक के बाद शत्रु का करियर नीचे उतरने लगा. पता नहीं क्यों. जबकि उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी विलेन-हीरो का कांबो पैक विनोद खन्ना भी शांति तलाश रहे थे. फिल्में नहीं कर रहे थे. बाद में 1987 में शत्रु की खुदगर्ज हिट रही थी. इसके बाद धीरे-धीरे शत्रु राजनीति में आते गए. कहते हैं कि बाबरी मस्जिद और राम मंदिर के मुद्दे पर शत्रु भगवा दल के साथ थे. कहते हैं कि इन्होंने भाषण वगैरह भी दिए थे. जो भी हुआ हो, कौन जानता है. हुआ होगा. मस्जिद तो टूट ही गई. विवाद हो ही गया. समाज में जहर फैल ही गया. अब दोष क्या ही दें किसी को. जबकि जनता ही मुक्त नहीं होना चाहती. शत्रु ने अपनी आत्मकथा एनीथिंग बट खामोश में कुछ छुपाया नहीं है. काफी कुछ लिखा है. सबसे खूबसूरत है रीना रॉय और पूनम सिन्हा के बीच घूमते शत्रु का सोचना. कहते हैं कि जब ऐसे अफेयर होते हैं तो जब आप घर में होंगे तो बाहर वाली औरत के बारे में सोच के दुखी होंगे. बाहर होंगे तो पत्नी के बारे में सोच के दुखी होंगे. ये भी कहते हैं कि मेरे साथ कई लड़कियां जुड़ी हुई थीं. कई के साथ अफेयर था. पर डिसाइड नहीं कर पा रहे थे कि किससे शादी करें. जब पूनम के साथ शादी करने का फैसला लिया तो लड़कियों ने कहा कि फिर ठीक है. कहते हैं कि कई लड़कियों ने तो शादी ही नहीं की जिंदगी में. शायद ये चीज शत्रु का ईगो बूस्ट करती होगी. जो भी हो, क्या फर्क पड़ता है. पर कहते हैं कि शत्रु ने हमेशा रीना रॉय की मदद की. बाद में भी. 14sinha3 भाजपा में शत्रु मंत्री हो गए. जहाजरानी मंत्री. बाद में कुछ फिल्में भी कीं. नाम ना ही लें तो बेहतर है. क्योंकि रोल इनका बहुत ही खराब था. इसके बाद राजनीति में भी इनका रोल बदलने लगा. 2014 के लोकसभा चुनाव में इन्होंने ही सबसे पहले नरेंद्र मोदी को नमो कहा था. और बाद में यही भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के खिलाफ बोलने लगे. इतना कि भाजपा ने इनके बयानों से आहत हो कमेंट करना बंद कर दिया. बोलने की ही वजह से इनको शॉटगन कहा जाता है. खामोश कराने के लिए इनकी आवाज बड़ी जरूरी मानी जाती है. पर राजनीति में अभी खामोश बैठे हुए हैं. पता नहीं कहां जाएंगे. कहा तो जा रहा है कि नीतिश कुमार के काफी करीब हैं. कभी भी उनके साथ जा सकते हैं. पर कहा ये भी जा रहा है कि नीतिश भाजपा के साथ नजदीकियां बढ़ा रहे हैं. कभी भी उनके साथ जा सकते हैं. फिल्में और राजनीति संभावनाओं का खेल हैं. शत्रु दोनों में रहे हैं. तो देखना है कि क्या होता है. shatrughan-sinha6

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