डियर नवाज़, कैसे हो? सुना है कि दशहरे में कुछ प्लान था तुम्हारा? रामलीला मेंऐक्टिंग करने जा रहे थे? क्या हुआ? नहीं करोगे? क्यूं? अच्छा! करने नहीं दिया जारहा है. कोई बात नहीं. आज-कल ऐसा ही हो रहा है. तुम्हें ज़बरदस्ती इस रामलीला मेंऐक्टिंग करने से रोका जा रहा है. किसी शिव सेना ने कहा है कि तुमने अपने छोटे भाईकी पत्नी से मारपीट की है, इसलिए एक आरोपी से रामलीला में ऐक्टिंग नहीं करवा सकते.तुम तो थोड़े फ़ेमस हो गए हो. टीवी पे इंटरव्यू आता है तुम्हारा. शिव सेना सेकॉन्टैक्ट कर सकते हो. उनके लिए कुछ कह भी सकते हो. लोग तुम्हें सुनेंगे. शिव सेनाभी सुनेगी. उसी शिव सेना से कह दो कि जो खुद कीचड़ में सना हो वो अगले के कुर्ते परपान के दाग को न दिखाए तो बेहतर होगा. तुम्हारे ऊपर लगा इल्ज़ाम अभी प्रूव नहीं हुआहै. जबकि शिव सेना की ख्याति समूचा देश जानता है. असली बात मैं बताता हूं. गैंग्सऑफ़ वासेपुर में तुम्हें फैजल के रूप में, किक में शिव, बदलापुर में लियाकत के रूपमें, लंचबॉक्स में "हेलो सार!! कैसे हैं आप?" कहकर ग्रीट करते हुए कभी इस बात परध्यान गया ही नहीं कि तुम सिर्फ नवाज़ ही नहीं सिद्दीक़ी भी हो. तुम मुसलमान हो. औररामलीला में ऐक्टिंग करना चाहते हो. गुलज़ार ने बहुत पहले झूम बराबर झूम फ़िल्म मेंएक गाना लिखा था. टिकट टु हॉलीवुड. उसमें एक लाइन थी, "तू रानी है फ़्रांस की, मैंबांसुरी बांस की हमारी सोसायटी में ये चलता नहीं." इस देश का हिंदुत्व फ़्रांस कीरानी है और तुम बांस की बांसुरी. हमारी सोसायटी में ये आज-कल चल नहीं रहा है. औरक्या है न, तुम तो बजरंगी भाईजान में भी पाकिस्तानी ही बने थे. गलती तुम्हारी हीहै. आज जब अपने कंधे पर प्रभाष एक भारी भरकम शिवलिंग रखकर चलते हुए दिखते हैं तोथियेटर में भीड़ उमड़ पड़ती है. फेसबुक पर फोटुएं चलती हैं कि आमिर खान ने शिव का मज़ाकउड़ाते हुए पीके को करोड़ों दिलाये तो हिन्दू चुप क्यूं हैं. ऐसे में किस मुंह से तुममुस्लिम होकर रामलीला के पावन ऐक्ट में ऐक्टिंग करने पहुंच गए? वो अलग बात है किकरण और अर्जुन बने सलमान खान और शाहरुख़ खान ने मां काली से ये वादा किया था कि जानचाहे देनी पड़े, बलि वो चढ़ाएंगे. तो क्या हुआ कि "ओ पालनहारे, निर्गुण ओ न्यारे,तुमरे बिन हमरा कौनो नाही" को पहली बार काग़ज़ पर उतारने वाला जावेद अख्तर है, जो खुदको निरा नास्तिक बताता है. उस गाने को संगीत देने वाला अल्लाह रखा रहमान था, जिसनेसालों पहले इस्लाम को अपना लिया था. उस फ़िल्म का नायक आमिर खान था. लेकिन क्या हैकि आज-कल माहौल देशभक्तिमय हो चुका है. और देशभक्ति का मतलब है पाकिस्तानमुर्दाबाद. और पाकिस्तान का मतलब है मुसलमान. गनीमत यही समझो कि सिर्फ पाकिस्तानीऐक्टर्स का बहिष्कार किया गया है. तुम्हें कम से कम फिल्मों में काम करने को तोमिलेगा. ज़्यादा लपड़-चपड़ किया तो सीधे इस्लामाबाद में दिखोगे. वो वक़्त गया जब वेदव्यास की लिखी महाभारत को टीवी पर लाने के लिए उसको स्क्रीनप्ले में बदलने के लिएराही मासूम रज़ा ने बीड़ा उठाया था. ये काहे भूल रहे हो कि देश को आज से 14 साल पहलेएक मस्जिद को ढहा देने का एक्सपीरियंस हो गया था. उस हिसाब से आज के वक़्त में हमाराएक्सपीरियंस किस लेवल पर पहुंच गया होगा, इसका अंदाज़ा लगा लो. सुनो नवाज़, ज़्यादाफैंटम न बनो. सर-सर करोगे, आगे पीछे घूमोगे, डांट दिए जाओगे. जित्ता कहा जाये,उत्ता करो. जो न कहा जाए, न करो. मस्त रहो. और अपनी ये हिन्दुओं की रामायण मेंऐक्टिंग करने के भूत को कहीं कोने में जाके मूत दो. काहे से कर तो कुछ पाओगे नहीं.और जो करना चाहोगे भी, तो करने नहीं दिया जायेगा. क्या है कि मुझे बचपन में हीफ़िज़िक्स की क्लास में ये सिखाया गया था कि दो सतहों के बीच मूवमेंट तब तक होतारहेगा, जब तक फ्रिक्शन नहीं होगा. और फ्रिक्शन न हो इसके लिए आइडियल सर्फेस होनाचाहिए. और आइडियल सर्फेस सिर्फ ख्वाबों में ही मिलता है. तो या तो ख्वाबों में रहोया फिर औकात में. रामायण में ऐक्टिंग नहीं करने दी जाएगी. बाकी ऐसा है कि आई लाइकआर्टिस्ट! तुम्हारे देश का हिन्दू.