The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • an open letter to Kolkata Knight Riders captain Gautam Gambhir

गंभीर, आप बैट मत खरीदिये, पंचिंग बैग खरीद लीजिये!

गौतम गंभीर. टीम इंडिया में वापसी की भरपूर कोशिश कर रहे हैं. रन भी बना रहे हैं लेकिन कुछ है जो खटक रहा है. एक खुला ख़त.

Advertisement
pic
3 मई 2016 (अपडेटेड: 3 मई 2016, 09:43 AM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
डियर गौतम गंभीर, आपको डियर कहना पड़ रहा है क्यूंकि ख़त की शुरुआत ऐसे ही करते हैं. ये एक कायदा है, जिसे फॉलो करना होता है. शिष्टाचार माना जाता है. ये भी आयरनी ही है कि मुझे आपको ख़त लिखने से पहले शिष्टाचार का ख्याल रखना पड़ रहा है. आप वो जो अपनी ही टीम के जीतने पर दूसरों को गालियां दे रहे होते हैं. सोमवार को केकेआर का मैच आरसीबी से था. 9 गेंदों पर जीतने के लिए 6 रन चाहिए थे. आईपीएल में ऐसे मैचों को सोते हुए भी जीता जा सकता है. सूर्यकुमार यादव ने शम्सी की गेंद पर स्वीप कर के बाउंड्री मारी. आप डगआउट में बैठे थे. पैड पहने. हाथ में तौलिया पकड़े. आप उठे, गालियां देते हुए, चिल्लाते हुए, तौलिया फेंका, उसी कुर्सी पर लात मारी जिसपर बैठे हुए थे. फिर और भी गालियां दीं. 3 ही गेंद बाद आप जीत गए. आप और भी चिल्लाए. तालियां पीटी गयीं. केकेआर की जय-जय हुई. लेकिन तभी एक घटना और घटी. विराट कोहली, आरसीबी का कप्तान, चलकर यूसुफ़ पठान के पास आया. कोहली मैच हार चुका था. लेकिन फिर भी वो जल्दी से चलकर पठान के पास पहुंचा. उसके चेहरे से निराशा साफ़ टपक रही थी लेकिन वो यूसुफ़ से हाथ मिलाता है. उससे रुक कर बात करता है. दोनों के चेहरे पर मुस्कान काबिज थी. कोहली उस ताबड़तोड़ इनिंग्स के लिए पठान को बधाई देता है. वो इनिंग्स जिसने उसकी टीम को हरा दिया. जिसने उसकी टीम को पॉइंट्स टेबल में नीचे घसीट दिया. जहां से ऊपर उठना उसके लिए अब और मुश्किल हो गया. ऐसे में भी वो अपने खिलाफ़ अच्छा खेलने वाले खिलाड़ी को बधाई देता है. उससे हाथ मिलाता है. फिर मैं सोचता हूं कि अगर आप हारे होते तो क्या करते? हार और जीत के चान्सेज़ तो 50-50 होते हैं न? हार आप भी सकते थे? फिर क्या करते? जीतने पर तो आपने कुर्सी पर लात मारी और गालियां दीं. हारने पर तो आप क़यामत ला देते. एक बात बताइये, ये किस बात का गुरूर है? चल रही अच्छी फॉर्म का? वो तो टेम्परेरी होती है न? पर्मानेंट तो क्लास होता है. ऐसा मैंने सालों पहले सुना था. आपने भी सुना होगा. सुना था न? मैं भले ही प्रोफेशनल क्रिकेट न खेल पाया हूं, लेकिन क्रिकेट से प्यार बहुत करता हूं. ऐसे में ज़ाहिर सी बात है कि मेरे आदर्श भी क्रिकेटर ही रहे हैं. उन सभी में ऐसा कोई भी ऐब नहीं है कि जिसके लिए उनके ऐटीट्यूड को ज़िम्मेदार ठहराया जा सके. जैसा कि आपके केस में लागू होता है. राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, सचिन तेंदुलकर, वीरेंदर सहवाग, ए बी डिविलियर्स. आपने इन्हें कभी भी ऐसा करते हुए देखा है? मैं तो इन्हें ऐसा करते हुए सोच भी नहीं सकता. और ऐसा भी नहीं है कि इन्हें गुस्सा नहीं आता. आता है. आखिर वो भी तो इंसान ही हैं न? क्रिस गेल, दुनिया का सबसे खौफ़नाक बल्लेबाज. टी-20 मैच में 175 रन मारे थे. उसके बाद दूसरी इनिंग्स में बॉलिंग करते टाइम अशोक डिंडा की ओर इशारा करता है. अपनी अंगुली को अपनी गर्दन के चारों ओर घुमाता है. ये सामने वाले की मौत का इशारा था. लेकिन उल्टा स्टेडियम में बैठे लोग शोर मचाते हैं. खुद डिंडा हंस रहा होता है. अंपायर भी. अगले दिन अख़बारों में तस्वीर आती है. मैथ्यू हेडेन ने एक दफ़े कहा था कि 'आज-कल ये जो भी हो रहा है वो अग्रेशन नहीं है. अगर आपको अग्रेशन देखना है तो आप राहुल द्रविड़ की आंखों में देखिये.' मुझे नहीं लगता कि आपकी लात में किसी भी तरह का अग्रेशन था. और न ही उस दिन आपकी गालियों में था जो रणजी ट्रॉफी के मैच में आपने मनोज तिवारी को दी थीं. या तब जब आईपीएल 2013 में कोहली के आउट होने पर आप उसे गालियां देने लगे थे. उस मैच में अगर बीच-बचाव न किया गया होता तो शायद आप दोनों के बीच में हाथापाई भी हो जाती. और बचाव किया भी तो किसने? रजत भाटिया ने. यहां मैं याद दिला दूं कि उस सीन में रजत और कोहली दोनों ही आपके जूनियर थे. ऐसे में वहां आपकी क्या इज़्ज़त रह गयी, इस बात का आप ही अंदाज़ा लगायें तो बेहतर. शेन वाटसन को आप कुहनी मार देते हैं. अफ्रीदी से आप गाली-गलौज करते हैं. कामरान अकमल के सर में अपना हेलमेट लगा सर भिड़ा देते हैं. वो भी ड्रिंक्स ब्रेक के दौरान. आप खुद को आईने में देखें और चेक करें कि कहीं आप प्रवीण कुमार तो नहीं. मुझे नहीं मालूम कि आप अपनी ऐसी हरकतों पर क्या राय रखते हैं, मैं इतना जानता हूं कि ये वो गेम नहीं है जिसे जेंटलमेन्स गेम कहा जाता है. ये वो गेम नहीं है जिसे सचिन या द्रविड़ खेलते थे. सचिन 98 रन पे थे. उन्हें ब्रेट ली ने बीमर फेंक के मार दी थी. कंधे पे गेंद लगी. 145 किलोमीटर प्रति घंटे के आस-पास की रफ़्तार से. उन्हें चोट लगी, ब्रेट ली को देखा. ब्रेट ली उन्हें सॉरी बोल रहे थे. उन्होंने उससे कहा 'कोई बात नहीं.' दोनों ने ही हाथ मिलाये. ब्रेट ली वापस अपने रन अप पर पहुंचे और सचिन ने अपनी सेंचुरी पूरी की. सचिन अगर महान क्रिकेटर हैं तो वो अकेले अपने रनों के अम्बार से नहीं बल्कि अपने उस बिहेवियर से हुए हैं जो दुनिया के सबसे तेज़ गेंद फेंकने वाले की बीमर खाने के बाद दिखाते हैं. क्रिस गेल के 175 रन. कोई गुरूर नहीं. सचिन के 10,000 रन. दुनिया की सबसे तेज़ बीमर अपने कंधे पर खाकर बॉलर को घूरा तक नहीं. विराट कोहली. इंडियन टीम में एक वक़्त का सबसे बदतमीज़ प्लेयर. आज टेस्ट टीम का कप्तान है. वो अपनी टीम के हारने पर भी यूसुफ़ पठान को बधाई देता है. और एक आप हैं. जीतकर भी गालियां बकते हैं. कुर्सियां गिराते हैं, लात मार के. अप रहने दीजिये. नए बल्ले मत खरीदिएगा. एक पंचिंग बैग खरीद लीजियेगा. आपको प्रैक्टिस की सख्त ज़रुरत है. अपने गुस्से को सही जगह निकालने की प्रैक्टिस. और गुस्सा वो नहीं होता जिसमें कुर्सियों पर लातें चलायी जाएं. कुर्सी तो कुर्सी है. गिर ही जाएगी. साथ ही आप भी गिरे. नज़रों से. - क्रिकेट का एक अदना सा फैन केतन

Advertisement

Advertisement

()