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खुला ख़त: डिअर प्रत्यूषा, दोबारा मत मरना

जिंदा रहना, घरों में, ऑफिसों में, सड़कों में, बसों में, स्ट्रगल करने वालों की पंक्ति में.

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प्रतीक्षा पीपी
1 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 1 अप्रैल 2016, 06:25 PM IST)
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डिअर प्रत्यूषा, तुम चली गईं. तुम ये ख़त नहीं पढ़ सकतीं. लेकन कई प्रत्यूषाएं हैं हमारे देश में. कुछ घरों में कैद. कुछ ऑफिस की बिल्डिंगों में स्क्रीन के सामने बैठी हुईं. कुछ फोन पर इस ख़त को पढ़ती हुईं. छोटे-बड़े शहरों में. कुछ अपने सपनों की ओर बढ़ती, कुछ अपने सपनों को जीतीं. दिन-रात काम करतीं. स्ट्रगल करतीं. ये ख़त उनके नाम. जब तुमने 'बालिका वधू' के लिए अपना ऑडिशन दिया होगा, कैसा-कैसा सा लग रहा होगा. पेट में गुदगुदी मच रही होगी. फिर जब तुम पहले एपिसोड में आई थी, देखने वाले कितने खुश हुए थे. कौतूहल से भरे. आनंदी बड़ी जो हो गई थी. देश के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सीरियलों में से एक की लीड एक्ट्रेस थीं तुम. घर-घर में औरतें तुम्हें देख कर तुम्हारे जैसी साड़ियां पहनना चाहती होंगी. मेरी दादी तुम्हें देख कर कहती थीं, ऐसी ही बहू लानी है अपने पोते के लिए. जो किरदार तुम करती थीं, याद है उसे कितना कुछ झेलना होता था? फिर भी आनंदी हार नहीं मानती थी. हर मुश्किल झेल ले जाती थी. हर विलेन से जीत जाती थीं. तुम सक्सेसफुल थीं. लोग तुमसे प्यार करते थे. क्या तब तुम्हारे रियल-लाइफ दुश्मन नहीं थे? बिलकुल रहे होंगे. हर सक्सेसफुल इंसान के होते हैं. पर तब तुम सीना चौड़ा कर जीती रहीं. क्योंकि तुममें चाह रही होगी. उन तमाम लड़कियों कि तरह जो ये ख़त पढ़ रही हैं. हम घर के बाहर कदम रखते हैं तो हममें ऐसा जूनून होता है की तारे नोच कर ला सकते हैं. सूरज में नकेल डाल कर उसको अपने क़दमों तले दबा सकते हैं. फिर ये सारी ताकत, सारा जूनून, सारी हिम्मत कहां चली जाती है जब तुम्हें प्यार होता है? तुम्हारी मौत का असल कारण अभी कोई नहीं जानता. पर लोग कहते हैं तुम डिप्रेस्ड थीं. बॉयफ्रेंड से रिश्ते ठीक-ठाक नहीं चल रहे थे. तुम्हारे एक्स के साथ भी तुमने बुरा समय देखा था. जाने कितनी प्रत्यूषाएं हैं ऐसी जो दिन भर काम करती हैं. फिर रात को चैन से सो नहीं पातीं क्योंकि उनकी लव लाइफ में स्ट्रगल चल रहा होता है. उनके बॉयफ्रेंड उन्हें गालियां देते हैं, पीटते हैं. किसी के घर में उसका पति उससे जानवरों सा सलूक करता है. किसी का बॉस उसे ऑफिस में हैरेस करता है. उम्र से पहले उनकी आंखों के तले गड्ढे पड़ जाते हैं, चेहरे पर झाइयां आ जाती हैं. तुम क्यों बर्दाश्त करती हो ये सब? तुम क्यों नकली हंसी ओढ़कर घूमा करती हो? क्या तुम्हारे पास खुद को पालने की कैपेसिटी नहीं? क्यों एक ही इंसान को अपने हिस्से की खुशियां तय करने का मौका देती हो? हो सकता है तुम्हारी सुसाइड का कारण तुम्हारी लव लाइफ न हो. कुछ और हो. पर तुम परेशान थीं. शायद तुम इंट्रोवर्ट रही होगी. पर क्या तुम्हारा एक भी दोस्त नहीं था? क्या एक भी फैन नहीं था? तुम उदास थीं, तो रो लेतीं. तुम नाराज़ थीं, तो किसी को पीट लेतीं. तुम कंगाल थीं, तो मेहनत करतीं. तुम किसी दोस्त से बातें करतीं. तुम एक बार ट्विटर पर आकर अपने फैन्स को देखतीं तो सही. लेकिन तुम मर क्यों गई, प्रत्यूषा? तुम जो मरी हो, अकेली नहीं मरी. सब मरे हैं थोड़े-थोड़े. तुम्हारे फैन, तुम्हारे घर वाले, तुम्हारे दोस्त, तुमसे प्यार करने वाले. और सिर्फ लोग ही नहीं, कुछ कच्चे सपने भी मरे हैं. उन लड़कियों के जो ग्लैमर इंडस्ट्री में कदम रखना चाहती हैं. वो नई लड़कियां जो तुमसे मिलकर कुछ सीखतीं. एक्टिंग और ज़िन्दगी के बारे में. तुम्हें पता नहीं है प्रत्यूषा, तुम्हें जानने वाले इस समय कितना असहाय महसूस कर रहे हैं. एक बड़ा पॉपुलर शेर है, प्रत्यूषा: अब तो घबरा के ये कहते हैं के मर जाएंगे मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएंगे जो मर के भी चैन न मिला तो क्या करोगी? मौत पर ज़िन्दगी से ज्यादा भरोसा क्यों? तुम, तुम जो ये ख़त ख़त पढ़ रही हो, कुछ भी करना , पर हारना मत. अपनी जान मत लेना जैसे प्रत्यूषा ने ली. सब ठीक हो जाता है. सब ठीक हो जाएगा. बस हिम्मत और धीरज रखना. तुम जिंदा रहना, स्क्रीनों पर, कीबोर्ड पर, घरों में, ऑफिसों में, सड़कों में, बसों में, स्ट्रगल करने वालों की पंक्ति में. लड़ाई बहुत मुश्किल है. लेकिन नामुमकिन नहीं. तुम्हारे जैसी, प्रतीक्षा

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